बीजेपी सांसद की कंपनी ने अहम परियोजना में ठेका मिलने के बाद ख़रीदे थे इलेक्टोरल बॉन्ड - प्रेस रिव्यू

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग ने इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदने वालों को जो सूची जारी की है, उससे अब कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं.
मसलन कई राज्यों में कुछ कंपनियोंं को इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदने के बाद ठेके दिए गए. ऐसी ही एक कंपनी है ऋत्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड. कंपनी के फ़ाउंडर आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के बीजेपी सांसद सी.एम. रमेश हैं.
‘द हिंदू’ ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट छापी है. अख़बार लिखता है कि रमेश की कंपनी ने कुल 45 करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे. सबसे पहले उन्होंने पांच करोड़ रुपये के बॉन्ड ख़रीदे. इसके कुछ ही दिन बाद उनकी कंपनी को हिमाचल प्रदेश में सन्नी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रॉक्यूरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) का ठेका मिला.
अख़बार लिखता है कि रमेश ने इलेक्टोरल बॉन्ड की ये खेप सिर्फ़ त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड चुनाव से ठीक पहले ख़रीदी थी. इसके दो महीने बाद उन्होंने 40 करोड़ रुपये के इलेक्टोरल बॉन्ड ख़रीदे.
ऋत्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड एक अनलिस्टेड कंपनी है. कंपनी की स्थापना हैदराबाद में हुई है. 14 जनवरी 2023 को इस कंपनी को 382 मेगावाट क्षमता के सन्नी हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट का ईपीसी कॉन्ट्रेक्ट मिला था.
ये कंपनी उत्तराखंड में तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट में भी शामिल थी. ये कंपनी तब चर्चा में आई थी जब जोशीमठ में इसकी परियोजनाओं के नज़दीक के घर और सड़कें धंसने लगी थीं.
सन्नी डैम का प्रोजेक्ट मिलने के दो सप्ताह से भी कम समय में कंपनी ने 27 जनवरी 2023 को एक-एक करोड़ रुपये के पांच बॉन्ड ख़रीदे.
इसी तरह 11 अप्रैल 2023 को कंपनी ने एक-एक करोड़ रुपये के 40 बॉन्ड ख़रीदे. ये बॉन्ड कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ठीक पहले ख़रीदे गए.
चंद्रबाबू नायडू से भी रहे हैं क़रीबी रिश्ते

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आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 4 जनवरी 2023 को 2614 करोड़ रुपये सन्नी डैम परियोजना को मंज़ूरी दी थी. इसके दस दिन बाद ऋत्विक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को इस परियोजना में ईपीसी ठेका दे दिया गया.
अख़बार के मुताबिक़ रमेश बीजेपी की ओर से दो बार राज्यसभा पहुंच चुके हैं. रमेश ने एलान किया था कि उन्होंने विशाखापट्टनम से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए बीजेपी हाईकमान की मंज़ूरी मांगी है.
रमेश 2019 तक तेलुगूदेशम पार्टी से जुड़े थे. 2014 से 2018 के बीच वो तेलंगाना से राज्यसभा के सांसद रहे.
वो आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के क़रीबी सहयोगी रहे. राज्य में उनकी कंपनियों को कई अहम सिंचाई और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के ठेके मिले. उनके बेटे ऋत्विक रमेश कंपनी के ऑपरेशन प्रेसिडेंट हैं.
इस सीट पर उम्मीदवार उतारने पर भीम आर्मी चीफ़ ने सपा पर साधा निशाना

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समाजवादी पार्टी की ओर से उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से उम्मीदवार उतारे जाने के बाद भीम आर्मी काफ़ी नाराज़ है.
नगीना से भीम आर्मी चीफ़ चंद्रशेखर आज़ाद चुनाव लड़ रहे हैं.
आज़ाद समाज पार्टी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा कि पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की एकता के नाम पर समाजवादी पार्टी ने अपने फैसले से ये जता दिया है कि दलितों और मुस्लिमों का शोषण किया जा रहा है.
‘द हिंदू’ के के मुताबिक़ आज़ाद ने अपने समर्थकों से कहा कि वो नोटा का बटन दबा कर समाजवादी पार्टी का पर्दाफाश करें.
भीम आर्मी की मैनपुरी यूनिट ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "उत्तर प्रदेश की जिन लोकसभा सीटों पर आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार नहीं हैं वहां भीम आर्मी समर्थकों से अपील की जाती है कि वो नोटा का बटन दबाएं. समाजवादी पार्टी आरएसएस की विचारधारा पर चल रही है. दलित और मुस्लिमों का पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए के नाम पर शोषण किया जा रहा है.’’
नगीना आरक्षित सीट है. यहां समाजवादी पार्टी की ओर से उम्मीदवार की घोषणा का मतलब है कि वो आज़ाद समाज पार्टी से गठबंधन नहीं करेगी.
इससे पहले समाजवादी पार्टी ने एलान किया था वो वहां आज़ाद के ख़िलाफ़ उम्मीदवार नहीं खड़ा करेगी.
सीएए लागू होने के बाद गुजरात में 18 लोगों को नागरिकता

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देश में सीएए लागू होने के बाद नागरिकता देने का सिलसिला शुरू हो गया है. शनिवार को गुजरात में पाकिस्तान से आए 18 लोगों को नागरिकता दी गई.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि ये लोग वहां से आकर अहमदाबाद में रह रहे थे.
देश में लोकसभा चुनाव से पहले ज़िलाधिकारी कार्यालय में इन लोगों को नागरिकता दी गई.
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने अपने आधिकारिक बयान में इन लोगों से कहा, "आज का दिन आपकी जिंदगी का एक अहम दिन है.’’
अहमदाबाद में रह रहे 1167 हिंदुओं को अब तक जिला प्रशासन की ओर से नागरिकता दी जा चुकी है.
2016 और 2018 के गजट में अहमदाबाद, गांधीनगर और कच्छ ज़िला कलेक्टर को अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आए हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारत की नागरिकता देने के अधिकार दिए गए हैं.
अदानी समूह के ख़िलाफ़ अमेरिका में जांच का दायरा बढ़ेगा?

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अमेरिका ने भारत के अदानी समूह की अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कंपनी के संस्थापक गौतम अदानी और कंपनी रिश्वतखोरी में शामिल हैं या नहीं.
‘अमर उजाला’ ने ब्लूमबर्ग न्यूज़ के हवाले से अपनी एक रिपोर्ट में इसका ज़िक्र किया है.
इसमें लिखा है कि रिपोर्ट में मामले के बारे प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से दावा किया गया है कि अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या गौतम अदानी सहित अदानी समूह की किसी इकाई या कंपनी से जुड़े लोगों ने एक ऊर्जा परियोजना के लिए भारत में अधिकारियों को भुगतान किया है?
इसमें लिखा गया है कि न्यूयॉर्क के पूर्वी ज़िले के अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय और वॉशिंगटन में न्याय विभाग की धोखाधड़ी इकाई यह जांच कर रही है. इसके साथ ही भारतीय अक्षय ऊर्जा कंपनी एज्यूर पावर ग्लोबल पर भी नज़र रखी जा रही है. अदानी समूह ने इस मामले में बयान जारी कर कहा है, "हमें अपने चेयरमैन के खिलाफ किसी जांच की जानकारी नहीं है."
अदानी समूह के शेयरों और बांडों में पिछले साल की शुरुआत में बड़े पैमाने पर बिकवाली देखी गई थी. उस समय अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें समूह पर खातों में गड़बड़ी, स्टॉक्स में हेरफेर और टैक्स हेवन के उपयोग का आरोप लगाया गया था. हालांकि, भारतीय कंपनी इन आरोपों से इनकार करती रही है.
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