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बिहार: विरोध प्रदर्शन में कार्यकर्ता की मौत पर बीजेपी हमलावर, सम्राट चौधरी ने कहा- 'जंगलराज रिटर्न'
- Author, चंदन कुमार जजवाड़े
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना
बिहार की राजधानी पटना में राज्य सरकार के ख़िलाफ़ बीजेपी के प्रदर्शन में जमकर हंगामा हुआ है. इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बीजेपी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए लाठी चार्ज भी किया है.
बीजेपी कार्यकर्ता बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और क़ानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव करने जा रहे थे.
बीजेपी का आरोप है कि पुलिस की लाठी से चोट लगने के बाद उसके एक कार्यकर्ता की मौत भी हो गई है.
वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि बीजेपी बेवजह हुडदंग कर रही है, बिहार में 18 साल तक वो सत्ता में रहे हैं, जबकि महागठबंधन सरकार ने तीन लाख से ज़्यादा नौकरी का विज्ञापन निकाला है.
भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने कार्यकर्ता विजय सिंह की हुई मौत को 'राजनीतिक हत्या' क़रार देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है.
सम्राट चौधरी ने अपने एक ट्वीट में लिखा, "ममता बनर्जी से प्रेरणा लेते हुए नीतीश बाबू ने भी बिहार को बंगाल बना दिया. राजनीतिक हत्या से अब बिहार भी अछूता नहीं है. वीर भाजपा कार्यकर्ता श्री विजय सिंह जी की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी."
उनके अनुसार, "भाजपा कार्यकर्ताओं पर पड़ी एक एक लाठी इस सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी. स्व० विजय सिंह जी की हत्या बिहार में लोकतंत्र की हत्या है, बिहार और विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास है."
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बीजेपी पर हंगामे का आरोप
तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि सरकार अपना कार्यकाल ख़त्म होने से पहले 10 लाख़ नौकरियां देगी और विधानसभा के मॉनसून सत्र के बाद सरकार नाराज़ शिक्षकों से बात करेगी और हर मुद्दे का समाधान निकालेगी.
बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र की शुरुआत यानी 10 जुलाई से ही सदन में कई मुद्दों को लेकर बीजेपी लगातार प्रदर्शन कर रही है.
इसमें बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के इस्तीफ़े की मांग भी शामिल है.
सीबीआई ने कथित 'लैंड फ़ॉर जॉब' घोटाले के मामले में अपनी चार्जशीट में तेजस्वी यादव का नाम भी शामिल किया है.
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बीजेपी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भ्रष्टाचार से समझौता का आरोप लगा रही है.
इससे विधानसभा के मॉनसून सत्र भी असर पड़ा है और बीजेपी के हंगामे और प्रदर्शन की वजह से कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है.
इसके अलावा बिहार में शिक्षकों के लिए बनाई गई नई नियोजन नीति का भी बीजेपी लगातार विरोध कर रही है.
बीजेपी का आरोप है कि बिहार के बेरोज़गारों को नौकरी देने के वादे पर सरकार असफल रही है.
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शिक्षक भी हैं नाराज़
उधर, बिहार में शिक्षक वर्ग भी कई दिनों से नौकरी के मुद्दे पर सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा है.
बिहार में नियोजित शिक्षकों की एक मांग यह भी है कि सरकार उन्हें सीधे सरकारी कर्मी का दर्ज़ा दे.
जबकि सरकार ने इसके लिए बीपीएससी की परीक्षा को पास करना ज़रूरी बना दिया है.
इसके अलावा शिक्षकों की नौकरी में राज्य के स्थानीय लोगों को अवसर देने की मांग पर भी बिहार में लगातार शिक्षकों और युवाओं का प्रदर्शन जारी है.
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बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने बीबीसी को बताया, "रोज़गार, भ्रष्टाचार, राज्य में बढ़ते अपराध और क़ानून-व्यवस्था जैसे तमाम मुद्दों को लेकर हमने गुरुवार को गांधी मैदान से चलकर बिहार विधानसभा घेराव की योजना बनाई थी."
बीजेपी का यह प्रदर्शन बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय कुमार सिन्हा, बीजेपी के अन्य नेता और कार्यकर्ताओं के साथ निकला, लेकिन पटना के डाल बंगला चौराहे पर पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया.
तस्वीरों से पता चलता है कि इस दौरान आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन और लाठी का भी इस्तेमाल किया गया. बीजेपी का आरोप है कि इसमें जहानाबाद के पार्टी के महामंत्री विजय कुमार सिंह की मौत हो गई.
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बीजेपी कार्यकर्ता की मौत
निखिल आनंद का आरोप है, "पुलिस हमें रोक सकती थी, गिरफ़्तार कर सकती थी, लेकिन बिना बताए अचानक बर्बर तरीके से लाठी चार्ज कर दिया गया जिसमें नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिंहा समेत हमारे एक सौ कार्यकर्ता घायल हो गए और एक की मौत भी हो गई."
हालांकि बिहार में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि "बीजेपी कार्यकर्ता की मौत लाठी के चोट से नहीं हुई है, अगर ऐसा होता तो बाहरी चोट के दाग़ ज़रूर होते."
नीरज कुमार का दावा है, "बीजेपी कार्यकर्ता की मौत भगदड़ में गिरने से हुई है, लाठी के चोट से नहीं. उन्हें पहले जिस हॉस्पिटल में ले जाया गया वह भी बीजेपी के एक नेता का है. मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता लग पाएगी."
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नीरज कुमार का आरोप है कि पुलिस ने जिस इलाक़े को प्रतिबंधित इलाक़ा घोषित कर रखा था, बीजेपी के लोग वहां जाना चाह रहे थे, जो कि ग़ैरक़ानूनी है.
इस लाठी चार्ज के बाद बीजेपी के कई कार्यकर्ताओं को पटना के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया.
केंद्रीय मंत्री और बिहार बीजेपी के नेता अश्विनी चौबे ने हॉस्पिटल जाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं मुलाक़ात की है.
इस दौरान अश्विनी चौबे से बात करते हुए एक बीजेपी कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने सीधा उनके पैर पर या सिर पर डंडे से मारा है.
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लाठी चार्ज का पहला मामला नहीं
पटना में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के लाठी चार्ज का यह कोई पहला मामला नहीं है.
हालांकि राजनीतिक प्रदर्शन पर ऐसा कम देखने को मिलता है, लेकिन नौकरी मांग कर रहे युवाओं पर पहले भी यहां लाठी चार्ज हो चुका है.
इसी महीने सीटीईटी पास युवाओं ने नौकरी की मांग में पटना में प्रदर्शन किया था, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया था.
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इसी साल जनवरी में बिहार में एसएससी की परीक्षा का रद्द करने की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन पर भी पुलिस ने लाठी चलाई थी, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे.
वहीं, दिसंबर 2022 में भी शिक्षकों के खाली पदों पर नौकरी की मांग में हो रहे प्रदर्शन को रोकने के लिए भी पटना में पुलिस ने लाठी चार्ज किया था.
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