उत्तराखंड की सुरंग में फँसे झारखंड के मज़दूरों के परिजन क्या कह रहे हैं?

फूलकुमारी देवी

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    • Author, रवि प्रकाश
    • पदनाम, खीराबेड़ा (झारखंड) से, बीबीसी हिंदी के लिए

‘क्या बोलेंगे. घर में रहता था, तो दिन भर में 3-4 बार खाना माँगता था. अब इतने घंटे हो गए. कौन जाने, सुरंग में खाना मिल भी रहा है या नहीं. सुने हैं कि खाना-पानी भेजा गया है. मिला है कि नहीं. खाया है कि नहीं."

"ये कैसे जानेंगे हम. भगवान मेरे बेटे को सुरंग से ज़िंदा बाहर निकाल दें. प्रधानमंत्री झारखंड आए हैं, तो मेरे बेटे को बचा लीजिए. सब लोग सुरंग से जल्दी बाहर आ जाएं. बस यही चाहते हैं.’

उत्तरकाशी में एक निर्माणाधीन सुरंग में फँसे एक मज़दूर, राजेंद्र बेदिया की माँ फूल कुमारी देवी इतना ही बोल पाती हैं.

बीबीसी हिंदी से बातचीत के दौरान आँसू रोकने की उनकी कोशिशें विफल साबित होने लगी हैं.

20 साल का राजेंद्र उनका इकलौता बेटा है. वो उन 40 मज़दूरों में से एक हैं, जो उस सुरंग के अंदर फँस गए हैं.

वे अपने गाँव खीराबेड़ा के कुछ साथियों के साथ इसी महीने उत्तरकाशी के उस प्रोजेक्ट में काम करने गए थे.

राजेंद्र बेदिया की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, राजेंद्र बेदिया, टनल में फंसे हुए हैं.

घर पर उनकी माँ फूलकुमारी देवी, पिता श्रवण बेदिया और बहन चांदनी को उनकी सकुशल वापसी की उम्मीदें हैं.

खीराबेड़ा गाँव, झारखंड की राजधानी राँची से क़रीब 45 किलोमीटर दूर ओरमांझी प्रखंड का हिस्सा है.

इस गाँव के कुल आठ मज़दूरों की टोली, उत्तरकाशी के सुरंग प्रोजेक्ट में काम करने गई थी. इनमें से राजेंद्र बेदिया समेत तीन लोग अभी सुरंग में फँसे हुए हैं. इनके परिजनों की हालत ख़राब होती जा रही है.

राजेंद्र बेदिया के पिता श्रवण बेदिया विकलांग हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, “हमें अपने बेटे को देखना है. राजेंद्र के साथ उत्तराखंड गए गाँव के दूसरे लोगों ने फोन पर इस घटना की ख़बर दी."

"जब से मन उदास है. हम लोगों की साँस अटक गई है. अब जब बेटा वापस आएगा, तभी खा-पी सकेंगे. वही मेरे जीवन का सहारा है.”

चरकू बेदिया का 25 साल का बेटा अनिल बेदिया भी टनल में फंसा हुआ है.

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इमेज कैप्शन, चरकू बेदिया का 25 साल का बेटा अनिल बेदिया भी टनल में फंसा हुआ है.

'किसी ने नहीं किया फोन'

बाँस-फूस से बने उनके घर से थोड़ी ही दूर पर स्थित गाँव के स्कूल के पास मेरी मुलाक़ात चरकू बेदिया से हुई.

वे 70 साल के हैं. उनका 25 साल का बेटा अनिल बेदिया भी इसी सुरंग के अंदर फँसा है. इससे एक दिन पहले ही उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बातचीत की थी.

चरकू बेदिया ने बीबीसी से कहा, “मैंने अनिल से कुछ पैसा माँगा था ताकि पर्व-त्योहार का काम चल सके. फिर शनिवार को फोन किए तो फोन नहीं लगा. इसके बाद मुझे सुरंग का मलबा गिरने और बेटे के उसमें फंसे होने की जानकारी मिली.”

चरकू बेदिया

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ऐसी ही हालत बरहन बेदिया और उनकी पत्नी की है. इनका 18 साल का बेटा सुखराम बेदिया भी सुरंग के अंदर फँस गया है.

इन तीनों परिवारों में एक और बात कॉमन है, वह है कि इनके घरों में टेलीविजन का नहीं होना.

सुरंग में फँसे मज़दूरों के इन परिवार वालों ने हादसे और वहाँ चलाए जा रहे बचाव कार्य का वीडियो मोबाइल पर देखा है.

सुखराम बेदिया ने बीबीसी से कहा, “उत्तराखंड से फोन आया कि कुछ घंटे में सारे मज़दूरों को सुरंग से बाहर निकाल लिया जाएगा. अब तो कितना घंटा हो गया. तो क्यों नहीं निकाल पाई सरकार.”

वे कहते हैं, “कब निकलेगा मेरा बेटा. क्या पता कैसे होगा सुरंग के अंदर. अंधेरे में. सांस कैसे लेता होगा. क्या खाता होगा. सोच के ही रोना आता है.”

सुरंग के पास मौजूद झारखंड के अधिकारियों की टीम

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झारखंड के 15 मज़दूरों की जान फँसी

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उत्तरकाशी में हुए इस हादसे में सुरंग के अंदर फँसे 40 मज़दूरों में से 15 झारखंड के हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय ने इसकी पुष्टि की है.

मंगलवार की शाम जारी विज्ञप्ति के मुताबिक़ सुरंग में फंसे मज़दूरों में से तीन राँची जिले के रहने वाले हैं. इनके अलावा खूंटी के तीन, पश्चिमी सिंहभूम का एक और गिरिडीह ज़िले के दो मज़दूर भी सुरंग में फंसे हैं.

झारखंड सरकार ने अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को उत्तरकाशी भेजा है. इन अधिकारियों ने पाइप के ज़रिये कुछ मज़दूरों से बातचीत की है.

इसके बाद दावा किया है कि सुरंग में फंसे झारखंड के सभी 15 मजदूर पूरी तरह सुरक्षित हैं.

उत्तरकाशी में हुए हादसे के बाद कांग्रेस की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सुरंग में फँसे मज़दूरों की सूची जारी की थी.

उन्होंने मुख्यमंत्री से मज़दूरों की सकुशल वापसी की पहल करने की अपील की थी. इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर झारखंड के अधिकारियों की टीम उत्तरकाशी भेज दी गई.

मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन अधिकारियों में से एक का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें वे पाइप के जरिये मज़दूरों से बातचीत करते दिख रहे हैं. इनकी तस्वीरें भी जारी की गई हैं.

पलायन की त्रासदी

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इमेज कैप्शन, खीराबेड़ा गाँव के सामाजिक कार्यकर्ता त्रिवेणी बेदिया ने झारखंड सरकार की रोज़गार नीति पर सवाल उठाए हैं.

प्रधानमंत्री झारखंड दौरे पर

यह इत्तेफ़ाक़ ही है कि जब उत्तरकाशी हादसे में फँसे झारखंड के मजदूरों के परिजन अपने बेटों की सकुशल वापसी की गुहार लगा रहे हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी झारखंड में ही हैं.

प्रधानमंत्री मंगलवार की देर शाम राँची पहुँचे. बिरसा मुंडा की जयंती पर होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद बुधवार की दोपहर वो दिल्ली वापस लौटेंगे.

वीडियो कैप्शन, उत्तराखंड की सुरंग में फंसे मज़दूरों के परिवार परेशान, सरकार से गुहार लगाई

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