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यूएन की 'लिस्ट ऑफ़ शेम' क्या है, इसमें इसराइल और हमास दोनों क्यों शामिल किए गए
- Author, अमीरा महजबी
- पदनाम, बीबीसी अरबी
इसराइली सेना, हमास और फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद के हथियारबंद संगठनों को संयुक्त राष्ट्र ने 'लिस्ट ऑफ़ शेम' में एक साथ डाला है.
इसमें उन ग्रुपों को जोड़ा गया है जिन्होंने संघर्ष के दौरान बच्चों पर विपरीत असर डालने वाले गंभीर उल्लंघन किए.
यह सूची, बच्चों और हथियारबंद संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव जनरल एंटोनियो गुटेरेस की वार्षिक रिपोर्ट में जोड़ी गई है.
सबसे हालिया यह रिपोर्ट जनवरी और दिसम्बर 2023 के बीच के समय की है जिसे 13 जून को सार्वजनिक किया गया था.
26 जून को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस रिपोर्ट पर बहस होगी.
ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है, "साल 2023 में किसी हथियारबंद संघर्ष में बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा अपने चरम पर पहुंच गई थी, इस दौरान नियमों में गंभीर उल्लंघन हैरतअंगेज़ रूप से 21% बढ़ा गया था."
इसके अनुसार, "हत्याओं और अपंगता के मामलों में 35 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज हुई."
साल 2024 की रिपोर्ट में इसराइल और कब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़े को, बच्चों के ख़िलाफ़ सबसे अधिक हिंसा वाला क्षेत्र बताया गया है.
अधिकांश हिंसा के लिए इसराइल ज़िम्मेदार
संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा के 5,698 मामलों की पुष्टि की है जो इसराइली सशस्त्र बल और सेना से जुड़े हैं जबकि 116 मामले हमास के इज़्ज़ अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड्स और 21 मामले फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद अल-कुद्स ब्रिगेड से जुड़े हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा के 2,051 मामलों की जांच जारी है.
रिपोर्ट में सत्यापित मामले
रिपोर्ट में सत्यापित किया गया है किः
- सात अक्टूबर और 31 दिसम्बर के बीच 2,267 फ़लस्तीनी बच्चे मारे गए, जिनमें अधिकांश ग़ज़ा से थेः "अधिकांश मामले घनी आबादी में इसराइली सेना और सुरक्षा बलों की ओर से इस्तेमाल किए गए विस्फ़ोटक हथियारों की वजह से हुए."
- कुल 43 इसराइली बच्चों की हत्या हुई, इनमें अधिकांश घटनाएं सात अक्टूबर को हुई गोलीबारी और रॉकेट हमले की वजह से हुईं.
- हमास के इज़्ज़ अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड्स और अन्य फ़लस्तीनी हथियारबंद समूहों ने 47 इसराइली बच्चों का अपहरण किया.
- इसराइली सुरक्षा बलों ने कथित सुरक्षा से जुड़े अपराधों के लिए 906 फ़लस्तीनी बच्चों को गिरफ़्तार किया.
- स्कूलों और अस्पतालों में पर हुए 371 हमलों के लिए इसराइली सेना, सुरक्षा बल और इसराइली बाशिंदे और अज्ञात हमलावर ज़िम्मेदार हैं.
- इसराइल में स्कूलों और अस्पतालों पर 17 हमलों के लिए अल-क़ासम ब्रिगेड्स और अन्य फ़लस्तीनी हथियारबंद संगठन और अज्ञात हमलावर ज़िम्मेदार हैं.
इस लिस्ट में शामिल किए गंभीर हिंसा वाले मामलों में बच्चों की अपंगता और मानवीय सहायता के रोके जाने को भी शामिल किया गया है.
हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने माना कि "दर्ज की गई सूचनाएं बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा की पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं क्योंकि ज़मीनी हालात पर पुष्टि करना चुनौती बना हुआ है."
'लिस्ट ऑफ़ शेम' क्या है और इसमें और कौन कौन हैं?
साल 2001 में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1379 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव से "संघर्ष में शामिल" उन पार्टियों को चिह्नित करने और सूचीबद्ध करने के लिए कहा जो बच्चों को भर्ती करते हैं और उनका इस्तेमाल करते हैं.
तब से, यह सूची संयुक्त राष्ट्र महासचिव की सुरक्षा परिषद की वार्षिक रिपोर्ट से जुड़ी हुई होती है, जिसमें "सशस्त्र संघर्ष का बच्चों पर प्रभाव के ढर्रे और अपराधों" की जानकारी होती है.
साल 1996 में बच्चों और सशस्त्र संघर्ष के लिए महासचिव के स्पेशल रिप्रजेंटेटिव की व्यवस्था बनाई गई, जिसमें संघर्ष के दौरान बच्चों पर असर का आकलन करने के लिए छह गंभीर अपराधों को चिह्नित किया गया.
इनमें पांच अपराध करने वाला अपराधी स्वतः इस सूची में शामिल हो जाता हैः
- भर्ती और बच्चों का इस्तेमाल
- बच्चों की हत्या और उनकी अपंगता
- बच्चों के ख़िलाफ़ यौन हिंसा
- स्कूलों और अस्पतालों पर हमले
- बच्चों का अपहरण
छठा अपराध है बच्चों समेत नागरिकों को मानवीय सहायता से दूर रखना.
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि "यह चौथे जिनेवा संधि और इसके अतिरिक्त प्रोटोकॉल्स के तहत यह प्रतिबंधित है और यह मानवता के ख़िलाफ़ अपराध या युद्ध अपराध के बराबर हो सकता है."
ताज़ा लिस्ट में बोको हरम, इस्लामिक स्टेट और तालिबान जैसे हथियारबंद संगठन शामिल हैं.
पिछले साल रूसी सेना को भी इसमें शामिल किया गया है.
इसराइल क्यों कहा 'अनैतिक'
संयुक्त राष्ट्र की ताज़ा रिपोर्ट पर अभी तक हमास या इस्लामिक जिहाद की ओर से कोई टिप्पणी नहीं है लेकिन इसराइल ने इसे 'अनैतिक' कहते हुए निशाना साधा है.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कोर्टनी रैटेरे ने 7 जून को यूएन में इसराइली राजदूत गिलाड अर्डान को फ़ोन पर बताया था कि आईडीएफ़ को सूची में डाला जाएगा.
बाद में अर्डान ने सोशल मीडिया पर डाले एक पोस्ट में इसे एक "अनैतिक फैसला बताया था जिससे केवल हमास को फायदा होगा."
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक बयान में कहा कि "संयुक्त राष्ट्र ने हमास हत्यारों का समर्थन करने वालों के खेमे में जाकर खुद को इतिहास में ब्लैकलिस्ट कर लिया है."
उन्होंने घोषणा की, "आईडीएफ़ दुनिया में सबसे नैतिकवादी सेना है, संयुक्त राष्ट्र का कोई भ्रामक फैसला इसे बदल नहीं पाएगा."
हालांकि इसराइल को पहली बार इस लिस्ट में शामिल किया गया है लेकिन सशस्त्र संघर्षों में बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पहले की रिपोर्टों में उसका ज़िक्र आता रहा है.
पिछले साल जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि इसराइली सेना की ओर से दागे गए आंसू गैस के कारण 524 बच्चे (517 फ़लस्तीनी, 7 इसराइली) अपंग हो गए और 563 बच्चों को मेडिकल सहायता की ज़रूरत पड़ी.
मानवाधिकार संगठन, यूएन की पूर्व की रिपोर्टों में इसराइल को इस सूची में न डालने के लिए महासचिव गुटेरेस की काफ़ी आलोचना करते रहे हैं.
ह्यूमन राइट्स वॉच के बाल अधिकार मामलों के डायरेक्टर जो बेकर ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र की लिस्ट ऑफ़ शेम में इसराइली सेना को शामिल करना काफ़ी समय से लंबित था."
वो कहती हैं, "हमास के इज़्ज़ अल-दीन अल-क़ासम ब्रिगेड्स और फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद के अल-क़ुद्स ब्रिगेड्स को भी शामिल करना सही है."
एमनेस्टी इंटरनेशनल के सेक्रेटरी जनरल एग्नेस कैलामार्ड ने इस महीने की शुरुआत में लिखा था, "इस शर्मनाक लिस्ट में शामिल होने के लिए इसराइल को ग़ज़ा में 15,000 बच्चों की हत्या नहीं करनी चाहिए थी."
इस लिस्टिंग का क्या होगा असर?
इस रिपोर्ट की मंशा बच्चों के हालात को सबके सामने लाना है लेकिन इसकी कोई क़ानूनी बाध्यता नहीं है.
ऑक्सफ़ोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एथिक्स, लॉ एंड आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट में वरिष्ठ शोधकर्ता इमानुएला-चियारा गिलार्ड ने बीबीसी को बताया, "देशों और संगठनों को उस सूची में डालना मुख्य रूप से 'शर्मिंदा' करना है - इसका कोई तत्काल ठोस कानूनी नतीजा नहीं होता."
उनके मुताबिक़, "हालांकि, यह कुछ देशों के इसराइल को हथियार देने के फैसले को प्रभावित कर सकता है, अगर वे ये मानें कि क़ानून के पालन के मामले में इसराइल को लेकर कुछ चिंताएं वाजिब हैं. लेकिन इससे कोई प्रतिबंध या पाबंदी लागू नहीं होता."
हमास और फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद पहले ही इसराइल, अमेरिका और ब्रिटेन की 'आतंकवादी संगठनों' की सूची में शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि ग़ैर सरकारी तत्वों (नॉन स्टेट ऐक्टर्स) के रूप में ज़िक्र से उनकी क़ानूनी स्थिति पर कोई फर्क नहीं पड़ता.
गिलार्ड का कहना है कि इस सूचि में शामिल होने का व्यावहारिक असर पड़ सकता है क्योंकि इसराइल और हमास को और आलोचनात्मक नज़रिए से देखा जाने लगेगा और इसका असर सुरक्षा परिषद में संबंधित प्रस्तावों पर पड़ेगा.
संयुक्त राष्ट्र की इस लिस्ट से खुद को बाहर लाने के लिए संगठनों को एक्शन प्लान बनाने और लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र बातचीत शुरू करनी होती है ताकि आगे बच्चों के ख़िलाफ़ जिस तरह के हिंसा का ज़िक्र है उसे रोका जा सके.
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