गौतम गंभीर की भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच पद पर दावेदारी में कितना दम?

    • Author, शारदा उगरा
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

जून में जब भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज़ डब्ल्यूवी रमन ने भारतीय क्रिकेट टीम के कोच पद के लिए इंटरव्यू दिया था तो इस ख़बर ने कई लोगों को अचरज में डाल दिया.

इससे पहले तक बाएं हाथ के एक अन्य पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज़ गौतम गंभीर को इस पद के लिए इकलौता दावेदार माना जा रहा था.

उन्हें भारतीय क्रिकेट की दूसरी सबसे अहम चुनौतीपूर्ण ज़िम्मेदारी (सबसे चुनौतीपूर्ण ज़िम्मेदारी भारतीय क्रिकेट टीम की कप्तानी है) के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार भी माना जा रहा था.

अगर आख़िरी समय में कोई बदलाव हो या गौतम गंभीर और बीसीसीआई के बीच वैचारिक अंतर हो जाए तो राहुल द्रविड़ की जगह लेने के लिए डब्ल्यूवी रमन का विकल्प मौजूद होगा. वैसे गंभीर के साथ तुलना में, रमन के पास कोचिंग का अनुभव कहीं ज़्यादा है.

उन्होंने घरेलू क्रिकेट में बंगाल और तमिलनाडु की रणजी टीमों को कोचिंग देने के अलावा आईपीएल में किंग्स इलेवन पंजाब टीम को भी कोचिंग दी है.

इतना ही नहीं 2019 से 2021 के बीच वे भारतीय महिला क्रिकेट टीम के हेड कोच रहे हैं. रमन नेशनल क्रिकेट अकादमी में बल्लेबाज़ी के कोच भी रहे हैं.

लेकिन इन सबके बावजूद गंभीर अपनी कम उम्र और बड़े टूर्नामेंटों में टॉप क्लास के प्रदर्शन की वजह से पसंदीदा माने जा रहे हैं.

गौतम गंभीर बनाम डब्ल्यूवी रमन

गौतम गंभीर अभी 42 साल के हैं जबकि रमन की उम्र 59 साल हो चुकी है.

भारत ने जो आख़िरी दो आईसीसी वर्ल्ड टाइटल- 2007 में वर्ल्ड टी20 और 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप- जीते हैं, उनमें गौतम गंभीर की अहम भूमिका रही है. उन्होंने दोनों फ़ाइनल मुक़ाबलों में शानदार पारी खेली है.

2007 वर्ल्ड टी20 के ख़िताबी मुक़ाबले में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 54 गेंदों पर 75 रन की पारी के साथ गंभीर मैच में शीर्ष स्कोरर थे.

जबकि 2011 के वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में श्रीलंका के सामने 275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने सातवें ओवर तक वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर के विकेट गंवा दिए थे.

लेकिन गंभीर ने न केवल पारी को संभाला बल्कि 122 गेंदों पर 97 रनों की पारी के साथ वे भारत के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे.

2014 में गौतम गंभीर की कप्तानी में कोलकाता नाइटराइडर्स ने अपना दूसरा आईपीएल ख़िताब जीता था, तब रमन टीम के सपोर्ट स्टाफ़ में शामिल थे.

'मैं भारतीय टीम का कोच बनना पसंद करूंगा'

गंभीर इस मायने में भी भाग्यशाली हैं कि वे अपनी क्रिकेट मैदान की उपलब्धियों के बूते ही इस पद के लिए पात्रता रखते हैं.

उन्हें इसके लिए अपनी राजनीति की मदद नहीं लेनी पड़ी है. गंभीर 2019 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और पूर्वी दिल्ली से सांसद भी चुने गए.

वे सरकार और बीसीसीआई में सबसे ताक़तवर शख़्स के करीबी भी रहे.

इसके बाद उन्होंने राजनीति छोड़ दी.

फोर्ब्स लीडरशिप इवेंट में उन्होंने कहा था, "मैंने राजनीति में भी किस्मत आजमायी. एक चीज़ जो मैं कह सकता हूं कि मैंने कभी हार नहीं मानी. अच्छी नीयत और पूरी ईमानदारी से जितना संभव था, उतना देने की कोशिश की. लेकिन हां, कभी कभी किसी मोड़ पर आपको फ़ैसला लेना होता है कि आपके दिल के क़रीब क्या है...और मेरा दिल क्रिकेट के साथ है और मैं क्रिकेट में लौट गया."

जून की शुरुआत में अबू धाबी में एक इवेंट में उन्होंने कहा, "मैं भारतीय टीम का कोच बनना पसंद करूंगा. अपनी राष्ट्रीय टीम को कोचिंग देने से बड़ा कोई सम्मान नहीं है. आप 140 करोड़ भारतीयों और देश से बाहर रहने वाले भारतीयों का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं."

भारतीय क्रिकेट टीम के नए कोच को लगातार तीन साल तक काम करने का मौका मिलेगा. इतना उदार कार्यकाल भारतीय क्रिकेट के सबसे कामयाब कोचों, जॉन राइट, गैरी कर्स्टन, रवि शास्त्री और राहुल द्रविड़ को भी नहीं मिला.

ऐसे में बहुत संभव है कि गौतम गंभीर ही भारतीय क्रिकेट टीम के अगले कोच बनेंगे. मान लिया जाए कि उन्हें ये मौका मिल गया, तो ऐसे में सबसे दिलचस्प ये होगा कि उनके सहायकों में किनको रखा जाता है.

दक्षिण अफ्रीका के तेज़ गेंदबाज़ मॉर्नी मॉर्केल, कोलकाता नाइटराइडर्स में गंभीर के टीम मेट रहे हैं, उनका नाम बॉलिंग कोच के तौर पर देखा जा रहा है.

गंभीर खुद कह चुके हैं कि उनके पास डेटा और वीडियो एनालिसिस के लिए कोई समय नहीं है. वे अपने फ़ैसले, खेल को पढ़ते हुए स्वभाविक सोच से लेते हैं.

ऐसे में मॉर्केल जैसे सहायक से डेटा और वीडियो एनालिसिस के पहलू का संतुलन बना रहेगा.

क्या डब्ल्यूवी रमन गंभीर के सहायक बनेंगे?

दिलचस्प ये भी है कि गंभीर के प्रतिस्पर्धी ही नहीं बल्कि उनके सहायक के लिए भी डब्ल्यूवी रमन का नाम लिया जा रहा है. बैटिंग कोच के तौर पर ड्रेसिंग रूम में एक उम्रदराज और शांत स्वभाव के कोच की ज़रूरत भी है जो रणनीतिक सलाहकार की भूमिका निभा सके.

माना जा रहा है कि रमन इस आइडिया का विरोध नहीं करेंगे.

लेकिन एक अंतिम सवाल ये भी है कि जब भारतीय क्रिकेट टीम दुनिया भर में सबसे ज़्यादा फैंस वाली टीम है, तब भी टीम के कोच पद के लिए गिनती के ही आवेदन क्यों आए? विदेश से किसी ने आवेदन नहीं किया और क्यों?

इस सवाल के जवाब कई तरह से दिए जा सकते हैं. निश्चित तौर पर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम का कोच एक प्रतिष्ठित ज़िम्मेदारी है.

यह दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट प्रेमी देश और सबसे बड़े बाज़ार में इस खेल से जुड़ी सबसे अहम ज़िम्मेदारियों में से एक है.

इस पद के लिए बहुत ही आकर्षक वेतन और सुविधाएं भी मिलती हैं. अनुमान के मुताबिक हेड कोच के तौर पर राहुल द्रविड़ को सालाना 10 से 12 करोड़ रुपये मिल रहे थे.

लेकिन इन सबके बाद भी कोई विदेशी पेशेवर खिलाड़ी जो भारतीय क्रिकेट की आतंरिक कार्य प्रणाली और बीसीसीआई की कामकाजी संस्कृति को नहीं जानता हो, वह इस पद के लिए क्यों अपना आवेदन देगा?

इससे कम तनाव वाले और इतने ही आकर्षक वेतन वाले कोचिंग के विकल्प आईपीएल और दूसरी फ्रेंचाइजी लीग क्रिकेट में उपलब्ध हैं.

लीग क्रिकेट में कोचिंग करने वालों को साल में दस महीने तक घर से दूर और हर पल मीडिया की निगरानी में नहीं रहना होता है.

इतना ही नहीं, आईपीएल फ्रेंचाइज़ी के पास बीसीसीआई की तुलना में कहीं ज़्यादा पेशेवर और योजनाबद्ध तरीक़े से चलने वाली प्रबंधकीय व्यवस्था मौजूद होती है.

नए लीडर बनाने की चुनौती

बहरहाल, इस ज़िम्मेदारी के लिए वे भारतीय ही उम्मीदवार होंगे जो भावनात्मक तौर पर अपनी टीम की प्रतिष्ठा के लिए सबकुछ झोंकने के लिए तैयार होंगे.

थोड़े समय पहले तक गंभीर भारतीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों के साथ खेल रहे थे. सुपरस्टार और उनके नखरों को संभालने या उससे निपटने में गंभीर पूरी तरह सक्षम हैं.

फोर्ब्स के इवेंट में उन्होंने लीडरशिप पर कहा था, "मेरे हिसाब से, मुझे लगता है कि एक लीडर होने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण गुण यही है कि लीडर दूसरे लीडर बनाएं. यह केवल अपने बारे में सोचने जैसा नहीं है. यह एक ऐसा माहौल बनाने के बारे में है जहां आप दूसरे लीडर भी बनाते हैं."

क्रिकेटरों और क्रिकेट टीम से अलग भारतीय क्रिकेट को अब कोचिंग में भी पुरुष और महिला नए लीडरों को तैयार करने का रास्ता तलाशना होगा जो आने वाले दिनों में भारतीय टीम की ज़िम्मेदारी और गंभीर के बाद आने वाली पीढ़ियों के कई दबावों को संभालने में सक्षम हों.

2022 में गंभीर लखनऊ सुपर जायंट्स के मेंटर थे और टीम शुरुआती साल में ही प्ले ऑफ़ तक पहुंचने में कामयाब रही थी.

इस साल गंभीर कोलकाता नाइटराइडर्स की टीम में लौटे और मेंटर के तौर पर उन्होंने टीम को कामयाबी दिलाने वाले सभी महत्वपूर्ण फ़ैसले लिए- जैसे कि सुनील नरेन से पारी की शुरुआत कराने का फ़ैसला उनका था.

गंभीर ने कोलकाता को दो बार से ज़्यादा आईपीएल जीतने वाली तीसरी टीम बनाया.

भारत के तेज़ गेंदबाज़ वरुण एरॉन कहते हैं कि गंभीर के पक्ष में उनका कद और खेल से जुड़ी नवीनतम जानकारियों से लैस होना है.

गंभीर हाल फ़िलहाल तक खुद खेलते रहे हैं और आधुनिकतम ट्रेंड और रुझान को समझते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)