मिल्कीपुर सीट पर उपचुनाव में बीजेपी की बड़ी जीत, समाजवादी पार्टी को हराया

मिल्कीपुर सीट पर बीजेपी की बड़ी जीत, समाजवादी पार्टी को हराया
उम्मीदवार
इमेज कैप्शन, समाजवादी पार्टी उम्मीदवार अजीत प्रसाद, बीजेपी के उम्मीदवार चंद्रभानु प्रसाद और आज़ाद समाज पार्टी के उम्मीदवार सूरज चौधरी उर्फ़ संतोष कुमार.

दिल्ली विधानसभा चुनाव के बीच प्रतिष्ठा का विषय बनी उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव का नतीजा भी काफ़ी चर्चा में है.

भारतीय जनता पार्टी ने यहां चंद्रभानु पासवान को उम्मीदवार बनाया था वहीं समाजवादी पार्टी ने अवधेश प्रसाद के बेटे अजीत प्रसाद को चुनाव में उतारा था.

चुनाव आयोग के मुताबिक़, बीजेपी के चंद्रभानु पासवान ने 61,710 वोट के अंतर से जीत हासिल की. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सपा के अजीत प्रसाद को हराया.

चंद्रभानु को 1 लाख 46 हज़ार 397 वोट मिले, जबकि सपा उम्मीदवार को 84 हज़ार से अधिक वोट हासिल हुए.

पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में मिल्कीपुर से ही विधायक रहे अवधेश प्रसाद फ़ैज़ाबाद से जीत गए थे. इस कारण यह विधानसभा सीट ख़ाली हो गई थी.

अवधेश प्रसाद ने अयोध्या की फ़ैज़ाबाद लोकसभा सीट से भाजपा के लल्लू सिंह को हराया था. लल्लू सिंह लगातार दो बार वहाँ से सांसद रहे थे. उनकी इस जीत की राष्ट्रीय स्तर पर ख़ूब चर्चा हुई थी.

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आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने इस चुनावी मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वह सिर्फ़ 5459 वोट ही हासिल कर सके.

पिछले साल जनवरी में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. भाजपा ने लोकसभा चुनाव में इसे ख़ूब भुनाया भी था लेकिन अयोध्या की फ़ैज़ाबाद सीट से मिली हार से बीजेपी को बड़ा झटका लगा था.

विपक्षी इंडिया गठबंधन ने इस जीत को संविधान की जीत कहा था. लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने तो सदन में उन्हें अपने साथ बैठाया और अपने संबोधनों में कई बार उनकी जीत का ज़िक्र भी किया.

प्रतिष्ठा का प्रश्न मिल्कीपुर

योगी और अखिलेश

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, भाजपा इस सीट को उपचुनाव में जीतकर लोकसभा की हार को पीछे छोड़ना चाहती थी.

लोकसभा चुनाव में फ़ैज़ाबाद सीट पर मिली हार के कारण मिल्कीपुर भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई थी. उत्तर प्रदेश के मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री ने इस सीट पर जीत का समीकरण बिठाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी.

लोकसभा चुनाव में इसी सीट से विधायक रहे अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी. भाजपा इसी सीट को उपचुनाव में जीतकर लोकसभा की हार को पीछे छोड़ना चाहती थी.

वहीं समाजवादी पार्टी से ज़्यादा यह अवधेश प्रसाद की आन की बात बन गई थी. अवधेश ने टिकट अपने बेटे को दिलाया था.

आज़ाद समाज पार्टी ने प्रत्याशी उतारकर मुकाबला बनाया था त्रिकोणीय

मिल्कीपुर 2009 से सुरक्षित सीट है. इस बार उपचुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का सीधा मुकाबला था.

बहुजन समाज पार्टी ने यहां अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था और कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था.

हालांकि आज़ाद समाज पार्टी (काशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने यहां अपना प्रत्याशी सूरज चौधरी उर्फ़ संतोष कुमार को उतारकर इस मुक़ाबले को त्रिकोणीय बनाने का प्रयास किया था. यहां से 10 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे.

वीडियो कैप्शन, यूपी की मिल्कीपुर सीट बीजेपी और एसपी के लिए नाक का सवाल क्यों बनीं?

समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है मिल्कीपुर

मिल्कीपुर की सीट परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है. मिल्कीपुर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से सांसद और इसके बाद में समाजवादी पार्टी के नेता बने मित्रसेन यादव का यह अभेद्य क़िला माना जाता था.

2012 और 2022 में जब अवधेश प्रसाद यहाँ से विधायक बने, तो उन्हें इस विरासत का फ़ायदा मिला.

अवधेश प्रसाद की इस इलाक़े में गहरी पैठ मानी जाती है. वह छह बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. इस बार इस सीट से समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे अजीत प्रसाद को उम्मीदवार बनाया था.

मिल्कीपुर सीट में 3 लाख 70 हज़ार 829 मतदाता हैं. पुरुष मतदाता 1 लाख 92 हज़ार 984 और महिला मतदाता 1 लाख 77 हज़ार 838 हैं. इन मतदाताओं में पहली बार 4811 नए मतदाता हैं.

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