ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू कौन हैं, जो होंगे नए चुनाव आयुक्त

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली उच्च-स्तरीय समिति ने चुनाव आयुक्तों के खाली पड़े पदों के लिए रिटायर्ड आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुना है.
गुरुवार को इससे संबिधित गजे़ट नोटिफ़िकेशन जारी किया गया जिसमें कहा गया कि राष्ट्रपति चुनाव आयुक्त के रूप में ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू की नियुक्ति करते हैं.
नोटिफ़िकेशन के अनुसार "भारतीय चुनाव आयोग में उनके कार्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से उनकी नियुक्ति होगी."
इससे पहले चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर बनी तीन सदस्यों वाली समिति में विपक्ष के एकमात्र सदस्य कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने मीडिया को इस बारे में जानकारी दी थी.
ये दोनों पद पूर्व चुनाव आयुक्त अनूप चंद्र पांडे के रिटायर होने और अरुण गोयल के अचानक इस्तीफ़े के बाद खाली हुए थे.

अधीर रंजन चौधरी ने क्या कहा?
अधीर रंजन चौधरी ने इन दोनों चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया पर सवाल किए थे और कहा था कि शॉर्ट-लिस्ट किए गए अधिकारियों के नाम उन्हें पहले नहीं बताए गए थे.
ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में अहम ज़िम्मेदारियां निभा चुके हैं. जम्मू-कश्मीर से जब साल 2019 में अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब इसकी देखरेख की ज़िम्मेदारी उन्हीं के पास थी. उन्हें अयोध्या से जुड़े मामलों को निपटाने का भी ज़िम्मा दिया गया था.
वहीं, सुखबीर सिंह संधू उत्तराखंड कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं. वह उत्तराखंड के मुख्य सचिव पद पर रह चुके हैं.
छह नामों में से चुने गए ये दो अधिकारी

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये बताया गया है कि केंद्र सरकार की ओर से अधीर रंजन चौधरी को चुनाव आयुक्त के लिए शॉर्ट-लिस्ट किए गए 236 अधिकारियों के नाम भेजे गए थे.
इस सूची में 92 ऐसे अधिकारी थे जो भारत सरकार में सचिव या इसके बराबर के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, 93 उन अधिकारियों के नाम थे जो मौजूदा समय में सचिव या इसके बराबर के पद पर काम कर रहे हैं, 15 ऐसे अफ़सर थे जो बीते एक साल में किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव रह चुके हों और 28 ऐसे अधिकारी जो राज्य में अभी मुख्य सचिव हों.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि आख़िर में छह नाम शॉर्ट-लिस्ट हुए, जिन्हें समिति के सामने चर्चा के लिए रखा गया.
इनमें उत्पल कुमार सिंह, प्रदीप कुमार त्रिपाठी, ज्ञानेश कुमार, इंदीवर पांडे, सुखबीर सिंह संधू, सुधीर कुमार गंगाधर रहाटे का नाम था. ये सभी पूर्व नौकरशाह हैं.
अधीर रंजन चौधरी ने कहा, "छह नामों में से ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के नाम को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति के लिए अंतिम रूप दिया गया."
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ज्ञानेश कुमार का आर्टिकल 370 और अयोध्या से कनेक्शन
ज्ञानेश कुमार साल 1988 बैच के केरल कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानेश कुमार वही पूर्व नौकरशाह है जिन्हें अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान कश्मीर की ज़िम्मेदारी दी गई थी.
जम्मू-कश्मीर के राज्य से केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के दौरान ज्ञानेश कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी.
इंडियन एक्सप्रेस की साल 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ज्ञानेश कुमार को सरकार ने उस डेस्क की ज़िम्मेदारी भी दी, जिसका काम अयोध्या केस से जुड़े मुद्दों को देखना था. इनमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से अयोध्या राम मंदिर के लिए 90 दिनों में ट्रस्ट बनाने वाले आदेश को लागू करना भी शामिल था.
इस डेस्क की अगुवाई ज्ञानेश कुमार ही कर रहे थे, जो उस समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के अतिरिक्त सचिव पद पर थे.
इकोनॉमिक टाइम्स की ख़बर के अनुसार ज्ञानेश कुमार संसदीय मामलों के मंत्रालय में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
मनी कंट्रोल की ख़बर के अनुसार ज्ञानेश कुमार इसी साल 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हुए थे.
कौन हैं सुखबीर सिंह संधू?
उत्तराखंड कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुखबीर सिंह संधू मूल रूप से पंजाब से आते हैं.
लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, संधू का जन्म साल 1963 में हुआ था और वह 1998 बैच के रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं.
संधू को उत्तराखंड का मुख्य सचिव उस समय बनाया गया था जब साल 2021 में पुष्कर सिंह धामी यहां मुख्यमंत्री बने थे.
इस रिपोर्ट के अनुसार, संधू नेशनल हाइवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एनएचएआई) के चेयरमैन भी रह चुके हैं. वह मानव संसाधन मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग में अतिरिक्त सचिव पद पर भी अपनी सेवा दे चुके हैं.
सुखबीर सिंह संधू ने अमृतसर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई की. उन्होंने अमृतसर के ही गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से इतिहास में मास्टर्स क पढ़ाई पूरी की. उनके पास लॉ की भी डिग्री है.
उन्हें पंजाब के लुधियाना नगर निगम का कमिश्नर रहने के दौरान अच्छे प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति से मेडल भी मिला था.
साल 2001 की जनगणना में अपनी भूमिका के लिए भी उन्हें राष्ट्रपति की ओर से मेडल मिला था.

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कैसे खाली हुए चुनाव आयुक्त के पद?
दरअसल, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में केवल मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ही बच गए थे. चुनाव आयुक्त के दो पद खाली थे. पिछले सप्ताह ही अरुण गोयल ने अचानक चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफ़ा दिया था.
इससे पहले अनूप चंद्र पांडे 15 फ़रवरी को चुनाव आयुक्त पद से रिटायर हुए थे.
ये माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की तारीखों का एलान अब किसी भी दिन हो सकता है. इससे पहले इन दोनों पदों को भरा जाना ज़रूरी था.
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