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पोंटिंग क्यों मानते हैं रोहित से बेहतर लीडर नहीं हो सकता?
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग ने मौजूदा भारतीय कप्तान रोहित शर्मा की जमकर तारीफ़ की है लेकिन उस बात का ज़िक्र लेख में आगे और उससे पहले मैं पाठकों को 2015 वर्ल्ड कप की तरफ़ ले जाना चाहता हूं जहां पर पोंटिंग से उनके घर पर मेलबर्न में इस लेखक की मुलाक़ात होती है.
दरअसल, पोंटिंग से उस वर्ल्ड कप के दौरान कई मौके पर इंटरव्यू करने का मौका मिला क्योंकि उनका एक निजी चैनल के साथ करार था जिसके साथ ये लेखक उस वक्त उस संस्था से जुड़े थे.
बांग्लादेश वाले क्वार्टर फ़ाइनल से ठीक पहले पोंटिंग ने अपने इंटरव्यू में न सिर्फ़ रोहित के शतक बल्कि एक बड़े शतक की भविष्यवाणी कर दी थी.
उन्हें अपनी भविष्याणी पर इतना भरोसा था कि वो इस लेखक के साथ शर्त लगाने तक को तैयार थे!
समझदारी दिखाते हुए इस लेखक ने पोंटिंग के साथ शर्त तो नहीं लगाई लेकिन उस दिन ये यकीन हो गया कि आखिर क्यों 2013 में बड़ी सहजता से पोंटिंग ने मुंबई इंडियंस की कप्तानी छोड़ते हुए रोहित शर्मा को भविष्य के लीडर के तौर पर तैयार करने में एक अहम फ़ैसला लिया था.
'रोहित से बेहतर शायद कोई और लीडर नहीं हो सकता'
पोंटिंग और रोहित दोनों एक दूसरे का बेहद सम्मान करते हैं और इत्तेफाक से दोनों एक दूसरे के पुल शॉट के सबसे बड़े फैन भी हैं.
हाल ही में इस लेखक ने जब भारतीय कप्तान का इंटरव्यू किया तो इस बात का उन्होंने इसका खुलासा किया था. पोंटिंग 2015 में ही ये बात मुझे बता चुके थे.
लेकिन, आज बात 2015 वाले रोहित शर्मा की नहीं बल्कि 2023 वाले कप्तान-बल्लेबाज़ रोहित शर्मा की हो रही है जिन्होंने अपने आक्रामक अंदाज़ और लाजवाब कप्तानी से वर्ल्ड कप 2023 के शुरुआती तीन मैचों में टीम इंडिया की शानदार जीत में अहम किरदार निभाया है.
आईसीसी के साथ बातचीत में पोंटिंग ने ये कहा कि इस वर्ल्ड कप के दौरान भारत पर उम्मीदों का दबाव काफी होगा और इस दबाव को झेलने के लिए रोहित से बेहतर शायद कोई और लीडर नहीं हो सकता था क्योंकि वो बेहद इत्मिनान और सहजता से जीने और क्रिकेट खेलने वाले शख़्स हैं.
रोहित की बैटिंग पहले से अधिक आक्रामक
रोहित की बल्लेबाज़ी का अंदाज़ बेहद सौम्य और सहज है लेकिन उनके स्ट्राइक रेट को देखें तो आपकी उनकी बल्लेबाज़ी में आक्रामकता नज़र आती है. अब तक तीन मैचों में रोहित ने 72 से ज़्यादा की औसत से 217 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट क़रीब 142 का है. लेकिन, ये सब अचानक वर्ल्ड कप में नहीं हुआ है.
वो किस कदर ख़तरनाक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी कर रहे हैं इस बात का गवाह 2023 में 116.51 के स्ट्राइक रेट से उनकी बल्लेबाज़ी में देखने को मिला है.
रोहित 2019 से 2021 तक 95 से कम के स्ट्राइक रेट से खेले लेकिन 2022 में ये छलांग लगाते हुए 115 के क़रीब तक पहुंच गया.
रोहित को इस छलांग की कीमत निजी तौर पर बहुत बड़ा स्कोर न करने से चुकानी पड़ी लेकिन कप्तान की तारीफ़ करनी होगी कि उन्होंने टीम को तेज़-तर्रार खेल के लिए प्रेरित करने के लिए ख़ुद के निजी आंकड़ों को तवज्जो नहीं दी.
रोहित का ये अंदाज़ सिर्फ वनडे नहीं बल्कि टी20 में भी ऐसा ही रहा.
2022 में टी20 वर्ल्ड कप के दौरान सेमीफाइनल में इंग्लैंड से हारकर टीम इंडिया बाहर हो गई लेकिन उस टूर्नामेंट में भी रोहित ओपनर के तौर पर आक्रामक रुख़ अपनाते रहे.
मौजूदा दौर के बेस्ट ओपनर
पिछले कुछ सालों में टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की आलोचना इसलिए होती थी कि रोहित, विराट और शिखर धवन या फिर केएल राहुल की बल्लेबाज़ी का तरीक़ा कमोबेश एक जैसा ही रहता था जो शुरुआत में संभलकर खेलते और बाद में बड़ी पारी खेलते हुए स्ट्राइक रेट को तेज़ करने की कोशिश करते.
हां, जब भी इस तिकड़ी में से दो बल्लेबाज़ बड़ी पारी नहीं खेल पाता तो टीम को आखिर में धीमी शुरुआत का नुक़सान ही होता था.
क़रीब दो साल पहले जब रोहित को कप्तानी की ज़िम्मेदारी मिली तो उन्होंने इस समस्या को नज़रअंदाज़ करने की बजाए ख़ुद के तरीक़े में बदलाव लाते हुए टीम को अलग दिशा देने की कोशिश की.
यकीन मानिए ऐसा करना बिल्कुल आसान नहीं होता है.
क्रिकेट के खेल में बहुत कम मौके पर कोई कप्तान आक्रामक अंदाज़ के साथ टीम को लीड करते हुए दिखेंगे. 2015 में ब्रैंडन मैकुलम न्यूज़ीलैंड के लिए अपवाद थे.
रोहित शर्मा का टेस्ट मैच में बल्लेबाज़ी करने का अंदाज़ भी पिछले कुछ सालों में बिल्कुल बदल गया है.
अब वो तकनीकी तौर पर शरीर के नज़दीक से गेंदों को इतनी सफ़ाई के साथ खेलते हैं कि उन्हें मौजूदा समय में बेस्ट ओपनर माना जाता है.
पिछले कुछ सालों में ओपनर के तौर उनके टेस्ट आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं.
कोच द्रविड़ से तालमेल
रोहित की प्रतिभा पर भारतीय क्रिकेट में कभी भी किसी को शक नहीं रहा और यही वजह है कि कई मौके पर नाकाम होने के बावजूद भी उन्हें बाकी खिलाड़ियों के मुक़ाबले ज़्यादा अवसर इसलिए मिले क्योंकि हर किसी को ये यकीन था कि ऐसा हुनरमंद खिलाड़ी आज नहीं तो कल टीम इंडिया को बेहतरीन सेवा देगा ही.
इत्तेफाक से जब से रोहित शर्मा ने टीम इंडिया की कप्तानी संभाली है तब से हर सिरीज़ में इस लेखक ने उनके और कोच राहुल द्रविड़ के आपसी तालमेल को बेहद क़रीब से देखा है. ख़ासकर, जुलाई के महीने में वेस्टइंडीज़ के दौरे पर जिस तरह से कप्तान और कोच वर्ल्ड कप के लिए रणनीति बना रहे थे और उन्हें अमलीजामा पहनाने की कोशिश कर रहे थे तो उन्हें उन आलोचनाओं की परवाह नहीं थी जो भारत में हो रही थी.
रोहित ने औपचारिक तौर पर भी ये माना है और कई मौके पर अनौपचारिक तरीक़े से भी कहा है कि आपके आंकड़े चाहे कितने भी तगड़े क्यों न हों, अपनी बल्लेबाज़ी के दम पर वर्ल्ड कप में अपनी टीम की जीत दिलाने की बात ही कुछ और है.
कप्तान और बल्लेबाज़ के तौर पर रोहित ने आग़ाज़ तो शानदार किया और मुमकिन है कि इसका अंजाम भी 19 नवंबर को उतना ही शानदार होगा.
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