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असरानी का निधन: बीबीसी से ख़ास बातचीत में जिन्होंने एक्टिंग को बताया था साइंस
अभिनेता असरानी का 84 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया है. असरानी के निजी सचिव बाबूभाई ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में उनकी मौत की पुष्टि की है.
उन्होंने बताया कि असरानी पिछले चार दिनों से स्वास्थ्य संबंधी शिकायत की वजह से मुंबई के जुहू स्थित आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती थे और सोमवार दोपहर क़रीब 3 से 3.30 बजे के बीच उनका निधन हुआ.
मुंबई के सांताक्रूज़ इलाक़े के शास्त्री नगर स्थित श्मशान भूमि में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया जहां उनके परिवार के सदस्य समेत क़रीबी लोग मौजूद थे.
असरानी 84 साल के थे. उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी था और उनका जन्म साल 1941 में जयपुर में हुआ था.
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मौत के कुछ ही घंटों के बाद असरानी के अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर असरानी के निजी सचिव बाबूभाई ने बीबीसी हिंदी को बताया कि असरानी ने अपनी पत्नी मंजू से कहा था कि वह नहीं चाहते हैं कि उनकी "मौत सुर्ख़ियों में जगह बनाए और इस पर ज़्यादा हो हल्ला हो और यही वजह है कि असरानी के अंतिम संस्कार के बाद ही उनकी मौत से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की गई."
असरानी के अंतिम संस्कार के वक़्त बेहद क़रीबी लोगों के अलावा उनकी पत्नी मंजू, असरानी की बहन और भतीजे मौजूद थे.
हाल ही में उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की ख़ास सिरीज़ 'कहानी ज़िंदगी की' में अपने करियर और जीवन से जुड़े कई क़िस्से साझा किए थे.
असरानी का शुरुआती जीवन
'कहानी ज़िंदगी की' में असरानी ने बताया था कि उनके पिता जयपुर में कार्पेट कंपनी के मैनेजर थे और उनकी पैदाइश से लेकर स्कूल-कॉलेज की पढ़ाई जयपुर में ही हुई थी.
उन्होंने कहा था कि मैट्रिक पास करने के बाद ही उन्होंने फ़िल्मों में जाने का मन बना लिया था, लेकिन शुरुआती कोशिशों के बावजूद फ़िल्मी सफ़र शुरू नहीं हो सका. इसके बाद उन्होंने तय किया कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट में एक्टिंग सीखेंगे.
उन्होंने दो-तीन साल आकाशवाणी, जयपुर में भी काम किया और फिर पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया.
पुणे में असरानी को मशहूर एक्टिंग टीचर रोशन तनेजा ने पढ़ाया. उनके शब्दों में, "फ़िल्म इंस्टीट्यूट पहुंचने के बाद पता चला कि एक्टिंग के पीछे मेथड होते हैं. ये प्रोफ़ेशन किसी साइंस की तरह है. आपको लैब में जाना पड़ेगा, एक्सपेरिमेंट्स करने पड़ेंगे."
उन्होंने कहा था कि उन्हें समझ आया कि एक्टिंग में आउटर मेक-अप के अलावा इनर मेक-अप भी बहुत ज़रूरी है.
असरानी ने इंटरव्यू में एक्टर मोतीलाल से मिले सबक़ को भी याद किया था. उन्होंने कहा था, "एक बार एक्टर मोतीलाल गेस्ट के तौर पर पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट आए थे. मेरी एक्टिंग की छोटी सी एक्सरसाइज़ देखकर उन्होंने मुझसे पूछा, तुम राजेंद्र कुमार की फ़िल्में बहुत देखते हो. उनकी कॉपी कर रहे हो. हमें फ़िल्मों में कॉपी नहीं चाहिए."
"ये बहुत बड़ा सबक़ था. मोतीलाल के कहने का मतलब था कि तुम्हारे अंदर जो टैलेंट है, उसे बाहर निकालो."
फ़िल्मों में पहला मौक़ा
असरानी ने बताया था कि पुणे के फ़िल्म इंस्टीट्यूट में एडिटिंग सिखाने के लिए डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी आते थे. एक दिन उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी से अपने लिए चांस मांगा था, लेकिन उस दिन बात आगे नहीं बढ़ी थी.
कुछ दिनों बाद ऋषिकेश मुखर्जी 'गुड्डी' फ़िल्म में गुड्डी के रोल के लिए एक लड़की की तलाश में फ़िल्म इंस्टीट्यूट आए. उन्होंने असरानी से जया भादुरी के बारे में पूछा और उन्हें बुलाने के लिए कहा. ऋषिकेश मुखर्जी के साथ उस दिन उनकी टीम आई थी, जिनमें राइटर गुलज़ार भी थे.
असरानी ने बताया था, "ऋषिकेश मुखर्जी जया भादुरी से बात करते-करते आगे बढ़ गए, तो मैंने गुलज़ार से अपने लिए छोटे-मोटे रोल की बात की. गुलज़ार ने मुझे गुड्डी फ़िल्म में ही एक छोटे से रोल के बारे में बताया. इसके बाद मैंने ऋषिकेश मुखर्जी से वही रोल मांगा और आख़िरकार बाद में मुझे वो रोल मिल गया."
वो कहते थे, "फ़िल्म हिट हो गई. तब मनोज कुमार की नज़र मुझ पर पड़ गई. उनको लगा कि इसको भी ले सकते हैं, ऐसे करते-करते चार-पांच फ़िल्में मिल गईं और यहां से मेरा करियर शुरू हुआ."
'शोले' का जेलर और हिटलर की मिसाल
बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में असरानी ने बताया था कि फ़िल्म शोले में 'अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर' का किरदार निभाने के लिए उन्हें हिटलर की मिसाल दी गई थी.
उन्होंने कहा था कि राइटर सलीम-जावेद और डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने उन्हें बुलाया था. तब उन्हें न तो शोले के बारे में जानकारी थी और न जेलर के किरदार के बारे में.
उन्होंने बताया था कि, "एक जेलर का किरदार है, जो ख़ुद को बहुत होशियार समझता है, लेकिन वो वैसा है नहीं, इसलिए उसे शोऑफ़ करना पड़ता है कि वो बहुत बढ़िया जेलर है."
असरानी ने याद किया था, "उन्होंने पूछा, 'कैसे करेंगे इसको?' मैंने कहा कि जेलर के कपड़े पहन लेंगे. उन्होंने कहा, 'नहीं'. उन्होंने सेकंड वर्ल्ड वॉर की किताब खोली, उसमें हिटलर के नौ पोज़ थे."
हिटलर के पोज़ देखकर असरानी को लगा था कि उन्हें हिटलर का रोल करना है, फिर समझाया गया कि उन्हें हिटलर के बोलने के तरीके पर गौर करना है.
उन्होंने कहा था, "हिटलर की आवाज़ रिकॉर्डेड है और दुनिया के सारे ट्रेनिंग स्कूलों, एक्टिंग कोर्सेज़ में हर स्टूडेंट को वो आवाज़ सुनाई जाती है."
उन्होंने बताया था कि हिटलर की आवाज़ के उतार-चढ़ाव को उन्होंने शोले में जेलर के डायलॉग में अपनाया था.
(मुंबई से रवि जैन के इनुपट के साथ)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित