पाकिस्तान: इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा बीबी क्या राजनीति में पैर जमा पाएंगी?

    • Author, फ़रहत जावेद
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस, इस्लामाबाद

एक जली हुई लॉरी, जहां-तहां बिखरे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की तस्वीर वाले पोस्टर और आंसू गैस के फट चुके गोले. ये इमरान ख़ान की पत्नी बुशरा बीबी के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शन के बचे हुए निशान थे, जिसके बाद इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा दिया गया था.

इसके एक दिन पहले, मंगलवार को दोपहर में बुशरा बीबी एक शिपिंग कंटेनर के ऊपर हिजाब पहने और सफेद शॉल ओढ़े अपने चिर-परिचित अंदाज़ में खड़ी थीं.

इस शिपिंग कंटेनर के आसपास विपक्षी पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के हज़ारों समर्थक हाथों में इमरान ख़ान की तस्वीर और पार्टी का झंडा लिए खड़े थे और नारे लगा रहे थे.

वहां कानफाड़ू शोर था, लेकिन जैसे ही बुशरा बीबी ने माइक अपने हाथों में थामा, सन्नाटा पसर गया.

प्रदर्शन में क्या हुआ?

बुशरा बीबी ने चिल्लाकर कहा, "मेरे बच्चों और मेरे भाइयों! आपको मेरा साथ देना होगा."

उनकी आवाज़ गूंजते ही भीड़ में हलचल शुरू हो गई और पूरे माहौल में एक बार फिर नारों की आवाज़ सुनाई देने लगी.

बुशरा बीबी ने अपनी बात जारी रखी और कहा, "लेकिन अगर आप लोग साथ नहीं भी रहते हैं, तो भी मैं मज़बूती से खड़ी रहूंगी. यह केवल मेरे पति का सवाल नहीं है, यह इस देश और इसके नेता का सवाल है."

पाकिस्तान की राजनीति पर नज़र रखने वाले कई जानकार इसे राजनीति में बुशरा बीबी की शुरूआत के तौर पर देख रहे हैं.

कुछ लोगों के लिए यह घटना राजनीति में उनका पहला कदम था. अन्य लोगों के लिए यह इमरान ख़ान की पीटीआई को तब तक बचाए रखने की रणनीतिक चाल थी, जब तक वो जेल में हैं.

बुशरा बीबी पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की तीसरी पत्नी हैं और अक्सर उन्हें बेहद रिज़र्व माना जाता है. उनके बारे में कहा जाता है कि वो राजनीति से दूर रहती हैं.

लेकिन इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शनों के दौरान वो राजनीति के केंद्र में दिखीं.

लेकिन बुधवार सवेरे जब सूरज उगा, न तो बुशरा बीबी का कोई निशान मौजूद था और न ही उनके समर्थन में आए उन हज़ारों लोगों का जिन्होंने इमरान ख़ान की रिहाई के लिए मार्च में हिस्सा लिया.

शहर के अंधेरे में डूबने के बाद इस तथाकथित "फ़ाइनल मार्च" और बुशरा बीबी के साथ क्या हुआ, ये अब तक स्पष्ट नहीं है.

एक महिला प्रदर्शनकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अचानक बिजली चली गई और डी-चौक जहां विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, वो जगह अंधेरे में डूब गई.

2022 में हुए अविश्वास मत में इमरान ख़ान की सरकार गिर गई थी. इसके बाद अगस्त 2023 से इमरान ख़ान भ्रष्टाचार, चरमपंथ और हिंसा भड़काने के आरोप में जेल में हैं.

इमरान ख़ान खुद पर लगाए आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं.

फ़ाइनल मार्च के दौरान अफ़रा तफ़री

महिला प्रदर्शनकारी ने बताया कि डी-चौक में हर तरफ लोगों के चीखने चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी, वहां आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे. वो अपने पति को पकड़ कर खड़ी थीं जिनके कंधे से गोली लगने के कारण ख़ून बह रहा था.

बाद में वो इस्लामाबाद के एक अस्पताल पहुंची, जहां उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया, "हर कोई अपनी जान बचाने के लिए भाग रहा था. वो कयामत के दिन या युद्ध के दिन की तरह था."

"मेरे हाथों में मेरे पति का खू़न लगा हुआ था और हर तरफ से चीखने की आवाज़ें आ रही थीं."

लेकिन इतनी तेज़ी से अचानक क्या हुआ?

कुछ घंटों पहले, यानी मंगलवार की दोपहर को प्रदर्शनकारी डी-चौक पहुंचे. शहर के केंद्रीय हिस्से के इस इलाक़े तक पहुंचने के लिए उन्होंने बीते दिनों कई पुलिस बैरिकेडिंग पार की थी और आंसू गैस के गोले झेले थे.

इनमें पाकिस्तान तहरीक़-ए-इंसाफ़ के समर्थक और कार्यकर्ता शामिल थे.

जेल में रहते हुए इमरान ख़ान ने पार्टी समर्थकों से इस मार्च के लिए अपील की थी.

इस मार्च में लिए पीटीआई समर्थक और कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और इस “फ़ाइनल मार्च” में उनकी तीसरी पत्नी बुशरा बीबी शामिल हुईं और मार्च का नेतृत्व किया.

राजधानी की सड़कों पर लाइन से बैरिकेड लगाए गए थे और पाकिस्तानी सेना का वहां कड़ा पहरा था.

जब काफ़िला शहर के क़रीब पहुंचा, बुशरा बीबी शिपिंग कंटेनर पर खड़ी समर्थकों का अभिवादन करती दिखाई दीं.

उन्होंने एलान किया, "जब तक ख़ान हमारे पास नहीं आते, हम वापस नहीं जाएंगे."

यह मार्च आगे बढ़ता हुआ इस्लामाबाद के सरकारी कार्यालयों वाले उस इलाक़े में पहुंच गया, जिसे डी-चौक कहते हैं.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद और प्रदर्शन के लिए अन्य जगह चुनने की सरकार की अपील के बावजूद बुशरा बीबी ने उस इलाक़े में प्रदर्शन करने का चुनाव किया जहां संसद, प्रमुख सरकारी कार्यालय स्थित हैं. इस इलाक़े में उनके पति इमरान ख़ान एक बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं.

बुशरा बीबी का ग़ायब होना

जैसे ही दिन ढला, हालात तनावपूर्ण हो गए. इलाक़े की बिजली गुल हो गई और पूरा इलाक़ा अंधेरे में डूब गया. इसके बाद स्थानीय समयानुसार रात के साढ़े नौ बजे सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ने के लिए अभियान चलाया.

इस दौरान मची अफ़रा तफ़री के बीच बुशरा बीबी धरना स्थल से चली गईं.

सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल हुए जिसमें वो इलाक़े से बाहर जाते हुए एक कार से दूसरे कार में बैठती दिखाई दीं. बीबीसी इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाया है.

जिस वक्त समर्थक आंसू गैस के गोलों और गिरफ़्तारियों का सामना कर रहे थे ऐसे में उनके वहां से अचानक ग़ायब होने ने कई लोगों को निराश किया.

कुछ देर बाद जिस शिपिंग कंटेनर पर वो दिखाई दी थीं, उसे अज्ञात लोगों ने आग के हवाले कर दिया.

एक व्यक्ति ने कहा, "उन्होंने हमें छोड़ दिया."

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, "उनकी ग़लती नहीं थी. पार्टी के नेताओं ने उन्हें वहां से जाने को मजबूर किया."

राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार मेहमाल सरफ़राज़ ने कहा, "उनके अचानक ग़ायब होने से, उनका राजनीतिक करियर के शुरू हो इससे पहले नुक़सान हो गया."

कई लोग इस बात को मानते हैं कि बुशरा बीबी के लिए यह वक्त बहुत अहम था. ऐसा लगता है कि अभी तक वो जानबूझ कर ही सुर्खियों से दूर रही थीं.

हालांकि कुछ वक्त पहले इमरान ख़ान ने सोशल मीडिया पर लिखा था, "मेरी पत्नी केवल मेरा संदेश लोगों तक पहुंचातीं" हैं.

रात के एक बजे के आसपास प्रशासन ने कहा कि प्रदर्शनस्थल से सभी लोग जा चुके हैं.

इस दौरान कितने लोगों को चोटें आई या कितनों की मौत हुई, इस बारे में अब तक आधिकारिक रूप जानकारी साझा नहीं की गई है. हालांकि बीबीसी ने स्थानीय अस्पतालों से बात कर पुष्टि की है कि इसमें कम से कम पांच लोगों की जान गई है.

पुलिस का कहना है कि रात को कम से कम 500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और पुलिस स्टेशन में रखा गया है. वहीं पीटीआई का दावा है कि कई लोग लापता हैं.

इमरान ख़ान से शादी

पाकिस्तान के अपेक्षाकृत संपन्न पंजाब प्रांत के प्रभावशाली ज़मींदार परिवार से आने वाली बुशरा बीबी की शादी इमरान ख़ान से 2018 में हुई थी. इसे लेकर उस वक्त मिली-जुली प्रतिक्रिया रही थी.

इससे पहले वो 28 साल तक विवाहित जीवन बिता चुकी थीं. उनके पूर्व पति ने उन पर इस्लामिक क़ानूनों का पालन न करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि तलाक़ और फिर से शादी करने के बीच पर्याप्त समय नहीं लिया गया. उनका कहना था कि यह इस्लामिक क़ानूनों का उल्लंघन है.

इस मामले में इमरान ख़ान और बुशरा बीबी को सज़ा हुई लेकिन बाद में बरी कर दिया गया.

बुशरा बीबी सूफ़ी पंथ में आस्था रखती हैं और पार्टी के क़रीबी लोगों का मानना है कि पर्दे के पीछे इमरान ख़ान को सलाह देने में उनकी बड़ी भूमिका रही है. इमरान ख़ान उन्हें आध्यामिक गुरु मानते हैं.

लेकिन पीटीआई की राजनीति में उनका सार्वजनिक रूप से शामिल होना नया और विवादित भी है.

इसी महीने की शुरुआत में वो ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की राजधानी पेशावर में हुई पार्टी की एक बैठक में शामिल हुईं, जहां पीटीआई की सरकार है.

इसी बैठक में उन्होंने पार्टी नेताओं से इस फ़ाइनल मार्च में शामिल होने की बात की. उन्होंने ऐसा न करने पर नतीजे भुगतने की चेतावनी भी दी थी, जिसमें पार्टी से निकाला जाना भी शामिल था.

कुछ लोग इसे उनके बढ़ते प्रभाव के रूप में भी देखते हैं. जबकि कुछ लोग इसे पार्टी में हस्तक्षेप मानते हैं.

पत्रकार आमिर ज़िया ने कहा, "उनका यह नज़रिया पीटीआई के नेताओं को रास नहीं आया."

"पार्टी खुद ही वंशवादी राजनीति का विरोध करती आई है. अगर वो आधिकारिक भूमिका अख़्तियार करती हैं तो यह पार्टी और इमरान ख़ान दोनों की छवि को नुक़सान पहुंचा सकती है."

बुशरा बीबी और राजनीति में उनका कदम

राजनीतिक विश्लेषक इम्तियाज़ गुल ने बीबीसी उर्दू से कहा कि राजनीति में उनका शामिल होना "असाधारण हालात में उठाया गया असाधारण कदम" है.

उन्होंने कहा, "असल में यह इमरान ख़ान की ग़ैर मौजूदगी में पार्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की कोशिश थी."

पीटीआई के कुछ सदस्य भी यही कहते हैं. उनका मानना है कि "वो राजनीति में केवल इसलिए आई हैं क्योंकि इमरान ख़ान उन पर पूरा भरोसा करते हैं."

लेकिन पार्टी के भीतर दबी आवाज़ में इस तरह की बातें होती रही हैं कि इमरान ख़ान जब प्रधानमंत्री थे, उस वक्त उनके फ़ैसलों को बुशरा बीबी प्रभावित करती थीं.

हालांकि पाकिस्तान के राजनीतिक इतिहास में ऐसा करने वाली वह पहली महिला नहीं हैं. इससे पहले भी देश में होने वाले कई प्रदर्शनों और रैलियों की अगुवाई महिलाएं कर चुकी हैं, ख़ासकर तब जब उनके पति को गिरफ़्तार किया गया या उन पर आरोप लगाए गए.

पूर्व राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की पत्नी नुसरत भुट्टो और तीन बार के प्रधानमंत्री रहे नवाज़ शरीफ़ की पत्नी कलसुम नवाज़ तब सुर्खियों में आईं जब उनके पतियों को जेल हुई थी.

इस महीने की शुरूआत में पहली बार बुशरा बीबी ने उस वक्त सीधे-सीधे राजनीति में कदम रखने का एलान किया जब उन्होंने इमरान ख़ान के समर्थन में प्रदर्शन करने के लिए पीटीआई के आला नेताओं की बैठक की अपील की.

हालांकि प्रदर्शन के दो सप्ताह पहले उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा था कि उनका "राजनीति में आने का उनका इरादा नहीं है."

कुछ लोग उनके इस दावे को संदेह से देखते हैं. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने बुशरा बीबी पर अवसरवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि "वह भविष्य में खुद को नेता के रूप में देखती हैं."

हालांकि पीटीआई के अंदर ही इस मामले में मतभेद हैं. कुछ लोगों ने बीबीसी को बताया कि "इमरान ख़ान उन पर बहुत भरोसा करते हैं." जबकि कई लोग इस बात से चिंतित हैं कि उनके शामिल होने से पार्टी के लोकतांत्रिक मूल्यों को नुक़सान पहुंचेगा.

इमरान ख़ान बुशरा बीबी पर कितना भरोसा करते हैं, इस बारे में राजनीतिक विश्लेषक मेहमाल सरफ़राज़ कहते हैं, "पीटीआई में इमरान ख़ान की बात ही अंतिम होती है. लेकिन राजनीति में शामिल होने की महत्वाकांक्षा रखने वाली उनकी दूसरी पत्नी रेहम ख़ान के उलट बुशरा बीबी का क़द और प्रभाव अधिक है."

उनके मुताबिक़, "ऐसा इसलिए है क्योंकि इमरान ख़ान बुशरा बीबी को अपने आध्यात्मिक गुरू के रूप में देखते हैं. यही बात बुशरा बीबी को उनकी बाकी पत्नियों से अलग करती है."

पत्रकार आमिर ज़िया का मानना है कि पीटीआई समर्थकों को इस्लामाबाद तक मार्च करने के लिए प्रोत्साहित करने का बुशरा बीबी का "दांव उलटा" पड़ गया.

इन आलोचनाओं के बावजूद, कई पीटीआई समर्थक बुशरा बीबी को इमरान ख़ान की क़रीबी मानते हैं.

इस्लामाबाद के रहने वाले आसीम अली कहते हैं, "वो उन लोगों में हैं जो असल में इमरान ख़ान की रिहाई चाहते हैं. मुझे उन पर पूरी तरह भरोसा है."

लेकिन एक बात साफ़ है कि पहले की तरह बुशरा बीबी की शख़्सियत अब रहस्यमयी नहीं रह गई है. अब वो पाकिस्तान की राजनीति के केंद्र में हैं- चाहे वो ऐसा चाहती रही हों या नहीं.

(जोएल गुन्टो और युवेट टैन की अतिरिक्त रिपोर्टिंग के साथ)

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