'भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में न फंस जाए', इस्तीफ़े के बाद पहली बार धनखड़ बोले

जगदीप धनखड़

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इमेज कैप्शन, जगदीप धनखड़ ने इसी साल संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा दे दिया था

क़रीब चार महीने पहले स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफ़ा देने वाले जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित किया.

जगदीप धनखड़ शुक्रवार को भोपाल में आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की किताब का विमोचन करने पहुंचे थे.

यहां उन्होंने नैरेटिव के चक्कर में फंसने को लेकर चेताते हुए कहा, "भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में न फंस जाए, इस चक्रव्यहू में कोई फंस गया तो निकलना बड़ा मुश्किल है."

हालांकि, इसके तुरंत बाद जगदीप धनखड़ ने हंसी के अंदाज़ में ये कहा कि वह अपना उदाहरण नहीं दे रहे हैं.

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धनखड़ ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस साल 21 जुलाई को अचानक इस्तीफ़ा दे दिया था. तब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा था और उनका इस्तीफ़ा स्वीकार भी कर लिया गया था.

इसके बाद विपक्षी पार्टियों ने धनखड़ के इस्तीफ़े पर सरकार की 'चुप्पी' को लेकर सवाल भी खड़े किए थे.

हालांकि, इस्तीफ़े के बाद धनखड़ सार्वजनिक मंचों से दूर ही दिखे. आख़िरी बार उन्हें सितंबर में उनकी जगह नए उपराष्ट्रपति बने सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था.

जगदीप धनखड़ ने क्या-क्या कहा?

धनखड़

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इमेज कैप्शन, धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद 12 सितंबर 2025 को सीपी राधाकृष्णन (दाएं) उपराष्ट्रपति चुने गए थे
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अपने भाषण की शुरुआत में धनखड़ ने कहा, "हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां धारणाएं ही वास्तविकता तय करती हैं. फिर चाहे आप इसे कितना ही नकारें."

आरएसएस नेता की किताब को धनखड़ ने 'गौरवशाली अतीत' का आईना बताया. उन्होंने कहा कि ये किताब उन लोगों को जगाएगी, जो सो गए हैं. ये किताब लोगों को उनके सांस्कृतिक मूल्यों से अवगत कराएगी.

इसी कड़ी में जगदीप धनखड़ ने कहा, "आज ऐसा ज़माना आ गया है कि नैतिकता और अध्यात्म से कुछ लोग दूर हटते जा रहे हैं."

मगर इसी बीच उन्हें उनके स्टाफ़ ने मैसेज भेजा कि उनकी फ़्लाइट का समय हो रहा है.

हालांकि, इस पर भी मज़ाकिया अंदाज़ में जगदीप धनखड़ ने कहा, "मैसेज आ गया है, समयसीमा है. लेकिन मैं फ़्लाइट पकड़ने की चिंता में अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता. और दोस्तों, मेरा हालिया अतीत तो इसका सबूत है."

धनखड़ ने इस संबोधन के दौरान दुनियाभर में सुरक्षा और आर्थिक क्षेत्र में पेश आ रही अभूतपूर्व चुनौतियों का ज़िक्र किया. उन्होंने का कि दुनिया जलवायु परिवर्तन का भी सामना कर रही है, साथ ही डेमोग्राफ़ी को लेकर बेचैनी है. सूचनाओं की जंग लड़ी जा रही है. इसी के आगे उन्होंने नैरेटिव की भी बात कही.

धनखड़ ने अपने से पहले दिए गए संबोधन की बात का हवाला देते हुए कहा, "तिवारी जी नैरेटिव की बात कर रहे थे. भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में न फंस जाए. इस चक्रव्यूह में कोई फंस गया तो निकलना बड़ा मुश्किल है. मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं."

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय जाने पर हुए पुराने विवाद का ज़िक्र करते हुए धनखड़ ने कहा, "जून 2018 में डॉ. प्रणब मुखर्जी के नागपुर में संघ मुख्यालय के दौरे ने कई लोगों को हैरान किया और तीखी प्रतिक्रियाएं आईं. कुछ लोगों ने तो इस दौरे को ईशनिंदा तक कहा."

उन्होंने कहा, "विरोध की कोई सीमा नहीं दिख रही थी. इसे इस तरह से गढ़ा गया था कि ये एक ऐसे नैरेटिव के तौर पर उभरे जो राष्ट्रवादी रुख़ को कमज़ोर करे. फिर भी प्रणब दा, जो अपने समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से थे, उन्होंने आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार के जन्मस्थान पर रखी विज़िटर्स बुक में एक संदेश लिखकर इस पूरे विवाद को विराम दे दिया."

धनखड़ के इस्तीफ़े पर हुआ था विवाद

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कई बार जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं

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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कई बार जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए

राज्यसभा के उपसभापति जगदीप धनखड़ ने इसी साल संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 21 जुलाई को इस्तीफ़ा दे दिया था. जबकि बतौर राज्यसभा के सभापति दिन में उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही का संचालन किया था.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे इस्तीफ़े में धनखड़ ने लिखा था, 'स्वास्थ्य की प्राथमिकता और चिकित्सकीय सलाह का पालन करते हुए, मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं.'

74 साल के धनखड़ ने अगस्त 2022 में कार्यभार संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक चलना था.

कांग्रेस पार्टी ने उस समय से ही ये दावा किया कि धनखड़ के इस्तीफ़े के पीछे ख़राब स्वास्थ्य के अलावा भी कोई कारण है. हालांकि, बीजेपी ने इस दावे को ख़ारिज किया था.

गृह मंत्री अमित शाह ने धनखड़ के इस्तीफ़े पर विवाद के बीच दिया था ये बयान
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में धनखड़ पर दबाव होने के सवाल पर कहा था, "धनखड़ साहब के पत्र में इस्तीफ़े की वजह स्पष्ट है. उन्होंने अपने आरोग्य (स्वास्थ्य) का हवाला देते हुए इस्तीफ़ा दिया है. उन्होंने सरकार के सभी मंत्रियों और प्रधानमंत्री को अच्छे कार्यकाल के लिए धन्यवाद दिया है."

अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने धनखड़ के भोपाल दौरे के बहाने बीजेपी को निशाने पर लिया है.

उन्होंने कहा, "बात ये है कि उनके (बीजेपी) लिए वही महत्वपूर्ण है जो उनके काम आए. यूज़ एंड थ्रो...यही भाजपा है और यही...मैं संघ के लिए इसलिए नहीं कह सकता क्योंकि वह संघ के कार्यक्रम में ही आए हैं."

इससे पहले बीते महीने ही कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए ये सवाल उठाया था कि धनखड़ अपने इस्तीफ़े के बाद से पिछले 100 दिनों से चुप हैं.

उन्होंने पोस्ट किया था, "ठीक 100 दिन गुज़रे हैं जब भारत के राजनीतिक इतिहास में कुछ अभूतपूर्व वाक़या हुआ था. 21 जुलाई की रात अचानक और हैरानी भरे तरीके से भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफ़ा दे दिया था. यह साफ़ था कि ऐसा करने पर उन्हें मजबूर किया गया था, जबकि वह दिन-रात प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते थे. पूर्व उपराष्ट्रपति जो सुर्खियों में रहा करते थे, वह पिछले 100 दिनों से न तो दिखे हैं, न तो कुछ बोले हैं. "

इसी साल 12 सितंबर को सीपी राधाकृष्णन को भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.