क्रिकेट वर्ल्ड कप: राहुल द्रविड़ कप्तान रहते जो नहीं कर सके क्या बतौर कोच कर पाएंगे?

राहुल द्रविड़

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    • Author, शारदा उगरा
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

भारतीय क्रिकेट की दीवार कहे जाने वाले राहुल द्रविड़ बीते 20 महीनों से भारतीय टीम के कोच हैं.

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट मैच में तीन दिनों के अंदर पारी की जीत से पहले भी टीम के आंकड़े उन्हें कामयाब कोच ठहराते हैं.

आईसीसी की ताज़ा रैंकिंग में भारत टेस्ट और ट्वेंटी-20 क्रिकेट में नंबर वन टीम है.

द्रविड़ की कोचिंग के दौरान भारत ने अब तक 16 टेस्ट मैचों में नौ मैच जीते हैं, दो मैच ड्रॉ रहे हैं और पांच मुक़ाबलों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है.

वहीं 24 वनडे मैचों में भारत ने 16 मैच जीते हैं और आठ में उसे हार का सामना करना पड़ा है.

भारत ने इसी दौरान 41 ट्वेंटी-20 मैच खेले हैं, जिसमें 29 मैच जीते हैं और 11 में उसे हार का सामना करना पड़ा है. एक मैच का कोई नतीजा नहीं निकला था.

वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ मौजूदा सिरीज़ के साथ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का नया सत्र शुरू ही हुआ है.

ज़ाहिर है द्रविड़ के कोचिंग कार्यकाल को आंकने के लिए अभी बहुत ज़्यादा मैच नहीं हुए हैं इसके बावजूद बतौर कोच द्रविड़ को आंके जाने का दिन तय हो गया है.

संयोग ऐसा है कि इसी दिन राहुल द्रविड़ का मौजूदा अनुबंध पूरा होगा. ये दिन है 19 नवंबर और इसी दिन वनडे वर्ल्ड कप 2023 का फ़ाइनल खेला जाएगा.

रोहित शर्मा और राहुल द्रविड़ की जोड़ी से टीम को सिर्फ़ फ़ाइनल में पहुंचाने की उम्मीद नहीं है, उनसे चैंपियनशिप जीतने की उम्मीद की जा रही है.

वेस्टइंडीज

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2011 की वर्ल्ड कप जीत के बाद भारत ने 2013 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी और दो एशिया कप पर कब्ज़ा जमाया है.

इसके अलावा टीम 2014 के ट्वेटी-20 वर्ल्ड कप, 2017 के चैंपियंस ट्रॉफ़ी, एक बार एशिया कप और अब तक खेले गए दोनों वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल तक पहुंचने में कामयाब रही है.

इस दौरान भारतीय टीम आईसीसी के लगातार चार वर्ल्ड कप आयोजन, 2015, 2019, 2021 और 2022 में सेमीफ़ाइनल से आगे नहीं बढ़ सकी है.

ऐसे में भारतीय टीम पर घरेलू मैदान पर खेले जाने वाले वनडे वर्ल्ड कप को जीतने का दबाव होगा.

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भारतीय कोच पर कितना दबाव होता है

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भारतीय क्रिकेट टीम के पहले विदेशी कोच जॉन राइट ने अपने कार्यकाल के दौरान एक सच्चाई का जिक्र किया था.

उन्होंने कहा था, "जब परिणाम टीम के पक्ष में नहीं हो तो सबसे पहले कोच की विदाई होती है. फिर कप्तान की. इसके बाद फिर कोच की बारी आती है. यह चक्र है."

ऐसे में सवाल यही है कि अगर 19 नवंबर को भारतीय टीम को अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो किसकी विदाई पहले होगी, राहुल की या रोहित की, ये तय नहीं है.

19 नवंबर की कितनी अहमियत है, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि अभी से यह भी कहा जा रहा है कि अगर भारत ने ये वर्ल्ड कप जीत लिया तो सरकार लोकसभा चुनाव को समय से पहले करा सकती है.

ये कयास इसलिए लगाए जा रहे हैं क्योंकि 19 नवंबर भारत की आम जनता के मूड को प्रभावित कर सकता है.

राहुल द्रविड़ ने 2007 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी की थी. इस वर्ल्ड कप में भारत दो मैचों के बाद ही रेस से बाहर हो गया था.

बतौर कप्तान राहुल द्रविड़ के लिए यह वर्ल्ड कप बुरे सपने जैसा साबित हुआ था.

लोगों को ये भी याद नहीं है कि कप्तान के तौर पर द्रविड़ ने भारत को 20 साल के इंतज़ार के बाद इंग्लैंड में टेस्ट सिरीज़ में जीत दिलाई थी.

जॉन राइट

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कोच के तौर पर द्रविड़ का प्रदर्शन कहां ठहरता है?

इस सवाल का बेहतर जवाब तो यही होगा कि पास और फेल के बीच में द्रविड़ टिके हुए हैं.

अब तक भारतीय टीम के कोच के लिए द्विपक्षीय सिरीज़ की जीत को खाने में स्टार्टर के जैसे देखा जाता रहा है. मेनकोर्स तो आईसीसी की वर्ल्ड ट्रॉफी ही होती है.

द्रविड़ अब तक इस स्थिति को नहीं बदल सके हैं और इसलिए उनकी कोचिंग कार्यकाल पर भी सवाल उठ रहे हैं.

बतौर कोच द्रविड़ की टीम 2022 ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप नहीं जीत सकी और हाल ही में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा.

भारतीय क्रिकेट का प्रदर्शन बीते दो दशक से घरेलू और विदेशी मैदानों पर लगातार अच्छा रहा है और दुनिया की श्रेष्ठ टीमों में उसकी गिनती होती रही है.

लेकिन ढेरों प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की मौजूदगी और संसाधनों के बाद भी भारतीय टीम का वर्चस्व नहीं दिखा है. टीम ऐसी टीम के तौर पर नहीं दिखी है जिसे हराना मुश्किल हो.

बीते दस सालों के दौरान आईसीसी के हर बड़े टूर्नामेंट में फ़ाइनल से पहले ही टीम का सफ़र थम गया है

इसकी कई वजहें हो सकती हैं- तैयारी, खिलाड़ियों का घायल होना, टीम का चयन, निर्णय लेने वाले फ़ैसले. पहली दो वजहों पर ना तो खिलाड़ियों का नियंत्रण हो सकता है और ना ही कोच का.

कोई भी भारतीय क्रिकेट वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की तैयारी के लिए आईपीएल टूर्नामेंट को मिस नहीं करेगा.

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पुरानी समस्याएं बनी हुई हैं

आईपीएल का शिड्यूल और कैलेंडर तैयार करते वक्त भारतीय क्रिकेट बोर्ड ना तो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप और ना ही वर्ल्ड कप को ध्यान में रखता है.

इसके अलावा खिलाड़ियों के वर्कलोड को लेकर ना तो कोच और ना ही चयनकर्ताओं से बात होती है.

ये बात ठीक है कि ऋषभ पंत के कार दुर्घटना का अंदाज़ा पहले से नहीं लगाया जा सकता था लेकिन जसप्रीत बुमराह के वर्कलोड का प्रबंधन किसकी ज़िम्मेदारी थी?

रोहित-द्रविड़ के दौर में भारतीय क्रिकेट उन्हीं समस्याओं का सामना कर रही है जो कोहली-शास्त्री के दौर में मौजूद थीं.

टीम चयन और मैच के दौरान की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए खेल के दौरान निर्णायत्मक फ़ैसले को लेकर समस्या बनी हुई है. यही कड़वी सच्चाई है.

द्रविड़ का क़द और उनकी प्रतिष्ठा इतनी बड़ी है कि शास्त्री की तुलना में कम दिखने के बावजूद, हर ग़लत आकलन के बाद नज़रें रोहित शर्मा के अलावा उन पर केंद्रित होती है.

हालांकि हमें यह ध्यान देना होगा कि फुटबॉल मैनेजरों की तुलना में क्रिकेट कोच का प्रभाव खेल के मैदान में जितना माना जाता है, उसकी तुलना में कम होता है.

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मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट टीम के बारे में धरना यही है कि टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही है, क्योंकि टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है. टीम के सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ और गेंदबाज़, अपने करियर के अंतिम दौर में हैं.

इसके अलावा भारतीय टीम, दूसरी टीमों के मुक़ाबले यात्राएं भी बहुत ज़्यादा करती हैं और इसका असर खिलाड़ियों पर पड़ता है.

आईसीसी की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, एक जून, 2022 से 31 मई, 2023 के बीच न्यूज़ीलैंड के क्रिकेट टीम ने 101 दिन मैच खेले हैं जबकि भारत 95 दिन के साथ दूसरे पायदान पर था. इंग्लैंड की टीम इसी दौरान 93 दिन खेली.

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लेकिन अंतत: क्रिकेट का खेल, खेलने और जीत हासिल करने के लिए ही है. हमें जब तक अंदाज़ा होगा तब तक 90 दिन के अंदर वर्ल्ड कप हमारे सिर पर होगा.

आईसीसी टूर्नामेंट में हार का सिलसिला का तोड़ने की चाभी कोच राहुल द्रविड़ को तलाशनी होगी.

उन्हें यह मालूम है, ये बात हमलोग भी जानते हैं. यह बात जितनी भी अटपटी हो लेकिन सच्चाई यही है कि बतौर कोच द्रविड़ कार्यकाल वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के साथ दांव पर है.

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