आरएलडी को बीजेपी लोकसभा चुनाव में कितनी सीटें देने पर है राज़ी? – प्रेस रिव्यू

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चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित करने के बीजेपी सरकार के फ़ैसले के बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) इंडिया गठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) में शामिल हो सकता है.
अख़बार द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार चरण सिंह के पोते और आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी से पत्रकारों ने बीजेपी के इस फ़ैसले पर उनकी प्रतिक्रिया के बारे में सवाल किया. इसके जवाब में जयंत चौधरी बोले "दिल जीत लिया."
बाद में अख़बार से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन को छोड़कर एनडीए में जाने के बारे में योजना और कारण के बारे में वो जल्द ही जानकारी देंगे.
उन्होंने कहा कि इस बारे में औपचारिक घोषणा आने वाले कुछ दिनों में हो सकती है.
उन्होंने लंबे वक्त से की जा रही इस मांग को पूरा करने के लिए पीएम मोदी का शुक्रिया भी किया और कहा कि उनका ये फ़ैसला बताता है कि वो देश के मूल चरित्र को समझते हैं.
चौधरी चरण सिंह की राजनीति

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चौधरी चरण सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे. ब्रितानी शासन के दौरान कई बार उन्हें जेल जाना पड़ा. उन्होंने अपना राजनीतिक करियर उत्तर प्रदेश कांग्रेस से शुरू किया था.
1959 में उन्होंने सहकारी खेती के जवाहरलाल नेहरू के विचार के ख़िलाफ़ खुल कर बोला जिसके बाद से राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान होने लगी. बाद में वो उत्तर प्रदेश के पहले ग़ैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने.
मूल रूप से किसान नेता के रूप में पहचाने जाने वाले चौधरी चरण सिंह ने ज़मीनों पर किसान के स्वामित्व की प्रणाली को संरक्षित करने और ग्रामीण स्तर पर भूमि सुधार को लागू करने के लिए जाना जाता है.
1975 की इमर्जेंसी के बाद उन्होंने विपक्षी ताकतों को एक साथ लाने के लिए काम किया और बाद में मोरारजी देसाई सरकार के नेतृत्व में बनी जनता सरकार में डिप्टी प्रधानमंत्री बने. लेकिन देसाई से वैचारिक मतभेद के कारण उन्होंने गठबंधन को विदा कहा और कांग्रेस के समर्थन से देश के पांचवें प्रधानमंत्री बने.
लेकिन इंदिरा गांधी के ख़िलाफ़ इमर्जेंसी से जुड़े मामले हटाने से इनकार करने के बाद उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़ा और एक बार फिर विपक्षी खेमे में आ गए.
जयंत चौधरी कर चुके हैं बीजेपी की आलोचना

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अख़बार लिखता है कि बीजेपी के साथ गठबंधन का जयंत चौधरी का फ़ैसला ऐसे वक्त आया है जब बीते कुछ वक्त में किसानों ने बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ कृषि क़ानूनों को लेकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया था. ऐसे में जयंत चौधरी के सामने अपने फ़ैसले को लेकर सवाल उठना लाज़िमी था क्योंकि वो खुद कह चुके हैं कि बीजेपी किसान विरोधी नीति अपना रही है.
बीजेपी का हाथ थामे हुए किसानों से जुड़ी बीजेपी की नीतियों को लेकर पहले किए गए अपने विरोध के बारे में किए एक सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि वो सोशल मीडिया पर किए अपने पुराने पोस्ट हटाएंगे नहीं.
उन्होंने कहा, "आज चौधरी साहब को भारत रत्न सम्मान देकर बीजेपी ने एक बड़ा कदम उठाया है. मैं यकीन नहीं कर सकता कि पार्टी उन मूल्यों के ख़िलाफ़ जाना चाहेगी जिनके लिए वो खड़े थे."
उन्होंने कांग्रेस पर इसे राजनीतिक चश्मे से देखने का आरोप लगाया और कहा कि उनका ये फ़ैसला किसानों के लिए उनके संघर्ष और उनकी विचारधारा को आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखेगा.
बीजेपी को क्या होगा फायदा?
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चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा के साथ जयंत चौधरी के एनडीए में शामिल होने को लेकर लगाए जा रहे कयासों का दौर थम गया है.
जयंत चौधरी के एक क़रीबी के हवाले से अख़बार लिखता है कि बीजेपी ने आरएलडी को दो लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारने के साथ-साथ उनके लिए राज्य सभा की सीट का प्रस्ताव रखा है.
पार्टी के सूत्रों के अनुसार ये फ़ैसला जाट किसानों के दबाव के कारण ज़रूरी हुआ जो पार्टी का मुख्य वोट बैंक है और फिलहाल बीजेपी और आरएलडी के बीच बंटा हुआ है.
वहीं बीजेपी के सूत्रों के हवाले से अख़बार लिखता है कि किसानों की नाराज़गी दूर करने के लिए पार्टी लंबे वक्त से जयंत चौधरी के साथ मिलकर काम कर रही थी. कुछ वक्त पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुरादाबाद में चौधरी चरण सिंह की मूर्ति का अनावरण किया था.
इस गठबंधन से बीजेपी को न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर इलाक़े के किसानों में नाराज़गी और अग्निवीर योजना को लेकर इलाक़े के युवाओं में नाराज़गी कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाट-मुस्लिम बहुल सहारनपुर और मुरादाबाद डिविज़न और उसके आसपास के इलाक़ों में उसके लिए मौक़े बढ़ सकते हैं. 2019 के चुनावों में इन इलाक़ों में बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा नहीं था.
ये तीसरी बार है जब आरएलडी बीजेपी के साथ हाथ मिला रही है. पार्टी के संस्थापक अजित सिंह वाजपेयी सरकार में कृषि मंत्री थे और 2009 में पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा बना और उसने पांच सीटें जीतीं.
जयंत चौधरी फिलहाल समाजवादी पार्टी (सपा) के समर्थन से राज्य सभा सांसद हैं.
2019 लोक सभा चुनावों में आरएलडी, सपा और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ मिलकर चुनावों में उतरी थी, लेकिन उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा. 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए उसने सपा के साथ गठबंधन किया और फिलहाल उसके नौ विधायक हैं.
लोकसभा में आज होगी राम मंदिर पर चर्चा

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17वीं लोकसभा का सत्र आज ख़त्म होगा और इसकी कार्यवाही में अयोध्या में बने राम मंदिर पर चर्चा होगी. राज्य सभा में आज इसी मुद्दे पर चर्चा होगी.
अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार बीजेपी ने अपने सभी सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है और "बेहद महत्वपूर्ण" मामले पर चर्चा के लिए उनसे दोनों सदनों में उपस्थित रहने के लिए कहा है.
सूत्रों के अनुसार संसद में राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाना है. साथ ही विकसित भारत और राम राज्य की तरह सुशासन स्थापित करने के संकल्प पर भी चर्चा होगी.
सूत्रों के अनुसार इस बात की भी संभावना है कि पीएम सदन को संबोधित करें.
इसी ख़बर से जुड़ी एक रिपोर्ट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा है कि संसद के दोनों सदनों में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का जश्न मनाने वाला ये प्रस्ताव राम मंदिर पर आधिकारिक मुहर देने की दिशा में एक कदम होगा.
सूत्रों के हवाले से अख़बार ने लिखा है कि यह प्रस्ताव भारत और भारतीयता, भारतीय संस्कृति के प्रतीक और "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" के लिए कोशिश करने वाले श्रीराम को समर्पित करने की संभावना भी है.
उम्र कै़द के क्या मायने, सुप्रीम कोर्ट कर रही मामले की सुनवाई

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सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को उस याचिका की सुनवाई के लिए सहमत हो गया है जिसके तहत कोर्ट से ये बताने की गुज़ारिश की गई है कि 'आजीवन क़ैद' का क्या मतलब होगा.
अख़बार जनसत्ता में छपी एक ख़बर के अनुसार कोर्ट को ये बताना है कि इसका मतलब बची ज़िंदगी के लिए जेल होगा या फिर आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 432 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए सज़ा की मियाद को कम या माफ किया जा सकता है.
सीआरपीसी की धारा 432 के तहत किसी व्यक्ति को दी गई उम्र क़ैद की सज़ा को कम या निलंबित किया जा सकता है.
ये याचिका चंद्रकांत झा नाम के एक व्यक्ति ने दायर की है जो तीन मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं. उन्हें हत्या और अपराध के सबूत ग़ायब करने के लिए दोषी ठहराया गया है.
उनका कहना है कि निचली अदालत ने एक मामले में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी जिसे बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने बदलकर उम्र क़ैद कर दिया था. उनकी दलील है कि उम्र क़ैद की सज़ा का मतलब अगर आख़िरी सांस तक जेल में रहना होता है तो ये व्यक्ति की मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. ये उससे सुधार का मौक़ा पूरी तरह छीन लेता है.
इस याचिका पर अब जस्टिस ह्रषिकेश राय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
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