विराट कोहली की नाकामी का सिलसिला कब थमेगा?

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पर्थ टेस्ट के पहले दिन कप्तान रोहित शर्मा की ग़ैरमौजूदगी में सबसे ज़्यादा उम्मीदें टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी विराट कोहली से थीं, मगर उनका बल्ला नहीं चला
    • Author, संजय किशोर
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

पर्थ टेस्ट के पहले दिन भारत के बल्लेबाज़ों की नाकामी को बहुत हद तक जसप्रीत बुमराह ने अपनी गेंदबाज़ी से थाम लिया है.

मैच के पहले दिन मुक़ाबला बराबरी का नहीं बल्कि भारत के पक्ष में दिख रहा है, तो इसकी वजह जसप्रीत बुमराह की गेंदबाज़ी है.

उन्होंने इस टेस्ट से पहले कहा भी था, “क्रिकेट की ख़ूबसूरती यही है कि अगर आप जीतते हैं तो भी आप शून्य से शुरुआत करते हैं, अगर आप हारते हैं तो भी आप शून्य से शुरुआत करते हैं. मैं खेल को इसी तरह देखता हूं.”

लेकिन, पर्थ टेस्ट के पहले दिन कप्तान रोहित शर्मा की ग़ैरमौजूदगी में सबसे ज़्यादा उम्मीदें टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी विराट कोहली से होनी लाज़िमी थी.

दोनों देशों के पूर्व क्रिकेटर, क्रिकेट पत्रकार और जानकार से लेकर आम क्रिकेट प्रेमी विराट कोहली को दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर बता रहे थे. उनके पिछले प्रदर्शनों को देखते हुए उनकी शान में कसीदे गढ़े जा रहे थे.

बीबीसी हिंदी का व्हॉट्सऐप चैनल
इमेज कैप्शन, बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

वाका की पिच तेज़

यशस्वी जायसवाल

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का साहसिक फ़ैसला लिया. लेकिन, यशस्वी जायसवाल कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके

पर्थ की वाका (वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट एसोसिएशन) पिच पेस और बाउंस के लिए जानी जाती है. भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का साहसिक फ़ैसला लिया.

युवा यशस्वी जायसवाल और देवदत्त पाडिक्कल चौदह रन बनते-बनते पवेलियन में थे.

ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाज़ों ने उन्हें पुल या कट करने का कोई मौक़ा नहीं दिया, और सुरक्षित रूप से ड्राइव करने के लिए कोई आसान गेंद नहीं डाली.

बचकाने तरीक़े से हुए आउट

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, खेल के जानकार कोहली के आउट होने से ज़्यादा उनके नौसिखिए तरीक़े से आउट होने के तरीक़े से स्तब्ध रह गए.

बारहवें ओवर में ही विराट कोहली को क्रीज़ पर आना पड़ा. मगर, दुनिया का बेहतरीन माने जाना बल्लेबाज़ बारहवीं गेंद पर ही आउट हो गया.

जानकार उनके आउट होने से ज़्यादा उनके नौसिखिए तरीक़े से आउट होने से स्तब्ध रह गए. इस पिच पर उनका क्रीज़ से बाहर निकल कर बल्लेबाज़ी करना किसी की समझ नहीं आया.

ये भी पढ़ें

आत्मविश्वास की कमी झलकी

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, कोहली को निर्णय लेने में ग़लती हुई या उनके रिफ़्लेक्स कमज़ोर हो रहे हैं ये बहस का विषय है. लेकिन, उनके प्रदर्शन में गिरावट आ रही है.

शायद आपको याद होगा कि इसी मैदान पर विराट कोहली ने 2018 में 123 रनों की पारी खेली थी. तब और आज के उनके स्टांस में उनके घटते आत्मविश्वास को देखा जा सकता है.

तब उनका पिछला पैर पॉपिंग क्रीज़ के ठीक बाहर होता था. गेंद की रफ़्तार और पिच को भाँप कर पैरों का मूवमेंट होता था. इस बार पिछला पैर क्रीज़ से दो फ़ीट आगे रख रहे थे.

ऐसे में पीछे जाकर गेंद को बल्ले पर नहीं ले पाए.

जॉस हेज़लवुड ने ओवरपिच गेंद नहीं डाली. बैक ऑफ़ द लेंथ गेंद ऊपर उठ रही थी. फ़्रंट फ़ुट पर खेलते हुए कोहली ने फ़र्स्ट स्लिप पर कैच थमा दिया.

कोहली को गेंद छोड़ देनी चाहिए थी. ज़ाहिर है विराट कोहली बेहद दबाव में हैं.

पुजारा का बयान

स्टार स्पोर्ट्स पर कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने कोहली की पाँच रन की छोटी पारी का विश्लेषण करते हुए कहा,

“क्रीज़ से बाहर खड़े होने की वजह से विराट कोहली के लिए उठती हुई गेंद के साथ सामंजस्य बैठाने के लिए समय नहीं था. क्रीज़ से बाहर खड़े होने का मक़सद गेंद के ऊपर पहुँचना होता है.”

“लेकिन, जब पिच में बाउंस होता है तो आपको यह मौक़ा नहीं मिल पाता. अगर वह बैकफ़ुट पर होते तो उस गेंद पर आउट नहीं होते.”

कोहली को 10वीं बार हेज़लवुड ने अपना शिकार बनाया. वो कोहली को तीनों फ़ॉर्मेट में मिलाकर सबसे ज़्यादा बार आउट करने वाले ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ भी बन गए.

इससे पहले जेम्स एंडरसन और मोईन अली भी कोहली को 10-10 बार आउट कर चुके हैं.

सोशल मीडिया पर कोहली तुरंत ही ट्रोल होने लग गए. लोगों ने कहा- इससे ख़राब तरीक़े से आउट नहीं हुआ जा सकता था.

कोहली को निर्णय लेने में गलती हुई या उनके रिफ़्लेक्स कमज़ोर हो रहे हैं ये बहस का विषय है लेकिन पिछले चार साल से उनके करियर ग्राफ़ में गिरावट आई है.

पिछली सफलता को दोहराने की उम्मीद

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर विराट ने 14 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें 52.19 की औसत से 1357 रन बनाए हैं.

विराट कोहली का ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शन ज़बरदस्त रहा है, इसलिए उनसे उम्मीदें भी बहुत ज़्यादा हैं.

सबसे बड़ी बात उन्हें ऑस्ट्रेलिया में और ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेलने में मज़ा आता है.

वहाँ पिचें उनकी बल्लेबाज़ी के लिये अनुकूल हैं. ऑस्ट्रेलियाई टीम, वहाँ के दर्शकों और माहौल में जो चुनौती बनती है, कोहली का इन परिस्थितियों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देखा गया है.

ऑस्ट्रेलिया की ज़मीन पर विराट ने 14 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें 52.19 की औसत से 1357 रन बनाए हैं जिसमें छह शतक शामिल हैं.

पर्थ में खेली थी सर्वश्रेष्ठ पारी

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, पर्थ की विकेट दुनिया की सबसे तेज़ पिच मानी जाती है. यहाँ कि उछाल भरी पिच बल्लेबाज़ों के लिए कड़ी चुनौतियां पेश करती है.

2018-19 में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी के दौरान पर्थ में उनका 123 रन का प्रदर्शन, जिसमें 13 चौके और एक छक्का शामिल था, ऑस्ट्रेलिया में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.

पर्थ की विकेट दुनिया की सबसे तेज़ पिच मानी जाती है. यहाँ कि उछाल भरी पिच बल्लेबाज़ों के लिए कड़ी चुनौतियां पेश करती है.

विराट ने बीसीसीआई टीवी से कहा था, "ऑस्ट्रेलिया में मेरी सर्वश्रेष्ठ पारी निश्चित रूप से पर्थ में मेरे 100 रन की होगी. 2018-19 श्रृंखला हमने खेली थी. मुझे लगा कि टेस्ट क्रिकेट में वह सबसे कठिन पिच थी, जिस पर मैंने खेला.”

2008 में करियर की शुरुआत

विराट कोहली.

इमेज स्रोत, ANI

इमेज कैप्शन, साल 2016 में कोहली का बल्लेबाज़ी औसत 86.50 तक पहुंच गया. 2015 से 2019 तक उनका करियर बुलंदियों पर था.

कोहली का अंतरराष्ट्रीय करियर 2008 में 31.80 के मामूली औसत के साथ शुरू हुआ, लेकिन जल्दी ही वह खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में स्थापित कर चुके थे.

साल 2016 में कोहली का बल्लेबाज़ी औसत 86.50 तक पहुंच गया. 2015 से 2019 तक उनका करियर बुलंदियों पर था. अति महत्वाकांक्षी विराट कोहली 4 में से 1 मैच में शतक लगा रहे थे.

2020 में उनका औसत तेज़ी से गिरकर 19.33 हो गया. 2021 और 2022 में संघर्ष करते रहे. इन दोनों साल उनका औसत क्रमशः 28.21 और 26.50 तक जा गिरा.

कोहली ने 2023 में 55.91 के औसत के साथ वापसी के संकेत दिए थे.

साल 2023 में उन्होंने कुल 8 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 671 रन बनाए. इनमें 2 शतक और दो अर्धशतक शामिल थे.

अहमदाबाद में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध 186 रन के बाद विराट कोहली की बड़ी पारी नहीं आई.

मगर, 2024 में उनका हालिया प्रदर्शन चिंताजनक रहा है, इस साल सात टेस्ट की 13 पारियों में बग़ैर शतक के 255 रन बना पाए हैं और औसत 21.25 रहा है.

कोविड काल के बाद से करियर ढलान पर

2020 से 61 पारियों में कोहली 1843 रन बना पाए हैं जिसमें दो शतक और नौ अर्धशतक शामिल हैं और औसत है 31.23 जबकि 2019 तक 84 टेस्ट में उनका औसत था 54.97 और वे 27 शतक और 22 अर्धशतक सहित 7202 रन बना चुके थे.

पिछली दस पारियों में कोहली बुरी तरह नाकाम रहे हैं. बांग्लादेश के ख़िलाफ़ दो टेस्ट में 99 और न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ तीन टेस्ट में 93 रन उस बल्लेबाज़ी के प्रदर्शन की छाया भर नहीं है.

क्या यह विराट कोहली का अंत है?

36 साल के कोहली के लिए ऑस्ट्रेलिया में शायद ये आख़िरी बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी है.

उनकी विफलता के पीछे तकनीकी ख़ामियाँ तो हैं ही साथ ही उम्मीदों के दबाव का असर उनके आत्मविश्वास पर दिख रहा है.

कई दिग्गज घरेलू क्रिकेट को नज़रअंदाज़ करना भी उनके फ़ॉर्म की वजह बता रहे हैं. फिर आप उम्र को झुठला नहीं सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और व्हॉट्सऐप पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)