पाकिस्तान में बकरीद पर अहमदिया परिवार की आपबीती- ‘पुलिस ने हमारे फ्रिज से कुर्बानी का मांस निकाला’
सना आसिफ और उमैर सलीमी
बीबीसी उर्दू संवाददाता

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“हमारे चचेरे भाई से ग़लती ये हुई कि वो मांस बांटने के लिए बाहर गया था. किसी ने उसका वीडियो बना लिया और मौलवी को भेज दिया.”
“मौलवी साहब हमारे घर पुलिस ले आए. ये हमारे लिए बड़ी समस्या बन गई.”
ये कहना है पाकिस्तान की अहमदिया समुदाय की शमायला (बदला हुआ नाम) का. उनके मुताबिक बकरीद पर जानवर की कुर्बानी देना उनके परिवार के लिए मुश्किल की वजह बन गया है.
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय को धार्मिक तौर पर अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है. इस समुदाय के लोग बकरीद के मौके पर जानवरों की कुर्बानी देते रहे हैं.
लेकिन, पाकिस्तान में कई धार्मिक समूह अहमदिया समुदाय को कुर्बानी से रोकने की कोशिश में रहते हैं.

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कुर्बानी के बाद क्या हुआ
शमायला बताती हैं कि पुलिस उनके परिवार के साथ सख्ती से पेश आई.
वो बताती हैं, “पुलिस ने हमारे फ्रिज से कुर्बानी का मांस निकाला. जब मेरे पिता छुप गए तो पुलिस ने उनकी बाइक कब्जे में ले ली.”
उन्होंने आगे बताया, “पुलिस ने मेरे चचेरे भाई को हिरासत में ले लिया. उनकी उम्र कोई 13 या 14 साल है. बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया. ”
वो बताती हैं कि उस वक़्त घर में सिर्फ़ महिलाएं ही थीं. पुलिस और तमाम मजहबी लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा थी.
शमायला बताती हैं कि इस मामले ने उनके पूरे परिवार को ख़तरे में डाल दिया.
वो बताती हैं, “हम बहुत डरे हुए थे. अब हमारा पूरा परिवार एक दूसरे शहर के होटल में छिपा है. हमारी जान पर ख़तरा है.”
शमायला दावा करती हैं कि उनके परिवार ने पुलिस से मदद मांगी लेकिन उनकी गुहार नहीं सुनी गईं. वो आरोप लगाती हैं कि पुलिसकर्मियों ने उनके परिवार के साथ बदतमीजी से बात की.

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अहमदिया समुदाय का आरोप
पाकिस्तान में रहने वाले अहमदिया समुदाय का आरोप है कि बकरीद के मौके पर उन्हें भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.
वो आरोप लगाते हैं कि पुलिस ‘चरमपंथी तत्वों’ को खुश करने के लिए उन्हें कुर्बानी देने से रोकने के लिए कई कदम उठाती है
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गृह विभाग ने 23 जून को सभी ज़िलों को एक आदेश भेजा. इसमें कहा गया था कि सिर्फ़ मुसलमानों को ही जानवरों की कुर्बानी देने की इजाज़त है.
गृह विभाग ने अपने पत्र में जिले के उपायुक्त और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि वो क़ानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाएं.
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के हफीजाबाद ज़िले में पुलिस ने एक रिपोर्ट जारी की. इसमें कहा गया था कि अहमदिया समुदाय के लोग कुर्बानी देने की कोशिश करते हैं. मुसलमान इस पर एतराज करते हैं और इसकी वजह से मजहबी तौर पर दिक्कत हो सकती है.
झांग, फ़ैसलाबाद, हफ़ीजाबाद और कोटली जैसे ज़िलों में लोगों ने पुलिस स्टेशन में अर्जी देकर अहमदिया समुदाया को कुर्बानी देने से रोकने की अपील की थी.

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पुलिस ने क्या कहा?
पाकिस्तान में बीते दिनों ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं जिनमें दावा किया गया कि अहमदिया समुदाय के लोगों के घरों की तलाशी ली गई. लोगों को उनके जानवरों समेत हिरासत में लिया गया.
उनके घरों को चिन्हित कर उनकी पहचान की गई.
सरकारी स्तर पर ऐसी घटनाओं की पुष्टि या रोकथाम की बात नहीं की गई.
बीबीसी उर्दू ने इसे लेकर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में आईजी पुलिस डॉक्टर उस्मान अनवर से बात की. डॉक्टर अनवर से पूछा कि राज्य के कई ज़िलों से अहमदिया समुदाय के लोगों के घरों की तलाशी लेने और उनके उत्पीड़न की खबरें आ रही हैं, इस पर उन्होंने कहा कि ये मुद्दा समाज में मजहबी सदभाव को नुक़ासन पहुंचाने के लिए उठाया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि पुलिस क़ानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने और लोगों के जान-माल की सुरक्षा के लिए कदम उठा रही है.
डॉक्टर अनवर ने कहा कि ऐसे मामलों में हर वक़्त निगरानी की ज़रूरत होती है. इस मामले को क़ानून के साथ धार्मिक सदभाव बनाए रखने के लिहाज से देखा जाता है.

बकरियां और बैल जब्त
ऐसी रिपोर्ट भी आईं कि कुछ जगहों पर ‘कट्टर विचारधारा से प्रेरित लोग’ अहमदिया समुदाय के लोगों के घरों में झांकते रहे..
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कोटली के तत्ता पानी इलाके में एक युवक दूरबीन के जरिए अहमदी समुदाय के घरों में झाँक रहा था, जिसके कारण अहमदिया समुदाय के लोगों और उस युवक के बीच तीखी नोकझोंक हुई.
कोटली के एसएसपी रियाज़ मुगल ने बीबीसी को बताया कि इस मामले में शिकायत ये थी कि दूरबीन के जरिए 'घरों की महिलाओं को देखने की कोशिश' हो रही है लेकिन दरअसल, वो कुर्बानी पर नज़र रखने की कोशिश में था.
पुलिस के मताबिक बाद में दोनों पक्षों के बीच सुलह करा दी गई.
अहमदिया समुदाय का दावा है कि ननकाना में समुदाय के तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया गया है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी कर रही है, जबकि सियालकोट में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है लेकिन कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है.
अहमदिया समुदाय के अनुसार, पुलिस ने फैसलाबाद में कई अहमदियों के घरों से बकरियों और बैलों को जब्त कर लिया और कहा कि वे उन्हें ईद के बाद ले सकते हैं.
गौरतलब है कि इस्लामाबाद बार एसोसिएशन समेत देश में वकीलों के और कई धार्मिक संगठनों ने ईद के दौरान पुलिस से कहा था कि अहमदिया समुदाय को जानवरों की कुर्बानी देने से रोकना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है
प्रवक्ता ने याद दिलाया सुप्रीम कोर्ट का आदेश
पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के प्रवक्ता अमीर महमूद ने कहा कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अहमदिया समुदाय को चार दीवारों के भीतर अपने धर्म का पालन करने की पूरी आजादी है.
उनके मुताबिक कोर्ट के फैसले में कहा गया है, 'गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यक को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने की अनुमति है और घर के भीतर उन्हें इसका पालन करने से रोकना संविधान के खिलाफ है.'
अमीर महमूद का कहना है, 'पिछले कुछ सालों से अहमदियों को ईद के मौके पर कुर्बानी देने से रोका जा रहा है.'
अमीर महमूद ने बताया कि अहमदिया समुदाय ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी और उन्हें स्थिति से अवगत कराया था. समुदाय ने मांग की थी कि ईद पर उन्हें सुरक्षा दी जाए और चार दीवारों के भीतर अपने धर्म का पालन करने की इजाज़त मिले.
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