ग़ज़ा में इसराइली सेना का किन चुनौतियों से होगा मुक़ाबला

    • Author, फ़ेरास किलानी
    • पदनाम, बीबीसी अरबी

इसराइली सेना ने बीते बुधवार ग़ज़ा पट्टी के उत्तरी हिस्सों में घुसकर कुछ जगहों को निशाना बनाया है.

इसराइली सेना ने कहा है कि कई घंटों तक चले इस मिशन में उनका एक भी सैनिक घायल नहीं हुआ है.

इसराइली सेना इस तरह के ज़मीनी हमले के लिए पिछले कई दिनों से तैयारियां कर रही थी.

इस दिशा में पिछले कई दिनों से ग़ज़ा पट्टी से लगती इसराइली सीमा पर इसराइली सैनिक और सैन्य साजो-सामान इकट्ठा होता दिखा है.

इसराइल के ज़मीनी हमले को लेकर लगातार आशंकाएं जताई जा रही थीं. इसे एक बेहद जोखिमपूर्ण और अनिश्चतताओं से भरा अभियान बताया जा रहा था.

बीबीसी अरबी सेवा के फ़ेरास किलानी ने मध्य पूर्व में कई युद्धों को कवर किया है. उन्होंने पिछले कई मौकों पर ग़ज़ा से रिपोर्ट की है. अब वो इस बात का विश्वेषण कर रहे हैं कि इसका परिणाम क्या हो सकता है.

ग़ज़ा में सुरंगों का जाल

पांच साल पहले मैंने उत्तरी ग़ज़ा में अल-शती शरणार्थी शिविर की यात्रा की थी. इस दौरान जब हम गाड़ी चला रहे थे तो मैंने धमाके की आवाज सुनी. ऐसा लग रहा था मानो हम ठोस ज़मीन की बजाय किसी पुल पर गाड़ी चला रहे हों.

मेरे साथ मौजूद कैमरामैन ने बताया कि ऐसा इसलिए लग रहा था, क्योंकि, डामर के बहुत नीचे, सुरंगों का एक विशाल नेटवर्क बनाने के लिए जमीन को खोखला कर दिया गया था. हमास की ओर से खोदी गई सुरंगें सैकड़ों किलोमीटर तक फैली हुई हैं. इन सुरंगों के जरिए हमास ग़ज़ा की संकरी और घनी आबादी वाली सड़कों के नीचे से सामान ले जाता है. यह काम पकड़ में भी नहीं आता है.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सात अक्टूबर के हमले के बाद हमास को कुचलने और खत्म करने की कसम खाई है. इस हमलें में 1400 से अधिक लोग मारे गए थे.

हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ग़ज़ा पर इसराइली सेना के हवाई हमले में अबतक करीब सात हज़ार लोग मारे गए हैं. बुधवार को ही इन हमलों में 500 लोगों की मौत हुई.

हमास के हथियार

ग़ज़ा पर इसराइल के ज़मीनी हमले के बाद से ये सुरंगें हमास की युद्ध रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाएंगी.

जमीनी हमले की आशंका के बाद से हमास भोजन, पानी और हथियार जमा कर रहा होगा.

माना जाता है कि हमास की कई सुरंगें इसराइल तक फैली हुई हैं. हमास के लड़ाके इनके जरिए इसराइली सैनिकों पर घात लगाकर हमले कर सकते हैं.

इसराइल का मानना ​​​​है कि हमास के तीस हजार सैनिक स्वचालित राइफल, प्रोपेल्ड ग्रेनेड और एंटी-टैंक मिसाइल चलाने में माहिर हैं. हमास को फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद और छोटे इस्लामिक गुटों जैसे अन्य समूहों का समर्थन हासिल है.

शहरी क्षेत्र में लड़ाई के ख़तरे

हाल के इतिहास ने हमें यह दिखाया है कि शहरी क्षेत्र में लड़ाई कितनी खतरनाक हो सकती है. मैंने खुद देखा है कि जब एक प्रशिक्षित सैन्य बल भी इस प्रकार के वातावरण में एक साहसी दुश्मन को घेरकर कुचलने का प्रयास करता है तो क्या हो सकता है.

साल 2016 में वो इराकी विशेष बलों के साथ थे, जब वे मोसुल शहर पर हमले की तैयारी कर रहे थे.

अधिकारियों ने इस्लामी चरमपंथियों को घेरने और यह सुनिश्चित करने का फैसला किया कि उनके पास पीछे हटने का कोई रास्ता न हो. उनकी इस रणनीति ने शहर को नृशंस और घातक टकराव की राह पर ला खड़ा किया.

जिस दिन हम मोसुल के पहले जिले में दाखिल हुए, चरमपंथियों का प्रतिरोध अविश्वसनीय था. उन्होंने हमारे काफिले पर गोलियों, हथगोलों और कंधे से छोड़ी जाने वाली मिसाइलें से हमला किया.

बूबी ट्रैप को हर उस चीज के ऊपर या अंदर रखा गया था, जिनकी कोई कल्पना कर सकता है. लोगों के घरों में रेफ्रिजरेटर, टीवी के साथ-साथ जमीन पर पड़े सोने के टुकड़े तक में हथियार थे.

किसी गलत चीज़ को उठाना या उस पर खड़े होने का मतलब मौत.

ग़ज़ा में दाखिल होने वाले इसराइली सैनिकों के लिए भी ठीक यही खतरे इतजार कर रहे हैं.

मोसुल की लड़ाई के सबक

मोसुल की लड़ाई के अंतिम चरण के दौरान मैंने कई इराकी सैनिकों का फोकस बदलते देखा. लड़ाई इतनी तेज़ और ख़तरनाक़ थी कि सैनिक केवल अपने अस्तित्व के बारे में ही सोच सकते थे. वे नागरिकों की रक्षा का जोख़िम नहीं उठा सकते थे.

एक दूसरा ख़तरा वो निशानेबाज़ थे, जो पूरे शहर की इमारतों और मलबे के बीच में छिपे हुए थे. इराकी सेनाएं अक्सर पूरे इलाके पर बमबारी करने और उन्हें रोकने के लिए हवाई हमले का उपयोग करती थीं.

इसराइली सेना को हमास के प्रशिक्षित निशानेबाज़ों से लड़ने का भारी जोखिम उठाने या उन्हें रोकने के लिए इमारतों को ऊपर से पूरी तरह समतल करने के विकल्प का सामना करना पड़ सकता है.

मोसुल में हम जिस सैन्य काफिले के साथ यात्रा कर रहे थे, उस पर कई कार बम धमाके हुए. उसके बाद हुए बहुत बड़े धमाके में हमारे साथ चल रहे पांच सैनिकों की मौत हो गई.

हमास को कार बमों के इस्तेमाल के लिए नहीं जाना जाता है, लेकिन उसने पहले अकेले आत्मघाती हमलावरों को तैनात किया है. इस प्रकार के हमले का सुरक्षा बलों पर प्रभाव नाटकीय हो सकता है.

अभी यह साफ नहीं है कि ग़ज़ा पर जमीनी हमला कितने समय तक चलेगा, लेकिन मोसुल में इस्लामिक स्टेट समूह के तगड़े प्रतिरोध की वजह से इराकी सुरक्षा बलों को शहर पर नियंत्रण हासिल करने में नौ महीने लग गए थे.

लड़ाकों को सुरक्षित जाने देने का विकल्प

साल 2017 में सीरियाई शहर रक्का में परिणाम बहुत अलग था, जहां कट्टरपंथी चरमपंथियों के एक बड़े समूह को घनी आबादी वाले इलाके में घेर लिया गया था.

इस बार, अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन और कुर्द बलों ने लड़ाकों को बच निकलने का विकल्प देने का फैसला किया.

मैंने कई सालों तक आईएस के खिलाफ कुर्दों की लड़ाई की रिपोर्टिंग की. इसके एक नेता मुझे सीरिया में एक अमेरिकी कमांडर के साथ गुप्त बैठक में ले गए. वह स्थानीय अरब नेताओं की ओर से आईएस के लड़ाकों और उनके परिवारों को रक्का छोड़ने की इजाजत देने के अपील पर राजी हुए.

इस समझौते का असर यह हुआ कि रक्का शहर लड़ाई में पूरी तरह से नष्ट होने से बच गया. इसका मतलब था कि सैन्य और नागरिकों के बीच हताहत होने वालों की संख्या मोसुल की तुलना में काफी कम थी .

चरमपंथियों के शहर छोड़ने के अगले दिन, जो नागरिक शहर में रह गए थे, वे जिंदा बच जाने की वजह से राहत महसूस करते हुए अपने घरों से बाहर निकले. उन्हें शहर पर बड़े हमले के दौरान मरने का डर था.

ग़ज़ा की भौगोलिक स्थिति

लेकिन ग़ज़ा की भौगोलिक स्थिति के कारण यह समझना मुश्किल हो जाता है कि इस तरह का समझौता कैसे इसराइल और हमास के लिए एक विकल्प हो सकता है. रक्का सीरिया का एक सुदूर शहर है. वहां से जिन लड़ाकों को जाने की इजाजत दी गई थी, उन्हें आसपास के खेतों में जाने की इजाजत दी गई थी.

ग़ज़ा पट्टी इसकी तुलना में काफी छोटी है वहां से हमास के लड़ाकों के जाने की कोई जगह नहीं है.

अतीत में लोगों को और भी दूर भेजने के लिए सौदे किए गए हैं. साल 1982 में फ़लस्तीन मुक्ति संगठन लेबनान की राजधानी बेरूत छोड़ने पर सहमत हुआ था, जहां उसे इसराइली सेना ने तीन महीने से घेरा हुआ था. वे अलग-अलग देशों में जाने पर सहमत हुए थे.

पीएलओ के नेता ट्यूनीशिया गए और अन्य सदस्यों को उत्तरी अफ्रीका और मध्य पूर्व में शरण मिली.

इस तरह का समझौता ग़ज़ा में लड़ाई और नागरिक मौतों को कम करने का एक रास्ता हो सकता है. लेकिन यह देखना मुश्किल है कि यह राजनीतिक रूप से कैसे संभव हो सकता है.

इसराइली सरकार ने सात अक्टूबर के हमले के बाद हमास को नष्ट करने की कसम खाई है. ऐसे में हमास के नेतृत्व को किसी दूसरे देश में भागने की इजाजत देने से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया होगी.

लेकिन जब तक कोई अन्य विकल्प नहीं खोजा जाता, तब तक उत्तरी ग़ज़ा हमास और इसराइली सेनाओं के बीच सड़क पर खूनी लड़ाई का युद्धक्षेत्र बन सकता है. इसमें हजारों नागरिक फंस सकते हैं.

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