You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
सरफ़राज़ की मेहनत रंग तो लाई, लेकिन क्या पिता का सपना होगा पूरा?
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
“भाई साहब, आप याद रखना, कुछ साल बाद आप मुझे फ़ोन करके बधाई देंगे कि वाकई जो मैंने आज कहा है वो एकदम सटीक भविष्यवाणी थी.”
नौशाद ख़ान ने ये शब्द 2011 में वन-डे वर्ल्ड कप के दौरान वानखेड़े स्टेडियम के ठीक बाहर मुझसे कही थी.
13 साल के सरफ़राज़ की प्रतिभा और काबिलियत को लेकर उनके पिता और कोच नौशाद को तनिक भी संदेह नहीं था और उन्हें पूरा यक़ीन था कि उनका बेटा इंडिया के लिए ज़रूर खेलेगा.
ये एक निजी तपस्या और हसरत भी थी क्योंकि नौशाद ख़ुद मुल्क के लिए नहीं खेल पाए.
कहते हैं इंतज़ार का फल मीठा होता है और शायद नौशाद से बेहतर इस कहावत को भला और कौन सच मानेगा?
लंबे इंतज़ार के बाद आख़िरकार उनके बेटे सरफ़राज़ को टेस्ट टीम में जगह मिल गई.
सोने पे सुहागा वाली बात ये भी है कि उनके दूसरे बेटे मुशीर ख़ान भी अंडर 19 वर्ल्ड कप में न सिर्फ़ खेल रहे हैं बल्कि तहलका भी मचा रहे हैं.
अगर सरफ़राज़ को 2 फरवरी से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौक़ा मिलता है, तो नौशाद ख़ान की एक दशक पहले की गई भविष्यवाणी वाकई में सच साबित हो जाएगी.
मज़बूत थी दावेदारी
सरफ़राज़ के खेलने की संभावना के बारे में सवाल पूछने पर टीम इंडिया के पूर्व मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने कहा, “देखिए, सरफ़राज़ पिछले कुछ सालों से लगातार चयन समिति के सामने अपना दावा पेश कर रहे थे."
"उन्होंने हर मौक़े पर रन बनाए हैं लेकिन भारतीय मिडिल ऑर्डर में न तो जगह आसानी से न ख़ाली होती है और न ही मौक़े समय पर मिल पाते हैं. मुझे लगता है कि सरफ़राज़ को टीम मैनेजमेंट ड्रेसिंग रूम में अभ्यस्त होने का मौक़ा देगी और फिर उन्हें आगे प्लेइंग इलेवन में भी जगह मिलेगी.”
सरफ़राज़ पिछले साल वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप और उससे पहले ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट सिरीज़ से पहले भी टीम में आने के बेहद क़रीब पहुँचे थे. लेकिन चयनकर्ताओं ने टी20 स्पेशिलस्ट सूर्यकुमार यादव को तरज़ीह दी.
हाल ही में दक्षिण अफ़्रीकी दौरे पर रितुराज गायकवाड़ चोटिल होकर वापस लौटे तो सरफ़राज़ के नाम पर एक बार फ़िर चर्चा हुई लेकिन मौक़ा अभिमन्यु ईश्वरन को मिला.
तमाम निराशा के बावजूद सरफ़राज़ ने टेस्ट क्रिकेट खेलने की उम्मीदों को मरने नहीं दिया.
उन्हें भरोसा था कि आज नहीं तो कल वे चयनकर्ताओं की सोच को बदलने में कामयाब होंगे ही. और हुए भी. लेकिन, अब भी एक अंतिम चुनौती बाक़ी है.
क्या टेस्ट खेलने का मौक़ा मिलेगा?
क्या कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा इस आक्रामक बल्लेबाज़ को इंग्लैंड जैसी टीम के ख़िलाफ़ मौक़ा देने का साहस जुटा पाएँगे?
टीम इंडिया के एक और पूर्व खिलाड़ी इरफ़ान पठान ने भी हाल के मौक़े पर सोशल मीडिया में सरफ़राज़ का नाम लिए बग़ैर इस बात की चर्चा की है कि आख़िरकार मुंबई के इस खिलाड़ी को टीम में जगह क्यों नहीं मिल रही थी.
हालाँकि, पठान ने भी माना कि फ़िलहाल टीम मैनेजमेंट शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर के अनुभव को ही तरजीह दे.
पठान का मानना है कि निजी तौर पर वो भी नहीं चाहेंगे कि फ़िलहाल विराट कोहली, केएल राहुल और रवींद्र जडेजा जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की ग़ैर-मौजूदगी में एक और युवा खिलाड़ी को इतनी मुश्किल चुनौती के लिए धकेल दिया जाए.
26 साल की उम्र में अब सरफ़राज़ के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए कुछ और वक़्त का इंतज़ार सहन न हो.
सिर्फ़ 16 साल की उम्र में श्रेयस अय्यर और संजू सैमसन के साथ अंडर 19 वर्ल्ड कप खेलने वाले इस खिलाड़ी ने इन दोनों से भी बेहतर खेल दिखाया था.
इतना ही नहीं इसके बाद 2016 के अंडर-19 वर्ल्ड कप में वो ऋषभ पंत और ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों के साथ मैदान पर थे लेकिन उन्होंने शानदार खेल दिखाया.
करियर में उतार चढ़ाव
भरपूर प्रतिभा रहने के बावजूद सरफ़राज़ ने अपने करियर में हर चढ़ाव के साथ-साथ एक उतार भी दिखा.
वे अनुशासनहीनता के चलते कभी विवादों में आए तो कभी अपनी फ़िटनेस को लेकर सुर्ख़ियों में आए.
लेकिन, इस दौरान वो रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए 50 लाख का करार लेने में न सिर्फ़ कामयाब हुए बल्कि विराट कोहली जैसे दिग्गज को भी एक मैच के दौरान नतमस्तक कराया था.
क़रीब चार साल पहले मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफ़ी में तिहरा शतक लगाते हुए उन्होंने सुनील गावसकर और रोहित शर्मा के जैसे एलीट खिलाड़ियों के एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल हुए.
इस क्लब में सिर्फ़ 7 खिलाड़ी ही शामिल हैं.
चलते-चलते एक बात और कहना चाहूँगा. जब नौशाद ख़ान ने अपने बेटे के भविष्य को लेकर भरोसा जताया था तो मैंने इसकी पुष्टि मुंबई के ही एक स्थानीय पत्रकार से उसी वक़्त की थी.
उस वरिष्ठ पत्रकार ने हमें बताया था कि 2009 में हैरिस शील्ड जैसे मशहूर स्कूली टूर्नामेंट में सरफ़राज़ ने सचिन तेंदुलकर के 346 रनों की पारी का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 439 रन बनाए थे.
मुंबई में तभी से ही बहुत लोगों ने सरफ़राज़ को अगला तेंदुलकर जैसे उपनाम देने शुरू कर दिए थे.
लेकिन, मुंबई के इस पत्रकार ने बताया कि अगला तेंदुलकर तो शायद कोई और नहीं हो सकता है लेकिन इतना तय है कि इस लड़के में इतना दम तो है कि जो काम इसके पिता न कर पाए वो ये कर सके. मतलब इंडिया के लिए खेलना.
उम्मीद की जा सकती है कि शुक्रवार को सरफ़राज़ और उनके पिता के लिए दशकों का इंतज़ार ख़त्म होगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)