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पंजाब चेन्नई मैच से रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की चिंता क्यों बढ़ सकती है?
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
अजीत अगरकर और उनके साथी चयनकर्ताओं ने जून में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए अनुभवी खिलाड़ियों को अहमियत दी है. वो शायद भूल गए हैं कि क्रिकेट के फटाफट फॉर्मेट में अनुभव से ज़्यादा युवा समझदारी कारगर साबित हो सकती है.
चेन्नई सुपर किंग्स को उन्हीं के घर में मात देते हुए पंजाब किंग्स ने इसी बात को साबित किया.
अब आप खुद सोचिए कि मेहमान टीम के पास राहुल चहर (सिर्फ एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच का अनुभव) और हरप्रीत बरार की स्पिन जोड़ी है.
इनका मुकाबला रवींद्र जडेजा और मोईन अली जैसे दिग्गज अनुभवी जोड़ी के साथ हुआ, जिनके पास ना सिर्फ़ 146 टी20 मैचों के अलावा 465 अंतरराष्ट्रीय मैचों (टेस्ट और वनडे) का अनुभव भी था.
लेकिन चेपॉक की स्पिन के लिए मददगार पिच पर इस जोड़ी ने ना सिर्फ 5 ओवर में 44 रन लुटा दिये बल्कि कोई भी विकेट नहीं लिया.
वहीं पंजाब के लिए बरार-चहर की जोड़ी ने ना सिर्फ 8 ओवर में बेहद कसी हुई गेंदबाज़ी की बल्कि एक के बाद एक 4 झटके भी दिए.
अगर ये कहा जाए कि मैच का नतीजा इन्हीं दोनों अनुभवी और ग़ैर-अनुभवी जोड़ी के तुलनात्मक प्रदर्शन पर तय हुआ तो ये ग़लत नहीं होगा.
चहर-बरार स्पिन जोड़ी ने 8 ओवर में 4.12 की इकॉनमी रेट से सिर्फ 33 रन दिए जो ना सिर्फ़ मैच में स्पिन गेंदबाज़ों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा बल्कि इस सीज़न में अब तक किसी भी मैदान पर किसी स्पिन आक्रमण ने ऐसा दबदबा हासिल नहीं किया है.
रवींद्र जडेजा की हार और टी20 के लिए बढ़ती चिंता
टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ को भी इस आईपीएल मैच को देखते हुए थोड़ी चिंता हो सकती है.
जडेजा, जिन्हें ऑलराउंडर की हैसियत से टीम में चुना गया है वो एक बार फिर से बल्लेबाज़(4 गेंद पर 2 रन) के तौर पर संघर्ष करते दिखे.
टेस्ट क्रिकेट में पिछले तीन सालों में जडेजा का खेल बल्लेबाज़ के तौर काफी निखरा है. वहीं टी20 फॉर्मेट में वो नीचे गया है.
शिवम दुबे को पहली बार रितुराज गायकवाड ने गेंद थमायी लेकिन फिर से दोबारा गेंदबाज़ी के लिए नहीं बुलाया. पहली गेंद पर विकेट लेने के बावजूद दुबे ने अपने एक ही ओवर में 14 रन लुटा दिए.
बहुत सारे क्रिकेट प्रेमी और जानकार इस बात पर भी अचरज जता रहे थे कि दीपक चाहर को आखिर अगरकर और उनके साथियों ने टी20 वर्ल्ड कप के लिए क्यों नहीं चुना, क्योंकि वो 8वें नंबर पर बल्लेबाज़ के तौर पर तेज़ी से रन भी जोड़ सकते हैं और पावर-प्ले में शानदार गेंदबाज़ी भी करते हैं.
इसका जवाब भी इसी आईपीएल मैच में मिल गया.
सिर्फ दो गेंद फेंकने के बाद चेन्नई के इस तेज़ गेंदबाज़ को अपनी फिटनेस को लेकर समस्या हुई और उन्हें मैदान छोड़कर जाना पड़ा जिसका फायदा विरोधी पंजाब के बल्लेबाज़ों ने उठाया.
बरार का जबरदस्त स्पिन
बहरहाल, इस मैच को आईपीएल में इसलिए याद नहीं किया जाएगा कि टीम इंडिया के लिए टी-20 वर्ल्ड कप में जाने वाले खिलाड़ियों ने क्या किया.
इस मैच को पंजाब के बाएं हाथ के स्पिनर बरार के लिए याद किया जाएगा, जिन्होंने क्रिकेट अपने हीरो युवराज सिंह को देखकर खेलना शुरू किया था, जब साल 2007 के टी20 वर्ल्ड कप में स्टुअर्ट ब्रॉड की गेंदों पर युवराज ने 6 छक्के जड़े थे.
बरार की क्रिकेट यात्रा की कहानी अपने आप में बेहद प्रेरणादायी है. आर्थिक तंगी से गुज़रने वाले इस खिलाड़ी ने एक वक्त में कनाडा रुख़ करने का मन बना लिया था लेकिन पंजाब के ही लिए खेल चुके गुरकीरत सिंह मान(वो भारत के लिए भी खेल चुके हैं) ने उनकी हौसला-अफजाई की.
बरार पहली बार सुर्खियों में तब आए, जब 2020 के आईपीएल में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के ख़िलाफ़ विराट कोहली, एबी डिविलियर्स और ग्लैन मैक्सवेल जैसी ख़तरनाक तिकड़ी को आउट किया.
ऐसा करने वाले वो पहले गेंदबाज़ बने थे.
बुधवार को बरार ने 4 ओवर में 17 रन देकर 2 विकेट लिए, जिसमें अंजिक्य रहाणे का विकेट रहा. लेकिन उससे भी अहम रहा ‘स्पिन हिटर’ के तौर पर अपनी अलग साख बना चुके शिवम दुबे को पहली ही गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट करना.
मैच का अगर सिर्फ कोई एक टर्निंग प्वाइंट वाला लम्हा कोई रहा तो शायद ये वही था. बरार ने अपने 4 ओवर की गेंदबाज़ी में 10 डॉट बॉल(कोई रन नहीं) डाले और मैन ऑफ द मैच का ख़िताब भी जीता.
धोनी की हार और सीएसके के हाथों से निकला खेल
दरअसल, देखा जाय तो चेन्नई के लिए इस मैच में वो सबकुछ गड़बड़ हुआ जो हो सकता था. दूसरी पारी में गेंदबाज़ी करते हुए उन्हें ओस की समस्या से जूझना पड़ा.
वहीं पहली बार जिस मैच में उन्हें महेंद्र सिंह धोनी के बल्ले से चिर-परिचित आक्रामकता वाली एक तेज़-तर्रार पारी की उम्मीद थी , उसमें वो नाकाम साबित हुए.
11 गेंदों की पारी के दौरान धोनी ने एक चौका और एक छक्का तो लगाया लेकिन डेरेल मिशेल जैसे बल्लेबाज़ के दूसरे छोर पर होने के बावजूद उनका आखिर लम्हों में रन के लिए नहीं दोड़ना थोड़ा अजीब लगा.
इस सीज़न में पहली बार धोनी आउट हुए. हालांकि, अब भी किसी गेंदबाज़ ने उनका विकेट नहीं लिया.
वो रन आउट हुए और उनकी टीम पर्याप्त रन, रणनीति के मामले में भी पंजाब के सामने आउट हुई.
इसके कारण उन्हें इस ख़ास विरोधी के सामने अपने करियर में लगातार 5वीं हार का सामना करना पड़ा.
इस महारथी टीम के ख़िलाफ़ लगातार 5 जीत का परचम आईपीएल के इतिहास में सिर्फ मुंबई इंडियंस ने ही हासिल किया था.
अंक-तलिका में अब चेन्नई 10 मैचों के बाद 10 अंकों के साथ भले ही चौथे स्थान पर बनी हुई है, लेकिन इतने ही अंक सनराइजर्स हैदराबाद(9 मैचों में) और डेल्ही कैपिटल्स(11 मैचों में) के भी हैं.
जो उनके प्ले-ऑफ की उम्मीदों को चुनौती देंगे. वहीं पंजाब किंग्स ने भी पिछले तीन मैचों में दमदार खेल दिखाकर 10 मैचों में 8 अंक जुटा लिए हैं.
अगर चेन्नई के ख़िलाफ़ जैसा खेल वो खेले, वही सिलसिला 4 मैचों में बरकरार रहता है तो प्ले-ऑफ की उम्मीदें उनके लिए भी जग सकती हैं.
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