हॉल में मौजूद थे सांसद, दिल्ली पुलिस ने बाहर से दरवाज़ा किया बंद- प्रेस रिव्यू

सुरजीत भवन में कार्यक्रम

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द टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जी-20 पर चर्चा के लिए आयोजित विपक्ष के एक कार्यक्रम को ज़बरदस्ती रोक दिया.

वी-20 नाम के इस सम्मेलन में विपक्ष के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हो रहे थे. पुलिस ने इस कार्यक्रम के हॉल के दरवाज़े बंद कर दिए और लोगों को जाने से रोक दिया.

ये कार्यक्रम सीपीएम की बिल्डिंग सुरजीत भवन के हॉल में हुआ. पुलिस के दरवाज़े बंद करने और लोगों को भीतर जाने से रोकने के बावजूद, जो लोग पहले से भीतर पहुंच गए थे उनकी मौजूदगी में ये कार्यक्रम हुआ.

इस तीन दिवसीय सम्मेलन का शनिवार को दूसरा दिन था.

द टेलीग्राफ़ ने सम्मेलन की आयोजकों में से एक प्रियदर्शिनी के हवाले से बताया है, “सुबह साढ़े नौ बजे कुछ पुलिसकर्मी आये और पूछने लगे कि क्या हो रहा है. एक अधिकारी ने सीपीएम पोलित ब्यूरौ की सदस्य बृंदा करात की तस्वीर देखी, और देखा कि हमने हॉल के नाम रोहित वेमुला, गौरी लंकेश और अन्य लोगों के नाम पर रखे हैं."

"उस पुलिस अधिकारी ने कहा कि इन सब लोगों के नाम यहां पर क्यों हैं. उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम जी-20 के ख़िलाफ़ है. 11.30 बजे के क़रीब हॉल के दरवाज़ों को बाहर से बंद कर दिया गया और किसी को भीतर नहीं जाने दिया गया.”

बाहर से बंद दरवाज़ा

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वहीं समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से लिखा है, “डीडीयू मार्ग एक संवेदनशील इलाक़ा है और जी-20 के मद्देनज़र यहां बिना पूर्व अनुमति के लोगों के इकट्ठा होने की अनुमति नहीं है. इसलिए आयोजकों से टेंट हटाने और बिना अनुमति के कार्यक्रम ना जारी रखने के लिए कहा गया.”

जिस समय पुलिस कार्यक्रम में पहुंची कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश और जेडीयू के सांसद अनील हेगड़े हॉल में ही मौजूद थे.

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को भी कार्यक्रम में शामिल होना था और वो किसी तरह पुलिस को चकमा देकर भीतर पहुंचीं.

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने ट्विटर पर लिखा, “वी, द पीपुल (हम भारत के लोग) का प्रतिनिधित्व करने वाले एक्टिविस्टों द्वारा आयोजित वी20 की मीटिंग में भाग लेने से लोगों को दिल्ली पुलिस रोक रही है. यह बेहद आश्चर्यजनक है."

"सीपीएम से जुड़ी एक बिल्डिंग में यह बैठक पूरी तरह से शांतिपूर्ण है. सड़क पर कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है. दिल्ली पुलिस की कार्रवाई शुरू होने से पहले मैं सुबह 10:30 में प्रवेश करने में कामयाब रहा लेकिन अब बाहर निकलने में कठिनाई हो रही थी. यह न्यू इंडिया डेमोक्रेसी है."

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कमल पेश करते जीतेंद्र सिंह

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108 पत्तियों का कमल, नाम रखा गया ‘नमो 108’

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केंद्रीय विज्ञान और टेक्नोलॉजी मंत्री जीतेंद्र सिंह ने कमल के फूल की एक नई प्रजाति का अनावरण करते हुए इसका नाम ‘नमो 108’ रखा है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने इस कमल के फूल को पेश किया.

इस दुर्लभ कमल में 108 पत्तियां हैं और इसे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने मिलकर विकसित किया है.

जीतेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लिखा, “कमल भारत का राष्ट्रीय पुष्प है और हमारे लिए विश्वास का प्रतीक भी है. नमो-108, अपनी तरह का अनूठा है जिसके जीनोम और विशेषताओं को पूरी तरह से सीक्वेंस किया गया है. इसे लखनऊ के नेशनल बोटैनिकल इंस्टीट्यूट ने विकसित किया है.”

इस कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कमल के फ़ाइबर से बने कपड़े और ख़ुशबू ‘फ्रोटस’ भी पेश की.

कमल की इस नई प्रजाति का नाम नमो-108 रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आंतरिक सुंदरता और अथक उत्साह के लिए एक भव्य उपहार है. ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दसवें साल में आया है.”

भारत में कारखाना

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नये निवेश में यूपी और गुजरात शीर्ष 5 राज्यों में, केरल और असम सबसे नीचे

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान बैंक-सहायता प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से आधे सिर्फ़ पांच राज्यों में हुए हैं.

इससे भारत में औद्योगीकरण के असमान रूप से होने के संकेत भी मिलते हैं.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल निवेश योजनाओं में 79.50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है और इनमें 3,52,624 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड पूंजी परिव्यय हुआ है जो 2014-15 के बाद से शीर्ष स्तर पर है. ये सब बैंकिंग प्रणाली में ब्याज दरों में वृद्धि के बावजूद हुआ है.

अख़बार ने ये आंकड़े आरबीआई के हवाले से दिए हैं.

साल 2022-23 के दौरान 547 प्रोजैक्ट को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से सहायता मिली और कुल 2,66,547 करोड़ रुपये इन प्रोजेक्ट में निवेश हुए. इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 में 401 प्रोजेक्ट में 1,41,976 करोड़ रुपये निवेश हुए थे. आरबीआई की टीम ने जो शोध किया है उसके मुताबिक़ एक साल में इसमें 87.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ जिन पांच राज्यों में सर्वाधिक निवेश हुआ है वो हैं- उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र और कर्नाटक. इन पांचों राज्यों में कुल 57.2 प्रतिशत निवेश हुआ है.

बैंक-सहायता प्राप्त प्रोजेक्ट के मामले में केरल, गोवा और असम सबसे नीचे आते हैं. केरल को सिर्फ़ 0.9 प्रतिशत यानी 2399 करोड़ रुपये के निवेश प्लान मिले, जबकि असम को 0.7 प्रतिशत और गोवा को 0.8 प्रतिशत निवेश योजनाएं मिलीं.

एकनाथ शिंदे

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महाराष्ट्र के सीएम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी नेताओं में घमासान

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता विजय वाडेत्तिवार और बीजेपी के राज्य अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकूले के बीच शनिवार को तीखी नोक झोंक हुई.

कांग्रेस के विजय वाडेत्तिवार ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि अगले पंद्रह दिनों में महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बदल जाएगा.

उन्होंने कहा, “राज्य में सितंबर में एक बड़ा बदलाव होगा, मैं इसकी गारंटी दे सकता हूं. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्रियों अजीत पवार और देवेंद्र फडणवीस के बीच सब ठीक नहीं हैं. जब भी मुख्यमंत्री किसी कार्यक्रम में शामिल होते हैं, उनके दोनों या एक डिप्टी उससे नदारद रहते हैं. सभी जानते हैं कि सत्ता के लालच में ये तीनों एक साथ आये हैं.”

उनकी इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकूले ने कहा, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और देवेंद्र फडणवीस कई बार ये स्पष्ट कर चुके हैं कि शिंदे 2024 तक उनके नेता रहेंगे.

उन्होंने ये भी कहा कि शिंदे के चेहरे पर ही विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा.

ये पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री को लेकर विवाद और बयानबाज़ी हुई है.

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