सोने और चांदी की क़ीमत में इतनी भारी गिरावट क्यों आई, क्या है आगे की राह

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इमेज कैप्शन, 30 जनवरी को सोने की क़ीमत में 12 प्रतिशत और चांदी में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि प्लैटिनम में 18 प्रतिशत की गिरावट आई.

सोने और चांदी की क़ीमतों में लगातार जाती बढ़ोतरी शुक्रवार को बड़ी गिरावट के साथ थमी.

30 जनवरी को सोने की क़ीमत में 12 प्रतिशत और चांदी में 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि प्लैटिनम में 18 प्रतिशत की गिरावट आई.

इससे पहले की रैली से दोनों धातुओं की क़ीमत ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई थी.

पैनम्योर लिबेरम के कमोडिटीज़ विश्लेषक टॉम प्राइस ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स से कहा, "यह बाज़ार के शिखर पर पहुंचने का क्लासिक रवैया है. भ्रम और अनिश्चितता है. हर कोई स्पष्टता की तलाश में है."

एमकेएस पैम्प की विश्लेषक निकी शील्स ने कहा कि गुरुवार और शुक्रवार को हुए ये तेज़ उतार-चढ़ाव उस महीने के अंत में आए हैं, जिसे "क़ीमती धातुओं के इतिहास का सबसे अधिक अस्थिर महीना" कहा जा सकता है.

वैश्विक उथल-पुथल, वेनेज़ुएला से लेकर ग्रीनलैंड और ईरान तक और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अनिश्चितता को लेकर बढ़ती चिंता ने निवेशकों को क़ीमती धातुओं की ओर भागने पर मजबूर कर दिया.

शील्स ने कहा, "अकल्पनीय घटनाएं रोज़ हो रही हैं. यह तेज़ी साफ़ तौर पर बहुत ज़्यादा और बहुत जल्दी थी."

पिक्टेट एसेट मैनेजमेंट में सीनियर मल्टी-एसेट स्ट्रैटिजिस्ट अरुण साई ने फ़ाइनैंशियल टाइम्स से कहा, "इससे पहले जिस तरह की ज़्यादा क़ीमतों में तेज़ हलचल देखने को मिली है, उसे देखते हुए ऊंची अस्थिरता की उम्मीद की जानी चाहिए."

कंपनी अपने इस आकलन पर कायम है कि केंद्रीय बैंक रिज़र्व प्रबंधकों और अन्य निवेशकों की ओर से निवेश में विविधीकरण के कारण सोने को लाभ मिलता रहेगा.

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अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, यह गिरावट 1980 के दशक की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट है. चांदी में भी यह रिकॉर्ड इंट्राडे गिरावट है. इस बिकवाली का असर पूरे मेटल बाज़ार पर पड़ा.

शेयर बाज़ार के जानकारों का मानना है कि इन धातुओं में तेज़ वृद्धि के बाद दामों में क्रैश की आशंका थी और कुछ ख़बरों ने इसका बहाना दे दिया.

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इमेज कैप्शन, भूराजनीतिक और वित्तीय अस्थिरता की वजह से सोने के भाव तेज़ी से बढ़े

रिकॉर्ड गिरावट क्यों?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों से भी बाज़ार लगातार सहमा रहा है.

पिछले एक साल में सोने की क़ीमतों में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

पिछले एक साल में क़ीमती धातुओं में निवेशकों की भारी मांग देखी गई, जिससे एक के बाद एक रिकॉर्ड बने.

इस तेज़ी ने अनुभवी ट्रेडरों को भी चौंका दिया और क़ीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव पैदा किया.

जनवरी में यह रुझान और तेज़ हुआ, जब निवेशकों ने करेंसी की कमज़ोर होती क़ीमत, फ़ेडरल रिज़र्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंता, ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख़ किया.

ब्लूमबर्ग ने ओवरसीज-चाइनीज बैंकिंग कोर के रणनीतिकार क्रिस्टोफर वोंग के हवाले से कहा कि द बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ऑफ़ द फे़डरल रिज़र्व के चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नामांकन की ख़बर इस 'महागिरावट' की एक ट्रिगर रही, लेकिन पहले से ही करेक्शन ज़रूरी हो गया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने द बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स ऑफ द फे़डरल रिज़र्व के चेयरमैन के लिए केविन वार्श के नाम की घोषणा की है.

ट्रंप की इस घोषणा का स्वागत कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी किया है. कार्नी ने कहा है कि मुश्किल वक़्त में दुनिया के सबसे अहम केंद्रीय बैंक के नेतृत्व के लिए केविन बेहतरीन चुनाव हैं.

क्रिस्टोफ़र वोंग ने कहा, "यह वैसा ही बहाना है, जिसका बाज़ार ऐसे तेज़ और असामान्य उछाल को ख़त्म करने के लिए इंतज़ार करता है."

एक अनुमान ये भी है कि निवेशकों ने इस मौके का फ़ायदा प्रॉफ़िट बुकिंग के लिए उठाया.

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फ़ाइनैंशिय टाइम्स ने लिखा है, ''कुछ निवेशकों का तर्क है कि वार्श के नेतृत्व वाला फेड, जिन्हें अन्य संभावित उम्मीदवारों की तुलना में ज़्यादा परंपरागत अर्थशास्त्री माना जाता है. महंगाई पर ज़्यादा सख़्त नियंत्रण बनाए रखने की संभावना है. डॉलर की कमज़ोरी को सोने में बढ़ते निवेश को भी एक कारण के रूप में देखा जाता है.''

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, सोने और चांदी की रिकॉर्ड गिरावट के साथ ही डॉलर मज़बूत हुआ है. इसकी वजह ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और स्वीडिश क्रोना जैसी कमोडिटी करेंसी में बिकवाली रही.

केविन वॉर्श के फ़ेड चेयर नामित होने की ख़बर के बाद डॉलर में तेज़ी देखने को मिली. मौजूदा फ़ेड चेयर जेरोम पॉवेल का कार्यकाल इस साल मई में समाप्त हो रहा है.

इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सीनेट डेमोक्रेट्स के बीच अस्थायी समझौता होने से एक और अमेरिकी सरकारी शटडाउन का ख़तरा टल गया है.

ट्रंप ने ईरान से बातचीत का संकेत दिया है, इससे भी मध्य-पूर्व में तनाव थोड़ा कम हुआ है.

ब्लूमबर्ग के मुताबिक़, सोने चांदी में गिरावट की एक और वजह ये भी थी कि ये दोनों धातुएं 'ओवरबॉट' श्रेणी में आ गई थीं. इनका रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 90 तक पहुंच गया, जो दशकों में सबसे ऊंचा स्तर है.

आरएसआई अगर 70 या इससे अधिक है, तो इसका मतलब है कि इनमें ज़रूरत से अधिक ख़रीदारी हो चुकी है और दाम ज़रूरत से अधिक बढ़ गए हैं और करेक्शन की ज़रूरत है.

हालांकि, शुक्रवार की गिरावट के बाद भी सोने ने महीने भर में 13 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की जबकि चांदी महीने में 19 प्रतिशत ऊपर रही.

गिरावट का असर मेटल बाज़ार पर भी पड़ा

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इमेज कैप्शन, तांबे और अन्य धातुओं के कारोबार पर भी इस गिरावट का असर हुआ.

मेटल बाज़ार में आई इस गिरावट का असर बड़ी माइनिंग कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ा. भारत के शेयर बाज़ार में गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ़ क़रीब 10 प्रतिशत तक गिरे. कॉपर के शेयर भी तेज़ी से गिरे.

न्यूयॉर्क ट्रेडिंग में न्यूमोंट कॉर्प, बैरिक माइनिंग कॉर्प और एग्निको ईगल माइंस जैसी प्रमुख गोल्ड कंपनियों के शेयर 10 प्रतिशत से ज़्यादा गिर गए.

न्यूयॉर्क में स्पॉट गोल्ड 8.9 प्रतिशत गिरकर 4,894.23 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ.

चांदी 26 प्रतिशत टूटकर 85.20 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई. प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज की गई.

ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स 0.9 प्रतिशत चढ़ा.

लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबा 13,157.50 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ. गुरुवार को यह 14,000 डॉलर प्रति टन से ऊपर चला गया था, जो 2008 के बाद इसकी सबसे बड़ी इंट्राडे तेज़ी थी. इसके बाद इसमें गिरावट देखी गई.

डॉलर मजबूत होने से अन्य करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए कमोडिटी महंगी हो जाती है, क्योंकि इनकी क़ीमत डॉलर में तय होती है.

ब्लूमबर्ग के अनुसार, हेरायस प्रेशस मेटल्स में ट्रेडिंग हेड डोमिनिक स्परज़ेल का कहना है कि बाज़ार में हलचल बेहद ज़्यादा है और शुक्रवार को 5,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर कई बार टूटे.

उनके अनुसार, "आने वाले समय में उतार-चढ़ाव जारी रहने के लिए तैयार रहना होगा."

सोने की तेज़ी में अहम भूमिका चीनी निवेशकों की रही और उनकी भारी ख़रीदारी को देखते हुए शंघाई फ़्यूचर्स एक्सचेंज को क़ीमती और औद्योगिक धातुओं में तेज़ी को रोकने के लिए कई उपाय करने पड़े थे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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