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भारत बनाम इंग्लैंड: क्या जडेजा की जगह ले पाएंगे सौरभ कुमार?
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय क्रिकेट में इन दिनों छोटे-छोटे गांवों और कस्बों से निकल कर खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में अपना स्थान बना रहे हैं.
मुकेश कुमार बिहार में गोपालगंज के एक छोटे से गांव से हैं तो वहीं मोहम्मद शमी अमरोहा के सहसपुर अलीनगर गांव से आते हैं.
इसी लिस्ट में एक और खिलाड़ी तेज़ी से पायदान चढ़ रहा है और वो हैं वो हैं उत्तर प्रदेश के सौरभ कुमार.
हालांकि सौरभ कुमार को 2022 की श्रीलंका सिरीज़ में भी टीम में रखा गया था लेकिन उन्हें कोई मैच खेलने को नहीं मिला था.
इस बार उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ़ विशाखापत्नम में खेले जाने वाले दूसरे टेस्ट मैच के लिए चुना गया है लेकिन अंतिम ग्यारह में चुना जाना अभी भी काफी मुश्किल दिखता है.
इस सबके बावजूद रोहित शर्मा, विराट कोहली और अश्विन जैसे खिलाड़ियो के साथ कंधे मिलाना इस विनम्र खिलाड़ी के लिए किसी सुनहरा सपना से कम नहीं है.
ये चीज़ भी उनका आत्मविश्वास बढ़ाती है कि टीम में उनकी जगह रवींद्र जडेजा जैसे खिलाड़ी को चोट लगने से बनी है – यानी एक तरह से वो जडेजा के रिप्लेसमेंट कहे जा सकते हैं.
कैसी की क्रिकेट की शुरुआत
बागपत में बुढ़ाना क्षेत्र में एक छोटा सा गांव है बिटावदा जहां सौरभ कुमार पले-बढ़े. उनके घर वाले उनसे सरकारी नौकरी की आस लगाए थे लेकिन सौरभ को खेल में बचपन से रूचि थी.
बागपत में क्रिकेट की कोचिंग कम थी इसलिए उन्हें कोचिंग के लिए दिल्ली आना पड़ता था. समाचार एजेंसी पीटीआई को उन्होंने एक इंटर्व्यू में कहा कि वो रोज़ ट्रेन घंटों इंतज़ार के बाद ट्रेन का सफर करके दिल्ली कोचिंग के लिए आते थे.
यहीं पर बाद में उन्हें बिशन सिंह बेदी के गर्मियों में लगने वाले समर कैंप में ट्रेनिंग का चांस मिला जो उनके लिए बड़ा अवसर साबित हुआ.
सौरभ कहते हैं कि बेदी ने उनके बोलिंग एक्शन में कोई बदलाव नहीं किया लेकिन उनके ग्रिप को और सुधारा जिससे उनकी गेंदबाज़ी और भी प्रभावकारी हो गई.
वो अपने स्तर में लगातार बेहतरी करते रहे और खेल के द्वारा ही उन्हें सरकारी नौकरी भी मिल गई जब स्पोर्ट्स कोटे में उनका चयन भारतीय एयरफोर्स के लिए हो गया.
वो 2014 में सर्विसेज़ के लिए रणजी और बाकी घरेलू क्रिकेट खेलने लगे. लेकिन सौरभ को भरोसा था कि वो भारतीय टीम के लिए भी खेल सकते हैं और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने एयरफोर्स की सरकारी नौकरी छोड़ी.
वे साल 2015 से उत्तर प्रदेश की तरफ़ से क्रिकेट खेलने लगे. लेकिन स्टार खिलाड़ियों से सुसज्जित भारतीय टीम में जगह बनान कोई आसान काम नहीं था. सौरभ साल दर साल मेहनत करते और उम्मीद लगाए रहते कि कभी ना कभी चयनकर्ता उन्हें ज़रूर याद करेंगे.
कैसा रहा है करियर
बाएं हाथ के स्पिनर सौरभ कुमार एक ऑलराउंडर कहलाना पसंद करते हैं. हालांकि अपने स्पिन के जाल में विपक्षी बल्लेबाज़ों को आउट करना उनकी पहली ज़िम्मेदारी है, बल्ले से भी वो अच्छा योगदान देने के क़ाबिल हैं.
उनके रिकॉर्ड्स भी बताते हैं कि सौरभ बहुमुखी प्रतिभा के धनी क्रिकेटर हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 68 मैचों में उन्होंने 27 की औसत से 2061 रन बनाए हैं जिनमें 2 शतक और 12 अर्धशतक शामिल हैं.
वहीं गेंदबाज़ी करते हुए उन्होंने 24.41 की औसत से 290 विकेट लिए हैं.
उनके बारे में उत्तर प्रदेश के कोच सुनील जोशी बताते हैं कि कुमार पर कोई भी टीम भरोसा कर सकती है.
समाचार एजेंसी पीटीआई सुनील जोशी ने बताया, “सौरभ एक शानदार गेंदबाज हैं जो खेल को अच्छी तरह पढ़ सकते हैं. उन्हें अपना लाइन और लेंथ को कब बदलना है अच्छी तरह मालूम है. भारतीय कंडीशंस में गेंदबाज़ी का उन्हें बढ़िया अनुभव है और उन्होंने चेतेश्वर पुजारा और मयंक अग्रवाल जैसे तगड़े बल्लेबाज़ों को आउट करने का भी अनुभव है.”
नेट बॉलर से बनी पहचान
हालांकि 30 साल के सौरभ भारतीय क्रिकेट के स्तर से युवा नहीं कहे जा सकते.
इसी वजह से टीम में उनकी जगह और भी बड़ी बात हो जाती है क्योंकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड और चयनकर्ता अकसर युवाओं को तरजीह देते हैं.
चेतेश्वर पुजारा एक सटीक उदाहरण है जिन्हें टीम में शायद इसलिए नहीं लिया जा रहा क्योंकि उनकी उम्र तीस के पार हो चुकी है.
इंग्लैंड के खिलाफ़ पहले मैच के चौथे दिन यही सवाल अनिल कुंबले ने भी उठाया और हैरानी जताई की शुभमन गिल जैसे युवा खिलाड़ी को तो कई मौके मिलते हैं लेकिन पुजारा जैसा खिलाड़ी हमेशा हाशिए पर खड़ा होता हैट
सौरभ कुमार को टीम इंडिया में खेलने का भरोसा साल 2021 में और बढ़ गया जब उन्हें इंगलैंड के खिलाफ सिरीज़ में नेट बॉलर के तौर पर टीम के साथ रखा गया.
उस सिरीज़ के नेट्स में सौरभ कुमार ने विराट कोहली, रोहित शर्मा और पुजारा जैसे बल्लेबाज़ों को गेंद डाली और अपनी फ्लाइट और टर्न से सभी को प्रभावित किया.
एक अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि घरेलू क्रिकेट में तो उन्हें कोहली और रोहित जैसे खिलाड़ियों को गेंद डालने का मौका नहीं मिलता लेकिन नेट्स पर उनके खिलाफ़ गेंदबाज़ी करके उन्होंने बहुत कुछ सीखा है.
यादगार प्रदर्शन
पिछले 10 साल से हर साल सौरभ कुमार घरेलू क्रिकेट में अपनी छाप छोड़े जा रहे हैं.
उनके कंसिस्टेंट प्रदर्शन को देखते हुए पिछले कुछ साल से वो इंडिया ए की टीम का एक अहम हिस्सा बन गए हैं.
इंडिया ए की तरफ से उन्होंने कुछ यादगार प्रदर्शन किया है जो सेलेकटर्स की निगाहों से भी छिपा नहीं है.
पिछले साल साउथ अफ्रीका ए के खिलाफ पहले अनाधिकारिक टेस्ट मैच में उन्होंने चार सफलताएं अर्जित की जो सभी टॉप ऑर्डर बैटर्स के विकेट थे.
आठवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने 22 रनों का महत्वपूर्ण योगदान भी दिया.
वहीं कुछ दिनों पहले इंग्लैंड लॉयंस के खिलाफ टेस्ट मैच में उन्होंने 77 रन बनाए जिसमें 16 जबरदस्त चौके शामिल रहे.
इसके अलावा उन्होंने 5 बहुमुल्य विकेट भी लिए और अपनी टीम को जीत दिलाई. ये 22वीं बार था जब कुमार ने पारी में 5 या उसे अधिक विकेट लिए.
इन विकेटों में इंग्लैंड के कप्तान और इंटरनेशनल खिलाड़ी ऑली रॉबिंसन का विकेट भी शामिल था.
उनके इसी प्रदर्शन को देखते हुए सौरभ कुमार को अब इंग्लैंड के विरुद्ध दूसरे मैच के स्कवॉड में शामिल किया गया है.
ध्यान देने वाली बात ये है कि उन्हें चोटिल जडेजा की जगह टीम में चुना गया है इसका मतलब है कि चयनकर्ता उनकी बॉलिंग और बैटिंग दोनों से प्रभावित हुए है.
पिछले चार साल से जडेजा अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे बेहतरीन ऑलराउंडर्स में एख गिने जाते हैं. क सं कम टेस्ट मैच में उनका ऑलराउंड प्रदर्शन किसी से कम नहीं है.
ऐसे टॉप खिलाड़ी की जगह टीम में आना सौरभ कुमार के लिए बड़ी बात है.
इंग्लैंड के विरुद्ध दूसरे मैच में उनके, कुलदीप यादव और वॉशिंगटन सुंदर के बीच सीधी टक्कर है कि तीनों में से कौन अंतिम ग्यारह में होगा.
हालांकि सौरभ का चांस कम है लेकिन अगर भारचीय मैनेजमेंट बैटिंग को भी ध्यान में रखती है तो वो कुलदीप यादव को मात भी दे सकते हैं.
टीम में किसे भी चुना जाए लेकिन सौरभ कुमार ने ये जता दिया है कि किसी भी लक्ष्य के पीछे जी-जान से लग जाया जाए को वो हासिल हो कर ही रहता है.
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