अरविंद केजरीवाल पर जर्मनी की टिप्पणी से भारत नाराज़, यूं दिया जवाब

अरविंद केजरीवाल(बाएं) जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता (दाएं)

इमेज स्रोत, ANI/Socialmedia

इमेज कैप्शन, अरविंद केजरीवाल(बाएं) जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता (दाएं)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने नाराज़गी जताई है.

गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली शराब नीति में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया था. शुक्रवार को कोर्ट ने उन्हें सात दिन के लिए ईडी की रिमांड पर भेजा है, हालांकि ईडी ने अपनी तरफ से 10 दिन के रिमांड की मांग की थी.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शनिवार की सुबह नई दिल्ली स्थित जर्मन दूतावास मिशन के उप प्रमुख जॉर्ज एन्ज़वीलर को तलब किया.

भारत ने जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता की टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज किया.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, "हम ऐसी टिप्पणियों को हमारी न्यायिक प्रक्रिया में दखल और हमारी न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर करने के रूप में देखते हैं."

बयान के अनुसार, "भारत क़ानून के शासन वाला एक जीवंत और मजबूत लोकतंत्र है. जैसा कि भारत और अन्य लोकतांत्रिक देशों के सभी कानूनी मामलों में होता है, वैसा ही इस मामले में भी कानून अपना काम करेगा. इस संबंध में बनाई गई सभी पक्षपातपूर्ण धारणाएं बहुत अनुचित हैं."

जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जर्मनी के चांसलर ओलाफ़ शॉल्त्स

जर्मनी ने क्या कहा?

जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ़्तारी पर कहा था कि भारत के लोकतांत्रिक देश होने के नाते उन्हें उम्मीद है कि केजरीवाल को निष्पक्ष और तटस्थ सुनवाई का मौक़ा मिलेगा.

शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से सवाल किया था कि चुनावों से पहले भारत में विपक्ष के एक बड़े नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को वे कैसे देखते हैं?

इसके जवाब में प्रवक्ता ने कहा, "हमने इस मामले की जानकारी है. भारत एक लोकतांत्रिक देश है. हम मानते हैं और उम्मीद करते हैं कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और बुनियादी लोकतांत्रिक सिद्धांतों से जुड़े मानकों को इस मामले में भी लागू किया जाएगा."

उन्होंने कहा, "आरोपों का सामना करने वाले किसी भी व्यक्ति की तरह केजरीवाल भी निष्पक्ष सुनवाई के हकदार हैं. इसमें यह भी है कि वे बिना किसी प्रतिबंध के सभी उपलब्ध कानूनी रास्तों को इस्तेमाल कर सकें."

प्रवक्ता ने कहा कि कानून के केंद्र में यह है कि जब तक अपराध साबित नहीं हो जाता है तब तक व्यक्ति को निर्दोष माना जाता है और यही बात उन पर भी लागू होनी चाहिए.

दिल्ली सरकार में मंत्री और आप नेता सौरभ भारद्वाज

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, दिल्ली सरकार में मंत्री और आप नेता सौरभ भारद्वाज

आम आदमी पार्टी ने क्या कहा?

आम आदमी पार्टी का कहना है कि जर्मनी की तरफ से आए बयान में कुछ भी गलत नहीं है.

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर ट्वीट करके जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के बयान का समर्थन किया है.

उन्होंने लिखा, "जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने प्राकृतिक न्याय और लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को सरलता से दोहराया है. यह बात सभी लोकतांत्रिक देश दशकों से कहते आ रहे हैं."

भारद्वाज ने लिखा, "बीजेपी इसे लेकर इतनी संवेदनशील क्यों है?"

वहीं भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने जर्मनी की तरफ से आई इस टिप्पणी को भारत के आंतरिक मामलों में दखल बताया है.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, "हमारे आंतरिक मामलों में अहंकार से भरा हस्तक्षेप. जर्मनी को चेताया जाना चाहिए, जिसे हमारे न्यायिक मानकों और स्वतंत्रता पर संदेह है, जो सवाल करते हैं कि क्या केजरीवाल के मामले में लोकतांत्रिक सिद्धांत लागू होंगे."

भारत और जर्मनी का राष्ट्रीय ध्वज

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भारत और जर्मनी का राष्ट्रीय ध्वज

यह पहली बार नहीं है

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

अक्टूबर, 2022 में जर्मनी पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी जर्मनी के दौरे पर गए थे.

उन्होंने अपनी समकक्ष एनालीना बेयरबॉक के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने बयान देते हुए तब जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया था.

जब जर्मनी की तत्कालीन विदेश मंत्री एनालीना बेयरबॉक से जम्मू और कश्मीर को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा था, "मेरी अपील सिर्फ़ यूरोप की स्थिति को लेकर नहीं है, जहाँ पर रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ा हुआ है. हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम दूसरे क्षेत्रों को भी देखें जहाँ पर तनाव और युद्ध की स्थिति बनी हुई है."

"मैं कह सकती हूँ कि बिल्कुल कश्मीर की स्थिति के संबंध में जर्मनी की भूमिका और ज़िम्मेदारी है. हालांकि हम शांतिपूर्ण समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र की बातचीत का समर्थन करते हैं."

इससे पहले जुलाई, 2022 में जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर बयान देते हुए भारत के लोकतंत्र पर तंज किया था.

एक सवाल के जवाब में तब जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने कहा था, "भारत ख़ुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहता है. ऐसे में उससे लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे- अभिव्यक्ति और प्रेस की आज़ादी की उम्मीद की जा सकती है. प्रेस को ज़रूरी स्पेस दिया जाना चाहिए. हम अभिव्यक्ति की आज़ादी को लेकर प्रतिबद्ध हैं."

"दुनिया भर में प्रेस की आज़ादी का हम समर्थन करते हैं. यह ऐसी चीज़ है, जिसकी काफ़ी अहमियत है और यह भारत में भी लागू होता है. स्वतंत्र रिपोर्टिंग किसी भी समाज के लिए बेहद ज़रूरी है. पत्रकारिता पर पाबंदी चिंता का विषय है. पत्रकारों को बोलने और लिखने के लिए जेल में नहीं डाला जा सकता है.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)