क़ासिम और सुलेमान: इमरान ख़ान के बेटों की बेनज़ीर भुट्टो और मरियम नवाज़ से तुलना क्यों हो रही है?

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- Author, आज़म ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद
अडयाला जेल में क़ैद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) ने एक बार फिर बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है. इमरान ख़ान ने इसकी मंजूरी दे दी है.
लेकिन इस बार के आंदोलन में एक नई बात हो सकती है. इमरान ख़ान के दोनों बेटे क़ासिम और सुलेमान ख़ान इसमें हिस्सा ले सकते हैं.
देश की राजनीति और पीटीआई पर पड़ने वाले इसके असर के बारे में पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर भी ज़ोर-शोर से चर्चा हो रही है.
सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स ने इस बहस में परिवारवादी राजनीति पर बात की तो कुछ लोगों ने क़ासिम और सुलेमान की तुलना बेनज़ीर भुट्टो और मरियम नवाज़ से करते हुए लिखा कि दोनों ने ही अपने पिता की क़ैद के बाद सियासी मैदान में क़दम रखा.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो की क़ैद के दौरान बेनज़ीर भुट्टो राजनीतिक तौर पर सक्रिय हुई थीं और बाद में उन्होंने ही पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की बागडोर संभाली थी.
आज उनके बेटे बिलावल भुट्टो पार्टी के चेयरमैन हैं. इधर, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की बेटी मरियम नवाज़ अब पंजाब की मुख्यमंत्री हैं.
पाकिस्तान समेत दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण मिलते हैं. लेकिन अब तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि क़ासिम और सुलेमान राजनीतिक तौर पर किस तरह और किस हद तक सक्रिय होंगे.
दोनों अपनी मां जेमाइमा ख़ान के साथ ब्रिटेन में ही रहते हैं और इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री रहने के दौरान भी उनकी किसी तरह की राजनीतिक भूमिका सामने नहीं आई.
हालांकि पिछले कुछ दिनों में उन्होंने सोशल मीडिया पर इमरान ख़ान की क़ैद के बारे में बातचीत की है और कुछ इंटरव्यू भी दिए हैं.
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इमरान ख़ान के बेटे अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी को एक बड़ा आंदोलन चलाने में मदद दे सकते हैं?
यह सवाल भी अपनी जगह अहम है कि अगर वह पाकिस्तान आते हैं तो पीटीआई पर क्या असर पड़ेगा?
अलीमा ख़ान का बयान और राना सनाउल्ला की 'वॉर्निंग'

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क़ासिम और सुलेमान के बारे में पहला बयान अडयाला जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए इमरान ख़ान की बहन अलीमा ख़ान ने दिया था.
उन्होंने बताया था कि क़ासिम और सुलेमान ख़ान ने कहा है कि पहले वो अमेरिका का रुख़ करेंगे और वहां जाकर बताएंगे कि पाकिस्तान में मानवाधिकारों की क्या स्थिति है.
अलीमा ख़ान के मुताबिक़ अमेरिका के बाद वह पाकिस्तान आएंगे. वो इस आंदोलन में भागीदारी निभाना चाहते हैं.
इसके बाद प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के सलाहकार राना सनाउल्ला ख़ान ने स्थानीय टीवी चैनलों को इंटरव्यू देते हुए यह संकेत दिया कि अगर इमरान ख़ान के बेटों ने पाकिस्तान में किसी तरह के आंदोलन में हिस्सा लिया तो उन्हें गिरफ़्तार किया जा सकता है.
इस बयान पर पीटीआई की प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जिसमें कहा गया कि अलीमा ख़ान ने बताया है कि क़ासिम और सुलेमान पाकिस्तान आने का इरादा रखते हैं क्योंकि कई महीनों से उनका अपने पिता से संपर्क नहीं करवाया गया है.
इस बयान में यह भी कहा गया कि इस बयान को गंभीरता से देखना चाहिए और किसी लोकतांत्रिक समाज में राजनेताओं के परिवारवालों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.
पीटीआई के सोशल मीडिया हैंडल पर जारी होने वाले बयान में कहा गया कि क़ासिम और सुलेमान की सुरक्षा को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहिए और ना ही उसे ख़तरे में डालना चाहिए.
'कार्यकर्ताओं को नया जज़्बा मिलेगा'

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अलीमा ख़ान के बयान के बाद पीटीआई के कई नेताओं ने यह उम्मीद ज़ाहिर की है कि इमरान ख़ान के बेटे न केवल पाकिस्तान आएंगे बल्कि वो आंदोलन का भी हिस्सा बनेंगे.
इमरान ख़ान और उनके परिवार के क़रीबी समझे जाने वाले ज़ुल्फ़ी बुख़ारी ने बीबीसी से बात करते हुए उनके बेटों के आंदोलन में शामिल होने की पुष्टि की. इसके साथ ही उनकी पाकिस्तान वापसी की भी संभावना जताई. ज़ुल्फ़ी बुख़ारी की राय में "इससे बहुत फ़र्क़ पड़ेगा और कार्यकर्ताओं को नया जज़्बा मिलेगा."
लेकिन विश्लेषक ज़ैग़म ख़ान ने कहा कि इस वक़्त इमरान ख़ान के बेटों का पाकिस्तान आना मुश्किल दिखाई देता है.
राजनीतिक विश्लेषक ज़ैग़म ख़ान को नहीं लगता कि इमरान ख़ान के बेटों के पास पाकिस्तानी पासपोर्ट भी होगा.
उनके मुताबिक़ ऐसी स्थिति में एफ़आईए (फ़ेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) एयरपोर्ट से ही उनका वीज़ा रद्द कर सकती है.
गिरफ़्तारी के बारे में सवाल पर उनका कहना था कि यह केवल डराने और धमकाने के लिए किया जा रहा है.
'इमरान ख़ान के बेटे क्या भूमिका निभा सकते हैं'

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वरिष्ठ पत्रकार मज़हर अब्बास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि इमरान ख़ान के बेटे पहली बार 5 अगस्त से इमरान ख़ान की रिहाई के लिए शुरू होने वाले आंदोलन का हिस्सा बनेंगे.
उन्होंने लिखा, "पूर्व प्रधानमंत्री की बहन पहले ही पहली पंक्ति में खड़ी हैं और अब उनके बेटों की भूमिका और भविष्य की राजनीति पर ज़ोर-शोर से चर्चा हो रही है."
ज़ैग़म ख़ान की राय में पूर्व प्रधान मंत्री के दोनों बेटे "समंदर पार रहते हुए पाकिस्तानियों को सक्रिय कर सकते हैं. वो ब्रिटिश इलीट का हिस्सा हैं. वो वहां नीति निर्धारकों पर भी असर डाल सकते हैं."
अंग्रेज़ी अख़बार 'द नेशन' से जुड़े और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) की सियासत पर गहरी नज़र रखने वाले पत्रकार इमरान मुख़्तार की राय में "अगर सभी नई रुकावटों के बावजूद वो पाकिस्तान आ जाते हैं तो यहां के सख़्त मौसम और मुश्किल हालात में उनके लिए राजनीतिक आंदोलन चलाना इतना आसान नहीं होगा."
इमरान मुख़्तार के अनुसार, "इस समय पीटीआई नेताओं पर कई मुक़दमे चल रहे हैं और सत्ता और भी सख़्त रवैया रखे हुए हैं तो ऐसी पार्टी का नेतृत्व एक चैलेंज से कम नहीं होगा."
ज़ैग़म ख़ान के अनुसार आंदोलन का संबंध जनता के मूड पर भी है.
वो कहते हैं, "अगर हर दिन अचानक मगर लगातार लोग बड़ी संख्या में निकलते रहे तो यह कहा जा सकता है कि यह आंदोलन रंग ला सकता है, वर्ना ऐसा आंदोलन कामयाब नहीं हो सकता जहां लोग केवल 26 तारीख़ को निकलें और फिर 27 तारीख़ को उनका पता भी न चले कि वो गए किधर हैं."
राजनीति में परिवारवाद

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राजनीति में परिवारवाद शायद तीसरी दुनिया के देश, ख़ास तौर पर दक्षिण एशियाई देशों में एक आम बात है.
पाकिस्तान की राजनीति में भी परिवारवाद पर बहस पुरानी है. पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के बाद उनकी बहन फ़ातिमा जिन्ना राजनीतिक परिदृश्य पर सामने आईं और सैनिक तानाशाह अय्यूब ख़ान के ख़िलाफ़ राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा लिया.
पाकिस्तान के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िक़ार अली भुट्टो को जनरल ज़ियाउल हक़ के मार्शल लॉ में जेल जाना पड़ा तो उनकी पत्नी नुसरत भुट्टो और उनकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो ने विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया.

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मुस्लिम लीग (नवाज़) में नवाज़ शरीफ़ के साथ शहबाज़ शरीफ़ और अब मरियम नवाज़ जैसे उदाहरण मौजूद हैं.
इधर, एएनपी (अवामी नेशनल पार्टी) में ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार ख़ान, जो बाचा ख़ान के नाम से मशहूर हुए, के परिवार ने ही पार्टी का नेतृत्व किया.
भारत में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं, जिनकी हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने. आज कांग्रेस पार्टी में उनके बेटे राहुल गांधी अहम भूमिका निभा रहे हैं.
बांग्लादेश में भी देश के पहले प्रधानमंत्री शेख़ मुजीबुर्रहमान की हत्या के बाद उनकी बेटी शेख़ हसीना राजनीतिक तौर पर सक्रिय हुईं और हाल ही में लंबे अरसे तक सत्ता में बने रहने के बाद उनकी सरकार का तख़्ता एक बड़े आंदोलन के बाद पलट दिया गया.
पत्रकार सीरिल अलमीदा ने सोशल मीडिया पर लिखा, "परिवारवाद विरोधी इमरान ख़ान सीख रहे हैं कि पारिवार राजनीति से क्यों इस हद तक जुड़ा हुआ है क्योंकि केवल यही वो लोग हैं जिन पर निर्णायक घड़ी में लड़ाई के लिए भरोसा किया जा सकता है यानी एक ऐसे वक़्त में जब आप मुश्किल में घिरे हुए हों."
परिवारवादी राजनीति की आलोचना पर ज़ैग़म ख़ान ने कहा कि यह सही है कि अब इमरान ख़ान की राजनीति भी परिवारवाद की तरफ चल निकली है.
उनकी राय में, "इमरान ख़ान की बहन अलीमा ख़ान पहले ही महत्वपूर्ण पद पर हैं और अब उनके बेटे भी जब इस आंदोलन में शामिल होंगे तो फिर वो भी किसी और को मुख्य भूमिका नहीं लेने देंगे.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
















