सेंसेक्स 1400 अंक गिरकर हुआ बंद और निफ़्टी में भी ज़बरदस्त गिरावट, क्या है वजह?

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भारतीय शेयर बाज़ारों के लिए 28 फ़रवरी का दिन 'ब्लैक फ़्राइडे' साबित हुआ. सेंसेक्स 1400 अंक गिरकर 73,198 पर बंद हुआ तो वहीं निफ़्टी 420 अंक गिरकर 22,124 पर बंद हुआ.
शुक्रवार को बाज़ार खुलते ही बीएसई के तीस शेयरों वाले सेंसेक्स और एनएसई के पचास शेयरों वाले निफ्टी इंडेक्स में भारी गिरावट देखने को मिली.
सेंसेक्स में एक समय में 1400 पॉइंट तक की गिरावट आ गई था. हालांकि बीच-बीच में कुछ सुधार भी दिखा. सेंसेक्स साढ़े ग्यारह बजे तक लगभग 1000 पॉइंट यानी 1.28 फ़ीसदी गिरकर 73,660 पर पहुंच गया था और एक बजते-बजते ये 1400 अंकों तक टूट गया.
उधर इस दौरान निफ्टी 282 प्वाइंट यानी 1.25 फ़ीसदी गिरकर 73660 अंक पर पहुंच गया.
बैंकिंग और आईटी सेक्टर के बड़े शेयरों में गिरावट की वजह से बाज़ार पर दबाव बना. स्मॉल, मिडकैप शेयरों के दाम सबसे ज़्यादा गिरे.
भारत के शेयर बाज़ार के लिए फ़रवरी का महीना ख़ास नहीं रहा है. जानकार इसका संबंध अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका से जोड़ रहे हैं.

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भारतीय बाज़ार पर ट्रंप का असर?

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शुक्रवार को भारत में जीडीपी वृद्धि पर आधिकारिक आंकड़े भी जारी होने हैं. कुछ जानकार गिरावट को इससे जोड़ कर भी देख रहे हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स ने शेयर बाज़ार में शुक्रवार को आई इस भारी गिरावट के पीछे पाँच वजहें गिनाई हैं.
इनमें जीडीपी के आंकड़े आने से पहले घबराहट, टैरिफ़ के मुद्दे पर ट्रंप का अस्पष्ट रुख, आईटी सेक्टर के शेयरों पर दबाव, डॉलर का चढ़ना और विदेशी संस्थागत निवेश यानी एफ़आईआई की बिकवाली का जारी रहना शामिल है.
गुरुवार यानी 27 फ़रवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कनाडा और मेक्सिको से आने वाले उत्पादों पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ दो अप्रैल नहीं बल्कि चार मार्च से प्रभावी हो जाएंगे. ट्रंप ने चीन से आने वाले उत्पादों पर भी 10 फ़ीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने की बात कही.
ट्रंप के इन बयानों ने दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड वॉर के तेज़ होने की आशंकाओं को हवा दे दी.
निवेशकों को क्या है डर?

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शुक्रवार को लगभग सभी सेक्टरों के शेयर लाल निशान पर रहे लेकिन जिनमें भारी गिरावट देखी गई उनमें आईटी, ऑटो, मीडिया और टेलीकॉम सेक्टर शामिल हैं. इन सभी सेक्टरों में दो से तीन फ़ीसदी तक की गिरावट आई.
बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी दो फ़ीसदी तक गिरे.
सेंसेक्स में सबसे ज़्यादा घाटा इंडस-इंड बैंक को हुआ, जिसके शेयर 4.44 फ़ीसदी तक गिर गए. इसके बाद एमएंडएम और एचसीएल टेक ने सबसे ज़्यादा नुकसान झेला.
इनके अलावा इन्फ़ोसिस, टीसीएस, भारती एयरटेल, टाटा मोटर्स और टाइटन के शेयर भी लाल निशान पर रहे.
रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिटेल रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डॉ.रवि सिंह ने शेयर ब़ाजार में इस गिरावट की वजहें बताईं.
उन्होंने कहा, "एक जनवरी से अब तक सभी सेक्टरों के शेयरों में कम से कम 20 से 25 फ़ीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. इनमें बैंक, आईटी, डिफेंस, ऑटो, पावर, एफएमसीजी, रियलिटी, एनबीएफसी, फर्टिलाइजर, शुगर जैसे सेक्टर हैं. दरअसल इतने सारे सेक्टरों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह ये है कि इकोनॉमी में जो बूस्ट दिखना चाहिए वो नहीं दिखा है.''
उन्होंने कहा,"दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ़ लगाने के ऐलान से बाज़ार में नकारात्मकता आई और इसका असर शेयरों में गिरावट के तौर पर देखने को मिला. इसके अलावा कंपनियों की पिछली तीन तिमाहियों से कमाई घटती दिख रही है. इसका असर शेयर बाज़ार पड़ा है. चीन की मेटल और निवेश पॉलिसी का भी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर निगेटिव असर पड़ा है. इस वजह से भारतीय शेयर ब़ाजार गिरा है.''
रवि सिंह का कहना है कि दुनिया भर में जियोपॉलिटिकल चिंताएं अभी भी कम होती नहीं दिखाई देती. रूस-यूक्रेन के मोर्चे पर अनिश्चितता बनी हुई है. इस वजह से कच्चे तेल के दाम को लेकर भी आशंकाएं बरकरार हैं. इस वजह से भारतीय बाज़ारों में गिरावट देखने को मिली है.

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के कमोडिटीज और करेंसी हेड अनुज गुप्ता ने बताया कि दरअसल अंतरराष्ट्रीय कारोबारी दुनिया में इस समय अनिश्चितता का माहौल है.
उनके मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से चीन के ख़िलाफ़ लगातार टैरिफ़ के ऐलान ने ग्लोबल शेयर बाजार में आशंका बढ़ा दी है. इस वजह से लोगों ने शेयर बेचने शुरू किए हैं. भारतीय बाज़ार भी इसी वजह से गिरे हैं.
उन्होंने कहा, "बाज़ार में अभी भी सेंटिमेंट काफ़ी कमज़ोर हैं. इस सेंटिमेंट में सुधार के बगैर हालात सुधरना मुश्किल है. भारतीय बाजार में कई एसेट क्लास में गिरावट है इसलिए गिरावट जारी है."
मनी कंट्रोल से बात करते हुए जियोजित फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ के चीफ़ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा, "शेयर बाज़ार को अनिश्चतता नापसंद है और अनिश्चतता तबसे बरकरार है, जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए."
उन्होंने कहा, "ट्रंप जो लगातार टैरिफ़ की घोषणा करते जा रहे हैं, वह बाज़ार को प्रभावित कर रहा है. चीन पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की उनकी हालिया घोषणा बाज़ार के इस नज़रिए पर मुहर लगाने जैसा है कि ट्रंप अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में अमेरिका के हित के लिए मोलभाव करने की खातिर, दूसरे देशों को टैरिफ़ से डराने में करेंगे. अब चीन इस टैरिफ़ पर क्या जवाब देगा, ये देखना बाकी है."
हालांकि, उन्होंने ये भी संभावना जताई कि मार्च महीने में भारतीय बाज़ार रिकवरी करेगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित












