इसराइल-हमास जंग: क्या है व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस जिसे लेकर बढ़ रही हैं चिंताएं

टीम बीबीसी हिंदी

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, ग़ज़ा पर बुधवार को हुए इसराइली हमले के बाद उठता सफ़ेद धुंआ.

ग़ज़ा में इसराइल की बमबारी जारी है. इसराइली सेना के मुताबिक़, उसने ग़ज़ा पर पांच दिनों में क़रीब 6000 बम गिराए हैं.

इस बमबारी के चलते मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि ग़ज़ा और लेबनान में अपनी सैनिक कार्रवाइयों में इसराइल व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल कर रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक़ ऐसे हथियारों का इस्तेमाल लोगों को गंभीर चोटें पहुंचा सकता है.

ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में से एक ग़ज़ा में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल नागरिकों के लिए जोखिम को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून का उल्लंघन करता है.

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़- जब इसराइली सेना से इन आरोपों के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि फ़िलहाल उसे ग़ज़ा में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस वाले हथियारों के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है. लेबनान में ऐसे हथियारों के इस्तेमाल पर इसराइली सेना ने कोई टिप्पणी नहीं की.

ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि उसने 10 अक्टूबर को लेबनान और 11 अक्टूबर को ग़ज़ा में लिए गए वीडियो को वेरीफाई किया है जिनमें ग़ज़ा सिटी पोर्ट और इज़राइल-लेबनान सीमा के पास दो ग्रामीण इलाक़ों पर तोपखाने से दागे गए सफे़द फ़ॉस्फ़ोरस के कई हवाई विस्फोट दिखे थे.

ह्यूमन राइट्स वॉच के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के निदेशक लामा फ़कीह कहते हैं, "जब भी भीड़भाड़ वाले नागरिक इलाक़ों में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल किया जाता है तो इससे गंभीर जलन और आजीवन पीड़ा का खतरा होता है."

साल 2013 में इसराइल की सेना ने कहा था कि वो युद्ध के मैदान में स्मोकस्क्रीन बनाने के लिए व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस वाली गोलाबारी का इस्तेमाल बंद करने जा रही है.

इसराइली सेना ने तब कहा था कि गोलों में गैस का इस्तेमाल कर स्मोकस्क्रीन का प्रभाव पैदा किया जाएगा. उस वक़्त भी मानवाधिकार समूहों ने ग़ज़ा संघर्ष के दौरान इसराइल के व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के इस्तेमाल की निंदा की थी.

आइए समझते हैं कि व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस क्या है और इसके इस्तेमाल को लेकर इतनी चिंताएं क्यों हैं?

ग़ज़ा पर बुधवार को हुए इसराइली हमले के बाद उठता सफ़ेद धुंआ.

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

इमेज कैप्शन, ग़ज़ा पर बुधवार को हुए इसराइली हमले के बाद उठता सफ़ेद धुंआ.

क्या होता है व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस?

छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

एपिसोड

समाप्त

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस अपने ज्वलनशील गुणों के लिए जाना जाता है. ये एक रासायनिक पदार्थ है जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने पर जल उठता है. इसका इस्तेमाल तोपखाने के गोलों, बम और रॉकेट में किया जाता है.

एक बार जब व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तो रासायनिक प्रतिक्रिया से 815 डिग्री सेल्सियस तक की तेज़ गर्मी पैदा होती है. ऑक्सीजन के संपर्क में आते ही व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के जल उठने की वजह से रौशनी और गाढ़ा धुंआ पैदा होता है जिसका इस्तेमाल सैन्य कार्रवाइयों में किया जाता है. लेकिन जब व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस इंसानों के संपर्क में आता है तो भयानक चोटें पहुंचाता है.

ये विनाशकारी आग का कारण बन सकता है और इमारतों, बुनियादी ढांचे को नष्ट कर सकता है और व्यापक क्षति पहुंचा सकता है.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

ज़्यादातर ज़मीनी सैन्य अभियानों को छुपाने के मक़सद से व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल होता है. व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के इस्तेमाल से सेनाएं एक स्मोकस्क्रीन बना कर अपनी गतिविधियों को छुपाने की कोशिश करती हैं.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस इन्फ्रारेड ऑप्टिक्स और हथियार ट्रैकिंग सिस्टम में भी हस्तक्षेप करता है और सैन्य बलों को एंटी-टैंक मिसाइलों जैसे निर्देशित हथियारों से बचाता है.

ज़मीनी विस्फोट के मुक़ाबले हवाई विस्फोट के वक़्त व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस ज़्यादा बड़े इलाक़े को कवर करता है और बड़ी सैन्य गतिविधियों को छिपाने में मदद करता है. ग़ज़ा जैसे घनी आबादी वाली इलाक़ों में हवा में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का धमाका वहां रहने वाले लोगों के लिए जोख़िम बढ़ाता है.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल आग लगाने वाले हथियार की तरह भी किया जा सकता है. साल 2004 में इराक़ में फालुजा की दूसरी लड़ाई के दौरान छुपे हुए लड़ाकों को बाहर निकलने के लिए व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल किया गया था.

2009 में ग़ज़ा पर इसराइल का हमला.

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

इमेज कैप्शन, ग़ज़ा में जनवरी 2009 में इसराइल की ओर से इस्तेमाल किए गए सफेद फ़ॉस्फ़ोरस से यूएन के दफ्तर में लगी आग.

कितना नुक़सान पहुंचाता है व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस?

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के संपर्क में आने पर इंसानों को गंभीर जलन महसूस होती है, ऐसी जलन जो अक़्सर हड्डियों तक पहुंच सकती है. इस जलन से बने घावों को ठीक होने में वक़्त लगता है और उनमें इन्फेक्शन होने की सम्भावना होती है.

अगर मानव शरीर के सिर्फ़ 10 फ़ीसदी हिस्से पर व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के जलने की वजह से घाव हो जाएँ तो ये जानलेवा होता है. इसके संपर्क में आने पर इंसानों में सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और शरीर के कई ऑर्गन काम करना बंद कर सकते हैं.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस की वजह से मिले प्रारम्भिक घावों के बाद जो लोग बच जाते हैं वो अपनी बाक़ी ज़िन्दगी में दर्द सहते हैं, उनकी गतिशीलता पर असर पड़ता है और उनके शरीर पर पड़े घावों के निशान उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिति पर बुरा असर डालते हैं.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस की वजह से लगने वाली आग घरों और बिल्डिंगों को भी नुक़सान पहुंचा सकती है, फसलों को बर्बाद कर सकती है और पशुधन को मार सकती है.

ग़ज़ा पर इसराइल का हमला.

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES

इमेज कैप्शन, फ़लस्तीन सरकार ने इसराइल पर 10 अक्टूबर को ग़ज़ा में सफ़ेद फ़ॉस्फ़ोरस से हमले का आरोप लगाया है.

व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस को लेकर क़ानूनी और नैतिक चिंताएँ

सशस्त्र संघर्षों में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल कई अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी ढांचों के अधीन है.

पारंपरिक हथियारों पर कन्वेंशन (सीसीडब्ल्यू) के प्रोटोकॉल III के तहत नागरिक आबादी या नागरिक इलाक़ों में आग लगाने वाले हथियार के रूप में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस का इस्तेमाल करने पर प्रतिबन्ध है.

प्रोटोकॉल के तहत इसका इस्तेमाल सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सिद्धांतों के अनुरूप सिग्नलिंग, स्क्रीनिंग और मार्किंग के लिए किया जाना चाहिए.

सशस्त्र संघर्षों में व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस के इस्तेमाल को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस पैदा कर दी है जिसमें कुछ लोगों ने नागरिकों और पर्यावरण को होने वाले नुक़सान को कम करने के लिए सख़्त नियमों और ज़्यादा निगरानी की मांग की है.

ये चर्चा अक्सर होती दिखती है कि सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों और पर्यावरण दोनों पर नुक़सान पहुँचाने वाले प्रभावों को कम करने के लिए व्हाइट फ़ॉस्फ़ोरस वाले हथियारों का इस्तेमाल करते वक़्त सैन्य बलों के लिए सावधानी बरतना और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और सम्मेलनों का पालन करना कितना ज़रूरी है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)