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ब्रिटेन के एक पूर्व कमांडर का दावा, इस साल युद्ध हार सकता है यूक्रेन
- Author, फ्रैंक गार्डनर
- पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता
ब्रिटेन के ज्वाइंट फ़ोर्सेज कमांड के एक पूर्व कमांडर ने कहा है कि यूक्रेन को इस साल रूस के हाथों हार का सामना करना पड़ सकता है.
जनरल सर रिचर्ड बैरन्स ने बीबीसी से कहा कि इस साल यूक्रेन के युद्ध हारने का गंभीर ख़तरा है. उन्होंने कहा, ''इसका कारण यह है कि यूक्रेन को यह लग सकता है कि वह जीत नहीं सकता है.''
उन्होंने कहा, "और जब वह उस बिंदु पर पहुंच जाएगा तो लोग क्यों और लड़ना और मरना चाहेंगे, केवल उस चीज़ की रक्षा के लिए जो बचाने लायक नहीं है?"
हालांकि यूक्रेन अभी उस बिंदु पर नहीं पहुंचा है.
लेकिन उसकी सेनाओं के पास गोला-बारूद, सैनिकों और हवाई सुरक्षा की बेहद कमी है. पिछले साल यूक्रेन का जवाबी हमला रूसियों को उनके कब्जे़ वाली ज़मीन से उखाड़ फेंकने में विफल रहा था.
अब रूस गर्मियों में हमले की तैयारी कर रहा है. यह हमला कैसा नज़र आएगा और इसके संभावित रणनीतिक उद्देश्य क्या हैं?
यूक्रेन से कितना ताकतवर है रूस?
जनरल बैरन्स कहते हैं, "रूसी हमले का जो स्वरूप होने वाला है, वह बिल्कुल साफ है.''
वो कहते हैं, "हम देख रहे हैं कि रूस अग्रिम पंक्ति पर लड़ रहा है. तोपखाने और गोला-बारूद के मामले में उसे पांच के बदले एक का फायदा है. वह नए हथियारों से लड़ने के लिए अतिरिक्त लड़ाकों का इस्तेमाल कर रहा है."
इनमें एफ़एबी ग्लाइड बम भी शामिल है. यह सोवियत युग का बम है, इसे गूंगा बम भी कहा जाता है. इसमें पंख, जीपीएस और 1,500 किलोग्राम विस्फोटक लगा होता है. यह बम यूक्रेनी सुरक्षाबलों पर कहर बरपा रहा है.
जनरल बैरन्स कहते हैं, "इस साल गर्मी के मौसम में किसी समय हम एक बड़ा रूसी हमला देख सकते हैं. उसका इरादा छोटे-छोटे फायदे के साथ आगे बढ़ने की जगह अधिक बड़ा हमला कर यूक्रेनी रक्षा पंक्ति को तोड़ने की कोशिश करना है."
वो कहते हैं, "और अगर ऐसा होता है तो हम रूसी सेनाओं के यूक्रेन के उन इलाक़ों में घुसने जोखिम उठाएंगे, जहां यूक्रेनी सशस्त्र बल उन्हें रोक नहीं सकते हैं."
लड़ाई कहां होगी?
पिछले साल रूस को इस बात का ठीक-ठीक अंदाज़ा था कि यूक्रेन पर कहां-कहां हमला करने की संभावना है- ज़ापोरिज़िया के दक्षिण से अज़ोव सागर की तरफ. इसी के मुताबिक़ उन्होंने अपनी योजना बनाई और यूक्रेन की बढ़त को सफलतापूर्वक रोक दिया.
डॉक्टर जैक वॉटलिंग व्हाइटहॉल थिंकटैंक द रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट में ज़मीनी युद्ध के शोधकर्ता हैं. वो कहते हैं, "यूक्रेनियों के सामने एक चुनौती यह है कि रूसी यह चुन सकते हैं कि उन्हें अपनी सेना तैनात कहां करनी है."
वो कहते हैं, "यह एक बहुत लंबी अग्रिम पंक्ति है. यूक्रेनी को इसकी रक्षा करने में सक्षम होने की ज़रूरत है. लेकिन वे निश्चित तौर पर ऐसा नहीं कर सकते."
डॉक्टर वॉटलिंग कहते हैं, "यूक्रेन की सेना अपनी ज़मीन खो देगी. लेकिन सवाल यह है कि इससे कहां की और कितनी जनसंख्या प्रभावित होने वाली है."
यह बहुत संभव है कि रूस के जनरल स्टाफ़ ने अभी यह तय न किया हो कि उन्हें किस दिशा को अपने कोशिशों के लिए मुख्य रूप में चुनना है. लेकिन मोटे तौर पर उनके सामने मौजूद अलग-अलग विकल्पों को तीन जगहों में बांटा जा सकता है.
ख़ारकीएव
डॉक्टर वॉटलिंग कहते हैं, "ख़ारकीएव, निश्चित रूप से असुरक्षित है."
ख़ारकीएव ख़तरनाक तरीके़ से रूस की सीमा के पास ही स्थित है. यह रूस के लिए एक आकर्षक लक्ष्य है.
अभी इस पर रोज़ाना रूसी मिसाइलों से हमला किया जा रहा है. ड्रोन, क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों के घातक मिश्रण से हो रहे इन हमलों बचने के लिए इसकी पर्याप्त हवाई सुरक्षा देने में यूक्रेन असमर्थ है.
जनरल बैरन्स कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस साल के आक्रामण का पहला उद्देश्य डोनबास से बाहर निकलना होगा."
वो यह भी कहते हैं, "उनकी नज़र ख़ारकीएव पर होगी जो रूसी सीमा से 29 किलोमीटर या उससे अधिक दूरी पर स्थित है. यह उनके लिए एक बड़ा पुरस्कार साबित हो सकता है."
यदि ख़ारकीएव रूस के कब्ज़े में चला गया तो क्या यूक्रेन एक इकाई के रूप में काम कर सकता है? विश्लेषकों का कहना है कि "हां, लेकिन यह उसके मनोबल और उसकी अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ा झटका होगा."
डोनबास
पूर्वी यूक्रेन के इलाके़ को डोनबास के रूप में जाना जाता है. यह इलाक़ा 2014 में उस वक्त से युद्धग्रस्त रहा है जब रूस समर्थित अलगाववादियों ने खुद को 'पीपुल्स रिपब्लिक' घोषित कर दिया था.
रूस ने 2022 में अवैध रूप से डोनबास के दो प्रातों (जिन्हें ओब्लास्ट भी कहा जाता है) - दोनेत्स्क और लुहान्सक पर कब्ज़ा जमा लिया था. पिछले डेढ़ साल से ज़मीन पर सबसे अधिक लड़ाई यहीं हो रही है.
यूक्रेन ने पहले बख़मुत और फिर अवदीव्का शहर पर कब्ज़ा करने की रूस की कोशिश को रोकने के लिए, काफी संख्या में सैनिक और संसाधन दोनों लगाए हैं.
इस कोशिशों के बावजूद उसने दोनों शहरों के साथ-साथ अपने कुछ बेहतरीन लड़ाकू सैनिकों को भी खो दिया. हालांकि यूक्रेन का दावा है कि उसके प्रतिरोध ने रूसियों को अधिक हताहत किया.
यह सच है, इन इलाके़ के रणक्षेत्र को 'मांस की चक्की' कहा जाता है.
लेकिन रूस के पास य़ुद्ध में उतारने के लिए बड़ा सैन्य बल है जो यूक्रेन के पास नहीं है.
जनरल क्रिस्टोफ़र कैवोली यूरोप में अमेरिकी सेना के कमांडर हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका जल्द से जल्द यूक्रेन को अधिक हथियार और गोला-बारूद नहीं भेजता, तो यूक्रेन की सेना युद्ध के मैदान में कमज़ोर हो जाएगी.
संख्या बल मायने रखता है. रूसी सेना की रणनीति, उसका नेतृत्व और उसके हथियार यूक्रेन से कमतर हो सकते हैं, लेकिन संख्या के मामले में, ख़ासकर तोपखाने में उसे को यूक्रेन से एक कदम आगे है. अगर वह इस साल कुछ और नहीं करता है तो भी उसका डिफाल्ड एक्शन यूक्रेन की सेना को पश्चिम दिशा में पीछे धकेलते रहना होगा. इस तरह वह एक के बाद एक गांव पर उसकी सेना कब्ज़ा करती जाएगी.
ज़ापोरिज़िया
ज़ापोरिज़िया भी रूस के लिए एक आकर्षक पुरस्कार होगा.
दक्षिण यूक्रेन में सात लाख की आबादी वाला ये शहर ख़तरनाक रूप से रूस की अग्रिम पंक्ति के नज़दीक है.
यह रूस के लिए एक चुभने वाले कांटे की तरह है, क्योंकि यह उसी नाम के एक प्रांत की राजधानी है, जिस पर रूस ने अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया है. इसके बाद भी यह शहर अब तक यूक्रेन के हाथों में स्वतंत्र रूप से है.
यहां तथाकथित सुरोविकिन लाइन है जिसमें सुरक्षा की तीन परतें शामिल हैं. यहां दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अधिक लैंडमाइन्स हैं. रूस इसे आंशिक रूप से खत्म कर सकता है, लेकिन इसकी तैयारियों का शायद पता चल जाए.
इस साल रूस का रणनीतिक उद्देश्य क्षेत्रीय नहीं हो सकता है. यह यूक्रेन की युद्ध की भावना को कुचलने और उसके पश्चिमी समर्थकों को यह विश्वास दिलाने के लिए हो सकता है कि उनके लिए यह एक हारा हुआ युद्ध है.
डॉक्टर जैक वॉटलिंग का मानना है कि रूस का उद्देश्य निराशा की भावना पैदा करने की कोशिश करना है.
वे कहते हैं, "ये (रूसी) आक्रामण निर्णायक रूप से खत्म नहीं करेंगे, भले ही यह किसी भी पक्ष के लिए कैसा भी हो."
जनरल बैरन्स को इस बात पर भी संदेह है कि यूक्रेन अब जिस गंभीर स्थिति में है, उसके बाद भी रूस अपने आप निर्णायक बढ़त हासिल कर लेगा.
वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि सबसे संभावित परिणाम यह है कि रूस ने फायदा तो ले लिया होगा, लेकिन वो आगे बढ़ने में कामयाब नहीं हो पाएगा.''
"उसके पास इतनी बड़ी या बेहतर ताकत नहीं होंगी जो नदी (नीप्रो) तक पहुंच सकें...लेकिन युद्ध रूस के पक्ष में हो जाएगा."
एक बात निश्चित है, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का यूक्रेन पर हमला बंद करने का कोई इरादा नहीं है.
वह एक पोकर खिलाड़ी की तरह हैं, जो अपने सारे चिप्स को जीत के लिए दांव पर लगा देता है. उन्हें भरोसा है कि पश्चिमी देश यूक्रेन को अपनी रक्षा के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध कराने में नाकाम रहेंगे.
नेटो के सभी शिखर सम्मेलनों, सभी उत्तेजक भाषणों के बाद भी, इस बात की संभावना है कि पुतिन सही हों.
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)
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