मध्य प्रदेश बीजेपी में भीतरघात का मामला कितना बड़ा है?- प्रेस रिव्यू

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द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस में भीतरघात और टिकट बँटवारे के बाद कार्यकर्ताओं की नाराज़गी पर रिपोर्ट प्रकाशित की है.
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही मध्य प्रदेश में अधिकतर सीटों पर टिकटों की घोषणा कर दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ क़रीब 22 सीटों पर बीजेपी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है.
छह सीटों पर टिकट की उम्मीद कर रहे कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है.
बीजेपी ने अभी तक 228 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं. गुना और विदिशा से उम्मीदवारों की घोषणा बाक़ी है.
पूर्व मंत्री रुस्तम सिंह ने रविवार को बीजेपी से इस्तीफ़ा दे दिया. वो मोरेना सीट से अपने बेटे राकेश सिंह के लिए टिकट मांग रहे थे. यहां से पार्टी ने रघुराज कनसाना को उम्मीदवार बनाया है.
कनसाना कांग्रेस के टिकट पर मोरेना से जीते थे. ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कनसाना ने भी कांग्रेस छोड़ दी थी. कनसाना ने बीजेपी के टिकट पर उपचुनाव लड़ा था और पाँच हज़ार से अधिक वोट से हार गए थे.
इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि उस समय भी जब कनसाना को उम्मीदवार बनाया गया था तब सिंह समेत कई स्थानीय नेता इसे लेकर नाख़ुश थे.
उपचुनाव में हार के लिए कनसाना ने भी बीजेपी नेतृत्व को ज़िम्मेदार बताया था.
रुस्तम सिंह एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं और बीजेपी सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं.
वहीं रविवार को भोपाल में मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा के सामने पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता के समर्थकों ने नारेबाज़ी की.
ये कार्यकर्ता भोपाल दक्षिण से उम्मीदवार बनें भगवानदास सबनानी को टिकट दिए जाने का विरोध कर रहे थे. भोपाल दक्षिण के कई बीजेपी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर गुप्ता को टिकट दिए जाने की मांग की है.
वहीं टीकमगढ़ से बीजेपी के पूर्व विधायक केके श्रीवास्तव ने भी टिकट बँटवारे पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है और बीजेपी अध्यक्ष को पत्र लिखा है.
श्रीवास्तव ने अख़बार से कहा, “मुझे इस बात का दुख है कि जिस पार्टी को मैंने अपना जीवन दिया, जिसके लिए 18 मुक़दमे लड़े, जेल गया, उसे मुझे कछ ग़लत निर्णयों के कारण छोड़ना पड़ा है.”
भीतरघात और टिकट बँटवारे पर असंतोष और नाराज़गी सिर्फ़ बीजेपी तक ही सीमित नहीं है.
अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ कांग्रेस भी 40 सीटों पर ऐसे ही हालात का सामना कर रही है.
पाँच सीटों पर पार्टी से जुड़े लोगों ने इस्तीफ़े भी दिए हैं.
शाजापुर ज़िले के सूजलपुर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कमलनाथ के घर के बाहर प्रदर्शन करके योगेंद्र सिंह के लिए टिकट मांगा है.
यहां से रामवीर सिंह सिकरवार को उम्मीदवार बनाया गया है. तीन दिनों के भीतर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दो बार सिकरवार को टिकट दिए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है.
वहीं चंद्र गोपाल मलैया के समर्थकों ने प्रदर्शन करके उनके लिए होशंगाबाद से टिकट मांगा है. यहां से गिरिजाशंकर शर्मा को टिकट दिया गया है. दो बार बीजेपी से विधायक रहे शर्मा हाल ही में कांग्रेस में आए हैं.
पति-पत्नी जिन्होंने वायुसेना में एयर मार्शल की रैंक हासिल की

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक ऐसे दंपती पर रिपोर्ट प्रकाशित की है जिन्होंने भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल की रैंक हासिल की है.
अख़बार लिखता है कि ये दुर्लभ बात है कि कोई पति-पत्नी तीन स्टार जनरल का दर्जा हासिल करें.
साधना नायर को जब सोमवार को भारतीय वायुसेना का एयर मार्शल बनाया गया तब नायर दंपती ने ये दुर्लभ उपलब्धि हासिल कर ली.
पेशे से डॉक्टर एयर मार्शल साधना नायर ने सोमवार को डायरेक्टर जनरल हॉस्पिटल सर्विसेज का पदभार संभाला.
इसी के साथ वो भी अपने पति केपी नायर की तरह ही एयर मार्शल बन गईं. फाइटर पायलट रहे केपी नायर साल 2015 में भारतीय वायुसेना के डायरेक्टर-जनरल इंस्पेक्शन एंड सेफ़्टी पद से रिटायर हुए थे.
एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया है कि नायर दंपती भारतीय वायुसेना के पहले ऐसे पति-पत्नी हैं, जिन्होंने दोनों ने ही एयर मार्शल की रैंक हासिल की है.
इससे पहले कानितकर दंपती ने भारतीय सेना में साल 2020 में थ्री स्टार जनरल का दर्जा हासिल किया है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ सेना में, लेफ्टिनेंट जनरल माधुरी कानिकतर, जो स्वयं भी डॉक्टर हैं, और उनके पति लेफ्टिनेंट जनरल राजीव कानितकर, दोनों ही थ्री स्टार जनरल की रैंक हासिल की.
ऑर्मर्ड कॉर्प के क्वार्टरमास्टर के अधिकारी राजीव कानितकर साल 2017 में क्वार्टरमास्टर जनरल के पद से रिटायर हुए थे.
एयर मार्शल साधना नायर के पिता और भाई भी वायुसेना में डॉक्टर रहे हैं. पिछले सात दशकों से उनका परिवार वायुसेना की सेवा में है.
ओडिशाः रिटायर होते ही सीएम के और ख़ास बने आईएएस अधिकारी

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ केंद्र सरकार ने ओडीशा काडर के शक्तिशाली आईएएस अधिकारी वीके पांडियन के स्वेच्छा से रिटायर होने को मंज़ूरी दे दी है.
इसके तुरंत बाद उन्हें मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की सरकार ने कैबिनेट रैंक का दर्जा देते हुए सरकार के 5टी कार्यक्रम और नबीन ओडीशा का प्रमुख बना दिया है.
इससे पहले पांडियन मुख्यमंत्री नवीन पटनयाक के निजी सचिव के रूप में काम कर रहे थे.
2000 बैच के आईएएस अधिकारी पांडियन पहले से ही प्रशासन में शक्तिशाली भूमिका में थे, अब उन्हें सरकार में अहम ज़िम्मेदारी दे दी गई है.
अख़बार लिखता है कि आईएएस से सेवानिवृत होने के बावजूद पांडियन का ओडीशा प्रशासन में ‘असामान्य प्रभाव’ बना रहेगा.
माना जाता है कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने पांचवे कार्यकाल में जिस 5टी कार्यक्रम की शुरुआत की है वो पांडियन का ही विचार है.
बदलाव के लिए शुरू की गई इस पहल का मक़सद राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना है.
पटनायक सरकार का दावा है कि इस कार्यक्रम के तहत राज्य में अब तक चार हज़ार से अधिक हाई स्कूलों का कायपलट किया जा चुका है.
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