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आग से खेल रहे हैं इसराइल और हिज़बुल्लाह लेकिन दोनों नहीं लड़ना चाहते जंग
- Author, लूसी विलियमसन
- पदनाम, मध्य-पूर्व संवाददाता, यरूशलम
इस हफ़्ते इसराइल और हिज़बुल्लाह के बीच पैदा हुई युद्ध की स्थिति के बीच एक विचित्र राजनीतिक मोड़ आया.
बकरीद के मौके पर दोनों पक्षों के बीच गहमागहमी और धमिकयों ने गोलीबारी और छिटपुट हमलों की जगह ली.
हिज़बुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह ने बुधवार को धमकी दी कि अगर इसराइल की तरफ़ से युद्ध की शुरुआत होती है तो वो उत्तरी इसराइल पर हमला करे देंगे.
उन्होंने ये भी कहा कि हिज़बुल्लाह के पास 'नए हथियार' हैं जो जंग के मैदान में नज़र आएंगे.
लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि वे इसराइल के साथ बड़े स्तर पर युद्ध नहीं चाहते हैं और वो ग़ज़ा में अपने सहयोगी हमास के प्रति अपने समर्थन के रूप में इसे देखता है.
मंगलवार को हिज़बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल के हाइफ़ा शहर का ड्रोन वीडियो जारी किया था जिसमें कई अहम सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाकों को चिन्हित किया हुआ था.
इसे इसराइल को एक धमकी के तौर पर देखा गया था. हाइफ़ा पर हमला दोनों पक्षों के बीच युद्ध की शुरुआत कर सकता था.
नसरल्लाह ने कहा ये हिज़बुल्लाह के दुश्मनों के ख़िलाफ़ एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है.
वीडियो के जारी होने के घंटों बाद इसराइल के विदेश मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा, ''देश लेबनान और हिज़बुल्लाह के खिलाफ़ अपने फ़ैसलों को बदलने के काफ़ी करीब है.''
उनके मुताबिक अगर जंग हुई तो हिज़बुल्लाह पूरी तरह से नेस्तनाबूद हो जाएगा और लेबनान को भी अच्छा-खासा नुकसान होगा.
इसराइली सेना का कहना है कि लेबनान में हमला करने के लिए ऑपरेशनल प्लान तैयार हैं और उन्हें मंज़ूरी भी मिल चुकी है.
अधिकतर एक्सपर्ट की राय है कि इसराइल और हिज़बुल्लाह दोनों ही इस वक़्त युद्ध नहीं चाहते.
अगर ये युद्ध हुआ तो भयावह होगा जिसमें सरहद की दोनों ओर लाखों लोगों का जीवन तबाह हो जाएगा. और इस युद्ध में हिज़बुल्लाह के समर्थक ईरान और इसराइल के सहयोगी अमेरिका शामिल हो जाएंगे.
लेकिन अब युद्ध की चाहत और इसे टालने के बीच की रेखा धीरे-धीरे पतली होती जा रही है.
इसराइली सरकार में कुछ लोगों का मानना है कि बीते सात अक्टूबर में हुए हमास के हमले के बाद सुरक्षा को लेकर नज़रिया बदल गया है. और किसी भी संभावित जंग में हिज़बुल्लाह की पूरी हार तक उत्तरी इसराइल में कई लोग अपने घरों में वापस तब तक नहीं जा पाएंगे.
जबसे फ़लस्तीन में अपने सहयोगी हमास के समर्थन में हिज़बुल्लाह ने उत्तरी इसराइल में रॉकेट और मिसाइल दागनें शुरू किए तबसे उत्तरी इसराइल के लोगों में से 60 हज़ार से ज्यादा लोग सीमा से दूर अस्थायी घरों में रह रहे हैं.
इसराइली सेना के जवाबी हमलों के बाद लेबनान में भी 90 हज़ार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा.
ज्यूइश पीपल पॉलिसी इंस्टिट्यूट ने 800 इसराइलियों के बीच एक सर्वे किया जिसमें से 60% लोग ये चाहते हैं कि हिज़बुल्लाह के ख़िलाफ़ 'पूरी ताकत' से हमला होना चाहिए.
इन्हीं में से एक तिहाई (36%) से ज्यादा लोगों ने कहा कि वो ये काम जल्द से जल्द चाहते हैं. तीन महीने पहले हुए एक ऐसे ही सर्वे के मुकाबले ये आंकड़े बढ़े हैं.
ग़ज़ा में चल रहे युद्ध के बीच, हिज़बुल्लाह के ख़िलाफ़ भी जंग की शुरुआत से इसराइल सरकार थोड़ी घबराई हुई हो सकती है.
लेकिन इस महीने इसराइल ने रिज़र्व सैनिकों की संख्या में इज़ाफा किया है. अब ये संख्या तीन लाख से लेकर 3.50 लाख तक पहुँच गई है. इससे उत्तरी इसराइल में युद्ध की संभावनाओं को और बल मिला है.
इसराइल की सरकार रिज़र्व सैनिकों की अस्थायी नियुक्तियों के कार्यकाल को भी बढ़ाने पर भी विचार कर रही है. उम्र की सीमा में एक साल और जोड़ा जा रहा है ताकि सैनिकों को मोर्चे पर बुलाया जा सके
बीते आठ महीनों में सीमा के दोनों तरफ जैसे-जैसे हमले बढ़ रहे हैं वैसे ही टारगेट भी लगातार बढ़ते जा रहे हैं.
इसराइली हमले में सीनियर कमांडर तालेब अब्दल्लाह के मारे जाने के बाद से बकरीद वाले दिन तक हिज़बुल्लाह ने इसराइली इलाक़ों पर ड्रोन और रॉकेट से कई हमले किए हैं.
इससे पहले भी बीते कई महीनों से हिज़बुल्लाह के लड़ाके सरहद पर इसराइली इलाक़ों पर एंटी-टैंक मिसाइल और ड्रोन से हमले करते रहे हैं.
अगर जवाबी कार्रवाई किसी संवेदनशील टारगेट को निशाना बनाती है या हताहतों की संख्या अधिक होती है तो युद्ध का ख़तरा बढ़ जाता है.
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक अब तक लेबनान में 400 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें कई सिविलयन भी शामिल हैं.
इसराइल में कम से कम 25 सैनिक और आम लोग जान गंवा चुके हैं.
इसी हफ्ते अमेरिका ने दोनों पक्षों के पास अपने राजदूत भेजे थे लेकिन हिज़बुल्लाह का साफ कहना है कि वो हमास का साथ रहा है, और हमास के साथ एक सीज़फायर समझौता ही उत्तर में भी शांति के लिए रास्ता खोलेगा.
शांति बहाल करने के दबाव के बीच, युद्ध में लिप्त इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू को दोनों तरफ़ युद्ध जारी रखने से फ़ायदा है.
नेतन्याहू के लिए बगैर हमास के नेताओं को मारे, कब्ज़ा किए और ख़ात्मा किए गज़ा में जीत की घोषणा करना आसान नहीं होगा, और जब इनके गुटों के पास अभी भी बटालियन मौजूद हैं.
हर हफ़्ते हमास के ख़िलाफ़ जंग जारी रहती है. इसराइली सेना हिज़बुल्लाह के कमांडरों को भी निशाना बनाती है.
वक़्त के साथ रहना ही नेतन्याहू की ख़ासियत है.
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