एयर इंडिया विमान हादसा: फ़्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर डीजीसीए का निर्देश

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नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने एयरलाइनों को निर्देश दिया है कि वे अपने बोइंग 787 और 737 विमानों में 'फ़्यूल स्विच लॉकिंग सिस्टम' की जाँच करें.
यह निर्देश विमान दुर्घटना जाँच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद जारी किया गया. उस रिपोर्ट में कहा गया था कि एयर इंडिया विमान हादसे से पहले फ़्यूल स्विच बंद हो गए थे.
12 जून, 2025 को हुई इस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हो गई थी. प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद से फ़्यूल कंट्रोल स्विच की सुरक्षा चर्चा का विषय बनी हुई है.
इससे पहले अमेरिकी फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़एए) ने साल 2018 में कहा था कि बोइंग विमानों में इस्तेमाल हो रहे फ़्यूल कंट्रोल स्विच सुरक्षित हैं.
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एफ़एए ने बीबीसी के साथ साझा किए गए एक आंतरिक नोट में कहा, "बोइंग के विभिन्न मॉडलों में फ़्यूल कंट्रोल स्विच का डिज़ाइन और लॉकिंग फ़ीचर समान है. एफ़एए इस मुद्दे को इतना असुरक्षित नहीं मानता, जिसमें उड़ान भरने के लिए विमान को सुरक्षित बताने वाले निर्देश जारी करने की ज़रूरत हो, 787 सहित किसी भी मॉडल के लिए."
एफ़एए ने ये भी कहा कि वह अन्य देशों के सिविल एविएशन अथॉरिटी के साथ ज़रूरी जानकारी साझा करता रहेगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, भारत की अलग-अलग एयरलाइंस 150 से ज़्यादा बोइंग 737 और 787 विमानों का संचालन कर रही हैं.
इनमें एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, अकासा एयर, स्पाइसजेट और इंडिगो शामिल हैं.
पीटीआई के अनुसार, "इंडिगो के पास सात बोइंग 737 मैक्स 8 और एक बोइंग 787-9 विमान हैं. ये सभी विमान लीज़ पर लिए गए हैं इसलिए भारत में पंजीकृत नहीं हैं."
अमेरिकी फ़ेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफ़एए) ने 2018 में विशेष बुलेटिन के ज़रिए 787 और 737 समेत कुछ बोइंग मॉडलों में फ़्यूल कंट्रोल स्विच लॉकिंग फ़ीचर के संभावित निष्क्रिय होने की आशंका जताई थी.
लेकिन इस चेतावनी के बाद भी कोई 'बाध्यकारी सुरक्षा निर्देश' (एयरवर्दीनेस डायरेक्टिव) जारी नहीं किया गया था. इसका मतलब है कि फ़िलहाल ये 'सुरक्षा से जुड़ी चिंता' का विषय नहीं है.
डीजीसीए ने क्या कहा है?

डीजीसीए ने सोमवार को कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ऑपरेटरों ने एफ़एए के एसएआईबी के अनुसार अपने विमानों की जाँच शुरू कर दी है.
पीटीआई के मुताबिक़, डीजीसीए ने आदेश में कहा, "प्रभावित विमानों के सभी एयरलाइन ऑपरेटरों को सलाह दी जाती है कि वे 21 जुलाई 2025 तक इनकी जाँच पूरी कर लें. जाँच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कार्यालय को सौंपी जाए."
डीजीसीए ने अपने ऑर्डर में कहा, "निर्धारित समय सीमा का सख़्ती से पालन करना विमानों की निरंतर एयरवर्दीनेस (उड़ान-योग्यता) और संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है."

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फ़्यूल कंट्रोल स्विच विमान के इंजनों में ईंधन के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं. एएआईबी ने शनिवार को बोइंग 787-8 हादसे की जो प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की, उसमें कहा गया कि विमान के दोनों इंजनों की ईंधन आपूर्ति एक सेकंड के भीतर बंद हो गई.
इस वजह से टेक-ऑफ़ के तुरंत बाद कॉकपिट में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई.
रिपोर्ट में कहा गया, "कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग में एक पायलट दूसरे से पूछता है कि उसने स्विच क्यों बंद किया? दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया."
एयर इंडिया ने शुरू की फ़्यूल स्विच की जाँच

एयर इंडिया ने अपने बोइंग 787 और 737 विमानों में फ़्यूल स्विच लॉकिंग सिस्टम की जाँच पहले ही शुरू कर दी है. पीटीआई के अनुसार, एयर इंडिया के ज़्यादातर बोइंग 787 विमानों की जाँच पूरी हो चुकी है, जबकि बोइंग 737 की जाँच लगभग ख़त्म होने वाली है.
टाटा समूह की स्वामित्व वाली एयर इंडिया के पास कुल 33 चौड़ी बॉडी वाले बोइंग 787 विमान हैं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास लगभग 75 सँकरी बॉडी वाले 737 विमान हैं.
पीटीआई के मुताबिक़, एयर इंडिया ने यह जाँच एहतियाती क़दम के तौर पर स्वेच्छा से शुरू की है.
अकासा एयर और स्पाइसजेट बोइंग 737 विमान संचालित करते हैं. इंडिगो भी बोइंग 787 और 737 उड़ाता है, लेकिन ये सारे विमान विदेशी एयरलाइनों से लीज़ पर लिए गए हैं, इसलिए उन पर डीजीसीए का यह निर्देश लागू नहीं होता.
एएआईबी की रिपोर्ट के बाद एतिहाद एयरवेज़ समेत दुनिया की कुछ अन्य एयरलाइनों ने भी अपने बोइंग 787 विमानों में फ़्यूल स्विच लॉकिंग सिस्टम की जाँच शुरू कर दी है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित















