धोनी क्या आईपीएल में चेन्नई टीम की परेशानी बन गए हैं?

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- Author, पंकज प्रियदर्शी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अगर ये कहा जाए कि भारत की बहुचर्चित टी-20 क्रिकेट लीग में अभी तक आईपीएल के सबसे लोकप्रिय खिलाड़ी कौन हैं, तो इसमें सबसे पहला नाम आएगा महेंद्र सिंह धोनी का.
इससे शायद ही किसी को इनकार होगा. पिछले दो साल से धोनी के आईपीएल से संन्यास की चर्चा ख़ूब रही. लेकिन ये अटकलबाज़ी बनकर रह गई.
लेकिन इस साल चेन्नई के मैचों को देखते हुए धोनी के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं.
आईपीएल के 18वें संस्करण में धोनी ने बिजली जैसी गति से दो स्टम्प किए हैं. जिसकी ख़ूब चर्चा हुई और इस आईपीएल के बेहतरीन मौक़ों में इसे शायद शामिल भी किया जाए.

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विकेटकीपर के रूप में धोनी ने अपने प्रशंसकों और अपनी टीम को इस सीज़न में भी निराश नहीं किया है.
लेकिन टीम में उनकी बल्लेबाज़ी को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
बल्लेबाज़ी क्रम पर सवाल

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रॉयल चैलेंजर्स बंगलौर के ख़िलाफ़ मैच में धोनी नौवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने उतरे थे. आर अश्विन के भी बाद. इस मैच में आरसीबी ने चेन्नई को 50 रनों से मात दी थी.
उस दौरान भी धोनी के इतने नीचे बल्लेबाज़ी करने उतरने को लेकर सवाल उठे थे.
रविवार को राजस्थान के ख़िलाफ़ मैच में भी धोनी सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए उतरे थे. उन्होंने 11 गेंदों पर 16 रन बनाए. लेकिन अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके और आउट हो गए.
धोनी के साथ लंबे समय तक चेन्नई के लिए खेलने वाले अंबाती रायुडू का भी कहना है कि अगर धोनी कुछ और ऊपर बल्लेबाज़ी के लिए उतरते, तो मैच और रोमांचक हो सकता था.
चेन्नई के लिए समर्थक धोनी को थाला यानी लीडर मानते हैं. चेन्नई में उनकी छवि किसी सुपरस्टार से कम नहीं.
लेकिन लगातार मिलती हार के बाद क्या चेन्नई की टीम उन्हें एक बल्लेबाज़ के रूप में टीम में जगह देती रहेगी या किसी और विकल्प की तलाश करेगी.
सीएसके टीम के कोच स्टीफ़ेन फ़्लेमिंग कहते हैं, "धोनी टीम के लिए एक मूल्यवान खिलाड़ी हैं. एक लीडर और विकेटकीपर के रूप में. हम टीम में उनके लिए जगह नहीं बना रहे हैं. "
उनकी बल्लेबाज़ी क्रम पर फ़्लेमिंग का कहना है कि धोनी का शरीर अब पहले जैसा नहीं है और वे लगातार 10 ओवर बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते.
फ़्लेमिंग के मुताबिक़ टीम की स्थिति के हिसाब से धोनी का क्रम तय होता है ताकि वे अपना बेहतर योगदान दे सकें.
हालाँकि इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन का कहना है कि चेन्नई के कप्तान रितुराज गायकवाड़ और कोच स्टीफ़ेन फ़्लेमिंग को ये तय करना चाहिए कि धोनी किस क्रम में बल्लेबाज़ी करें.

पूर्व क्रिकेटर और चेन्नई टीम के सदस्य रहे हरभजन सिंह ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा है कि राजस्थान के ख़िलाफ़ मैच में जब तक धोनी आए, मैच चेन्नई के हाथ से निकल गया था.
हरभजन सिंह ने कहा, "धोनी बहुत बड़े खिलाड़ी हैं. वे इस मैच में ऊपर भी आए. लेकिन जब तक वो आए, मैच ख़त्म हो चुका था."
उनका कहना है कि टीम प्रबंधन को अपना रुख़ बदलना पड़ेगा. भज्जी कहते हैं कि टीम प्रबंधन को धोनी को और ऊपर भेजना चाहिए और उन्हें खुला छोड़ देना चाहिए ताकि वे और शॉट्स लगा सकें.
उनका कहना है कि आज भी धोनी से बेहतर कोई विकेटकीपर नहीं, लेकिन बल्लेबाज़ के रूप में वे और बेहतर कर सकते हैं और ये उनके हाथ में है.
वरिष्ठ क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन का कहना है कि धोनी की बल्लेबाज़ी क्रम पर इसलिए सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उनकी पॉजिशन क्लियर नहीं है.
बीबीसी के साथ बातचीत में वे कहते हैं, "धोनी ने पहले मैच में नौ नंबर पर बल्लेबाज़ी की और दूसरे मैच में सात नंबर पर. ये कोई नई बात नहीं है. लेकिन कोई भी टीम आख़िरकार मैच जीतने के लिए मैदान पर उतरती है. अगर आप इतना नीचे उतरें कि मैच जीतने का चांस न हो, तो फिर सवाल तो उठेंगे और यही सवाल उठ रहे हैं."
धोनी का विकल्प

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जैसा कि चेन्नई के कोच स्टीफ़ेन फ़्लेमिंग कहते हैं कि धोनी टीम के लिए बहुत मूल्यवान है. इससे शायद ही किसी को इनकार होगा कि विकेटकीपर और अनुभव के मामले में धोनी अब भी बेमिसाल हैं.
उनकी दो स्टम्पिंग की चर्चा ख़ूब है. बिजली की गति से उनके हाथ घूमते हैं और बल्लेबाज़ जब तक कुछ समझ पाता है, गिल्ली बिखर जाती है.
मुंबई के ख़िलाफ़ मैच में उन्होंने सूर्य कुमार यादव को बेहतरीन तरीक़े से स्टम्प आउट किया.
फिर आरसीबी के ख़िलाफ़ मैच में धोनी ने जिस तेज़ी से सॉल्ट को स्टम्प आउट किया, वो हैरान कर देने वाला था.
लेकिन एक प्रोफ़ेशनल टूर्नामेंट में प्रबंधन अपनी टीम का आकलन हार या जीत के आधार पर करता है.
अभी तक चेन्नई की टीम ने तीन मैच खेले हैं और इनमें से दो में उन्हें हार मिली है. टीम की कई मोर्चे पर आलोचना हो रही है, लेकिन धोनी भी इस बहस में चर्चा का विषय बने हुए हैं.

तो क्या इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में टीम में उन्हें जगह मिलनी चाहिए. यानी वे विकेटकीपर के रूप में टीम में रहे, फिर टीम प्रबंधन बल्लेबाज़ी के लिए किसी और को चुने.
क्रिकेट पत्रकार शारदा उगरा कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि सीएसके टीम के पास विकल्प नहीं हैं. वो धोनी को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में लेकर किसी पॉवर हिटर को बल्लेबाज़ी के लिए उतार सकते हैं. लेकिन वो इतनी बड़ी हस्ती हैं वहाँ कि कोई उनको ये नहीं कह सकता कि आपको हम इम्पैक्ट प्लेयर के लिए रिप्लेस कर सकते हैं."
उनका कहना है कि ये निर्णय तो सीएसके को ही लेना पड़ेगा और ये साफ़ दिखाई दे रहा है कि धोनी को लेकर सीएसके कोई निर्णय नहीं ले पा रहा है.
वरिष्ठ क्रिकेट समीक्षक अयाज़ मेमन का कहना है कि सीएसके के लिए धोनी का विकल्प ढूँढना आसान काम नहीं, क्योंकि धोनी का प्रभाव टीम का एक खिलाड़ी से कहीं अधिक है.
लेकिन वे कहते हैं कि डेवन कॉनवे चेन्नई टीम में हैं और वे भी अच्छी विकेटकीपिंग और बल्लेबाज़ी करते हैं. हालाँकि अयाज़ मेमन का ये भी मानना है कि धोनी की अहमियत को देखते हुए टीम प्रबंधन के लिए ये
फ़ैसला आसान नहीं.
धोनी 'एक ब्रांड'

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भारत की ओर से कई उपलब्धियाँ अपने नाम करने के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.
भारत को धोनी ने तीन आईसीसी ख़िताब भी दिलाए: टी-20 विश्व कप (2007), वनडे विश्व कप (2011) और चैंपियंस ट्रॉफी (2013).
लेकिन उन्होंने आईपीएल में खेलना जारी रखा था. उनकी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल में पाँच ख़िताब जीते.
कप्तानी छोड़ने के बाद 43 वर्षीय धोनी अब भी चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा बने हुए हैं.

पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर का कहना है कि धोनी अब खिलाड़ी से ज़्यादा एक ब्रांड के रूप में टीम के साथ जुड़े हैं.
जिओस्टार के साथ बातचीत में संजय मांजरेकर ने कहा, "अगर आप इस साल या पिछले साल को देखें, तो धोनी एक ब्रांड की तरह ज़्यादा जुड़े दिखते हैं. जब टीम प्रबंधन खिलाड़ियों का चयन करता है तो वो एक अतिरिक्त बल्लेबाज़ इसलिए नहीं रखता कि धोनी है. धोनी उनके लिए एक बोनस हैं. उनका अलग रोल है."
लेकिन संजय मांजरेकर का मानना है कि धोनी का सही इस्तेमाल चेन्नई की टीम नहीं कर रही है. संजय मांजरेकर का तो यहाँ तक कहना है कि धोनी को कप्तान बना देना चाहिए ताकि उनकी टीम में उपयोगिता बढ़ सके.
उन्होंने कहा, "अगर धोनी इतनी देर से बल्लेबाज़ी करने आ रहे हैं, तो उन्हें कप्तान बना देना चाहिए. वे एक विकेटकीपर के रूप में बहुत अच्छा कर रहे हैं. लेकिन वे कप्तान के रूप में और अधिक योगदान कर सकते हैं. फ़िलहाल उनका कम इस्तेमाल हो रहा है."

दूसरी ओर अयाज़ मेमन का कहना है कि धोनी आईपीएल के सबसे बड़े ब्रांड हैं और उनसे बड़ा कोई नहीं है.
हालाँकि अंबाती रायुडू ने धोनी को लेकर ये सवाल उठाए और कहा था कि सीएसके के समर्थक धोनी को देखना चाहते हैं ना कि वे चेन्नई को जीतते देखना चाहते हैं. क्योंकि उनकी प्राथमिकता ये है कि किसी तरह धोनी के दर्शन हो जाएँ.
लेकिन रायुडू का मानना है कि ये चेन्नई के लिए अच्छी बात नहीं. अयाज़ मेमन भी रायुडू की बात से सहमत हैं.
वे कहते हैं, "ब्रांड की वैल्यू तभी बढ़ती है, जब आप जीतते हैं. अगर धोनी ख़ुद पाँच ख़िताब नहीं जीतते, न इतने बड़े फ़िनिशर रहते, न इंडिया को टी-20 के साथ-साथ वनडे वर्ल्ड कप और चैम्पियंस ट्रॉफी जिताते, तो धोनी का ब्रांड भी इतना बड़ा नहीं होता."
उनका कहना है कि ब्रांड कितना भी बड़ा हो, लेकिन आख़िरकार आप टीम के लिए और जीतने के लिए खेलते हैं और प्राथमिकता ये होनी चाहिए कि आप कैसे मैच जिता सकते हो.
हालाँकि अयाज़ मेमन का ये भी मानना है कि कमर्शियल वैल्यू भी ज़रूरी है और दोनों चीज़ें साथ में लेकर चलना होगा.
अब भी चेन्नई टीम के प्रशंसकों के लिए धोनी की अहमियत बहुत ज़्यादा है.
उनके मैदान पर उतरते समय जिस तरह चेन्नई टीम के समर्थक शोर मचाते हैं, शायद ही किसी खिलाड़ी के लिए हो.
लेकिन इन सबके बीच अब धोनी की टीम के लिए अहमियत बहस का विषय बना हुआ है.
वरिष्ठ क्रिकेट पत्रकार शारदा उगरा कहती हैं कि सीएसके एक प्लेयर के ईर्द-गिर्द ही घूमती नज़र आती है और वो हैं महेंद्र सिंह धोनी.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "सीएसके में उनका रोल क्रिकेट के अलावा भावनात्मक भी है. धोनी सीएसके से बहुत अटैच्ड हैं और सीएसके धोनी से बहुत अटैच्ड है. चेन्नई की टीम में धोनी का बहुत बड़ा प्रभाव है."
टीम प्रबंधन की उलझन

धोनी की वैल्यू और उनके ब्रांड को देखते हुए चेन्नई टीम प्रबंधन के लिए ये आसान नहीं कि वो उन्हें लेकर कोई फ़ैसला करे.
लेकिन जानकारों का मानना है कि चेन्नई की टीम इम्पैक्ट प्लेयर के नियम का फ़ायदा उठा सकती है.
तो क्या चेन्नई की टीम को बल्लेबाज़ी करते समय धोनी की जगह किसी और प्लेयर को उतारना चाहिए.
अयाज़ मेमन कहते हैं, "इम्पैक्ट नियम आने से धोनी के लिए रास्ता खुल गया था. इस पर विचार करना चाहिए टीम प्रबंधन को. मुझे लगता है कि इम्पैक्ट रूल का फ़ायदा चेन्नई की टीम उठा सकती है. हो सकता है कि वे आगे ये फ़ैसला करें भी. तीन मैचों में दो हारने के बाद वे पहले से ही दबाव में हैं. लेकिन उन्हें समाधान के साथ आगे आना होगा."
शारदा उगरा का मानना है कि हो सकता है कि धोनी इम्पैक्ट प्लेयर वाला प्रयोग आज़माने से निराश हों, लेकिन टीम प्रबंधन को कुछ तो फ़ैसला करना पड़ेगा.

जानकारों का ये भी कहना है कि टीम प्रबंधन को धोनी का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए. ये सच है कि धोनी का प्रभाव टीम पर एक खिलाड़ी से ज़्यादा है.
उन्होंने टीम को मेंटॉर भी किया है. कई खिलाड़ियों को उन्होंने मौक़े दिए हैं और इससे उन्हें काफ़ी फ़ायदा भी हुआ है.
अयाज़ मेमन अजिंक्य रहाणे, रवींद्र जडेजा और आर अश्विन जैसे खिलाड़ियों का ज़िक्र करते हैं, जिन्हें धोनी ने निखारा.
वे कहते हैं, "लेकिन आख़िरकार टीम प्रबंधन को एक संतुलन बनाना होता है और टीम मैच और ख़िताब जीतने के लिए ही मैदान में उतरती है. धोनी के लिए लंबी पारी खेलना अब संभव नहीं है. टीम प्रबंधन भी शायद यही चाहता है कि वो आख़िर में आकर तेज़ गति से कुछ रन बनाकर अपना योगदान करें. ये सीएसके के लिए चैलेंज है कि वो धोनी का कैसे इस्तेमाल करते हैं."
अभी आईपीएल 18 का शुरुआती दौर है. हो सकता है कि चेन्नई की टीम आगे के मैचों में अच्छा प्रदर्शन करे. लेकिन जानकार यही मानते हैं कि टीम प्रबंधन को धोनी का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए.
आईपीएल में धोनी का रिकॉर्ड

धोनी 2008 में शुरू हुए आईपीएल के पहले सीज़न से ही खेल रहे हैं. दो साल वे चेन्नई टीम से दूर रहे, क्योंकि उस समय चेन्नई पर पाबंदी लगी हुई थी.
वर्ष 2016 और 2017 में धोनी पुणे की टीम की ओर से खेले थे.
अभी तक धोनी ने आईपीएल में 267 मैच खेले हैं और 39.18 की औसत से 5289 रन बनाए हैं. उनका अधिकतम स्कोर है 83.
उन्होंने 152 कैच लपके हैं और 45 स्टम्पिंग की है.
धोनी की कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स ने पाँच बार ख़िताब जीते हैं.
बल्ले के साथ धोनी का सबसे यादगार सीज़न था 2018 का आईपीएल. इस साल धोनी ने 75.83 की औसत से 455 रन बनाए. धोनी का स्ट्राइक रेट था 150.66.
पाबंदी के बाद वापसी कर रही चेन्नई की टीम को धोनी ने अपनी कप्तानी में इस साल ख़िताबी जीत दिलाई थी.
धोनी ने आईपीएल के 226 मैचों में कप्तानी की है और 133 मैचों में जीत दिलाई है. वे आईपीएल में सबसे सफल कप्तान रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित
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