‘मैं आंखों के सामने अपने घर को गिरते हुए देख रही थी, पर कुछ नहीं कर सकी’

सौरभ परिवार
इमेज कैप्शन, 14 अगस्त को शिव मंदिर हादसे में 17 साल के सौरभ की मौत हो गई. परिवार अभी भी सदमे में है.
    • Author, अरविंद छाबड़ा
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ पंजाबी, शिमला से लौटकर

“मैंने अपना घर गिरते हुए देखा. आप कल्पना नहीं कर सकते कि जब मैंने उसे गिरते देखा तो कैसा महसूस हुआ.”

आपबीती बताते हुए 45 साल की सुमन की आवाज़ कांप जाती है.

बीते 15 अगस्त को हुई भारी बारिश के कारण उनका घर गिर गया और इस मंज़र को याद करते हुए वो भावुक हो गईं.

उन्होंने बताया, “मैं चिल्लाई, और फिर ज़ोर से चिल्लाई. लेकिन मैं कुछ नहीं कर सकती थी.”

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहाड़ पर बसा शहर है और अंग्रेज़ों के ज़माने के आकर्षण और शांत माहौल के लिए जाना जाता है. शहर के बीचों बीच सुमन के परिवार ने सालों की मेहनत से घर बनाया था.

लेकिन उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हुई मूसलाधार बारिश और इसकी वजह से व्यापक भूस्खलन में सुमन और उनके परिवार की मेहनत का फल बह गया.

आज वो हिमाचल प्रदेश सरकार के बनाए गए अस्थाई राहत कैंपों में आसरा लिए हुए हैं.

प्रकृति के प्रकोप से उन्हीं की तरह बेघर हुए कई लोग वहां शरण लिए हुए हैं.

सुमन की आंखों के सामने उनका घर ध्वस्त हो गया.
इमेज कैप्शन, सुमन की आंखों के सामने उनका घर ध्वस्त हो गया

सुमन कहती हैं, “हमारे मां बाप ने अपनी ज़िंदगी भर की कमाई को इस घर को बनाने में लगा दिया. अब ये देखना बर्दाश्त के बाहर है.”

अपने सपने के घर के लिए योजना बनाने और संसाधान जुटाने के लिए रात रात भर जागने की याद अभी भी उन्हें साल रही है.

वो कहती हैं, “अब हम कोई घर बनाना नहीं चाहते. हमने हार मान ली है.” उनकी आवाज़ में भविष्य की चिंता साफ़ झलक रही थी.

लेकिन ये सिर्फ एक सुमन की कहानी नहीं है बल्कि मानसून की बारिश ने जिस अभूतपूर्व पैमाने पर तबाही मचाई है, पूरे हिमाचल प्रदेश में उनके जैसे हज़ारों पीड़ित हैं.

भयंकर बारिश और इसके बाद पड़े प्रभाव ने भारी नुकसान और ज़िंदा बचे रहने की जद्दोजहद के लिए लोगों को मजबूर कर दिया है.

सरकार की रिपोर्ट कहती है कि भूस्खलन और बाढ़ के कारण 348 लोगों की मृत्यु हो गई.
इमेज कैप्शन, हिमाचल सरकार की रिपोर्ट कहती है कि भूस्खलन और बाढ़ के कारण 348 लोगों की मौत हो गई

348 लोगों की मौत, हज़ारों बेघर

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इस तबाही के बीच जो आंकड़े हैं वो कहीं भयावह तस्वीर पेश करते हैं.

राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह के बाद से बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं में 348 लोग मारे गए, जिनमें बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं शामिल हैं.

सबसे अधिक नुकसान शिमला में हुआ है जहां 80 लोगों की जान गई है.

राज्य के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुखु ने कुल 10,000 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही, इससे तबाही का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

इन घटनाओं में 336 लोग घायल हुए, 2220 घर जमींदोज़ हो गए और 10,000 घरों में दरारें आ गई हैं और उन्हें आंशिक रूप से क्षति पहुंची है.

ये नुकसान व्यावसायिक जगहों पर भी हुआ है. क़रीब 300 दुकानें और 4600 काउशेड इस्तेमाल लायक नहीं बचे हैं.

जबकि मारे गए मवेशियों की संख्या भी बड़ी है. क़रीब 9930 मुर्गे मुर्गियां, 6,085 दुधारू मवेशी और अन्य जानवर इस तबाही की भेंट चढ़ गए.

कुल 131 भूस्खलन और 60 अचानक आई बाढ़ (फ़्लैश फ़्लड्स) की घटनाएं हुईं जिसने इलाके की भौगोलिक स्थिति के बारे में भी चिंतित किया है.

आपको हर कुछ सौ मीटर पर कीचड़ और पहाड़ों से गिरे बड़े पत्थर और सड़कों पर गिरे हुए पेड़ मिलेंगे.

संख्याओं से परे, इसका मानवीय प्रभाव बहुत गहरा है.

मलबे में दबी एक कार
इमेज कैप्शन, मलबे में दबी एक कार

मंदिर का हादसा जिसमें 20 लोग मारे गए

14 अगस्त को शिव मंदिर में हुआ हादसा, जिसमें 20 श्रद्धालु मारे गए थे, इस बात का गवाह है कि बीते तीन महीनों में उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों में क्या कहर बरपा है.

अचानक बाढ़ में एक परिवार ने अपने सात सदस्य खो दिया, जबकि मंदिर चारो ओर से कीचड़, पानी और पत्थर से भर गया.

मंदिर की घटना के बाद राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ़) और अन्य राहत एवं बचाव एजेंसियों ने बचे हुए लोगों ओर शवों की तलाशने के लिए सघन तलाशी अभियान चलाया.

भारी बारिश के बावजूद राहत और बचाव में लगे नाउम्मीदी के बीच भी हिम्मत नहीं हारा.

अपने 17 साल के बेटे सौरभ को खोने वाले संजय ठाकुर ने दिल दहला देने वाले उस मंज़र को याद करते हुए कहा, “उस सुबह हमने एक जोरदार गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनी.”

“मेरी पत्नी ने कहा कि सौरभ कहां है. मैं मंदिर की ओर दौड़ा और देखा कि मंदिर का एक हिस्सा गिर गया है. मलबे में फंसा हुए एक आदमी मदद के लिए चिल्ला रहा है. हम उसे बचाने जल्द ही उसके पास पहुंचे.”

“एक और भूस्खलन हुआ और मंदिर के ऊपर रेल ट्रैक की ज़मीन धंस गई और मंदिर को बहा ले गई. वहां कुछ भी नहीं बचा था.”

कुल्लू ज़िले में भारी तबाही
इमेज कैप्शन, कुल्लू ज़िले में भारी तबाही हुई है.

आजीविका छिन गई

परिवार और स्थानीय लोगों ने सौरभ की काफ़ी तलाश की. अगले दिन उन्हें शव मिला.

ये बताते हुए संजय ठाकुर की आंखों में दर्द साफ़ देखा जा सकता था.

उन्होंने कहा, “बेटे की हर चीज़ उसकी याद दिलाती है. देखिए किताबें यहां पड़ी हुई हैं. कपड़े यहां हैं. बस वही नहीं है. लेकिन अब कोई कुछ नहीं कर सकता.”

आकाश कुमार की तरह ही बहुत सारे लोगों की आजीविका ख़त्म हो गई है.

कुमार की मीट की दुकान पर उनके परिवार और स्थानीय लोगों की कई पीढ़ियों को भरोसा था, लेकिन सरकारी कसाईखाने के गिरने के बाद उन्हें घर और काम से हाथ धोना पड़ा.

आकाश कुमार कहते हैं, “हम वहां से सप्लाई लाते थे और फिर अपनी दुकान से बेचते थे. लेकिन कसाईखाना जमींदोज़ हो गया और उससे थोड़ी दूर पर बने हमारे घर को ख़तरनाक घोषित कर दिया गया. मैं समझ नहीं पा रहा कि हम अपनी आजीविका कहां से कमाएंगे और कहां से खाएंगे.”

वो अपने बड़े परिवार का ज़िक्र करते हैं, चार भाई और उनकी पत्नियां और बच्चे, ये सभी शिमला के राहत कैंप में शरण लिए हुए हैं.

कार

और तबाही की आशंका

14 और 15 अगस्त को हुए भूस्खलन के बाद सामान्य हालात बनाने की कोशिशों के बीच 24 अगस्त को कुल्लू ज़िले में भूस्खलन की एक बड़ी घटना घटी.

बारिश के कारण हुए भूस्खलन से कमज़ोर हुए कुछ घर ताश के पत्तों की तरह ढह गए. ये घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुआ और सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ.

इससे हुए नुकसान का आंकलन अभी नहीं हुआ है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इन इमारतों को कुछ दिन पहले ही खाली करा लिया गया था.

कुल्लू से 76 किलोमीटर दूर एक बाज़ार वाले इलाके अन्नी में भूस्खलन की घटना घटी.

हिमाचल प्रदेश में रह रहे निवासी लगातार आशंका और डर के साये में रह रहे हैं.

23 अगस्त को सुबह सुबह शिमला में बिजली की गरज के साथ भारी आंधी तूफ़ान आया, जिसने लोगों में डर और आशंका को और बढ़ा दिया.

एक होटल में काम करने वाले राजेश नेगी ने कहा, “इससे पहले हमने ऐसा कभी नहीं देखा था.”

“सुबह तीन बजे के आस पास भयंकर गड़गड़ाहट के साथ तूफ़ान आया. डर के मारे हम घरों से निकल गए, लगा कि ये कभी भी ढह जाएगा. यहां डर और तनाव का माहौल बना हुआ है.”

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