कमज़ोर होते भारतीय रुपये के कारण नेपाल को क्यों हो रहा है भारी नुक़सान

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- Author, संजय ढकाल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ नेपाली
नेपाल के सेंट्रल बैंक नेपाल राष्ट्र बैंक के मुताबिक़, बुधवार को एक अमेरिकी डॉलर मूल्य 145.95 नेपाली रुपये तक पहुंच गया.
भारतीय रुपये के कमज़ोर होने के साथ-साथ, नेपाली रुपये का मूल्य भी कम हो गया है क्योंकि भारतीय रुपये के साथ नेपाली मुद्रा का 'फ़िक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम' है.
विश्लेषकों का कहना है कि डॉलर की मज़बूती का नेपाल के कई क्षेत्रों में नकारात्मक और कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक असर पड़ेगा.
हालांकि, इसके कारण सबसे बड़ा नुक़सान नेपाल पर कर्ज़ का बोझ बढ़ना भी है.
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44 अरब नेपाली रुपये के नुक़सान की संभावना

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नेपाल के पब्लिक डेट मैनेजमेंट ऑफ़िस (सार्वजनिक ऋण प्रबंधन कार्यालय) के मुताबिक़ नेपाल का कुल कर्ज़ 2 लाख 72 हजार 9 सौ करोड़ नेपाली रुपये तक पहुंच गया है.
इसमें से विदेशी कर्ज़ 1 लाख 45 हजार 3 सौ करोड़ नेपाली रुपये है. ज़्यादातर विदेशी कर्ज़ अमेरिकी डॉलर में लिया गया है.
नेपाल के पब्लिक डेट मैनेजमेंट ऑफ़िस के आंकड़ों के अनुसार, कुल विदेशी कर्ज़ का 20 प्रतिशत सीधे अमेरिकी डॉलर में है और लगभग 72 प्रतिशत 'स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स' यानी एसडीआर में है.
ये एसडीआर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) की बनाई गई एक तरह की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा यानी इंटरनेशनल करेंसी है, जो अमेरिकी डॉलर, यूरो, चीनी युआन, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड पर आधारित है.
ये सभी मुद्राएं नेपाली रुपये के मुकाबले मज़बूत हो रही हैं, इसलिए नेपाल के विदेशी कर्ज़ पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है.
नेपाल के पब्लिक डेट मैनेजमेंट ऑफ़िस के प्रमुख गोपीकृष्ण कोइराला ने बीबीसी न्यूज़ नेपाली को बताया, "अगर हमें आज (16 दिसंबर को) ही अपना सारा विदेशी कर्ज़ चुकाना पड़े, तो विनिमय दर यानी एक्सचेंज रेट के कारण हमें 44.22 अरब नेपाली रुपये का अतिरिक्त नुक़सान उठाना पड़ेगा. अगर कल विनिमय दर में सुधार होता है, तो यह संभावित नुक़सान कम हो सकता है."
उन्होंने कहा, "डॉलर के लगातार मजबूत होने से हमारा विदेशी कर्ज़ निश्चित रूप से बढ़ रहा है. विदेशी कर्ज़ लेने पर भुगतान से जुड़ी शर्तें विनिमय दर यानी एक्सचेंज रेट पर आधारित होती हैं, जो बाजार मूल्यों के मुताबिक़ घटती-बढ़ती रहती है."
पिछले साल नवंबर में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 134 रुपये थी, लेकिन एक साल में ही इसमें 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. पांच साल पहले एक डॉलर की कीमत 118 रुपये थी.
विनिमय दर में इस बदलाव के कारण नवंबर के मध्य तक 44 अरब रुपये से अधिक का नुक़सान होने का अनुमान था. पिछले एक महीने में डॉलर में लगभग 4 रुपये की वृद्धि होने से संभावित नुक़सान और भी बढ़ गया है.
इस साल विदेशी कर्ज़ चुकाने के लिए आवंटित 67 अरब रुपये से अधिक की राशि में से 15.5 अरब रुपये केवल ब्याज के लिए आवंटित किए गए हैं. इसमें से 19.25 अरब रुपये सरकार चुका चुकी है.
नेपाल की कुल ऋण देनदारी अब देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 45 प्रतिशत है.
नेपाली रुपये का भारत कनेक्शन क्या है?

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नेपाल ने अपनी मुद्रा को भारतीय रुपये से जोड़कर एक स्थायी विनिमय दर प्रणाली यानी फ़िक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम अपनाया है.
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इसका मूल्य बाजार में भारतीय रुपये के उतार-चढ़ाव से निर्धारित होता है.
नेपाल ने 1960 से अपनी मुद्रा को भारतीय रुपये से फ़िक्स्ड एक्सचेंज रेट सिस्टम से जोड़ा था.
65 साल पहले भी, 100 भारतीय रुपये के मुकाबले 160 नेपाली रुपये की दर तय की गई थी.
समय के साथ, यह दर कभी 101, फिर 135, 142, 170 या 168 तक बढ़ाई गई, लेकिन अब यह दर बहुत लंबे समय से 160 पर ही स्थिर है.
इसलिए, नेपाली मुद्रा की कमज़ोरी भारतीय रुपये की स्थिति पर निर्भर करती है.
डॉलर का मूल्य गिर रहा, फिर भी भारतीय रुपये के मुकाबले मजबूत

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यूं तो 2025 की शुरुआत से ही दुनिया भर के बाज़ारों में अमेरिकी डॉलर के मूल्य में गिरावट हो रही है.
इस साल के पहले छह महीनों में अमेरिकी डॉलर में 11 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो पिछले 50 वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट है. लेकिन भारत के रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत हो रहा है.
भारतीय विश्लेषकों ने रुपये की कीमत में जारी गिरावट का कारण विदेशी निवेशकों के भारत से डॉलर की निरंतर निकासी, भारत का ऊंचा व्यापार घाटा, तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग सिस्टम की अनिश्चितताओं को बताया है.
इसके अलावा, उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ़ और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी ने डॉलर को गिरने से रोका है.
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल अमेरिकी डॉलर में सुधार की कोई संभावना नहीं दिख रही है.
लेकिन नेपाल राष्ट्र बैंक के पूर्व कार्यकारी निदेशक गुनाकर भट्ट का कहना है कि नेपाल अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना भारतीय रुपये के साथ फ़िक्स्ड एक्सचेंज रेट को छोड़ने की स्थिति में नहीं है.
उन्होंने कहा, "जब तक हम अपना घरेलू उत्पादन नहीं बढ़ाते, निर्यात नहीं बढ़ाते, अपने ख़ुद के उद्योगों का विकास नहीं करते, और जब तक हमें ऊर्जा पर बहुत पैसा खर्च करना पड़ता रहेगा, तब तक हमारी मुद्रा कमज़ोर रहेगी."
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में सुधार होने के बाद ही इस मुद्दे पर चर्चा की जा सकती है.
"फिलहाल, हमारी मुद्रा मजबूत और स्थिर होने की स्थिति में नहीं दिख रही है."
डॉलर की मजबूती से नेपाल को फ़ायदे और नुक़सान

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मजबूत अमेरिकी डॉलर का नेपाल की अर्थव्यवस्था पर कई तरह से असर पड़ता है.
डॉलर के महंगा होने से नेपाल के आयात शुल्क पर सबसे पहले असर पड़ेगा. जुलाई में शुरू हुए इस वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में आयात 609 अरब रुपये रहा.
डॉलर के मूल्य में वृद्धि होने से आयात पर खर्च की जाने वाली राशि अपने आप ही बढ़ जाती है, जिसके कारण घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ जाती हैं.
इससे विदेश जाने वाले नेपाली छात्रों और विदेश जाने वाले नेपाली नागरिकों दोनों के खर्च बढ़ जाते हैं.
वहीं इससे नेपाल के निर्यात को फ़ायदा हो सकता है क्योंकि जब डॉलर महंगा होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में नेपाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमत सस्ती हो जाती है.
इसका एक और फ़ायदा विदेश से नेपाली लोगों का अपनी आय भेजने के मामले में मिलता है. इसके अलावा डॉलर की मज़बूती से नेपाल विदेशी पर्यटकों के लिए और भी आकर्षक बन सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.














