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भारत बनाम इंग्लैंड: जसप्रीत बुमराह के तूफ़ान में उड़े अंग्रेज़, टीम इंडिया ने की सिरीज़ में बराबरी
- Author, विमल कुमार
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
करीब डेढ़ महीने पहले साउथ अफ्रीका के प्रिटोरिया शहर में जसप्रीत बुमराह अपने कप्तान रोहित शर्मा के साथ सोफे पर बैठकर टीम बस का इंतज़ार कर रहे थे.
दरअसल, टेस्ट सीरीज़ से पहले तीन दिवसीय अभ्यास मैच के लिए टीम को मैदान में जाना था लेकिन बारिश की वजह से ख़बर आयी कि मैच लंच के बाद शुरु होगा तो टीम होटल, जो कि पहले फ्लोर पर था, वहां जाने की बजाय बुमराह सोफे पर ही बैठकर कप्तान के साथ बातचीत करने लगे.
ये लेखक भी वहां मौजूद थे और टकटकी लगाकर इन दोनों दिग्गजों को देख रहे थे. तभी रोहित की नज़र मुझ पर पड़ी. उन्होंने चिर परिचित मज़ाकिया लहज़े में पूछा, "आप बुमराह का इंटरव्यू करने के इंतज़ार में हैं क्या?"
मैंने कहा, "अवश्य! अगर आप कह दें क्योंकि वो कप्तान की बात टालेगा नहीं."
बुमराह ये सुनकर मुस्कराते हैं लेकिन रोहित कहते हैं, "यार मैं इसको गेंद थमाने के बाद कुछ नहीं कहता हूं कि क्या करना है तो भला इंटरव्यू देने के लिए कैसे कह सकता हूं!"
ये सुनकर तीनों ज़ोर से हंसने लगे.
भारत की जीत के हीरो
बहरहाल, उस दिन अनौपचारिक तौर पर बुमराह के साथ करीब एक घंटे बातचीत करने का मौका मिला और क्रिकेट के प्रति उनके समर्पण की बातों को सुनकर ये महसूस हुआ कि यूं ही इत्तेफाक से ऐसा जीनियस भारतीय क्रिकेट में नहीं आया है.
अगर अब भी किसी को बुमराह की टेस्ट क्रिकेट या फिर भारतीय क्रिकेट को लेकर उनकी निष्ठा को लेकर शक हो (ऐसा इसलिए क्योंकि सोशल मीडिया में अक्सर उनकी फिटनेस और आईपीएल को लेकर ताने कसे जाते रहें हैं) तो उन्हें हर समय विशाखापत्तनम टेस्ट मैच का खेल याद करना चाहिए.
ना सिर्फ पहली पारी में बुमराह ने बेहद मुश्किल हालात में छह विकेट लिए बल्कि दूसरी पारी में निर्णायक मौकों पर तीन विकेट लिये और जिससे भारत की जीत निश्चित हुई.
इंग्लैंड में भी टेस्ट मैंच में नौ विकेट और भारत में भी एक टेस्ट में नौ विकेट झटकने वाले वो देश के पहले तेज़ गेंदबाज़ हैं.
भारतीय पिचों पर टेस्ट मैच में जहां तेज़ गेंदबाज़ों को अब भी गिनती के ओवर सिर्फ इसलिए थमाये जाते हैं ताकि स्पिनर्स को जल्द से जल्द हमला करने का मौका मिले.
वैसे में गुजरात के इस तेज़ गेंदबाज़ का मैन ऑफ द मैच होना अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है.
150 विकेट का रिकॉर्ड
इसी मैच के दौरान बुमराह भारत की तरफ से एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर सबसे तेज़ी से 150 विकेट हासिल करने वाले खिलाड़ी बने.
एशिया में सिर्फ वकार यूनिस जैसे दिग्गज ही उनसे इस सूची में आगे हैं.
पहली पारी में ऑली पोप को बुमराह ने जिस हैरतअंगेज तरीके से अपनी स्विंगिग यार्कर से पूरी तरह से परास्त किया था उससे ना सिर्फ खेल प्रेमियों को बल्कि खुद पाकिस्तानी दिग्गज को भी अपने पराक्रम के दौर की यादें ताज़ा हो गयी.
बहरहाल, शून्य-एक से सीरीज़ में पिछड़ने वाली टीम इंडिया के लिए दूसरे टेस्ट में मैच 106 रनों के बड़े अंतर से जीत कई मायनों में यादगार रखती है.
जीत का अंत भले ही सुनने में इतना बड़ा अभी लग रहा है लेकिन मैच के चौथे दिन इंग्लैंड ने जिस अंदाज़ में शुरुआत की उससे ऐसा लगा कि उनके तेज़ गेंदबाज़ जेम्स एंडरसन की बातें( अगर 600 का भी लक्ष्य रहेगा तो हम जीत के लिए जायेंगे) बिलकुल सही थी.
बहुत ख़ास है ये जीत
विराट कोहली, रविंद्र जडेजा, के एल राहुल, मोहम्मद शमी और यहां तक मोहम्मद सिराज जैसे नियमित खिलाड़ियों के बगैर उतरी रोहित शर्मा की टीम के लिए बेज़बॉल के तूफान को रोकना कोई आसान चुनौती नहीं थी.
ब्रैंडन मैक्कलम जब से इंग्लैंड के कोच बने हैं तब से लक्ष्य का पीछा करते हुए 11 मैचों में उनकी टीम की ये सिर्फ तीसरी हार है.
हार के बावजूद इंग्लैंड ने चौथी पारी में 292 रन बनाये जो कि आखिरी बार भारतीय ज़मीं पर लक्ष्य का पीछा करते हुए टेस्ट मैच जीतने वाली कैरेबियाई टीम के 276 रनों से बड़ा स्कोर है.
इस मैच के दौरान इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने इंग्लैंड की अख़बार 'द टाइम्स' में अपने एक कॉलम में लिखा, "भारतीय समर्थकों की भावनाओं को देखकर ऐसा लगता है कि वो हर हाल में चाहते हैं कि 'बेज़बॉल का दर्शन' भारत में नाकाम हो."
चौथे दिन ही मिल गई जीत
हैदराबाद में इंग्लैंड ने पहले दो दिन पिछड़ने के बाद नाटकीय अंदाज़ में वापसी करते हुए मैच 28 रनों से जीता था लेकिन दूसरे टेस्ट में भी पहले दो दिनों कमोबेश उसी अंदाज़ में पिछड़ने के बाद उन्होंने तीसरे दिन वापसी को ज़ोरदार कोशिश की. लेकिन, पहले रविचंद्रन अश्विन और उसके बाद बुमराह ने चौथे दिन मैच को तीसरे सत्र भी जाने नहीं दिया और सिरीज़ में मेज़बान की 1-1 से बराबरी करा दी.
लेकिन, इतना तय है कि बचे हुए तीन टेस्ट मैचों में रोहित शर्मा और उनके साथियों के लिए बेज़बॉल की चुनौती उन्हें तनिक भी सहज होने का मौका नहीं देगी.
चलते-चलते बुमराह से मेरा पूछा गया एक सवाल, “आप वाकई में बात क्यों नहीं करना चाहते हैं मीडिया से?"
वो कहते हैं, "भाई साहब, क्या बात करुं, कहने को नया क्या है. बस खेलते जाना है और आप लोगों के पास लिखने-कहने को काफी कुछ मिल ही जाता है.”
इंग्लैंड के ख़िलाफ़ बुमराह ने अपने शानदार खेल से ये दिखाया है कि आने वाले कई सालों तक उनके इस यादगार खेल के बारे में काफी कुछ कहा और लिखा जायेगा.
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