पाकिस्तान: इमरान ख़ान के समर्थकों के विरोध-प्रदर्शन को पुलिस ने कराया ख़त्म

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ (पीटीआई) के समर्थकों को पुलिस और रेंजर्स ने ब्लू एरिया से हटा दिया है.

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हटाने के अभियान में सुरक्षाबलों ने सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार किया है.

मंगलावार को इस्लामाबाद में सुरक्षाबलों और पीटीआई समर्थकों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थीं. पीटीआई समर्थक अपने नेता इमरान ख़ान की रिहाई की मांग कर रहे हैं.

क्रिकेटर से प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचने वाले 72 साल के इमरान ख़ान जब 2022 में सत्ता से बाहर हुए तो उनके ख़िलाफ़ कई मुक़दमे दर्ज किए गए थे. इमरान ख़ान को पहले मई 2023 में गिरफ़्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने इस्लामाबाद के ब्लू एरिया में पीटीआई प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ रेंजर्स और पुलिस के ऑपरेशन की पुष्टि की है.

पाकिस्तानी के जियो न्यूज़ से बात करते हुए प्रधानमंत्री के सलाहकार ने कहा, "हमारे पास प्रदर्शनकारियों में शामिल अपराधियों के बारे में जानकारी थी, इसलिए रेंजर्स और पुलिस ने इनके ख़िलाफ़ ऑपरेशन चलाया."

बुशरा बीबी कर रही थीं नेतृत्व

इमरान ख़ान जेल में हैं, इसलिए प्रदर्शन की अगुवाई उनकी पत्नी बुशरा बीबी और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर कर रहे थे.

बुशरा बीबी पिछले महीने ही ज़मानत पर जेल से बाहर आई हैं. बुशरा बीबी पहली बार इस तरह के किसी राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा ले रही थीं.

शहबाज़ शरीफ़ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि रेंजर्स और पुलिस के ऑपरेशन के दौरान बुशरा बीबी और अली अमीन गंडापुर धरने वाली जगह से 'भाग' गए हैं.

उनका कहना है कि क़रीब 500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है.

मंगलवार की रात से ही पाकिस्तान के स्थानीय और सोशल मीडिया पर ऐसी खबरें आई थीं कि पुलिस ने इस्लामाबाद के ब्लू एरिया में कार्रवाई कर उसे पीटीआई प्रदर्शनकारियों से ख़ाली करा लिया है.

इलाक़े के कुछ लोगों ने बीबीसी उर्दू को बताया कि उन्होंने गोली चलने की आवाज़ें सुनी थीं.

'फ़ाइनल कॉल नहीं मिस्ड कॉल थी'

इमरान ख़ान के मंगलवार शाम एक्स अकाउंट से जारी बयान में अपनी टीम को 'आख़िरी गेंद तक लड़ने का' संदेश दिया था. उन्होंने अपील की है कि जो लोग अब तक प्रदर्शन में नहीं पहुंचे हैं, उन्हें भी इस्लामाबाद डी-चौक पहुँचना चाहिए.

इमरान ख़ान के बयान में कहा गया है, "सैन्य अदालत में मुक़दमे की धमकी देने वालों को मेरा संदेश है कि तुम्हें जो करना है करो, मैं पीछे नहीं हटूंगा."

लेकिन देर रात पुलिस ऑपरेशन के बाद डी चौक को ख़ाली करवा लिया गया है. पीटीआई ने इस धरने को फ़ाइनल कॉल का नाम दिया था.

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि 'फ़ाइनल कॉल नहीं बल्कि एक मिस्ड कॉल थी.'

इस्लामाबाद में धरने की जगह पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि बुशरा बीबी और खैबर पख्तूनख्वाह के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर मोनाल की ओर से भाग गए हैं.

लेकिन तरार ने ये नहीं बताया कि धरने की जगह को कैसे ख़ाली कराया गया. हालांकि उन्होंने दावा किया कि शहर में सारी सड़कें खोल दी गई हैं.

उन्होंने कहा, "लोग कहते थे कि आप सख्त नहीं हैं, लेकिन हम उन्हें मौक़ा नहीं देना चाहते थे. हम सही वक़्त का इंतज़ार कर रहे थे और गृह मंत्री लगातार निगरानी कर रहे थे."

तरार ने कहा, "जिस तरह से अपनी ही गाड़ियों को क्रैश करते हुए पीटीआई के लोग पागलों की तरह भागे उससे भी एक सीख मिलती है."

अताउल्लाह तरार ने कहा कि कार्यकर्ता अपने नेता को रिहा कराने आए थे लेकिन ख़ुद ही गिरफ्तार हो गए.उनकी सियासी मंशा नेक नहीं थी इसलिए वे विफल रहे."

मंगलवार को क्या हुआ

मंगलवार को इस्लामाबाद पुलिस ने कहा कि तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ताओं के रेड ज़ोन स्थित डी चौक पर पहुंचने के बाद अज्ञात लोगों द्वारा की गई गोलीबारी में कम से कम छह लोग घायल हो गए.

इसके बाद डी चौक पर पुलिस और रेंजर्स की तैनाती बढ़ा दी गई थी. बीबीसी संवाददाता फ़ाख़िर मुनीर के मुताबिक़ डी चौक मंगलवार देर शाम तक पूरी तरह ख़ाली हो गया और पीटीआई के कार्यकर्ता आसपास के इलाक़ों में पुलिस से बचने की कोशिश में दिखे.

विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ही तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ता इस बात पर अड़े थे कि वो इस्लामाबाद के डी चौक पहुंचेंगे और इमरान ख़ान की रिहाई के लिए प्रदर्शन करेंगे.

आख़िरकार मंगलवार दोपहर बाद तहरीक-ए-इंसाफ का विरोध प्रदर्शन इस्लामाबाद के रेड ज़ोन स्थित डी चौक पहुंच गया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों को डी चौक पर रखे कंटेनरों पर चढ़कर जश्न मनाते देखा गया.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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