ग़ज़ा पर ज़मीनी हमले से इसराइल क्या हासिल कर पाएगा?

इमेज स्रोत, MENAHEM KAHANA/AFP via Getty Images
- Author, पॉल किर्बी
- पदनाम, बीबीसी यूरोप संवाददाता
- इसराइली सेना का कहना है कि उसने ग़ज़ा पट्टी पर छोटे स्तर पर छापेमारी शुरू कर दी है.
- सेना के प्रवक्ता के अनुसार इसका उद्देश्य "आतंकवादियों और हथियारों को नष्ट करना और बंधकों को छुड़ाना है.
- इसराइल ने ग़ज़ा में रहने वालों को चेतावनी दी है कि वो वादी ग़ज़ा के उत्तर का पूरा इलाक़ा खाली कर दक्षिण की तरफ चले जाएं. इससे 11 लाख लोग प्रभावित होंगे.
- संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि इतने बड़े पैमाने पर लोगों के पलायन से "बेहद गंभीर मानवीय संकट" पैदा हो सकता है.
- बीते सप्ताह इसराइल पर हमास के हमले में 1,300 लोगों की मौत हुई थी. वहीं इसके बाद शुरू हुई इसराइल की जवाबी कार्रवाई में अब तक 2,000 फ़लस्तीनियों की जान गई है.
इसराइली नेताओं ने चेतावनी दी है कि वो धरती से हमास का अस्तित्व हमेशा के लिए ख़त्म कर देंगे और ग़ज़ा फिर कभी पहले जैसा नहीं रहेगा.
शनिवार को इसराइल के ख़िलाफ़ हुए हमास के बर्बर हमले में 1,300 नागरिकों की मौत के बाद इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है "हमास के हर सदस्य को हम ख़त्म करेंगे".
इसके लिए इसराइल ने हमास के ख़िलाफ़ "स्वॉर्ड्स ऑफ़ आइरन" नाम का अभियान शुरू किया है. इससे पहले ग़ज़ा में इस तरह के सैन्य अभियान को कभी अंजाम नहीं दिया गया था.
लेकिन "स्वॉर्ड्स ऑफ़ आइरन" अभियान कितना व्यावहारिक है? घनी आबादी वाले ग़ज़ा में इसे अंजाम देना इसराइली सेना के लिए कितना चुनौतीपूर्ण हो सकता है? और क्या इसराइली कमांडर इससे अपने उद्देश्यों को हासिल कर सकेंगे?
ग़ज़ा पट्टी पर ज़मीनी कार्रवाई का मतलब है एक घर से दूसरे घर जा-जा कर तलाश करना और शहर की तंग गलियों और सड़कों में लड़ाई. इससे आम नागरिकों के हताहत होने का ख़तरा कई गुना बढ़ सकता है.
अब तक इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी पर हवाई हमले किए हैं, जिनमें सैंकड़ों लोगों की जान गई है और चार लाख से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ कर भागना पड़ा है.
सेना के पास एक और अहम ज़िम्मेदारी उन 150 बंधकों को छुड़ाना भी है जिन्हें शनिवार को हमले के दौरान हमास के लड़ाके उठाकर ले गए थे. इन्हें ग़ज़ा में कहां रखा गया है इस बारे में सेना के पास कोई जानकारी नहीं है.
इसराइली डिफेन्स फोर्सेस के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ हरेज़ी हलेवी ने हमास को जड़ से उखाड़ फेंकने की कसम खाई है और ग़ज़ा में इसके राजनीतिक प्रमुख पर निशाना साधा है. लेकिन माना जा रहा है कि इसराइल की इस कार्रवाई के बाद ग़ज़ा हमेशा के लिए बदल जाएगा, जो बीते 16 सालों से हमास के शासन का गवाह बना हुआ है.
इसराइली आर्मी रेडियो से जुड़े सैन्य विश्लेषक आमिर बार शलोम कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि इसराइल हमास के सभी सदस्यों को ख़त्म कर सकता है, क्योंकि इसके पीछे की सोच कट्टर इस्लाम से प्रेरित है. लेकिन वो इस संगठन को इतना कमज़ोर ज़रूर कर सकता है कि किसी तरह के अभियान को अंजाम देने की इसकी क्षमता ख़त्म हो जाए."
ये उद्देश्य सुनने में अधिक वास्तविक लगता है. अब तक इसराइल ने हमास के साथ चार युद्ध लड़े हैं, और हम बार हमास को पूरी तरह से रोकने की उसकी कोशिश नाकाम रही है.
इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेन्ट कर्नल जोनाथन कॉनरिकस ने कहा है कि इस युद्ध के ख़त्म होने तक हमास के पास इतनी सैन्य ताकत नहीं बची रहेगी कि "वो इसराइली नागरिकों के लिए ख़तरा बन सके."

इमेज स्रोत, SAID KHATIB/AFP
ज़मीनी कार्रवाई का जोखिम
ग़ज़ा में इसराइल के अभियान "स्वॉर्ड्स ऑफ़ आइरन" की सफलता कई कारकों पर निर्भर करेगी.
हमास को इसका अंदाज़ा है कि इसराइल हमला कर सकता है. ऐसे में उसकी सैन्य शाखा इज़्ज़ेदीन अल-क़ासम ने इसकी तैयारी की होगी.
हमास ने जगह-जगह पर विस्फोटक लगाए होंगे और ये भी तय किया होगा कि उसे कहां-कहां लड़ना है. वो इसराइली सेना पर हमलों के लिए ग़ज़ा में ज़मीन के नीचे फैले अपने सुरंगों के नेटवर्क का भरपूर इस्तेमाल करेगा.
साल 2014 में ग़ज़ा शहर के उत्तरी हिस्से में इसराइली सेना और हमास के लड़ाकों के बीच संघर्ष हुआ था. उस दौरान एंटी टैंक माइन्स, स्नाइपर्स और हमास के लड़ाकों से लड़ाई में इसराइल की पैदल सेना को काफी नुक़सान झेलना पड़ा था. इस संघर्ष में सैकड़ों आम नागरिक मारे गए थे.
ये एक बड़ी वजह है कि इसराइल ने ज़मीनी हमला शुरू करने से पहले ग़ज़ा के उत्तरी हिस्से में रह रहे 11 लाख फ़लस्तीनी नागरिकों को 24 घटों के भीतर इलाक़ा खाली कर दक्षिण की तरफ जाने के लिए कहा है.

इसराइल ने चेतावनी दी है कि ये युद्ध महीनों तक जारी रह सकता है. उसने इसके लिए 3 लाख 60 हज़ार रिज़र्व सैनिकों को ड्यूटी पर बुलाया है.
लेकिन सवाल ये है कि पीछे हटने को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच इसराइल कब तक अपनी ये मुहिम जारी रख सकेगा.
रिफ्यूजी मामलों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की संस्था ने कहा है ग़ज़ा "नरक का कुंआ" बनता जा रहा है. यहां मौतों का आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है. यहां पानी, बिजली और पेट्रोल-डीज़ल की सप्लाई काट दी गई है. अब इसराइल ने ग़ज़ा की लगभग आधी आबादी को इलाक़ा ख़ाली करने को कहा है.
सुरक्षा और ख़ुफ़िया मामले कवर करने वाले इसराइल के जाने-माने पत्रकार योस्सी मेलमैन कहते हैं, "इसराइली सेना और सरकार ये मान कर चल रही है कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय का कम से कम पश्चिमी मुल्कों का समर्थन मिला हुआ है. अभी उनका सिद्धांत ये है कि 'चलिए साथ आते हैं क्योंकि हमारे हाथों में बहुत समय है."
हालांकि वो मानते हैं कि अगर भूख से मरते लोगों की तस्वीरें सामने आईं तो इसराइल के सहयोगियों को भी स्थिति देखते हुए हस्तक्षेप करना होगा.

इमेज स्रोत, ATEF SAFADI/EPA-EFE/REX/Shutterstock
बंधकों को बचाने का मुश्किल काम
शनिवार को इसराइल पर हुए हमले में हमास के लड़ाके जिन 150 लोगों को अपने साथ बंधक बना कर ले गए हैं, उनमें केवल इसराइली नागरिक नहीं हैं. इनमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक हैं, कई ऐसे भी हैं जिन्हें दोहरी नागरिकता हासिल है.
ऐसे में अमेरिका, फ्रांस और यूके जैसे कई मुल्कों की सरकारों के लिए भी उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. उनकी कोशिश है कि बंधकों को सुरक्षित निकाला जाए.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने देश में रहने वाले फ्रांसीसी-इसराइली परिवारों को भरोसा दिया है और कहा है कि "फ्रांस कभी भी अपने नागरिकों का साथ देने से पीछे नहीं हटता."
अब तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि हमास के पास बंधकों के होने का इसराइल के इस पूरे अभियान पर कितना असर पड़ेगा. इसके साथ ही इसराइल के भीतर भी सरकार पर इसे लेकर दबाव बहुत अधिक है.
आमिर बार शलोम मौजूदा स्थिति की तुलना 1972 के म्यूनिख़ ओलंपिक खेलों के दौरान पैदा हुई स्थिति से करते हैं. 1972 में फ़लस्तीनी बंदूकधारियों ने इसराइल के खिलाड़ियों को अपने कब्ज़े में ले लिया था और 11 लोगों की हत्या की थी.
उस समय हमले में शामिल सभी लोगों को तलाश करके उन्हें मारने के लिए सरकार ने एक अभियान शुरू किया था. वो मानते हैं कि इस बार भी सरकार ऐसा ही कुछ करना चाहेगी, वो इसराइली नागरिकों को अगवा करने के लिए ज़िम्मेदार हमास के लड़ाकों का पता लगाना चाहेगी.
इसराइल की एलीट कमांडो यूनिट सायेरेत मतकाल के सैनिकों के लिए भी ग़ज़ा में अलग-अलग जगहों पर बंधक बनाकर रखे गए लोगों को छुड़ाना बेहद मुश्किल साबित हो सकता है. हमास पहले ही धमकी दे चुका है कि अगर इसराइल ने उस पर हमला कया तो वो बंधकों की हत्या करना शुरू कर देगा.
साल 2011 में इसराइल ने गिलाद शालित नाम के एक सैनिक को हमास के कब्ज़े से छुड़ाने के लिए एक हज़ार फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया था. हमास के लड़ाकों ने गिलाद को पांच साल तक बंधक बनाए रखा था.
लेकिन एक बार फिर इस तरह का कदम उठाने से पहले इसराइल को सोच-विचार करना पड़ेगा. 2011 में जिन फ़लस्तीनियों को इसराइल ने रिहा कया था उनमें याह्या सिनवार भी एक थे. सिनवार अब हमास के राजनातिक प्रमुख बन चुके हैं.

इमेज स्रोत, AHMED ZAKOT/SOPA IMAGES/LIGHTROCKET
इस युद्ध पर इलाक़े के दूसरे मुल्कों की भी नज़र
इसराइल के ज़मीनी अभियान की सफलता इस पर भी निर्भर करेगी कि उसके पड़ोसी इसे लेकर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.
उसे मिस्र की तरफ से ख़ास परेशानी हो सकती है. मिस्र की उत्तरी सीमा ग़ज़ा के दक्षिणी हिस्से से सटी है. रफ़ाह ब्रॉर्डर क्रॉसिंग के ज़रिए ग़ज़ा के भीतर लोगों को मदद पहुंचाने के लिए मिस्र उस पर दबाव बना सकता है.
इसराइल के इंस्टीट्यूट फ़ॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ के ओफ़िर विन्टर कहते हैं, "जैसे-जैसे इसराइल का सैन्य अभियान आगे बढ़ेगा और ग़ज़ा में हताहतों की संख्या बढ़ेगी मिस्र पर दबाव बढ़ता जाएगा. उसके सामने ये सवाल पैदा हो जाएगा कि क्या वो युद्ध से जान बचाना चाह रहे फ़लस्तीनियों से मुंह मोड़ ले?"
लेकिन मामला केवल मिस्र तक सीमित रहेगा ऐसा नहीं है. ओफ़िर विन्टर कहते हैं कि बड़ी संख्या में ग़ज़ा से पलायन करने वालों के लिए मिस्र को अपनी सीमा खोलनी होगी. हो सकता है कि उनकी तरफ से इसराइल के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई के लिए भी उस पर दबाव बढ़े.
इसराइल की उत्तरी सीमा पर भी सभी की नज़रें रहेंगी जो लेबनान से सटी हुई है.
लेबनान में मौजूद इस्लामिक चरमपंथी गुट हिज़्बुल्लाह और इसराइली सेना के बीच कई बार गोलीबारी की घटनाएं हुई हैं, हालांकि अब तक ये इलाक़ा इसराइल के लिए एक नए युद्ध का मैदान नहीं बना है.
हिज़्बुल्लाह का मुख्य समर्थक ईरान पहले ही इसराइल के ख़िलाफ़ "नया मोर्चा" शुरू करने की धमकी दे चुका है. हाल में जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि कोई भी मौजूदा तनाव का फायदा लेने से बचे, तो उनका इशारा ईरान और हिज़्बुल्लाह की ही तरफ था.
जो बाइडन ने कहा था, "कोई भी देश, कोई भी संगठन और कोई भी व्यक्ति अगर इस स्थिति का फायदा उठाने की सोच रहा है, तो उनके लिए मेरे पास एक ही शब्द है- ऐसा न करें."
अपने इस संदेश की गंभीरता दिखाने के लिए अमेरिका ने अपने विमानवाहक युद्धपोत को पूर्वी भूमध्यसागर में भेज दिया है.

इमेज स्रोत, REUTERS/Ibraheem Abu Mustafa
ग़ज़ा के लिए इसराइल की आख़िरी चाल क्या होगी?
अगर इसराइल अपने इस सैन्य अभियान से हमास को पूरी तरह कमज़ोर कर भी देता है, तो सवाल उठता है कि ग़ज़ा में उसकी जगह कौन लेगा.
2005 में इसराइल ने अपनी सेना और हज़ारों की तादाद में ग़ज़ा पट्टी में बसाए गए इसराइलियों को यहां से बाहर निकाल लिया था. वो एक बार फिर इस इलाक़े में आकर बसना और खुद को कब्ज़ा करने वाले के रूप में दिखाना नहीं चाहेगा.
ओफ़िर विन्टर मानते हैं कि हो सकता है कि ग़ज़ा पट्टी में एक बार फिर फ़लस्तीनी ऑथोरिटी (पीए) की वापसी हो जाए, जिसे साल 2007 में हसाम ने सत्ता से बाहर कर दिया था.
फ़लस्तीनी ऑथोरिटी विद्रोही संगठन नहीं है और फिलहाल वेस्ट बैंक के इलाक़े में इसका शासन है. वो कहते हैं कि मिस्र भी इस तरह के एक ज़िम्मेदार पड़ोसी का स्वागत करेगा.

एक चुनौती इसराइली हमलों मे नष्ट हुए ग़ज़ा के इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से पहले की तरह बनाने की होगी.
हमास के हमले से पहले भी इसराइल के रास्ते ग़ज़ा जाने वाली "दोहरे इस्तेमाल वाली चीज़ों" पर इसराइली सरकार ने कड़ी पाबंदियां लगाई थीं. ये ऐसी चीज़ें होती हैं जिसका इस्तेमाल सैन्य और नागरिक दोनों भूमिका में हो सकती थी. इसराइल इस तरह की चाज़ों पर और कड़े प्रतिबंध लगाना चाहेगा.
इसराइल ये भी चाहेगा कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज़ से रिहाइशी इलाक़े इसराइल-ग़ज़ा सीमा पर बनी बाड़ से ज़रूरी दूरी पर रहें. इस तरह की मांग पहले भी इसराइल में उठती रही है.
इसराइल की सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के पूर्व प्रमुख योराम कोहेन मानते हैं कि मौजूदा बफ़र ज़ोन की जगह कम से कम दो किलोमीटर (1.25 मील) की जगह को "शूट ऑन साइट" (देखते ही गोली मारो) वाली जगह बना देनी चाहिए.
हमास के ख़िलाफ़ इसराइल के ज़मीनी अभियान का अंजाम जो भी निकले, वो चाहेगा कि इसके ज़रिए वो अपना मूल उद्देश्य हासिल कर सके. वो चाहेगा कि भविष्य में उस पर इस तरह का हमला फिर कभी न हो.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)














