बिहार: हाई कोर्ट ने रद्द किया दस साल पुराना ‘पकड़ौआ विवाह, जानिए क्या है पूरा मामला

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- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- ........से, नवादा/लखीसराय, बिहार
बिहार में पटना हाई कोर्ट ने दस साल पुरानी एक शादी को रद्द कर दिया है. इस मामले में लड़के ने आरोप लगाया था कि उसे अगवा कर जबरन शादी कराई गई थी. बिहार में इस तरह की शादी को ‘पकड़ौआ विवाह’ कहते हैं.
राज्य में इस तरह की शादी का पुराना इतिहास रहा है. पकड़ौआ विवाह में लड़की पक्ष के लोग लड़के को अगवा कर जबरन अपनी लड़की से शादी करा देते हैं.
हालांकि लड़की वालों को हाई कोर्ट का यह फ़ैसला मंजूर नहीं है और वो इसके ख़िलाफ़ अपील करने के लिए क़ानूनी सलाह ले रहे हैं.
इस फ़ैसले के पीछे वो ख़ुद अपने वकील को दोषी ठहरा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि उनके वकील ने कोर्ट में सारे सबूत नहीं रखे.
क्या है मामला?

दरअसल इस मामले में बिहार के दो परिवारों के बीच क़ानूनी लड़ाई चल रही थी.
यह मामला नवादा ज़िले के रेवरा गांव के चंद्रमौलेश्वर सिंह के बेटे रविकांत और लखीसराय ज़िले के चौकी गांव के बिपिन सिंह की बेटी बंदना कुमारी की शादी को लेकर है.
आरोपों के मुताबिक़ रविकांत सिंह अपने चाचा सत्येंद्र सिंह के साथ लखीसराय के अशोक धाम मंदिर में पूजा करने गए थे.
उसी दौरान उन्हें बंदूक दिखाकर अगवा कर लिया गया और लखीसराय की बंदना कुमारी के साथ जबरन शादी करा दी गई. यह घटना 30 जून 2013 की है. उस समय रविकांत की सेना में नई नौकरी लगी थी.
सत्येंद्र सिंह के मुताबिक़, '' क़रीब आठ लोग थे जिनमें से कुछ के पास हथियार भी था. वो लोग रविकांत को घसीटते हुए ले गए. मुझे भी उठा लिया था लेकिन लखीसराय में छोड़ दिया और बताया कि तुम्हारे लड़के की शादी करा रहे हैं. हमने घर में भी ख़बर दी, घर के लोग वहां आए भी, लेकिन कुछ पता नहीं चला.''
सत्येंद्र सिंह का दावा है कि बंधक रविकांत सुबह चार बजे टॉयलेट के बहाने निकला, उस समय घर के लोग सो रहे थे. उसकी मोटरसाइकिल मंदिर के पास ही खड़ी थी और चाबी उसी के पास थी.
रविकांत अपनी मोटरसाइकिल से उसी समय लखीसराय से भाग गया. लखीसराय का अशोक धाम मंदिर लड़की के घर से महज़ कुछ कदमों की दूरी पर है.
वहीं रविकांत के पिता चंद्रमौलेश्वर सिंह का कहना है कि उन्होंने और उनके परिवार ने जबरन कराई गई इस शादी को कभी स्वीकार नहीं किया. हालांकि इसके लिए नाते रिश्तेदारों की तरफ से दबाव बनाने की कोशिश ज़रूर हुई थी.
चंद्रमौलेश्वर सिंह कहते हैं, ''किसी को अगवा कर जबरन सिंदूर डलवा देना कोई शादी नहीं है. पकड़ौआ शादी बिहार में होती थी, हो रही होगी और आगे क्या होगा हम नहीं जानते, लेकिन जिनसे हम कभी मिले नहीं, हम जानते नहीं, जिनसे हमारा मन नहीं मिलता उनके साथ रिश्ते को कैसे स्वीकार कर लें.''
क्या है पकड़ौआ विवाह?

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पकड़वा या पकड़ौआ विवाह ऐसा शादी होती है जिसमें शादी के योग्य लड़के का अपहरण कर उसकी जबरन शादी करवाई जाती है. इस तरह की शादी पर फ़िल्में और टीवी सीरियल तक बन चुके हैं.
साल 1980 के दशक और उससे पहले बिहार में ऐसी शादी के बहुत से मामले देखने को मिलते थे. ऐसी शादी उत्तर बिहार में ज़्यादा देखने को मिलती थी.
माना जाता है कि इसके लिए गांव में गिरोह तक होते थे जो लड़कों का अपहरण करते थे. उत्तर बिहार में एक ज़माने में नौकरीपेशा और योग्य लड़कों को शादी के सीज़न में घर से बाहर निकलने में ख़ास सावधानी रखने की सलाह दी जाती थी.
बिहार पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक़ राज्य में हर साल जबरन शादी के क़रीब तीन से चार हज़ार मामले दर्ज़ होते हैं. इससे पहले के साल में भी देखें तो फोर्स्ड मैरिज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसमें प्रेम प्रसंग में घर से भागने वाले जोड़ों का आंकड़ा शामिल नहीं है.
‘पकड़ौआ नहीं, प्रेम विवाह’

आमतौर पर यह माना जाता रहा है कि जबरन शादी को भी धीरे-धीरे लड़के वाले मान लेते और इसे मान्यता दिलाने में समाज या बिरादरी का दबाव में अहम भूमिका निभाता है.
चंद्रमौलेश्वर सिंह कहते हैं, “मैं सेना में था और मुझे इसके बारे में बहुत जानकारी नहीं है, लेकिन आजकल भी अगर ऐसा होता है तो लड़की की शादी का ख़र्च बचाने के लिए होता है.”
हालांकि बंदना कुमारी और उनके परिवार के लोगों का कहना है कि यह ‘पकड़ौआ शादी’ नहीं, बल्कि प्रेम विवाह था और हाई कोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ वो पुनर्विचार याचिका डालेंगे या सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.
परिवार का आरोप है कि उनके अपने ही वकील ने अदालत में सारे सबूत नहीं रखे.
बंदना कुमारी कहती हैं, “हाई कोर्ट का यह फ़ैसला ग़लत है लेकिन हमें कोर्ट से कोई शिकायत नहीं है. हम इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे. मेरे पास सारे सबूत हैं. हम दोनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी की थी. हमारे वकील ने हाई कोर्ट में कोई सबूत नहीं रखा. वो हमारा फ़ोन तक नहीं उठा रहे हैं.”
इस संबंध में हमने बंदना कुमारी के वकील से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन लेकिन उनसे हमारा संपर्क नहीं हो पाया.
दरअसल बंदना का कहना है कि रविकांत उनकी रिश्ते की एक बहन के देवर (पति का छोटा भाई) हैं और इसी वजह से उनका घर में आना होता था. इसी दौरान दोनों ने एक-दूसरे को पसंद कर अशोक धाम मंदिर में प्रेम विवाह किया था, लेकिन लड़के के पिता को यह शादी मंजूर नहीं थी.
दूसरी शादी का आरोप

बंदना की मां शिरोमणि देवी का आरोप है कि बंदना के वकील ने केस में मदद नहीं की.
शिरोमणि देवी दावा करती हैं, “दोनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी की है और लड़के ने हंस-हंसकर शादी की सारी रस्म पूरी की थी और मंत्र पढ़े थे. यह शादी पूरे समाज के बीच हुई थी.”
वहीं बंदना की एक पड़ोसी निशा देवी ने दावा किया है कि लड़के ने अपनी पसंद से शादी की थी, यह कोई पकड़ौआ शादी नहीं थी. लड़के ने लड़की को पसंद कर के शादी की थी, कोई उसे पकड़कर नहीं लाया था लेकिन यह शादी लड़के के घरवालों के मंज़ूर नहीं थी.
बंदना का दावा है किया कि रविकांत शादी के बाद उनसे मिलने लखीसराय आते थे.
वह भी क़रीब तीन साल पहले कई महीनों के लिए अपने ससुराल में जाकर रही थीं. बंदना ने आरोप लगाया है कि ससुराल में उनके साथ ग़लत व्यवहार किया जाता था, इसलिए वो वहां से वापस चली आईं.
लेकिन रविकांत के घरवालों का दावा है कि रविकांत शादी के अगले दिन ही किसी तरह ससुराल से भाग गए थे.
दरअसल शादी के बाद रविकांत ने लखीसराय के फ़ैमिली कोर्ट में इसके ख़िलाफ़ केस किया था.
बंदना कुमारी का आरोप है कि ऐसा रविकांत ने घरवालों के दबाव में किया था. हालांकि लखीसराय में जनवरी 2020 में कोर्ट ने रविकांत के ख़िलाफ़ फ़ैसला सुनाया था और बंदना को रविकांत की पत्नी का दर्जा दिया गया था.
लेकिन इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ रविकांत के परिवार ने पटना हाई कोर्ट में अपील की थी.
इसी पर सुनवाई पूरी होने के बाद हाई कोर्ट ने पिछले ही हफ़्ते साल 2013 की शादी को रद्द करने का फ़ैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने फ़ैसले में लड़की वालों की तरफ से शादी को लेकर पेश किए गए सबूत को अपर्याप्त माना है.
इसके अलावा अशोक धाम मंदिर में शादी कराने का दावा करने वाले पंडित को लेकर कोर्ट ने सवाल उठाए हैं और यह भी कहा है कि हिन्दू विवाह कानून के मुताबिक़ शादी में सात फेरे होते हैं, जिसके बारे में शादी कराने का दावा करने वाले पंडित को कुछ पता नहीं है.
बंदना कुमारी का क्या कहना है?

बंदना का दावा है कि लखीसराय कोर्ट का फ़ैसला आने के बाद रविकांत अपने ससुराल भी आए थे और इस दौरान बंदना के भाई की शादी में भी शामिल हुए थे.
उसके बाद बंदना भी कुछ महीनों के लिए अपने ससुराल जाकर रही थीं. इस दौर की ही कुछ तस्वीरें भी बंदना के पास मौजूद हैं. हालांकि बीबीसी उन तस्वीरों की सच्चाई की पुष्टि नहीं कर सकता है.
बंदना ने एक गंभीर आरोप यह भी लगाया है कि साल 2017 में रविकांत की दूसरी शादी करा दी गई थी. वंदना का कहना है कि उसने इस शादी के ख़िलाफ़ भी केस कर रखा है.
उनका आरोप है कि यह शादी झारखंड के देवघर में महज़ कुछ लोगों की मौजूदगी में कराई गई थी, जबकि उस समय रविकांत और बंदना की शादी को लेकर कोर्ट का कोई फ़ैसला नहीं आया था.
कोर्ट के फ़ैसले के बाद रविकांत की शादी के बारे में हमने उनके पिता से जानने की कोशिश की तो उन्होंने इसे पारिवारिक मामला बताकर इसपर कुछ भी बोलने के इनकार कर दिया.
वहीं बंदना ने जिस महिला से रविकांत की शादी का दावा किया है, हमने उनसे भी संपर्क किया. हालांकि उन्होंने इस बारे हमें कोई जानकारी नहीं दी, लेकिन फ़ोन पर उनके एक भाई ने हाई कोर्ट के फ़ैसला का स्वागत किया और बताया कि रविकांत की शादी साल 2017 में हुई थी और उनके बच्चे भी हैं.
रविकांत फ़िलहाल अपनी नौकरी के सिलसिले में जयपुर में तैनात हैं. उन्हें पटना हाई कोर्ट में जीत ज़रूर मिली है लेकिन मामले पेचीदगियां अभी बरक़रार हैं. बंदना का दावा है कि दूसरी शादी का मामला अभी कोर्ट में है और वो अपने केस को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगीं.
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