उदय सहारन: भारतीय क्रिकेट के नए सितारे का उदय

    • Author, विधांशु कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

राजस्थान में श्रीगंगानगर के रहने वाले संजीव सहारन क्रिकेटर बनना चाहते थे.

घरेलू स्तर पर वो थोड़ा-बहुत खेल भी रहे थे, लेकिन परिवार की ज़िम्मेदारी उन्हें खेल के बजाय पढ़ाई की ओर धकेल रही थी, जिससे वो एक सुरक्षित करियर बना सके.

उन्होंने क्रिकेट छोड़ा, आयुर्वेद की पढ़ाई की और डॉक्टर भी बन गए, लेकिन मन में क्रिकेटर न बनने का मलाल बाक़ी रह गया था.

अपने इसी सपने को उन्होंने अपने बेटे उदय के ज़रिए पूरा करने की ठानी और इस कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी.

उनकी ये लगन और बेटे उदय की मेहनत रंग लाई जब मंगलवार को उदय ने कप्तानी पारी खेलकर भारत को आईसीसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जगह दिलवा दी.

श्रीगंगानगर में उदय सहारन का पूरा परिवार और पूरा शहर ख़ुशी की लहरों में समा गया, वहीं पूरे भारत में भी भारतीय जूनियर टीम की इस सफलता को सराहा गया.

सेमीफ़ाइनल की अग्निपरीक्षा

टूर्नामेंट के सेमीफ़ाइनल में भारत का मुक़ाबला दक्षिण अफ्रीका से था. भारतीय टीम को जीत के लिए 245 का लक्ष्य मिला था लेकिन जब उदय बैटिंग करने आए, तो पहले दो विकेट सिर्फ 8 रन पर ही गिर चुके थे.

उनके पास पारी को संभालने की ज़िम्मेदारी थी, लेकिन ज़बरदस्त पेस बॉलिंग के सामने दूसरे छोर से विकेट गिरते जा रहे थे. जल्दी ही भारतीय टीम ने 12वें ओवर में 32 रन पर चार विकेट खो दिए थे.

यहां से जीत मुश्किल लग रही थी, लेकिन उदय ने हार नहीं मानी. उन्होंने साथी खिलाड़ी सचिन धस के साथ मिलकर धीरे-धीरे पारी को आगे बढ़ाया.

सचिन तेंदुलकर के नाम पर अपना नाम पाने वाले सचिन धस भी आक्रामक बल्लेबाज़ी करते हैं और उन्होंने चौके-छक्के से पारी को सजाया.

दूसरी छोर पर उदय पूरा दबाव अपने ऊपर ले रहे थे और सिंगल लेकर छोर बदलते रहते थे. आसान गेंद आती तो उनके बल्ले से चौके भी निकलते लेकिन ये पारी धैर्य भरी थी.

वो बार-बार सचिन के पास जाकर उन्हें देर तक टिके रहने की बात भी करते रहते. दोनों ने मिलकर 174 रनों की पार्रटनरशिप की और सचिन 96 रन बनाकर आउट हुए.

आख़िरी ओवरों में उदय टिके रहे और जीत से सिर्फ़ एक रन दूर वो रन आउट हो गए, लेकिन तब तक जीत भारत की झोली में आ चुका था क्योंकि टीम ने लक्ष्य बिना और विकेट खोए पा लिया.

दबाव में उदय सहारन की ऐसी परिपक्व पारी की सभी ने जमकर तारीफ़ की है. लेकिन श्रीगंगानगर में टीवी पर मैच देख रहे उनके पिता को पूरा भरोसा था कि उदय मैच निकाल लेंगे.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को कहा, "उदय में बचपन से ही लीडरशिप की क्वॉलिटी थी. वो ज़िम्मेदारी से खेलता था. उसे जब भी मैं कोई तकनीक सिखाता तो वो उसे सीखकर साथी खिलाड़ियों को भी सिखाता था."

ख़ुद उदय ने भी जीत के बाद उसका श्रेय अपने पिता को ही दिया.

पिता ने सिखाए गुर

4 अप्रैल 2004 को श्रीगंगानगर में जन्मे उदय सहारन 12 साल की उम्र तक आते-आते क्रिकेट को गंभीरता से लेने लगे थे.

उनके पिता तब तक बीसीसीआई के लेवल वन कोच बन गए थे. उन्होंने ही उदय को शुरुआती ट्रेनिंग दी.

अपने ज़माने में घरेलू क्रिकेट खेलने वाले संजीव अपनी मज़बूत बैटिंग तकनीक की वजह से टीम के गावस्कर माने जाते थे. उन्होंने उदय में भी मज़बूत तकनीक की नींव रखी.

संजीव ने उदय को ये भी सिखाया की मैच को कैसे आख़िर तक लेकर जाना है और विपरीत परिस्थिति में भी हार नहीं माननी है.

उदय ने सीख की जब हर गेंद पर एक या दो रन से भी काम चल सकता है तो छक्का मारने की ज़रूरत नहीं और जब उसकी ज़रूरत आए तो बांउड्रीज़ भी लगाई जाएगी.

14 साल की उम्र तक आते-आते उन्हें बेहतर कोचिंग के लिए पंजाब भेज दिया गया. पंजाब से ही उदय ने अंडर-14, फिर अंडर-16 और अंडर-19 खेलते हुए भारतीय अंडर-19 टीम में जगह बनाई.

पंजाब के रणजी कप्तान मंदीप सिंह ने एक अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा, "खेल को लेकर उनकी समझ बहुत अच्छी है. ट्रेनिंग में वो अपने सीनियर्स के साथ हिस्सा ही नहीं लेते थे बल्कि सभी मामलों में अव्वल भी आना चाहते थे. वो टेलेंटेड हैं इसलिए अंडर-19 में खेल रहे हैं लेकिन इसके अलावा उनमें एक अलग खूबी ये है कि वो कभी खुद से संतुष्ट नहीं होते."

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और कमेंटेटर आकाश चोपड़ा भी उदय सहारन की तकनीक और लीडरशिप से प्रभावित हैं.

अंडर-19 वर्ल्ड कप शुरु होने से पहले उन्होंने जियो सिनेमा पर एक कार्यक्रम में कहा, "उदय के पिता ने उनके करियर में काफ़ी मदद की है और पंजाब क्रिकेट ने भी उन पर काफ़ी ध्यान दिया है. चौथे या पांचवें नंबर पर वो ज़बरदस्त बैटिंग करते हैं. अभी हाल ही में दक्षिण अफ्रीका, अफ़ग़ानिस्तान और भारत के बीच सिरीज़ में उन्होंने शानदार खेल दिखाया और एक शतक भी लगाया. वो धैर्य के साथ खेलते हैं और एक अच्छे स्ट्रोक प्लेयर हैं. वो कम्पलीट बैट्समैन हैं."

कप्तानी में अव्वल

अंडर-19 वर्ल्ड कप में उदय ने शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने अब तक एक शतक और 3 अर्धशतक लगाए हैं और टूर्नामेंट के सर्वाधिक रन स्कोरर हैं.

वो टिक कर बल्लेबाज़ी करते हैं, कंसिस्टेंट हैं, विकेटों के बीच तेज़ी से दौड़ते हैं और जोखिम मुक्त क्रिकेट खेलते हैं.

कुल मिलाकर सहारन 50 ओवरों के मैच में नंबर 4 की पोज़िशन के लिए आयडियल बल्लेबाज़ है.

इस भारतीय टीम में मुशिर और सचिन धास जैसे बल्लेबाज़ी की पारियां शायद ज़्यादा आकर्षक लगीं हों लेकिन भारतीय टीम में जीत की रीढ़ उदय सहारन ही है.

वो ना सिर्फ अपने रन बनाते है बल्कि साथी बल्लेबाज़ों को भी और लंबा खेलने के लिए प्रोत्साहित करते रहते हैं.

कप्तान के तौर पर मैदान में सहारन ने शायद ही कोई कदम ग़लत लिया है. उनकी फ़ील्ड प्लेसमेंट आक्रामक रही है गेंदबाज़ी में बदलाव भी साथ निर्णायक रहे हैं. अंडर-19 टूर्नामेंट में, ऐसी स्थिर नेतृत्व और कुशल कप्तानी दूसरे टीमों में देखने को नहीं मिली है.

सचिन के साथ जोड़ी

इस टूर्नामेंट में एक और खास बात रही है उदय और सचिन की ज़ोड़ी जिन्होंने दो बड़ी साझेदारियां निभाई हैं.

सचिन के साथ बैटिंग करना कैसा है इसके बारे में उदय ने आईसीसी टीवी को बताया, "बहुत अच्छा लग रहा है सचिन के साथ खेलकर क्योंकि उनकी सोच पॉज़िटिव रहती है. इससे मुझे भी मदद मिलती है."

"सचिन बाउंड्री मारने की फिराक में रहते हैं इससे मुझ पर भी दबाव कम हो जाता है. हम लगातार एक-दो रन लेकर छोर भी बदलते रहते हैं और कोशिश करते हैं कि मैच को आख़िरी ओवर तक लेकर जाएं. जब हम साथ खड़े होते हैं तो सोच यही होती है कि आख़िर तक खेलना है और मैच ख़त्म करके आना है."

सचिन भी मानते हैं कि उनकी पारी में उदय का बड़ा हाथ है क्योंकि वो दूसरों को दबाव में नहीं आने देते.

भारतीय अंडर-19 टीम ट्रॉफ़ी जीतने से सिर्फ एक कदम दूर है. अगर टीम ऐसा कर पाती है तो उदय सहारन मोहम्मद कैफ़, विराट कोहली, उन्मुक्त चंद, पृथ्वी शॉ और यश धुल जैसे खिलाड़ियों के मशहूर क्लब में आ जाएंगे जिनके नेतृत्व में भारत ने पहले ये टूर्नामेंट में जीत हासिल की है.

उदय जानते हैं कि सिर्फ एक मैच का फ़ासला है और वो अपने करियर की सबसे बड़ी चुनौती के लिए तैयार हैं.

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