नीतीश कुमार को लेकर क्या बोले पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी

नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की फ़ाइल फ़ोटो

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    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवददाता, पटना से

बिहार में जारी राजनीतिक उठापटक और कयासों के दौर के बीच राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि नीतीश कुमार रविवार दोपहर तीन बजे एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, लेकिन उनकी सरकार को बीजेपी का समर्थन मिला होगा.

उन्होंने दावा किया कि नई सरकार में भले ही नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होंगे, मगर सरकार की कमान भारतीय जनता पार्टी के हाथ में रहेगी.

मांझी ने कहा कि एनडीए का हिस्सा होने की वजह से वह और उनकी पार्टी के विधायक भी इस सरकार में शामिल होंगे.

किस आधार पर वह ऐसे दावे कर रहे हैं और अगर ऐसा हुआ तो नीतीश कुमार से तल्ख़ रिश्तों के बावजूद क्या वह उनके साथ काम कर पाएंगे?

साथ ही, बिहार की राजनीति में अचानक इतनी हलचल कैसे पैदा हो गई? बीबीसी के साथ इंटरव्यू में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने ऐसे ही कुछ और सवालों के भी जवाब दिए.

जीतनराम मांझी

जीतन राम मांझी ने बीबीसी को बताया है कि नीतीश कुमार किसी भी समय आरजेडी के साथ हुए गठबंधन को तोड़कर बीजेपी के हाथ मिला सकते हैं.

उन्होंने कहा कि बीजेपी के शीर्ष नेताओं से उनकी बातचीत हुई है और इसके बाद उन्होंने भी नीतीश कुमार को समर्थन देने का फ़ैसला किया है.

मांझी ने कहा, "नीतीश कुमार एनडीए के साथ जाना चाहते हैं. लगभग तय हो गया है कि वो चले जाएंगे. हमारी पार्टी ने तय किया है कि हम नरेंद्र मोदी यानी एनडीए के साथ रहेंगे. अगर नीतीश कुमार इस्तीफ़ा देकर एनडीए का हिस्सा बनते हैं तो हम लोग उनका साथ देंगे."

पूर्व सीएम ने कहा कि रविवार को नीतीश कुमार राज्यपाल को विधायकों के समर्थन की सूची सौंपेंगे और दोपहर बाद तीन बजे शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है.

जब उनसे पूछा गया कि जो दावे आप कर रहे हैं, उनके सही होने की कितनी संभावनाएं हैं, तो मांझी का जवाब था- "अभी तक जो सूचना है, उसके आधार पर 100 फ़ीसदी संभावनाएं हैं."

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नई सरकार में मांगे दो मंत्री पद

जीतन राम मांझी ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनकी बात हुई है और उनके कहने पर वह नीतीश कुमार का समर्थन करेंगे.

उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी हिंदुस्तान अवाम मोर्चा के चारों विधायक एनडीए के साथ हैं. एनडीए की मूल पार्टी बीजेपी है. अमित शाहजी से भी बात हुई है. उन लोगों ने भी सुझाया है कि नीतीश कुमार का साथ देना चाहिए."

अगर नई सरकार बनी तो वो उसमें अपनी और अपनी पार्टी की क्या भूमिका देखते हैं? इस पर मांझी ने कहा कि उनकी ओर से भावी सरकार में दो मंत्री पदों की मांग की गई है.

मांझी ने कहा, "जब एक निर्दलीय विधायक को एक मंत्री पद दिया जाता है तो हमारी पार्टी के पास चार विधायक और एक एमएलसी हैं. हम लोगों ने तय किया कि इस हिसाब से दो मंत्री तो बनाइए."

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दो मंत्री पद देने पर सहमति बन गई है, तो उन्होंने कहा, "सहमति बनी है या नहीं, वे लोग जानें. हमारी तो यह मांग है."

नीतीश से तल्ख़ी को भुला पाएंगे?

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पिछले दिनों बिहार विधानसभा में आरक्षण को लेकर विधेयक पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जीतन राम मांझी पर भड़क गए थे.

उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनकी "ग़लती और मूखर्ता के कारण ही" जीतन राम मांझी बिहार के सीएम बने थे.

इसके बाद जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार के बरे में कहा था, "उनका दिमाग ठीक नहीं है. मर्यादा लांघ रहे हैं. हम उनसे चार साल बड़े हैं और राजनीतिक जीवन में भी उनसे बड़े हैं."

इस तरह की टिप्पणियों और तल्ख़ी के बाद वह संभावित सरकार में एक साथ कैसे रह पाएंगे? इस पर मांझी ने कहा, "सरकार भले नीतीश कुमार की होगी, लेकिन स्टीयरिंग बीजेपी पास रहेगा और हम बीजेपी के साथ हैं."

"वो सीएम बनेंगे तो अपनी बातों को दबाएंगे, उन्हें एहसास होगा. बीच में जब हम एक साथ दिल्ली जा रहे थे तो उन्होंने कहा कि मैंने मज़ाक किया था, सॉरी भी कहा. तो राजनीति में ऐसा चलता है, बीती बातों को भुला देना चाहिए."

मांझी ने कहा कि बहुत सी बातों को जनहित में नज़रअंदाज़ किया जाता है. उन्होंने कहा, "आज जनहित की बात है. आज सरकार बदलना ज़रूरी है नहीं तो बिहार की जनता तबाह हो रही थी. ऐसे में किसी व्यक्तिगत बात को ख़त्म करना चाहिए."

लेकिन क्या व्यक्तिगत तौर पर उनकी बातों से ठेस पहुंची है और क्या उसकी टीस रहेगी? इस सवाल के जवाब में मांझी ने कहा, "नीतीश कुमार ने बहुत कुछ किया था. पीएम को खाने पर बुलाकर बाद में इनकार कर दिया था. लेकिन नरेंद्र मोदी ने उस बात को भूलकर उन्हें सीएम पद पर स्वीकारा है तो हम कौन होते हैं?"

नीतीश कुमार

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दरअसल, जीतन राम मांझी 68 वर्ष की उम्र में 20 मई 2014 में बिहार के 23वें मुख्यमंत्री बने थे.

एक नाटकीय घटनाक्रम मे उस वर्ष बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) नेता नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफ़े के बाद मुख्यमंत्री के रूप में उनके नाम की पेशकश की थी.

2014 के आम चुनावों में जेडीयू के ख़राब प्रदर्शन का हवाला देते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अपना छोड़ दिया था. और सीएम के तौर पर मांझी का नाम आगे रखा था.

उस वक्त विपक्ष उन पर डमी सीएम होने का आरोप लगाता था. दस महीने बाद जेडीयू ने उन्हें इस्तीफ़ा देने को कहा क्योंकि पार्टी एक बार फिर नीतीश को सीएम बनाना चाहती थी.

लेकिन मांझी ने पद छोड़ने से मना कर दिया. जिसके जवाब में पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया. उधर, बीजेपी ने कहा कि वे विधानसभा में मांझी का साथ देंगे.

लेकिन तेज़ी से बदलते सियासी हालात के बीच मांझी ने 20 फ़रवरी 2015 को इस्तीफ़ा दे दिया. उसके बाद उन्होंने हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा नाम की एक पार्टी बनाई थी.

पहले से ही बन रही थी भूमिका?

नीतीश कुमार

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बिहार में पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक घटनाक्रम तेज़ी से बदला है. सभी प्रमुख दलों में बैठकों का दौर जारी है.

कयास तो बहुत लगाए जा रहे हैं लेकिन नीतीश कुमार और उनकी पार्टी की ओर से कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा रहा है.

आख़िर ऐसे हालात क्यों पैदा हुए? इस सवाल पर जीतन राम मांझी ने कहा कि जेडीयू और आरजेडी में तल्ख़ियां पहले से ही बढ़ने लगी थीं और इन हालात की भूमिका पहले से ही बन रही थी.

उन्होंने कहा, "जिनके माता-पिता 2005 से पहले सीएम थे और उनके कार्यकाल में जो गड़बड़ियां हुई थी, उनका हवाला देते हुए सीएम कहें कि 2005 से पहले की स्थिति मत पैदा कीजिए, तो यह अप्रत्यक्ष रूप से तेजस्वी यादव पर ही निशाना साधा जा रहा था."

मांझी का मानना है कि पूरे मामले में अहम मोड़ तब आया, जब कर्पूरी ठाकुर जो भारत रत्न देने का एलान हुआ.

उन्होंने कहा, "जब कर्पूरी ठाकुर जी को भारत रत्न दिया गया तो नीतीश कुमार ने सीधे कहा कि कर्पूरी ठाकुर परिवारवाद के ख़िलाफ़ थे और उन्होंने अपने रहते अपने परिवार को राजनीति में नहीं आने दिया था. उन्होंने कहा कि मैं भी वैसा ही कर रहा हूं, लेकिन कुछ लोग अपने बच्चों को आगे बढ़ा रहे हैं."

"ऐसा कहते समय उनका इशारा सोनिया गांधी की ओर था कि वह राहुल और प्रियंका गांधी को बढ़ा रही हैं और साथ में लालू यादव को लेकर भी था. तो इन लोगों को एहसास हो गया कि ये अब हम लोगों साथ रहने वाले नहीं हैं."

जीतन राम मांझी

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कुछ साल पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में जीतन राम मांझी ने कहा था कि इंसान को 75 साल की उम्र में राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए.

इस बयान का हवाला देते हुए उनसे पूछा गया कि आपने तो ख़ुद 75 पार होकर भी चुनाव लड़ा था और अब भी राजनीति में सक्रिय हैं.

इस पर मांझी ने कहा, "2020 में तो नीतीश कुमार के आग्रह पर मैंने चुनाव लड़ा था. 2025 में मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा. विधान परिषद और राज्यसभा में चुनाव की बात नहीं है. वहां रहकर हम आगे भी जनता की सेवा कर सकते हैं."

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