'उन्हें गंदे पैंट वाली बात नहीं कहना चाहिए थी', जया बच्चन के बयान पर पैपराज़ी बिरादरी में ग़ुस्सा

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- Author, रवि जैन
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
मशहूर अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने बीते सोमवार को मुंबई के बांद्रा स्थित बाल गंधर्व सभागृह में एक आयोजन के दौरान जानी मानी पत्रकार बरखा दत्त से पैपराज़ी और मीडिया से अपने रिश्ते के बारे में बोलते हुए पैपराज़ी को मीडिया का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया.
जया बच्चन ने पैपराज़ियों को 'गंदे-गंदे पैंट पहनकर और हाथ में मोबाइल लेकर चूहे की तरह कहीं भी घुस जाने वाला' कहते हुए कड़े शब्दों में आलोचना भी की.
उनके इस बयान को मनोरंजन जगत के बड़े से बड़े आयोजनों और तमाम सितारों को कवर करने वाले पैपराज़ी 'वर्गवादी, ग़रीब-विरोधी और भेदभावपूर्ण' ठहरा रहे हैं और इसे लेकर जया बच्चन की आलोचना का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है.
जया बच्चन के बयान से उपजे विवाद के बाद आगे से पूरी तरह से उनका बहिष्कार करने से लेकर उनके बंगले 'जलसा' के बाहर धरना देने तक की बातों पर पैपराज़ी की ओर से विचार किया जा रहा है.
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फ़िल्मी सितारों को अपने कैमरे में क़ैद करने के लिए दिन-रात भागदौड़ करने वाले कुछ नामचीन पैपराज़ी से बात करते हुए हमने उनकी राय जानने की कोशिश की है.
'पहनावे से जज करना ग़लत'

बॉलीवुड में फ़ोटोग्राफ़र और कंटेंट क्रिएटर के रूप में अपनी एक पहचान रखने वाले विरल भयानी ने कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं है कि जया जी को किसी से भी नाराज़ होने और अपनी नाराज़गी जताने का पूरा हक़ है. वह उम्र में काफ़ी बड़ी हैं और ऐसे में अगर उन्हें किसी बात का बुरा लगे तो उन्हें किसी को डांटने का पूरा हक़ है. मगर मेरा मानना है कि जया जी ने जिस अंदाज़ में पैपराज़ी के ख़िलाफ़ बातें कहीं हैं, उस तरह से उन्हें पैपराज़ी की आलोचना नहीं करनी चाहिए थी. वैसे हर फोटो लेने वाला पैपराज़ी ही नहीं होता है."
विरल यह भी जोड़ते हैं, "किसी की जाति, धर्म, स्किन कलर, शरीर की बनावट या फिर आर्थिक हैसियत को लेकर टिप्पणी करना किसी को भी शोभा नहीं देता क्योंकि यह नैतिक रूप से ग़लत है. बतौर पैपराज़ी हम सभी जया जी की बेहद इज़्ज़त करते हैं मगर उन्हें 'गंदे पैंट पहनने वाले' कमेंट से बचना चाहिए था और निजी टिप्पणी के बग़ैर ही अपनी बात को सलीके से कहना चाहिए था."
बीते आठ सालों से बॉलीवुड सितारों को कवर करते आ रहे फ़ोटोग्राफ़र और पैपराज़ी समुदाय का हिस्सा रहे स्नेह ज़ाला तो जया बच्चन के कमेंट्स से ख़ासे आहत नज़र आए.

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स्नेह ने अपना विरोध दर्ज़ कराते हुए कहा, "हम दिन-रात सितारों और उनसे जुड़े बड़े-बड़े इवेंट्स को कवर करते रहते हैं. ऐसे में हम भी अपने दायरे में रहकर काम करने की कोशिश करते हैं ताकि किसी को भी किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े. जया जी ने जो कुछ भी कहा, वे बातें निजी तौर पर किसी भी शख़्स के लिए नहीं कही जानी चाहिए."
स्नेह यह भी मानते हैं कि जया बच्चन जी को पैप कल्चर पसंद नहीं है. उन्होंने कहा, "हम समझते हैं कि जया जी पैप कल्चर को नापसंद करती हैं, मगर एक सीनियर अभिनेत्री और वरिष्ठ पॉलिटिकल फ़िग़र होने के नाते किसी के पहनावे और हुलिये से किसी को जज करना जायज तो नहीं ठहराया जा सकता है."
स्नेह पैपराज़ी बिरादरी का बचाव भी करते हैं, "ढेरों यू ट्यूबर्स और हाथ में फ़ोन लेकर कहीं भी पहुंच जाने वाले लोगों की वजह से फ़ील्ड पर इस तरह की दिक़्क़तें पेश आ रही हैं. ऐसे लोग सही मायनों में पैपराज़ी नहीं होते हैं लेकिन इन कंटेट क्रिएटर्स और यू ट्यूबर्स की हरकतों से हम लोगों का भी नाम ख़राब होता है और फिर हमें इस तरह की आलोचना का शिकार होना पड़ता है."
पिछले 28 सालों से बतौर फ़ोटोग्राफ़र मनोरंजन जगत में सक्रिय वरिंदर चावला ने भी जया बच्चन की पैपराज़ी के लिए 'गंदे पैंट पहनने वाले और हाथ में मोबाइल लेकर चूहा की तरह कहीं भी घुस जाने वाले' बयान पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी.
बहिष्कार पर विचार

बीबीसी हिंदी से वरिंदर ने कहा कि पैपराज़ी समुदाय में फ़िलहाल इस बात को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही है कि जया बच्चन के इस रवैये के लिए उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए और इस पर जल्द ही फ़ैसला लिया जाएगा. उल्लेखनीय है कि पैपराज़ी को लेकर जया बच्चन ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह उनकी कतई परवाह नहीं करती हैं.
इस पर वरिंदर कहते हैं, "हम जानते हैं कि जया जी पैपराज़ी को किस क़दर नापसंद करती हैं, लेकिन अगर उन्हें हमारी परवाह नहीं है तो हम पूरे बच्चन परिवार का बहिष्कार करने के बारे में भी कोई फ़ैसला ले सकते हैं. हो सकता है कि तब कहीं जाकर जया बच्चन को इस बात का एहसास होगा कि उन्होंने पैपराज़ी के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया है, वह नहीं करना चाहिए था."
वरिंदर चावला कहते हैं, "एक राजनीतिक हस्ती होने के नाते जया बच्चन ग़रीबों के मुद्दों को भी उठाती रही हैं. मगर 'गंदे पैंट' वाला उनका यह बयान ग़रीबी विरोधी नहीं है तो क्या है?"

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दरअसल, आए दिन फ़िल्मी इवेंट्स को कवर किये जाने के दौरान पैपराज़ी द्वारा 'सितारों का मखौल' उड़ाने वाली टिप्पणियां, अभद्र तरीके से किये जाने वाले व्यवहार, सितारों की प्राइवेसी के प्रति पैपराज़ी की बेफ़िक्री से जुड़े वीडियोज़ की यू ट्यूब और तमाम अन्य तरह के सोशल मीडिया पर ख़ूब चर्चा होती रही है.
मगर विरल भयानी और स्नेह ज़ाला की तरह ही वरिंदर चावला का भी मानना है कि पैपराज़ी की भीड़ में घुसकर, हाथ में मोबाइल लेकर शूट करने वाले किसी भी शख़्स को पैपराज़ी समुदाय का हिस्सा नहीं माना जा सकता है और न ही उनकी किसी हरकत का ज़िम्मेदार पैपराज़ी को ठहराया जा सकता है.
जाने-माने पत्रकार मयंक शेखर ने भी जया बच्चन के कमेंट करने के तरीके को ग़लत बताते हुए कहा, "मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हूं कि पैपराज़ी को जर्नलिस्ट माना जाए या नहीं माना जाए... अगर ये मान लिया जाए कि वह जर्नलिस्ट नहीं भी हैं तब भी वह कुछ काम कर रहे होते हैं. उनका अपना एक पेशा है और उन्हें जीविकोपार्जन का पूरा अधिकार है जिसके लिए उन्हें सम्मान की भावना से देखा जाना चाहिए. मगर यह बात भी सही है कि आप सितारों के पीछे पड़ जाएं, उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन करें तो कोई भी नाराज़ होगा ही."
पहले भी हुए हैं कई मामले

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यह सच है कि अधिकांश जगहों पर तस्वीरें खींचने के लिए पैपराज़ी बिरादरी को सितारों की पीआर टीम आमंत्रित करती है. फिर चाहे घर, जिम, एयरपोर्ट जैसी तमाम जगहों पर उन्हें स्पॉटलाइट करना हो या फिर किसी तरह का लॉन्च या रेड कार्पेट इवेंट हो. मगर ऐसे भी कई मौके आए हैं जब पैपराज़ी को लेकर बॉलीवुड सितारों ने अपनी नाराज़गी खुलकर जताई है.
दो साल पहले आलिया भट्ट पैपराज़ी के प्रति अपना गुस्सा खुलकर ज़ाहिर कर चुकीं हैं. वजह थी कि अपने घर के लिविंग रूम में खड़ी आलिया की पड़ोस की इमारत पर चढ़कर किसी पैपराज़ी ने तस्वीर खींच ली थी.
आलिया ने अपना विरोध जताते हुए उस वक्त लिखा था, "किस दुनिया में इस तरह की चीज़ों की इजाज़त दी जाती है? यह किसी की प्राइवेसी का सरासर उल्लंघन है. एक सीमा रेखा होती है जिसे क्रॉस नहीं किया जाना चाहिए, मगर मैं साफ़तौर पर कहना चाहती हूं कि सभी तरह की रेखाओं को आज पार कर दिया गया है."
उस दौरान अर्जुन कपूर, जाह्नवी कपूर, करण जौहर और अनुष्का शर्मा जैसे सितारों ने आलिया के समर्थन में आवाज़ें उठाई थीं.
अनुष्का शर्मा भी पैपराज़ी को अपने निशाने पर ले चुकीं हैं. साल 2021 में मुम्बई स्थित सी-फ़ेसिंग अपार्टमेंट में चहलकदमी कर रहीं अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की तस्वीरें भी उनकी इजाजत के बग़ैर खींच लीं गई थीं. ऐसे में अनुष्का ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इसका विरोध किया था.
2023 में मार्च महीने में देर रात एक बर्थडे पार्टी से अपनी पत्नी करीना कपूर के साथ अपने घर लौट रहे सैफ़ अली ख़ान ने भी पैपराज़ी को फटकारा था.
अपने बिल्डिंग के कंपाउंड के अंदर तक पीछे पीछे चले आए पैपराज़ी से चिढ़ते हुए सैफ़ अली ख़ान ने कहा था, "हमारे बेडरूम में भी आ जाइए."
हाल ही में धर्मेंद्र की मौत के बाद हरिद्वार में उनकी अस्थियों के विसर्जन के दौरान फ़ोटो और वीडियो लेने वालों पर भी सनी देओल अपना गुस्सा ज़ाहिर करते नज़र आए थे.
एक वायरल वीडियो में सनी देओल गले में कैमरा लटकाए खड़े एक फ़ोटोग्राफ़र के पास जाकर उनसे 'पैसे चाहिए तेरे को, कितने पैसे चाहिए?' कहते हुए साफ़ तौर पर देखे/सुने जा सकते हैं.
इससे पहले धर्मेंद्र की सेहत से जुड़ी कवरेज़ के लिए बंगले के बाहर खड़े पैपराज़ी और बाक़ी मीडिया पर भी सनी देओल ने भड़ास निकाली थी जिसके फ़ौरन बाद सभी तरह की मीडिया को वहां से हटा दिया गया था.
बॉम्बे न्यूज़ फ़ोटोग्राफ़र एसोसिएशन के सचिव रजनीश काकडे जया बच्चन की टिप्पणी पर एक अलग तरह की राय रखते हैं.
उन्होंने कहा कि पैपराज़ी को भी अपने दायरों को अच्छी तरह से समझना चाहिए और सितारों की निजता का सम्मान करना चाहिए.
वे कहते हैं, "पिछले कुछ सालों में एंटरटेनमेंट कवर करने वाली मीडिया का चरित्र तेज़ी से बदला है जो बेहद चिंताजनक है. पैपराज़ी की हरकतों के कारण मेनस्ट्रीम मीडिया के फ़ोटोग्राफ़रों का भी नाम ख़राब हो रहा है और अब उनकी गिनती भी ऐसे ही बेलगाम पैपराज़ी के साथ की जाने लगी है जो हमारी साख़ को भी नुकसान पहुंचाता है."
"जया बच्चन जी ने जो हमला पैपराज़ी पर बोला है, उसके विरोध में हम पैपराज़ी का किसी तरह का समर्थन नहीं कर रहे हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.












