बांग्लादेश में संसदीय चुनाव को लेकर ये हैं छह चुनौतियां

    • Author, बीबीसी बांग्ला
    • पदनाम, ढाका

बांग्लादेश चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि देश में राष्ट्रीय चुनाव 12 फ़रवरी को होंगे. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की. ख़ास बात यह है कि इसी दिन देश में जनमत संग्रह भी होगा.

यह चुनाव उस छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद पहली बार होने जा रहा है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को सत्ता से हटा दिया था.

चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख़ 29 दिसंबर है और नामांकन पत्रों की जांच 30 दिसंबर से 4 जनवरी तक जारी रहेगी.

बांग्लादेश में पिछले साल जुलाई में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद तैयार किए गए 'जुलाई चार्टर' को लागू करने के लिए संसदीय चुनावों के साथ ही जनमत संग्रह भी होगा.

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दरअसल 'जुलाई चार्टर' का मक़सद देश की राजनीति और संस्थागत ढांचे में सुधार लाना था.

बांग्लादेश सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफ़ेसर मोहम्मद यूनुस ने कुछ दिन पहले ही बताया था कि जनमत संग्रह के लिए मतपत्र के साथ ही वोटरों से चार सवालों के जवाब 'हाँ' या 'नहीं' में मांगे जाएंगे.

अगर ज़्यादा वोटरों ने 'हाँ' के पक्ष में वोटिंग की तो बांग्लादेश में एक संवैधानिक सुधार परिषद का गठन किया जाएगा जो संविधान में संशोधन करेगी.

विश्लेषकों का मानना ​​है कि हालांकि कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा से चुनाव को लेकर सभी अनिश्चितताएं समाप्त हो गई हैं, लेकिन चुनाव आयोग (ईसी) को इस चुनाव से पहले कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.

हालांकि, आयोग पहले ही कह चुका है कि उन्होंने चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं.

मंगलवार को चुनाव आयुक्त मोहम्मद अनवरुल इस्लाम सरकार ने पत्रकारों को बताया कि आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने के उद्देश्य से कार्यक्रम की घोषणा के तुरंत बाद विभिन्न मुद्दों पर लगभग बीस सर्कुलर जारी करेगा.

चुनाव आयोग के सामने चुनौतियाँ

विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश में इस बार चुनाव में आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ही दिन में दो चुनाव कराना होगा, यानी संसदीय चुनाव और जनमत संग्रह कराना.

उनके अनुसार, इन दोनों मुद्दों पर वोटिंग की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की चूक मतदान और मतगणना को संकट में डाल सकती है. इसलिए, अगर मतगणना में अप्रत्याशित देरी होती है, तो हालात को काबू करना एक चुनौती बन सकता है.

कई लोगों का मानना ​​है कि एक ही दिन में दो बार मतदान के अलावा, मतपत्रों की व्यवस्था और गिनती, चुनावी माहौल, कानून व्यवस्था और सशस्त्र बलों की तैनाती, सोशल मीडिया और एआई का उपयोग आयोग के लिए प्रमुख चुनौतियां बन सकती हैं.

1. एक ही दिन में दो बार वोटिंग

चुनाव आयोग पहले ही घोषणा कर चुका है कि अगले साल के चुनावों में संसदीय चुनाव और जनमत संग्रह के मतपत्रों के लिए दो अलग-अलग रंगों के कागजों का इस्तेमाल किया जाएगा.

इनमें से राष्ट्रीय संसद के लिए होने वाली वोटिंग के लिए सफेद कागज पर काले रंग से छपे मतपत्रों का उपयोग किया जाएगा, जबकि जनमत संग्रह के लिए रंगीन मतपत्रों का उपयोग किया जाएगा.

ढाका में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में, मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने ख़ुद कहा कि राष्ट्रीय चुनाव और जनमत संग्रह को एक ही दिन आयोजित करने के लिए चुनाव आयोग को कई अतिरिक्त काम करने होंगे.

चुनाव विश्लेषक अब्दुल अलीम का कहना है, "दोनों मतदान एक ही दिन होंगे और उम्मीद है कि कम से कम 80 प्रतिशत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिसका मतलब है कि लगभग 10 करोड़ मतदाता मतदान कर सकते हैं."

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला को बताया, "इसका मतलब है कि जनमत संग्रह को जोड़ दें तो 20 करोड़ मतों की गिनती करनी होगी. साल 2008 के चुनाव में 7 करोड़ मतदाता थे, और वह गिनती भी चुनाव के अगले दिन सुबह ही पूरी हो पाई थी. अगर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं अपनाई गई, तो इस बार गिनती में कुछ दिन लगेंगे."

उनके अनुसार, बांग्लादेश में वोटों की गिनती में देरी से उम्मीदवार बेचैन हो जाते हैं, और अक्सर इससे हिंसा भड़क उठती है.

अलीम ने कहा, "यहां राजनीतिक दलों के बीच सहिष्णुता कम है. मुझे लगता है कि यही कारण है कि चुनाव का समय और वोटों की गिनती दोनों ही आयोग के लिए चुनौती होगी."

पूर्व चुनाव अधिकारी जैस्मीन टुली का कहना है कि चुनाव आयोग ने मतदान का समय एक घंटे बढ़ा दिया है, लेकिन मतपत्रों पर लिखे नामों को पढ़ने में काफ़ी समय लगेगा.

उनके अनुसार, जनमत संग्रह के मतपत्रों पर लिखे मुद्दों को पढ़ने में मतदान करने के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है.

उन्होंने बीबीसी न्यूज़ बांग्ला को बताया, "इस देश में पार्टियां और उम्मीदवार नतीजों का इंतजार नहीं करना चाहते. इसके अलावा, कई इलाकों में बिजली नहीं है. कई जगहों पर बिजली की व्यवस्था अच्छी नहीं है. ऐसे में, रात होने के साथ-साथ मतगणना में जोखिम बढ़ता जाता है."

2. मतदान की व्यवस्था

चुनाव आयोग ने कहा है कि इस बार देश भर में 300 संसदीय क्षेत्रों के लिए कुल 42,761 मतदान केंद्र होंगे. इन केंद्रों में बूथों की कुल संख्या 2,44,739 होगी, जो 12वें संसदीय चुनाव की तुलना में कम है.

चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुमान के अनुसार, मतदान केंद्र के गुप्त कक्ष में मतपत्र को सील करने, मोड़ने और उसे बॉक्स में डालने के लिए मतदाता को औसतन अधिकतम 52 सेकंड का समय मिलेगा. इसमें से महिला मतदाताओं को औसतन 57 सेकंड और पुरुष मतदाताओं को 48 सेकंड का समय मिलेगा.

देश में जनमत संग्रह संसदीय चुनाव के दिन ही आयोजित किया जा रहा है, इसलिए मतदाता को इस समय सीमा में दो मतपत्रों पर अपना मतदान पूरा करना होगा.

मतदान केंद्रों और बूथों की व्यवस्था के अनुसार, एक महिला बूथ में 500 मतदाता, एक पुरुष बूथ में 600 मतदाता और एक केंद्र में तीन हज़ार मतदाता वोट डाल पाएंगे.

इस चुनाव में मतदान का समय एक घंटे बढ़ा दिया गया है और मतदान सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चलेगा.

इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि क्या इस दौरान महिलाओं के बूथ में 500 मतदाताओं या पुरुषों के बूथ में 600 मतदाताओं की वोटिंग संभव है?

चुनाव आयोग की पूर्व अतिरिक्त सचिव जैस्मीन टुली का कहना है कि इस बार कई प्रवासी पोस्टल बैलट से मतदान करेंगे, और इसका प्रबंधन आयोग के लिए एक नई चुनौती होगी.

3. चुनाव के लिए अनुकूल माहौल बनाना

बांग्लादेश में चुनाव से पहले विभिन्न दलों के बीच तनाव बढ़ रहा है.

अंतरिम सरकार ने शेख़ हसीना की पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया है जिसकी वजह से वो इन चुनावों में भाग नहीं ले पाएगी.

इस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभियान चला रहे हैं कि "अवामी लीग के बिना चुनाव नहीं हो सकते."

दूसरी ओर, चुनाव में भाग लेने वाले दलों में से कुछ को उम्मीदवारों को लेकर आंतरिक कलह का सामना करना पड़ रहा है. एक बार फिर, चुनाव से पहले, बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच शत्रुता लगातार बढ़ रही है, जो उनके कार्यकर्ताओं और समर्थकों में फैल रही है.

बांग्लादेश की मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक़ चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद, चुनाव आयोग को लॉ इनफ़ोर्समेंट और प्रशासन का अधिकार मिल जाता है.

जैस्मीन टुली का कहना है कि इस साल के चुनाव का संदर्भ बहुत अलग है और चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियां लंबे समय से चुनाव में भाग नहीं ले पाई हैं.

वो कहती हैं, "हालांकि, मतदाताओं या उम्मीदवारों को भरोसा दिलाने के लिए अभी तक अनुकूल माहौल नहीं बना है. निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनावी माहौल को भरोसेमंद बनाना होगा."

4. कानून व्यवस्था के हालात

चुनाव के संबंध में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक से मिली जानकारी के अनुसार, चुनाव के दौरान कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीनों बलों के क़रीब एक लाख सदस्य मौक़े पर तैनात रहेंगे.

इनमें से 90 हज़ार थल सेना के जवान, 2,500 नौसेना के जवान और 1,500 वायु सेना के जवान तैनात किए जाएंगे.

बांग्लादेश की तीनों सेना प्रमुखों ने नवंबर की शुरुआत में सरकार के सलाहकार से मुलाकात कर उन्हें सूचित किया कि हर उपज़िले में सैनिकों की एक कंपनी तैनात की जाएगी.

चुनाव आयोग ने कहा कि कार्यक्रम की घोषणा के बाद, मोबाइल अदालतों, मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, चुनावी जांच समितियों की नियुक्ति, न्यायिक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति, निगरानी प्रकोष्ठों के गठन और कानून एवं व्यवस्था प्रकोष्ठों के गठन जैसे मुद्दों पर लगातार सर्कुलर जारी किए जाएंगे.

हालांकि, विश्लेषक जैस्मीन टुली का मानना ​​है कि कानून और व्यवस्था में अभी तक उस हद तक सुधार नहीं हुआ है जितना होना चाहिए था.

5. राजनीतिक दलों पर नियंत्रण रखना

बांग्लादेश में चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती असहिष्णुता की आलोचना हो रही है. कई लोगों का कहना है कि देश के सियासी दलों में किसी भी कीमत पर चुनाव जीतने की प्रवृत्ति है.

जैस्मीन टुली ने कहा, "चुनाव तभी सफल होते हैं जब वे कंपीटिटिव हों और उसमें हर किसी की सहभागिता हो. अगर उम्मीदवार एक लेवल पर नहीं हैं, तो माहौल बिगड़ जाता है. प्रशासन अब कोई मजबूत रुख़ नहीं अपना सकता क्योंकि वे मान लेते हैं कि एक पार्टी ही जीतेगी और अगर वे उस पार्टी के ख़िलाफ़ फ़ैसला करते हैं, तो बाद में नुक़सान होने का ख़तरा रहता है."

उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के सामने ऐसा माहौल बनाने की चुनौती होगी जहाँ राजनीतिक दल धैर्य रखें और जो भी चुनाव परिणाम हों, उसे स्वीकार करें.

6. सोशल मीडिया और एआई

चुनाव आयोग ने चुनाव में सोशल मीडिया के माध्यम से वोट मांगने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए आचार संहिता जारी की है.

इसमें कहा गया है कि कोई उम्मीदवार, उसका चुनाव प्रतिनिधि या उम्मीदवार की ओर से कोई अन्य व्यक्ति सोशल मीडिया का उपयोग करके चुनाव प्रचार कर सकता है.

हालांकि, इस स्थिति में, उम्मीदवार, उसका चुनाव प्रतिनिधि, उसकी पार्टी या उम्मीदवार को प्रचार शुरू होने से पहले संबंधित सोशल मीडिया का नाम, अकाउंट की जानकारी, आईडी, ईमेल आईडी और अन्य पहचान संबंधी जानकारी रिटर्निंग ऑफ़िसर के पास जमा करनी होगी.

आचार संहिता में कहा गया है कि चुनाव प्रचार सहित किसी भी चुनाव संबंधी मामले में एआई का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण मक़सद के लिए नहीं किया जा सकता है. नफ़रती भाषण, ग़लत सूचना, ग़लत तरीके से जोड़-तोड़ और मनगढ़ंत जानकारी सहित सभी प्रकार की नकारात्मक सामग्री के निर्माण और प्रसार पर रोक होगी.

लेकिन चुनाव विश्लेषक अब्दुल अलीम का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनकी निगरानी कैसे की जाएगी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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