ट्रंप को इराक़ की बधाई पर क्यों भड़का विवाद, क्या है पूरा मामला

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव जीतने पर बधाई देने वाले इराक़ी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई है.

जैसे ही इन दोनों ने उन्हें बधाई दी वैसे ही इराक़ी सामाजिक कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों ने उनके ख़िलाफ़ इराक में जारी किए अरेस्ट वारंट की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर सर्कुलेट कर दी.

ट्रंप के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का ये वारंट जनवरी 2021 में जारी हुआ था.

ट्रंप की ओर से इराकी मिलिशिया नेता अबु मेहदी अल-मुहांदिस और ईरान के सर्वोच्च कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या का आदेश देने पर इराक़ की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने ट्रंप के ख़िलाफ़ ये आदेश जारी किया था. 2020 में अमेरिका के मिसाइल हमले में दोनों की मौत हो गई थी.

अमेरिकी मिसाइलों ने बग़दाद हवाई अड्डे पर सुलेमानी के काफ़िले पर हमला किया था वहीं इराक के एक प्रमुख मिलिशिया के उप प्रमुख अबु महदी अल-मुहांदिस को एक मिलिट्री हमले में मारा गया था. इन हमलों को ट्रंप के पहले कार्यकाल को मंज़ूरी दी गई थी.

सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने उस समय जारी एक आधिकारिक बयान में कहा था,'' ये फैसला (ट्रंप की गिरफ़्तारी के लिए वारंट) मौजूदा इराकी दंड संहिता के अनुच्छेद 406 के प्रावधानों के तहत लिया गया है.''

इसमें कहा गया था कि इस अपराध को अंजाम देने वाले दूसरे भागीदारों की पहचान के लिए जांच प्रक्रिया जारी रहेगी, चाहे वो इराक़ी हों या विदेशी.

बुधवार को इराकी राष्ट्रपति अब्दुल लतीफ़ ज़मा रशीद ने ट्रंप को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जीत की बधाई देते हुए कहा था, ''हमें उम्मीद है कि अब इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का नया दौर आएगा.''

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग

कई सोशल मीडिया यूज़र इराक के राष्ट्रपति के इस बदले रुख़ पर हैरत जता रहे हैं.

ट्रंप के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वांरट जारी करने वालों के बाद लोगों का ये कहना है कि इराक़ के साथ नए अमेरिकी राष्ट्रपति क्या सुलूक करें, इसका सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

कइयों का मानना है कि रशीद का ट्रंप को बधाई देना इराक़ की न्यायपालिका के आदेश की अवमानना है.

इराक़ी प्रधानंमत्री मोहम्मद शिया अल-सूडानी ने भी ट्रंप और उप राष्ट्रपति बनने जा रहे जेडी वेन्स को बधाई दी है.

उन्होंने चुनावी प्रक्रिया के सफल संचालन पर अमेरिका को बधाई देते हुए कहा है इराक अमेरिका के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है.

कुछ लोग सोशल मीडिया पर ट्रंप के गिरफ़्तारी वारंट से जुड़े ट्वीट और सर्वोच्च न्यायिक परिषद के आदेश का वीडियो भी सर्कुलेट कर रहे हैं.

कुछ लोग ये भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस गिरफ़्तारी वारंट को देखते हुए आने वाले दिनों में अमेरिका और इराक़ के रिश्तों का क्या होगा.

ऐसे ट्वीट भी सर्कुलेट हो रहे हैं जिनमें इस बात के संकेत दिए जा रहे हैं कि सीरिया और यमन में भी ट्रंप के ख़िलाफ़ वारंट जारी हो सकते हैं.

इराकी संसद की विदेश संबंध कमेटी ने बुधवार को जारी बयान जारी किया.

इसमें कहा गया है कि कमेटी में इस बात पर विचार हुआ कि राष्ट्रपति चुनाव में जीत के बाद इराक़ डोनाल्ड ट्रंप के साथ रिश्तों लेकर कैसे आगे बढ़ेगा.

खासकर उस स्थिति में जब देश की सर्वोच्च न्यायिक परिषद ने पहले ही उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी कर रखा है.

कमेटी के सदस्य मुख़्तार अल मुसावी ने कहा,’’ इराकी कानूनी के मुताबिक़ ट्रंप इराक़ के लिए एक अपराधी हैं. लेकिन इराक़ उनके साथ किसी भी मामले में सामान्य तौर ही आगे बढ़ेगा. क्योंकि ऐसा करना इराक़ के हित में है. व्हाइट हाउस में ट्रंप के आने से इराक़ और अमेरिका के बीच के रिश्तों पर असर नहीं पड़ेगा. अमेरिका संंस्थानों का देश है और अहम विदेशी मामलों में वहां कोई भी राष्ट्रपति आए इससे बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है.’’

अरब के मीडिया को ट्रंप पर ज्यादा भरोसा नहीं

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की जीत को लेकर अरब के देशों के मीडिया में तीखी बहस चल रही है.

अरब के ज्यादातर मीडिया आउटलेट्स का कहना है कि ट्रंप के आने से मध्यपूर्व में शांति आएगी इसकी कोई गारंटी नहीं है.

अल जज़ीरा ने ट्रंप की जीत पर फ़लस्तीन के जिन लोगों से बात की उन्हें इस बात की पूरी आशंका है कि ट्रंप के आने से इसराइल की नृशंसता और बढ़ेगी क्योंकि प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से उनकी काफ़ी क़रीबी है. अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने नेतन्याहू से दोस्ती दिखाई थी.

'तेहरान टाइम्स' लिखता है कि ट्रंप ने ग़ज़ा संघर्ष ख़त्म कराने का वादा किया था. लेकिन अब ये साफ हो गया है कि ऐसा वो इसलिए कह रहे थे कि कमला हैरिस के वोट रिपब्लिकन पार्टी को मिल सके.

अख़बार ने लिखा है, ''ट्रंप और हैरिस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. दोनों को इसराइल की ओर से मारे जा रहे फल़स्तीनियों और लेबनानी लोगों की जान की कोई परवाह नहीं है. हैरिस की हार ये दिखाती है कि अमेरिकी लोग उनके देश की ओर से इसराइल को दी जा रही मदद को लेकर कितने हताश हैं.''

अरब न्यूज़' लिखता है कि मध्य-पूर्व में ट्रंप की नीतियों से सबसे ज्यादा चिंतित होने की ज़रूरत किसी को है तो वो है ईरान.

अख़बार लिखता है कि अपने चुनावी अभियान के दौरान ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले की संभावनाओं पर बात की थी. उनका कहना था कि अमेरिका को पहले उन पर हमला करना चाहिए था और फिर बात करनी चाहिए थी.

अख़बार ने लिखा है कि ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में ईरान और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ ज़्यादा कड़ा रुख़ अख़्तियार कर सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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