वेस्टइंडीज़ पर भारत की धमाकेदार जीत में कोहली कहां पड़ गए फीके

विराट कोहली

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, खेल पत्रकार, डोमिनिका से

डोमिनिका टेस्ट में टीम इंडिया को एक पारी और 141 रनों से महज़ तीन दिनों के भीतर जीत दिलाने वाले अहम किरदारों में मैन ऑफ द मैच यशस्वी जायसवाल और रविचंद्रन अश्विन रहे.

अश्विन ने दूसरी पारी में भी कमाल दिखाया और मैच में 12 विकेट झटके. इसके अलावा रोहित शर्मा ने शतक जमाया और रविंद्र जडेजा ने भी ऑलराउंडर वाला खेल दिखाया.

कप्तान रोहित शर्मा ने टीम इंडिया की पारी को सिर्फ 271 रनों की लीड के बाद ही घोषित कर दिया था.

इसके ज़रिए कप्तान ना सिर्फ जीत चाहते थे बल्कि मैच को तीन दिनों के भीतर ख़त्म करके ये भी दिखाना चाहते थे कि दोनों टीमों के बीच फ़ासला कितना गहरा है.

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पंजे को सत्ते में किया तब्दील

भारत ने अपनी पहली पारी 5 विकेट के नुकसान पर 421 रनों पर घोषित कर दी थी और इसके बाद अश्विन ने फिर से जलवा बिखेरा और पहली पारी में पंजे (पांच विकेट) को दूसरी पारी में सत्ते (सात विकेट) में तब्दील कर दिया.

मैच में 10 या उससे ज़्यादा विकेट लेने का ये कमाल उन्होंने 8वीं बार कर दिखाया है जो इससे पहले भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े मैच-विनर अनिल कुंबले ने दिखाया था.

इस पिच पर अश्विन-जडेजा की जोड़ी का सामना करना इस मौजूदा कैरेबियाई टीम के लिए चांद पर कदम रखने जैसी चुनौती थी.

लेकिन, जीत हासिल करने के बाद टीम इंडिया स्टेडियम से बाहर निकल रही थी तो स्टेडियम में मौजूद अधिकारी, सुरक्षाकर्मी, चुनिंदा फैंस और कुछ बच्चे सिर्फ और सिर्फ विराट कोहली की एक झलक और उनके साथ सेल्फी लेने के लिए बेताब दिखे.

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कोहली कहां चूके

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ये अपने आप में एक चौंकाने वाला नज़ारा रहा क्योंकि वेस्टइंडीज़ में हीरो को पूजने वाली संस्कृति नहीं है. लेकिन, शायद इसे किंग कोहली का जलवा कह लें या कुछ और, सबसे ज़्यादा मांग में तो कोहली ही रहते हैं.

लेकिन, कोहली इस मैच में शतक से चूके. उनके पास एक शानदार मौक़ा था कि वो पिछले 5 साल से विदेशी ज़मीं पर चल रहे शतक के सूखे को ख़त्म कर सकते थे.

करीब एक दिन की बल्लेबाज़ी और 182 गेंदों का सामना करने के बावजूद अपनी पारी के दौरान वो आखिरी 24 रन नहीं बना पाये जिसकी उन्हें शायद इस वक्त सख़्त ज़रूरत थी. वो 76 रन बनाकर आउट हुए.

दूसरे दिन जब कोहली बल्लेबाज़ी करने उतरे थे तो उनके ख़िलाफ़ पहली ही गेंद पर एलबीडब्लू की ज़बरदस्त अपील हुई थी और वो बाल-बाल बचे थे.

तीसरे दिन वो अपने 36 नॉट आउट के स्कोर में सिर्फ 4 रन ही जोड़ पाये थे उन्हें वेस्टइंडीज़ के कप्तान क्रेग ब्रेथवेट ने जीवनदान दे दिया.

लंच के बाद कोहली को फिर एक जीवनदान मिला जब उन्होंने फिर से ऑफ स्टंप के बाहर छेड़छाड़ की कोशिश की. लेकिन, अफ़सोस की बात है कि महज़ चार रन के बाद उन्हें पवेलियन वापस लौटना पड़ा.

भीमकाय स्पिनर राखिम कार्नवेल की गेंद पर वो अचानक उछाल से चौंक गये और लेग स्लिप में कैच दे बैठे.

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कोहली ने क्या कहा

कोहली को शतक से चूकने का मलाल तो रहा होगा लेकिन जब वो ग्राउंड से निकलकर बस में बैठे तो उनके चेहरे पर एक संतुष्टि वाली मुस्कान थी.

शतक के करीब पहुंचकर चूकने के सवाल पर कोहली का कहना था कि यह खेल का हिस्सा है लेकिन तीसरे दिन पिच और चुनौतीपूर्ण हो गयी थी.

उनका कहना था कि वेस्टइंडीज़ को इतनी परेशानी हुई कि पहले दिन के बाद तीसरे दिन वो और जूझे.

ये बात तो सही है कि 182 गेंदों का सामना करने के दौरान कोहली अपनी छवि किंग के मुताबिक बल्लेबाज़ी करते नहीं दिखे और इस बात का सबूत है सिर्फ 5 चौके का होना.

उन 5 चौकों में भी तीन तो 10 गेंदों के भीतर आये थे जो वेस्टइंडीज़ के पार्ट-टाइम गेंदबाज़ों ने डाले थे.

हाल ही में पूर्व टेस्ट ओपनर आकाश चोपड़ा ने कहा कि अब कोहली दुनिया के टॉप 4 टेस्ट बल्लेबाज़ों में से नहीं हैं.

ऑस्ट्रेलियाई स्टीव स्मिथ और इंग्लैंड के जो रूट भी अब कोहली की तरह अपनी अपनी टीमों के कप्तान नहीं हैं. लेकिन, स्मिथ और रूट की बल्लेबाज़ी कप्तानी छोड़ने के बाद काफी बेहतर हुई है वहीं दूसरी तरफ कोहली के खेल में उनके असाधारण स्तर के मुकाबले बड़ी गिरावट दिखी है.

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कोहली और तेंदुलकर की तुलना

बहरहाल, कोहली दुनिया के पहले ऐसे खिलाड़ी नहीं हैं जो सर्वोच्चता के दौर के बाद दबदबे वाली लय के लिए जूझ रहे हैं. रन उनसे अब भी बन रहे हैं लेकिन किंग कोहली वाला अंदाज़ फिलहाल नहीं दिख रहा है.

ऐसा एक दौर में सचिन तेंदुलकर के साथ भी हो चुका है.

2004 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे और 2006 के इंग्लैंड दौरे पर तेंदुलकर जैसे महान बल्लेबाज़ ने अपने अहम को काबू में रखा था और दबदबा नहीं बनाने के बावजूद वो उस दौर में टिककर खेलते रहे.

तेंदुलकर को उस दौर में वीरेंद्र सहवाग और वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ की लय से कोई परेशानी नहीं हुई. बाद में वो उस दौर को पीछे छोड़कर फिर से रनों का अंबार लगाने में कामयाब हुए.

अगर आने वाले वक्त में कोहली का यही नया रूप ही लगातार देखने को मिले तो आप हैरान मत हों. बस यही उम्मीद की जाय कि वो कोहली का नया रूप भी उन्हें अपने करियर में एक अलग मुकाम पर ले जाने में मदद करे.

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