अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत: सैन्य सम्मान न मिलने पर परिवार नाराज़, सेना बोली- ख़ुद ली थी जान

अमृतपाल सिंह की मां और अमृतपाल सिंह

अग्निवीर अमृतपाल सिंह का अंतिम संस्कार ‘सैन्य सम्मान’ के साथ न होने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय सेना ने कहा है कि वह अग्निवीरों और अन्य जवानों में किसी तरह का भेदभाव नहीं करती.

पंजाब से सम्बंध रखने वाले अग्निवीर अमृतपाल सिंह की 11 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी के दौरान मौत हो गई थी.

इसके बाद उनके शव को निजी एम्बुलेंस से उनके गांव भेजा गया और अंतिम संस्कार से पहले सेना की ओर से ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ नहीं दिया गया.

इसके बाद यह चर्चा होने लगी थी कि भारतीय सेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों के लिए अलग प्रोटोकॉल बनाया है.

इस मामले पर आ रही प्रतिक्रियाओं को देखते हुए भारतीय सेना के एडीजी पीआई ने एक्स (पहले ट्विटर) पर बयान जारी किया है.

इसमें कहा गया है, “सैन्य बल अग्निपथ योजना से पहले या बाद में भर्ती होने वाले सैनिकों को मिलने वाले लाभों और प्रोटोकॉल में किसी तरह का भेदभाव नहीं करते हैं.”

हालांकि, सेना का कहना है कि ‘अग्निवीर अमृतपाल सिंह की मौत उनकी ही गोली से हुई है, ऐसे में नियमानुसार उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई नहीं दी गई.’

परिजनों की नाराज़गी

अमृतपाल सिंह

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अमृतपाल सिंह पंजाब के मानसा के कोटली कलां गांव के रहने वाले थे. उन्हें भर्ती हुए अभी 10 महीने ही हुए थे.

बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुरिंदर मान ने उनके माता-पिता से बात की. वे नाराज़ हैं कि उनके बेटे के शव को सैन्य सम्मान के साथ नहीं भेजा गया और अंतिम संस्कार से पहले गार्ड ऑफ़ ऑनर भी नहीं दिया गया.

अमृतपाल की मां राजविंदर कौर कहती हैं, “मेरे बच्चे को वर्दी पहनने का शौक़ था. जो बच्चा वर्दी पहनकर आना चाहता था, उसे वर्दी क्यों नहीं दी गई? उसे लिफ़ाफ़े में लपेटकर क्यों भेजा गया?”

पिता गुरदीप सिंह कहते हैं, “एक बक्सा आया और मेरा बच्चा मुझे दे दिया गया. मैं अनपढ़ हूं, सेना और सरकार के बारे में क्या जानता हूं? लेकिन मैंने अपने बेटे को सेना में भेजा था और भर्ती होने के बाद वह मेरा नहीं था. मैं उसे शहीद मानता हूं.”

अमृतपाल के परिजनों के अनुरोध पर स्थानीय पुलिसकर्मियों ने अमृतपाल के अंतिम संस्कार से पहले गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया था.

सेना ने दिया नियमों का हवाला

अमृतपाल सिंह के पिता

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भारतीय सेना के ‘वाइट नाइट कोर’ ने एक्स पर लिखकर जानकारी दी थी कि अमृतपाल सिंह की मौत उनकी अपनी गोली लगने से हुई है.

आगे लिखा था, “एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में अग्निवीर अमृतपाल सिंह की राजौरी सेक्टर में ख़ुद को मारी गई गोली से आई चोट के चलते मौत हो गई. इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए जांच जारी है.”

वाइट नाइट कोर का कहना था कि ‘ख़ुद को पहुंचाई गई चोट के कारण मौत हो जाए तो वर्तमान नीति के मुताबिक़ गार्ड ऑफ़ ऑनर या सैन्य परंपरा से अंतिम संस्कार नहीं किया जाता.’

इसके बाद भारतीय सेना के एडीजी पीआई ने भी यही बात दोहराई और 1967 के सैन्य आदेश का हवाला दिया.

एडीजी पीआई ने लिखा, “इस आदेश का बिना किसी भेदभाव के पालन किया गया है. 2001 से हर साल 100-140 सैनिकों की जान आत्महत्या या ख़ुद को पहुंचा गई चोट के कारण गई है और उनका सैन्य परंपरा से अंतिम संस्कार नहीं किया गया. हालांकि, अंतिम संस्कार के लिए फ़ौरी आर्थिक मदद समेत अन्य राहत राशि प्राथमिकता के आधार पर दे दी जाती है.”

आगे लिखा है, “सेना को नीतियों और प्रोटोकॉल के पालन के लिए जाना जाता है और आगे भी जानी जाएगी. भारतीय सेना अपने स्थापित प्रोटोकॉल के पालन के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की गुज़ारिश करती है.”

एडीजी पीआई

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विरोध

विपक्षी दल सेना की अग्निपथ योजना को लेकर शुरू से ही केंद्र की बीजेपी सरकार हमलवार रहे हैं.

इस पूरे मामले को लेकर भी राजनेताओं की कड़ी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं.

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गांव जाकर अमृतपाल के परिजनों से मुलाक़ात के अमृतपाल सिंह को ‘देश का शहीद’ बताया और कहा कि इस मामले में केंद्र सरकार से कड़ी आपत्ति जताई जाएगी.

उन्होंने अमृतपाल सिंह के परिजनों को पंजाब सरकार की नीति के तहत एक करोड़ रुपये देने की भी घोषणा की.

मान ने कहा, “यह शहीदों का अपमान है. सेना को इस बारे में सोचना चाहिए. परिवार नाराज़ है कि उनके बेटे को वह सम्मान नहीं मिला, जिसका वह हक़दार था.”

अमृतपाल के परिजनों से मिले भगवंत मान

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शिरोमणि अकाली दल की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार न किए जाने पर नाख़ुशी जताई है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “पता चला कि यह सब इसलिए हुआ क्योंकि वह अग्निवीर थे. हमें अपने सभी जवानों का सम्मान करना चाहिए.”

वहीं, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने एक्स पर लिखा, “क्या अग्निवीर होने का मतलब यह है कि उनका जीवन महत्वपूर्ण नहीं है?”

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