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उन दो फ़लस्तीनियों की आपबीती, जिन्हें इसराइली सेना ने जीप के बोनट पर बाँधकर घुमाया
- Author, लूसी विलियमसन
- पदनाम, बीबीसी की मध्यपूर्व संवाददाता
कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में पिछले हफ्ते सैन्य-ऑपरेशन के दौरान घायल हुए दो अन्य फ़लस्तीनियों ने बीबीसी से बात की है.
इन लोगों ने बताया है कि इसराइली सैनिकों ने उन्हें आर्मी की एक जीप के बोनट पर बांधकर गांव की सड़कों पर तेज़ी से घुमाया.
उनका ये ब्यौरा उस फुटेज के सामने आने के कई दिन बाद आया है, जिसमें 23 वर्षीय मुजाहिद अबादी बलास को कार के बोनट पर बांधकर घुमाया गया था. इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई थी. ऐसा लगता है कि दोनों मामलों में इस्तेमाल की गई आर्मी जीप एक ही थी.
बीबीसी ने उन दो लोगों से बात की है, जिनका कहना है कि उनके साथ बीते शनिवार को जेनिन के बाहरी इलाक़े जबारियात में सैन्य ऑपरेशन के दौरान इसी तरह का बर्ताव किया गया.
25 वर्षीय समीर डबाया फ़िलहाल जेनिन के अस्पताल में भर्ती हैं.
समीर का कहना है कि इसराइली बलों ने उन्हें पीछे से गोली मारी, कई घंटे तक उनका ख़ून रिसता रहा और जब तक सैनिकों ने उनकी हालत का जायज़ा नहीं लिया, वो तब तक सिर झुकाकर नीचे पड़े रहे.
समीर का कहना है कि सैनिकों ने उन्हें पलटकर देखा और ज़िंदा पाया, जिसके बाद उन्हें बंदूक से पीटा गया. वो कहते हैं कि इसके बाद उन्हें उठाकर जीप पर पटक दिया गया.
समीर ने बताया, ''उन्होंने मेरी पैंट उतारी. मैं कार का सहारा लेना चाहता था, लेकिन एक सैनिक ने मेरे चेहरे पर मारा और ऐसा नहीं करने के लिए कहा. इसके बाद उसने गाड़ी चलाना शुरू कर दिया. मैं मौत का इंतज़ार कर रहा था.''
समीर ने हमें एक सिक्योरिटी कैमरे का फुटेज दिखाया, जिसमें वो अर्ध-नग्न लग रहे हैं और तेज़ी से चल रही जीप के बोनट पर पड़े हुए हैं, जिसके एक ओर 1 नंबर साफ़ नज़र आ रहा है.
घटना की जगह वही लग रही है, जहां सैन्य ऑपरेशन हो रहा था, लेकिन रिकॉर्डिंग पर कोई तारीख़ या समय दिखाई नहीं दे रहा है.
पैर में मारी गोली
एक अन्य फ़लस्तीनी व्यक्ति हेशम ने बीबीसी को बताया कि जबरियात में ऑपरेशन के दौरान उन्हें दो बार गोली मारी गई और उसी जीप पर उन्हें जबरन डाला गया, जिस पर 1 नंबर लिखा हुआ था.
उन्होंने बताया, ''हर तरफ़ से गोलियां चल रही थीं.''
उन्होंने भागने की कोशिश भी की, लेकन पैर में गोली मार दी गई, जिसके बाद उन्हें और एक अन्य व्यक्ति को लेने के लिए सैनिक आए.
उन्होंने बताया, ''सैनिकों ने हमें खड़े होने का आदेश दिया और हमारे कपड़े उतार दिए. फिर उन्होंने हमें जीप के सामने खड़े होने के लिए कहा. जीप इतनी गर्म थी कि आग की तरह लग रही थी.''
उन्होंने आगे बताया, ''मैं नंगे पैर था और तन पर कपड़े भी नहीं थे. मैंने जीप पर अपना हाथ रखने की कोशिश की, लेकिन रख नहीं पाया, वो बेहद गर्म थी. मैंने उनसे कहा कि ये बहुत गर्म है, लेकिन वो हमें मजबूर कर रहे थे और कह रहे थे कि अगर मरना नहीं चाहते, तो ऐसा करना ही होगा.''
हमने इन आरोपों के बारे में इसराइली फ़ौज से बात की तो उन्होंने कहा कि ये मामला विचाराधीन है.
पिछले हफ्ते मुजाहिद अबादी बलास के वीडियो के मामले में, इसराइली फ़ौज ने कहा था कि उन्हें जीप पर बांधा जाना ''आदेशों और प्रक्रियाओं का उल्लंघन है '' और इस मामले की पड़ताल की जाएगी.
इसराइली फ़ौज ने एक लिखित जबाव में कहा, ''घटना के वीडियो में बलों का जो आचरण है, वो आईडीएफ़ के मूल्यों के अनुरूप नहीं है.'
इसराइली फ़ौज का क्या है कहना
अस्पताल में भर्ती मुजाहिद ने बीबीसी को बताया कि उन्हें ज़िंदा बचने की उम्मीद नहीं थी और चलते वाहन पर पड़े होने के दौरान वो अपनी अंतिम प्रार्थनाएं कर रहे थे.
उन्होंने बीबीसी को एक अन्य वीडियो भी दिखाया, जिसे कुछ दूरी से रिकॉर्ड किया गया था. इस वीडियो से उनके इस दावे को बल मिलता नज़र आता है कि इसराइली सैनिकों ने उनके साथ किस तरह का बर्ताव किया.
उन्होंने बताया, ''जब उन्हें ये पता चल गया कि मेरे पास कोई हथियार नहीं है, वो जीप से उतरकर मेरे पास आए और मुझे मारने-पीटने लगे. सैनिकों ने मुझे कमर और घुटनों से पकड़कर हवा में उछाल दिया.''
उन्होंने बताया कि वो ज़मीन पर गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें फिर उछालकर फेंका गया और आख़िर में जीप पर पटककर घुमाया गया.
फ़ौज का कहना है कि वो पिछले हफ़्ते जबरियात में कुछ संदिग्धों को पकड़ने गई थी और ऑपरेशन के दौरान ''चरमपंथियों ने सैनिकों पर गोलियां चलाई, जिसका गोलियों से ही जबाव दिया गया.''
हेशम का कहना है कि उस दिन वो और मुजाहिद जिस घर में थे, वो घर पड़ोसी दोस्त मज्द अल-आज़मी का था, जिन्हें ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया गया था, जो अभी भी इसराइल की हिरासत में हैं.
इन तीनों ही व्यक्तियों का कहना है कि वो निहत्थे थे और पहचान की पड़ताल करने के बाद फ़ौज ने उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया था.
इसराइली मानवाधिकार समूह बेत्सेलम की इन मामलों पर नज़र है.
समूह के प्रवक्ता शाई पर्न्स का कहना है कि सात अक्तूबर को हमास के हमलों के बाद, वेस्ट बैंक में फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ इसराइली सैनिकों और सेटलर्स के हाथों हिंसा ने पहले के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
उनका कहना है, ''ये पहले से ज़्यादा उग्र और बर्बर है. सात अक्तूबर के बाद 500 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 100 से अधिक नाबालिग हैं और हर दिन फ़लस्तीनी शहरों पर हमले हो रहे हैं.
लड़ाई के तौर-तरीके बदले
पिछले साल सात अक्तूबर को हमास के हमलों के बाद, जेनिन ख़ासतौर पर इसराइली बलों के निशाने पर रहा है, जहां 120 से अधिक फ़लस्तीनी नागरिक और लड़ाके मारे गए हैं.
एक स्थानीय व्यक्ति का कहना है, ''फ़ौज को ये नहीं पता है कि प्रतिरोध लोगों के दिलों में है. ये नहीं रुकेगा. अगर एक व्यक्ति मारा जाता है, तो पांच और लोग उसकी जगह आ जाएंगे.''
इस हफ्ते एक इसराइली ऑपरेशन के दौरान, जेनिन कैंप के आस-पास की सड़कों पर लगाए गए बमों में धमाकों की वजह से एक सैनिक मारा गया और 16 अन्य घायल हुए.
ये लड़ाई ग़ज़ा युद्ध से काफ़ी पहले से चल रही है, लेकिन इसके तौर-तरीके बदल रहे हैं और वेस्ट बैंक में भी इसराइली सैनिकों के बर्ताव की अब पड़ताल की जा रही है.
ग़ज़ा से ये जगह अलग है, लेकिन दुश्मन वही हैं, जो एक बड़ी जंग लड़ रहे हैं.
लेकिन जेनिन में अभी भी हथियारबंद लोग गश्त कर रहे हैं, जो हमास और इस्लामिक जिहाद समर्थित लड़ाकों का ठिकाना है. वहां रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है कि जंग से कोई राहत नज़र नहीं आ रही है.