नौ साल पर छिड़ा विवाद: बीजेपी ने कहा- किए 'नौ कमाल', तो कांग्रेस ने गिनाई नौ नाकामियां

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस साल केंद्र में अपने नौ साल पूरे कर रही है. इस मौक़े पर बीजेपी ने अपनी कामयाबियां गिनाने की कोशिश की तो विपक्षी पार्टियां उस पर हमलावर हो गईं.
मई 2014 में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई बीजेपी ने इस मौक़े पर दो दिन पहले सोशल मीडिया पर अपनी कामयाबियों की लिस्ट पोस्ट की.
इस पोस्ट के बाद विपक्षी कांग्रेस इस पर ख़ामोश नहीं बैठी और उसने भी पलटकर बीजेपी पर नौ सवाल दाग़ दिए.
कांग्रेस ने केवल सोशल मीडिया पर ही सवाल नहीं किए बल्कि देश के दो दर्जन से अधिक शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए.
शनिवार को कांग्रेस ने एक ट्वीट कर कहा कि वो जनता की आवाज़ उठाते रहेंगे और सरकार को ज़िम्मेदार ठहराएंगे.
कांग्रेस ने लिखा, "देश के 28 शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर नौ साल से सत्ता में रही मोदी सरकार की बीते नौ सालों की नौ नाकामयाबियां जनता के सामने रखी गईं. हम हमेशा लोगों की आवाज़ उठाते रहेंगे. हम संविधान के लिए लड़ते रहेंगे और सरकार को ज़िम्मेदार ठहराएंगे."
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कांग्रेस के नौ सवाल
- आसमान क्यों छू रही है महंगाई और बेरोज़गारी? धनी और धनी क्यों बनते जा रहे हैं और ग़रीब और अधिक ग़रीब क्यों होते जा रहे हैं?
- कृषि क़ानून वापस लेते वक्त किसानों से जो वादे किए गए उन पर अमल क्यों नहीं हुआ? क़ानूनी तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी क्यों नहीं दी जा रही?
- अपने मित्र अदानी की मदद के लिए जनता की ख़ून-पसीने की कमाई को एलआईसी और एसबीआई में क्यों लगाया जा रहा है? कुछ लोगों को देश छोड़ कर भागने क्यों दिया जा रहा है?
- महिलाओं, दलितों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ उत्पीड़न पर सरकार ख़ामोश क्यों?
- 2020 में चीन को क्लीन चिट देने के बाद भी वो भारतीय ज़मीन पर अपने पैर क्यों जमाए बैठा है?
- चुनावी राजनीति में आगे बढ़ने के लिए जानबूझ कर नफरत की राजनीति क्यों की जा रही है?
- बीते नौ सालों में आपने संवैधानिक मूल्यों और गणतांत्रिक संगठनों को कमज़ोर करने का काम क्यों किया? विपक्षी पार्टियों को लेकर दुश्मनी भरा रवैय्या क्यों?
- ग़रीबों, ज़रूरतमंदों और आदिवासियों के लिए बनी योजनाओं का बजट कम कर उन्हें कमज़ोर क्यों किया जा रहा है?
- 40 लाख से अधिक लोगों की मौत कोविड-19 से होने के बाद भी सरकार उनके परिवारों को मुआवज़ा क्यों नहीं दे रही है? अचानक लॉकडाउन क्यों लगाया गया?
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इतना ही नहीं कांग्रेस ने बीजेपी पर ये भी आरोप लगाया है कि बीते नौ सालों में उसने जनता से नौ वादे किए लेकिन उसने उन्हें पूरा नहीं किया.
कांग्रेस ने अपने ट्वीट में इससे जुड़ी एक तस्वीर पोस्ट की और लिखा 'नौ साल वादाख़िलाफ़ी के.'
कांग्रेस की पोस्ट की गई तस्वीर के अनुसार, "मोदी सरकार ने काला धन वापस लाने, हर साल 2 करोड़ रोज़गार पैदा करने, हर व्यक्ति के खाते में 15 लाख रुपये लाने, 100 स्मार्ट सिटी बनाने, बुलेट ट्रेन शुरू करने, सबको पक्का घर देने, हर परिवार को 24 घंटों बिजली देने, अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन का बनाने और किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन सरकार इन नौ वादों को पूरा नहीं कर पाई."

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बीजेपी ने क्या किया दावा?
रविवार को नए संसद के उद्घाटन के ऐलान से पहले कांग्रेस बीजेपी पर हमलावर रही है.
हालांकि नए संसद के उद्घाटन की घोषणा के बाद कांग्रेस ने ये कहते हुए इसके उद्घाटन समारोह का बहिष्कार किया कि इसका उद्घाटन राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से कराया जाना चाहिए था.
नए संसद भवन का उद्घाटन ऐसे वक्त हो रहा है जब बीजेपी केंद्र में अपनी सरकार के नौ साल पूरे कर रही है और साथ ही अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी कर रही है.
इस मौक़े पर बीजेपी ने 'नौ साल, नौ कमाल' कहते हुए बीते नौ सालों में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की तुलना बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से की और अपनी कामयाबी गिनाई.
इसी दिन बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा, "कांग्रेस दो बार लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हार चुकी है, अगली बार के चुनावों में भी उनका यही हश्र होगा."
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बीजेपी ने क्या-क्या गिनाई कामयाबियां?
- औसत महंगाई दर यूपीए के दौर में 8.7 फ़ीसदी थी, एनडीए के दौर में 4.8 फ़ीसदी है. कांग्रेस ने अपने दोस्तों को कोयला खदानों का लाइसेंस दिया, एनडीए ने पारदर्शी व्यवस्था लागू की.
- चावल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यूपीए के दौर में 3.09 लाख करोड़ दिया गया, एनडीए के दौर में 10.64 लाख करोड़ दिया गया. 9 सालों में किसानों की आय दोगुनी हुई.
- एलआईसी का प्रॉफ़िट एक साल में 27 गुना तक बढ़ा, एसबीआई ने भी एक तिमाही में बड़ा प्रॉफ़िट दर्ज किया.
- यूपीए के दौर में या फिर नेहरू के दौर में ही चीन भारतीय ज़मीन पर अपने पैर रख सका है. एनडीए ने चीन के सामने घुटने नहीं टेके हैं.
- कांग्रेस और नफ़रत की राजनीति समानार्थी शब्द हैं इसलिए देश के अधिकतर हिस्सों से इसका सफाया हो चुका है.
- कांग्रेस ने ओबीसी कमिशन के संवैधानिक दर्जे का विरोध किया था, उसने पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति का अपमान किया. उन्होंने तीन तलाक का विरोध किया.
- कांग्रेस के वकील के अनुसार आदेश न लिखने पर कांग्रेस ने चीफ़ जस्टिस के ख़िलाफ़ महाभियोग की धमकी दी.
- पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकारी योजना सीधे जनता तक पहुंची.
- कोविड महामारी के दौरान कांग्रेस ने डर फैलाया, वहीं दुनिया ने कोविड के प्रबंधन के लिए भारत सरकार के काम की तारीफ़ की.
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अन्य पार्टियों ने भी उठाए सवाल
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी सरकार बीते नौ सालों में रोज़ बदलाव कर रही है.
उन्होंने कहा, "सरकार इतिहास बदल रही है, चरित्र बदल रही है, शिक्षा बदल रही है, धर्म बदल रही है, नोट बदल रही है. सब कुछ बदलते-बदलते एक दिन बीजेपी खुद ही बदल जाएगी."
उन्होंने कहा कि बीते नौ सालों में देश में अलोकप्रिय और जनता के प्रति असंवेदनशील नीतियां लेकर आई जो नाकाम साबित हुईं.
वहीं पार्टी नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीते नौ सालों में संसद में किसी सवाल का उत्तर नहीं दिया है.
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तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पार्टी भारत राष्ट्र समिति (पहले तेलंगना राष्ट्र समिति) के वाई सतीश रेड्डी ने ट्वीट कर लिखा है कि बीते नौ सालों में मोदी सरकार ने 99 से अधिक आपदाओं को अंजाम दिया.
उन्होंने लिखा, "इसमें से नौ आपदाएं हैं- नोटबंदी, सरकारी संपत्ति बेचना, बेरोज़गारी, कोविड मामले का बुरा प्रबंधन, गणतंत्र की हत्या, कृषि क़ानून लाना लेकिन वादे पूरे नहीं करना, मीडिया को 'मोदिया' बनाया, पुलवामा में राजनीति के लिए आर्मी का इस्तेमाल किया और पूरे इकोसिस्टम को आदानी के लिए बदला."
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आम आदमी पार्टी की आतिशी ने इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखकर अध्यादेश का मुद्दा उठाया और लिखा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरी तरह से पलटते हुए केंद्र सरकार ने चुनी हुई सरकार के ऊपर दो चुने हुए नौकरशाहों को प्रथमिकता देने का फ़ैसला किया है.
उन्होंने लिखा कि "बीते नौ सालों में मोदी सरकार राज्यों के हाथों से उनकी ताकत छीनने के लिए बदनाम रही है. पहले उन्होंने अपनी ग़ैर-क़ानूनी सरकार बनाने के लिए ऑपरेशन लोटस चलाया और विधायकों की खरीद-फरोख्त की. ऐसा न हुआ तो उन्होंने सीबीआई और ईडी को दूसरी पार्टियों के पीछे लगा दिया, फिर असंवैधानिक अध्यादेश ले कर आए."
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