ईशनिंदा में सज़ा काट रहे हिंदू प्रोफ़ेसर की रिहाई क्यों चाहते हैं पाकिस्तान के लोग

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- Author, शुमाइला ख़ान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
''हम पिछले चार साल से दर-ब-दर हैं. हम किसी घर में छह महीने से अधिक नहीं रह सकते हैं. हमें फ़ोन पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं. कृपया कोई हमें न्याय दिला दे.''
ये बातें मुस्कान सचदेव ने हमें फ़ोन पर बताईं. मुस्कान के पिता प्रोफ़ेसर नूतन लाल इन दिनों जेल की सज़ा काट रहे हैं. ईशनिंदा के दोष में सिंध की एक अदालत ने उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई है.
प्रोफ़ेसर नूतन लाल की रिहाई के लिए सिंध प्रांत के सामाजिक कार्यकर्ताओं और लेखकों ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अभियान चलाया.
पाकिस्तान से बाहर रह रहे सिंधी समुदाय ने भी इस अभियान में भाग लिया.
एक जगह पर नहीं रह सकते
मुस्कान सचदेव ने बीबीसी से कहा कि उनके 60 साल के पिता चार साल से जेल में हैं. उन्होंने 30 साल सरकारी नौकरी की है.
वो कहती हैं, ''हमारे परिवार पर कभी मुकदमा नहीं चला. हम तीन बहनें हैं और हमारा दस साल का एक भाई और मां है. हम 2019 से दर-ब-दर की ठोकरें खा रहे हैं. हमें जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं, फोन आ रहे हैं.''
वो कहती हैं, ''हम कहीं भी शांति से नहीं रह पा रहे हैं. हम किसी को भी अपने घर का पता नहीं बता सकते. हमारे पिता की तनख्वाह बंद हो गई है. हमारी आय का कोई और स्रोत नहीं है.''

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प्रोफ़ेसर नूतन लाल पर आरोप क्या हैं?
नूतन लाल को 2019 में उत्तरी सिंध प्रांत के घोटकी ज़िले में गिरफ़्तार किया गया था.
घोटकी पुलिस का कहना है कि इस विवाद की शुरुआत घोटकी स्कूल में तब हुई जब प्रोफ़ेसर नूतन लाल एक क्लास में उर्दू पढ़ा रहे थे.
उनके पढ़ाने के बाद एक छात्र अपने इस्लामी अध्ययन वाले शिक्षक के पास गया. छात्र ने आरोप लगाया कि प्रोफ़ेसर लाल ने इस्लाम के पैग़ंबर के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल किया है.
शिक्षकों ने इस मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की. वहीं नूतन लाल ने माफी मांगते हुए कहा कि उनका इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था.
लेकिन शिकायत करने वाले छात्र ने इस घटना का जिक्र अपने पिता से किया और फेसबुक पर एक पोस्ट भी लिख दी. इसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया.
इस घटना के बाद स्थानीय बाजार में हड़ताल भी हुई. इस दौरान उग्र लोगों की एक भीड़ ने नूतन लाल के स्कूल पर हमला कर वहां तोड़फोड़ की.
वहीं एक दूसरे समूह ने नूतन के घर पर भी हमला किया. इस दौरान साईं साधराम मंदिर पर हमला कर वहां तोड़फोड़ की गई. हालात ख़राब होने के बाद जिला प्रशासन ने रेंजर्स को बुलाया.

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अदालत ने प्रोफ़ेसर को सुनाई उम्रक़ैद
इस मामले में घोटकी की एक स्थानीय अदालत ने प्रोफ़ेसर लाल को उम्रकैद की सज़ा सुनाई और जुर्माना भी लगाया.
सिंध में हाल के सालों में यह पहला मामला था, जब किसी हिंदू को ईशनिंदा के दोष में सज़ा सुनाई गई.
अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अभियोजन पक्ष के मुताबिक़ 14 सितंबर, 2019 को वादी अब्दुल अजीज ख़ान ने घोटकी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया.
ख़ान ने अपनी शिकायत में कहा कि उनका बेटा एक पब्लिक स्कूल में पढ़ता था. उसने उन्हें (अपने पिता को) बताया कि स्कूल के मालिक नूतन लाल कक्षा में आए और इस्लाम के पैगंबर के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और चले गए.
वादी के मुताबिक उनके बेटे ने दो गवाहों, मोहम्मद नवीद और वकास अहमद की उपस्थिति में यह बात कही.

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मुमताज सोलांगी ने अपने फैसले में लिखा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाह 'स्वतंत्र और विश्वसनीय' थे. उनके बयान 'द्वेष पर आधारित नहीं थे' क्योंकि उनमें से किसी की भी अभियुक्त के खिलाफ व्यक्तिगत दुश्मनी या शत्रुता नहीं थी. ऐसे में उनकी गवाही पर अविश्वास करने का कोई औचित्य नहीं है.
कोर्ट के मुताबिक़, अभियोजन पक्ष अभियुक्त नूतन के खिलाफ आरोप साबित करने में सफल रहा, इसलिए उसे उम्रकैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई जाती है.
कोर्ट ने कहा कि जुर्माना न भरने पर अभियुक्त को चार महीने जेल की सजा और भुगतनी होगी. फैसले के मुताबिक़ गिरफ्तारी के दिन से ही सज़ा पर अमल किया जाएगा.
वहीं नूतन के चचेरे भाई महेश कुमार ने बीबीसी को बताया कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था, सिर्फ अफवाहें थीं. वादी द्वारा गवाह के रूप में पेश किए गए व्यक्ति भी उसके पड़ोसी हैं.
हाई कोर्ट में लंबित हैं अपील
महेश कुमार ने बताया कि उत्तरी सिंध में कोई भी वकील उनके मामले की पैरवी के लिए तैयार नहीं था.
इसके बाद उन्होंने हैदराबाद में प्रोग्रेसिव वकील यूसुफ लघारी से संपर्क किया. इस मामले की पैरवी के लिए लघारी 600 किलोमीटर की यात्रा करते हैं, लेकिन पिछले दो साल से मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई है.
महेश कुमार के मुताबिक मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होनी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत कम से कम नूतन के वकील की बात सुनेगी और इस मामले में न्याय करेगी और नूतन लाल को रिहा करेगी.

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पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चार साल से जेल में बंद नूतन लाल की रिहाई के लिए शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अभियान चलाया. उन्होंने प्रोफेसर नूतन लाल हैशटैग के साथ अपने विचार व्यक्त किए.
एक्स पर एक यूजर जेसी शर्मा ने लिखा, 'प्रोफेसर #नूतनलाल पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. उन्हें जेल में बंद हुए तीन साल से ज्यादा समय हो गया है."
"प्रोफेसर नूतन लाल को गलत तरीके से फंसाया गया था, उन्हें बिना किसी अपराध के सजा दी गई है. हम उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.''
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अधिकारियों से अपील करते हुए सपना सेवानी ने लिखा, ''प्रोफ़ेसर नूतन लाल पंजन सरीन को गलत तरीके से कैद किया गया और कड़ी सजा दी गई."
"हम उनकी सुरक्षित रिहाई के लिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट और पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश से अपील करते हैं. आइए एक साथ जुड़ें और उनकी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने के लिए क़दम उठाएं.''

सुनील ठाकुरिया ने लिखा कि 'प्रोफेसर नूतन लाल को रिहा करो और अन्य धर्मों के लोगों के जीवन से खेलना बंद करो.''
दिलीप रतनी ने कहा, ''हम संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से पुरजोर अपील करते हैं कि वो प्रोफेसर नूतन लाल की रिहाई के लिए पाकिस्तानी सरकार पर राजनयिक दबाव डाले.''
नारायण दास भील ने लिखा, ''पाकिस्तान को अपने समाज की प्रगति के लिए अपने ईशनिंदा कानूनों पर पुनर्विचार करना चाहिए. सरकार को ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त तरीका अपनाना चाहिए.''
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मुस्लिम कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी चिंता जताते हुए प्रोफ़ेसर नूतन लाल की रिहाई की मांग की.
अब्दुल सत्तार बाकर ने एक्स पर अपना गुस्सा इन शब्दों के साथ जाहिर किया, ''यदि आपको इस देश में जीवित रहना है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप ईश्वर से डरते हैं या नहीं, आपको निश्चित रूप से मौलवियों से डरने की जरूरत है.''
एक अन्य नागरिक सीनघर अली चांडियो ने लिखा, ''निर्दोष नागरिकों को प्रताड़ित करने के लिए ईशनिंदा कानून का दुरुपयोग बंद करें.''
मुबारक अली भट्टी ने लिखा, ''प्रोफेसर #नूतनलाल पर कथित तौर पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था. उन्हें जेल में बंद हुए तीन साल से ज्यादा समय हो गया है."
"प्रोफेसर नूतन लाल को गलत तरीके से फंसाया गया था, उन्हें बिना किसी अपराध के सजा दी गई है. हम उनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.'
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