सीक्रेट कॉल और कोड नेमः उत्तर कोरिया को पैसे भेजने का ख़तरनाक बिज़नेस

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- Author, जुंगमिन चोई
- पदनाम, बीबीसी कोरियन
उत्तर कोरिया से भागकर दक्षिण कोरिया में बसे लोग हर साल अपने घर धन भेजते हैं.
लेकिन अब धन भेजना लगातार ख़तरनाक़ होता जा रहा है क्योंकि दोनों देश ग़ैर क़ानूनी मनी ट्रांसफ़र पर शिकंजा कस रहे हैं.
एक दशक से भी ज़्यादा समय से दक्षिण कोरिया में ब्रोकर रहे ह्वांग जी-सुंग कहते हैं, “यह एक जासूसी फ़िल्म जैसा है और लोग अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा देते हैं.”
वो ख़ुद उत्तर कोरिया से भाग कर दक्षिण में आए थे. वो जानते हैं कि यह काम कितना जटिल और मुश्किल है. इसके लिए दक्षिण कोरिया, चीन और उत्तर कोरिया में ब्रोकरों और कूरियर का काम करने वालों का एक व्यापक गोपनीय नेटवर्क की ज़रूरत होती है.
चीन से तस्करी कर लाए गए फ़ोन से किसी दूरदराज़ इलाक़े से कॉल की जाती है. इसके लिए कोड नेम (कूट भाषा) का इस्तेमाल किया जाता है.
लेकिन इसमें बहुत अधिक ख़तरा होता है, अगर पकड़े गए तो उत्तर कोरियाई लोगों को देश के बदनाम राजनीतिक कैदियों वाले कैंप, क्वान-ली-सो, में भेजा जा सकता है. माना जाता है कि यहां कई सालों में हज़ारों लोगों की मौतें हो चुकी हैं.
उत्तर कोरियाई ह्यूमन राइट्स के लिए डेटाबेस सेंटर ने 2023 में एक सर्वे कराया था. इसमें उत्तर कोरिया छोड़कर जाने वाले 400 लोगों से बात की गई.
सर्वे में पाया गया कि 63% लोगों ने उत्तर कोरिया में रह रहे अपने परिवारों को पैसे भेजे.
लेकिन 2020 से, उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया में आ रहे पैसे के सिलसिले और दक्षिण कोरिया से आने वाले 'प्रतिक्रियावादी विचारधारा और संस्कृति' को रोकने के लिए ब्रोकरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है.
ह्वांग की पत्नी जू सू-येआन भी ब्रोकर हैं. वो कहती हैं, “पिछले कुछ सालों के मुकाबले उत्तर कोरिया में ब्रोकरों की संख्या 70% से अधिक कम हो गई है.”
दक्षिण कोरिया ने लगाया प्रतिबंध

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दक्षिण कोरिया ने भी इस तरह के मनी ट्रांसफ़र पर प्रतिबंध लगा दिया है लेकिन पहले प्रशासन अन्य तरीके तलाशता था. अब यह बदल रहा है.
बीते अप्रैल में सियोल के पास ग्येओंगी प्रांत में ह्वांग और उनकी पत्नी जू के घर पर पुलिस ने छापा मारा. उन पर फॉरेन एक्सचेंज ट्रांसैक्शन एक्ट के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था.
उत्तर कोरिया को पैसे भेजने के लिए जिस बैंक खाते का इस्तेमाल किया जाता था, उस पर सू का नाम है, इसलिए वो आरोपों का सामना कर रही हैं.
इसके अलावा सात अन्य ब्रोकरों पर जांच चल रही है.
हालांकि ब्रोकर कैमरे के सामने बात नहीं करते लेकिन मिस जू ने बीबीसी से बात करने का फैसला किया क्योंकि वो अपने मामले को सबके सामने लाना चाहती हैं.
इस मामले पर बीबीसी के सवालों का पुलिस ने जवाब नहीं दिया है.
दक्षिण कोरियाई प्रशासन ने ह्वांग से कहा कि उत्तर कोरिया को होने वाला कोई भी मनी ट्रांसफ़र "वैध बैंक" के माध्यम से होना चाहिए.
वो पूछते हैं, “कोई एक (वैध बैंक) हो तो हमें बताईए!” वो कहते हैं कि जबसे दोनों देश एक दूसरे के ख़िलाफ़ युद्ध की स्थिति में हैं, उत्तर कोरिया में कोई भी संस्था नहीं है जो क़ानूनी तौर पर पैसे स्वीकार कर सके.
साल 2020 में उत्तर कोरिया ने संयुक्त संपर्क कार्यालय बंद कर दिया, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते लगातार ख़राब हुए हैं.
हाल ही में किम जोंग उन ने यहां तक कह दिया कि दक्षिण के साथ एकीकरण का लक्ष्य संभव नहीं है, जोकि संविधान में यह लक्ष्य निर्धारित किया गया था.
सीक्रेट कॉल

सीमा के आर पार अवैध नकदी हस्तानांतरण, दक्षिण कोरिया में आए उत्तर कोरियाई लोगों का उनके परिवारों से फ़ोन पर बातचीत से शुरू होता है. ये कॉल, सीमा से सटे प्रांतों में जहां चीन का नेटवर्क आता है, वहां से चीन से तस्करी कर लाए गए फ़ोन से किए जाते हैं.
इस कॉल की व्यवस्था उत्तर कोरिया में मौजूद ब्रोकर करते हैं, इसके लिए उन्हें लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और पहाड़ भी चढ़ने होते हैं.
कॉल कनेक्ट होने के लिए घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, इसके बाद दक्षिण कोरिया में मौजूद व्यक्ति रकम के बारे में अपनी रज़ामंदी देता है.
राज्य सुरक्षा मामलों के मंत्रालय की निगरानी से बचने के लिए बातचतीत रुक रुक कर करनी होती है.
इसके बाद दक्षिण कोरियाई ब्रोकर की मदद से यह रकम एक चीनी बैंक खाते में जमा कराई जाती है. यह भी जोख़िम भरा होता है क्योंकि विदेशी मुद्रा के आवागमन पर चीन भी नज़र रखता है.
अब चीन के ब्रोकर का काम होता है कि वो यह रकम उत्तर कोरिया पहुंचाए.
उत्तर कोरिया के अहम सहयोगी चीन के साथ उसकी सीमा पर अपेक्षाकृत कम बंदिशें हैं. देश छोड़ चुके लोगों से भेजी हुई रकम चीन और उत्तर कोरियाई व्यापारिक कंपनियों के बीच हुए लेनदेन के रूप में दिखाई जाती है.
वे उत्तर कोरिया में परिवारों को रकम पहुंचाने के लिए कई कूरियर रखते हैं.
2013 में देश छोड़ने वाले किम जिन सिओक पहले उत्तर कोरिया में कूरियर का काम करते थे.
वे कहते हैं, “रकम पहुंचाने वाले एक दूसरे को नहीं जानते और उन्हें जानना भी नहीं चाहिए क्योंकि उनकी ज़िंदगी दांव पर लगी होती है.” हम उनकी सुरक्षा के लिए उन्हें छद्म नाम देते हैं.
ब्रोकर छद्म नाम और कोड का इस्तेमाल करते हैं ताकि इसका संकेत दिया जा सके कि कब रकम पहुंचाना सुरक्षित है.
पकड़े जाने पर 15 साल की जेल

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ह्वांग के पास क़रीब 800 ग्राहक हैं. वो कहते हैं कि उनका ऐसे परिवारों से भी पाला पड़ा जिन्होंने पैसे लेने से मना कर दिया.
उनके मुताबिक़, “वो डरे हुए थे कि यह सुरक्षा पुलिस की ओर से बिछाया गया जाल है और इस तरह की बातें करते कि हम गद्दारों से पैसे नहीं लेते.”
रकम पहुंचने के बदले ब्रोकर 50% कमीशन लेते हैं.
ह्वांग ने बताया, “उत्तर कोरियाई ब्रोकर हर लेन देन पर पांच से छह लाख वॉन बनाने के लिए अपनी ज़िंदगी दांव पर लगाते हैं.”
आज के विनिमय दर से यह रकम 375 से 450 डॉलर (31,000 से 37,000 रुपये) है.
"आजकल, अगर आपको एक सुरक्षा अधिकारी गिरफ़्तार करता है और सज़ा होती है तो 15 साल की जेल होगी. जासूसी में सज़ा मिली तो आपको क्वान-ली-सो में भेज दिया जाएगा."
ह्वांग हमें उन उत्तर कोरियाई लोगों की प्रतिक्रिया दिखाते हैं जिन्हें उनके ब्रोकरों के मार्फ़त रकम मिली.
एक बूढ़ी महिला रोते बता रही थी, “मैं हर रोज़ भूखे सो रही थी और मैंने घास तक खाई है.” जंगलों में खाना खोजते हुए उनका हाथ फूल गया था.
उसी वीडियो में एक अन्य महिला ने कहा, “यहां बहुत मुश्किल है और मैं आपको 100 बार शुक्रिया करना चाहती हूं.”
मिस जू कहती हैं कि जब भी ऐसे वीडियो देखती हैं, उनका दिल टूट जाता है.
“कुछ लोगों ने अपने मां बाट और बच्चों को पीछे छोड़ आए. वो बस ये चाहते हैं कि उत्तर कोरिया में उनका परिवार बचा रहे ताकि एक दिन वे एकजुट हो सकें.”
वो कहती हैं कि 10 लाख वॉन, उत्तर कोरिया में तीन लोगों के एक परिवार के लिए एक साल तक के पर्याप्त है.
ह्वांग कहते हैं कि ऐसी रकम पाने वालों को उत्तर कोरिया में "हालासान स्टेम" कहा जाता है.
हालासान का संदर्भ माउंट हाला से जुड़ा है, जोकि दक्षिण कोरिया के एक खूबसूरत जेजू द्वीप पर प्रसिद्ध ज्वालामुखी है.
वो कहते हैं, “हालासन स्टेम परिवार से आने वाला व्यक्ति, कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों से भी ज्यादा विवाह के योग्य माना जाता है.”
लाइफ़ लाइन

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ये स्पष्ट नहीं कि क्यों दक्षिण कोरिया ने ऐसे लेनदेन पर शिकंजा करना शुरू किया है, लेकिन उत्तर कोरिया से भागने वालों की क़ानूनी मदद करने वाले वकील पार्क वॉन-येओन का मानना है कि अतिउत्साह एक कारण हो सकता है क्योंकि इसी साल जासूसी जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों की जांच, राष्ट्रीय खुफ़िया सेवा से पुलिस के हवाले कर दिया गया है.
वो कहते हैं, “अगर पुलिस जासूसी के आरोप सिद्ध नहीं कर पाती है तो वो फॉरेन एक्सचेंज ट्रांसैक्शन एक्ट की धारा लगा देती है.”
दोनों सरकारों की ओर से कड़ा रुख़ अपनाए जाने से उत्तर कोरिया में रह रहे परिवारों के लिए लेन देन की यह जीवन रेखा बंद हो सकती है.
ह्वांग अपनी पत्नी के मामले को सुप्रीम तक ले जाने के लिए तैयार हैं, अगर उन्हें सज़ा होती है. वो मानते हैं कि उत्तर कोरिया से आने वाले लोगों द्वारा भेजी जाने वाली रकम सिर्फ पैसे का मामला नहीं है.
वो कहते हैं, “उत्तर कोरिया को बिना लड़े ही नीचे लाने का यही एकमात्र रास्ता है. पैसे के साथ ये भी ख़बर आती है कि दक्षिण कितना संपन्न और समृद्ध है...यही वो बात है जिससे किम जोंग उन डरे हुए हैं.”
किम मानते हैं कि उत्तर कोरिया से आए उनके जैसे लोग, अपने प्रियजनों को पैसा भेजना नहीं बंद करेंगे, भले ही दोनों तरफ़ का प्रशासन इसे रोकना चाह रहा हो.
उन्होंने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो रकम भेजने के लिए वो खुद चीन जाएंगे.
वो कहते हैं, "मैंने इतना ख़तरा लिया कि मैं अपने बच्चों का मुंह न देख पाऊं लेकिन कम से कम उन्हें अच्छी ज़िंदगी तो नसीब होगी. "
वो दक्षिण कोरिया में ट्रक ड्राईवर हैं और हफ़्ते में पांच दिन अपने वाहन में ही सोते हैं.
वो अधिक से अधिक पैसा बचा रहे हैं ताकि वो उत्तर कोरिया में अपनी पत्नी और बच्चों को 40 लाख वान हर साल भेज सकें.
अपने परिवार की ओर से मिले ऑडियो संदेशों को बार बार सुनते हैं.
एक संदेश में उनके बेटे कहते हैं, “आप कैसे हैं, डैड? आपको कितनी परेशानी झेलनी पड़ रही है? आपकी मुश्किलों के सामने हमारी दिक्कतें कुछ भी नहीं.”
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