बिहार में गंगा नदी में पुल गिरने का क्या है पूरा मामला

    • Author, चंदन जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

बिहार के खगड़िया में गंगा नदी पर बन रहे पुल का एक हिस्सा गिरकर नदी में समा गया है.

रविवार को हुई यह घटना कैमरे में भी क़ैद हो गई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ है.

यह पुल क़रीब 1717 करोड़ की लागत से भागलपुर ज़िले के सुल्तानगंज और खगड़िया ज़िले के अगुवानी के बीच बन रहा था.

इस हादसे में अब तक पुल पर ड्यूटी कर रहे एक गार्ड के लापता होने की ख़बर आ रही है.

इस गार्ड की तलाश लगातार जारी है.

इस बीच जनता दल यूनाइटेड के नेता निखिल मंडल ने ट्वीट किया है कि इस पुल को नए सिरे से दोबारा बनाया जाएगा.

पुल बना रही कंपनी को भी नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है.

वहीं बिहार सरकार ने खगड़िया के एक्जीक्यूटीव इंजिनियर को निलंबित कर दिया है.

ख़ास बात यह है कि इस पुल का एक हिस्सा साल 2022 के अप्रैल महीने में भी गिर गया था. उस वक़्त बीजेपी बिहार की सत्ता में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ साझेदार थी.

उस समय आरजेडी विपक्ष में थी और उसने इस पुल के निर्माण पर सवाल उठाए थे और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था. आज बीजेपी विपक्ष में है और ऐसे ही आरोप लगा रही है.

पुल के गिरने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि इसके नुक़सान की भरपाई वो कंपनी करेगी, जो इसका निर्माण कर रही थी.

तेजस्वी यादव ही फ़िलहाल बिहार के सड़क निर्माण विभाग के मंत्री हैं.

कई बड़े पुल बना चुकी है निर्माणकर्ता कंपनी

गंगा नदी पर बन रहे इस पुल का निर्माण एसपी सिंगला कंन्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी कर रही है.

बिहार के अलावा इस कंपनी को भारत के कई राज्यों में भी निर्माण के बड़े प्रोजेक्ट्स मिले हैं.

इनमें गुजरात के वडोदरा में नर्मदा नदी, राजस्थान के डूंगरपुर में माही नदी, ओडिशा के ढेंकनाल में ब्राह्मणी नदी और यूपी के प्रयागराज में गंगा नदी पर बने पुल भी शामिल है.

कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक़ सुल्तानगंज- अगवानी पुल चार लेन का बनाया जा रहा है और आम लोगों के पैदल चलने के लिए इस पर फ़ुटपाथ भी मौजूद होगा.

क़रीब 3.6 किलोमीटर लंबे इस पुल के बनने के बाद इलाक़े में नेशनल हाईवे 31 और एनएच 80 आपस में जुड़ जाएँगे.

‘पुल पर सावधानी से चढ़ें’

बिहार में विपक्षी बीजेपी ने इस पुल के गिरने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसा है.

बीजेपी सांसद और बिहार बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा है कि महागठबंधन की सरकार के दौरान बिहार में बने किसी भी पुल पर सावधानी से चढ़ें.

इस पुल के निर्माण को लेकर सोशल मीडिया पर भी जमकर बयानबाज़ी हो रही है.

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में पुल के निर्माण में हुए जनता के पैसों के नुक़सान का हिसाब मांगा है.

वहीं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया है कि पुल का काम बीजेपी के राज में हुआ है जबकि आरोप महागठबंधन सरकार पर लगाया जा रहा है.

आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने एक ट्वीट में बीजेपी के तीन पूर्व मंत्रियों के ट्वीट को भी शेयर किया है, जिसमें वो पुल के बनने के बाद होने वाले फ़ायदे गिना रहे हैं.

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी ट्वीटर पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गंगा नदी पर बन रहे इस पुल से होने वाले फ़ायदे गिना रहे हैं.

दरअसल इस पुल के निर्माण के दौरान साल 2017 से साल 2022 के बीच लंबे समय तक बीजेपी बिहार की सत्ता में जनता दल यूनाइटेड की साझेदार रही है.

पहले भी गिरा है एक हिस्सा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खगड़िया पुल हादसे के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि साल 2012 में इस पुल को बनाने के बारे में सोचा गया था और काम पूरा नहीं होने से उन्हें तकलीफ़ हो रही है.

नीतीश ने कहा है, “एक साल पहले ही ऐसा एक बार और हुआ था तो हमने उस समय भी कहा था कि ऐसा क्यों हुआ? कल गिरने के बाद हमने विभाग को कहा कि तुरंत एक्शन लीजिए? ठीक से नहीं बना रहा है इसलिए गिर रहा है.”

दरअसल जब इस पुल के निर्माण का काम शुरू हुआ था तब नीतीश कुमार के पास ही पथ निर्माण विभाग की ज़िम्मेदारी थी.

इसके लिए दिसंबर 2013 में टेंडर हुआ था और 22 जनवरी 2014 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ख़ुद इसका शिलान्यास किया था.

साल 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले ही नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो गए थे और जेडीयू के पास बिहार की सत्ता थी.

बीजेपी सांसद संजय जायसवाल आरोप लगाते हैं, “नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की सरकार में अफ़सर फ़ायदा उठाते हैं. जब एक साल पहले पुल का एक हिस्सा गिरा था तब इसपर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?”

दरअसल पिछले साल पुल का एक हिस्सा टूटने के बाद इसमें फिर से कुछ दरार देखे गए थे और मार्च 2023 में जेडीयू विधायक संजीव कुमार ने इस मामले को बिहार विधानसभा में उठाया भी था.

बिहार में सत्ताधारी जेडीयू के प्रवक्ता नीरज कुमार के मुताबिक़ एसपी सिंगला कंपनी को ई-टेंडरिंग के ज़रिए पुल का ठेका दिया गया था और यह देशभर में कई पुलों का निर्माण करने वाली कंपनी है.

उनका कहना है, “पुल निर्माण के दौरान जब बीजेपी बिहार में सत्ता में साझेदार थी, यह विभाग उन्हीं के पास था. पिछले साल इसका एक हिस्सा टूटा था तब भी बीजेपी के नितिन नबीन ही विभाग के मंत्री थे, उन्होंने कोई एक्शन क्यों नहीं लिया था?”

नीरज कुमार का दावा है कि अगर सरकार की मंशा ख़राब होती तो आईआईटी रुड़की को इसकी जाँच के लिए नहीं कहा जाता.

आईआईटी रुड़की की जाँच

बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को बताया है कि पिछले साल 30 अप्रैल को आंधी के बाद पुल का एक हिस्सा गिरने के बाद ही आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी रुड़की और पटना के एनआईटी के विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर को इसकी जाँच के लिए कहा गया था.

तेजस्वी यादव उस वक़्त बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता थे. तेजस्वी यादव के मुताबिक़ आईआईटी रुड़की की एक रिपोर्ट के बाद पुल के कुछ हिस्सों को पूरी तरह से तोड़कर दोबारा बनाया जा रहा था.

बिहार सरकार ने दावा किया है कि पिछले साल पिलर नंबर पाँच के गिरने के बाद आईआईटी रुड़की को बाक़ी हिस्सों की जांच के लिए कहा गया था, जबकि इसके कई स्ट्रक्चर को तोड़कर हटा दिया गया था.

पथ निर्माण विभाग के मुताबिक़ पहली घटना के बाद ही माना जा रहा था कि इस पुल के डिज़ाइन में कोई कमी है.

उसके बाद विभाग के अधिकारियों, आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों और अपने अमेरिकन डिज़ाइनर के साथ एसपी सिंगला कंपनी के बीच 14 दिसंबर 2022 को एक बैठक भी हुई थी.

पुल पर आईआईटी रुड़की की पूरी रिपोर्ट इसी सप्ताह सौंपी जा सकती है और बिहार सरकार का दावा है कि ज़रूरत पड़ने पर पूरे स्ट्रक्चर को तोड़कर फिर से निर्माण कराया जा सकता है.

बिहार राज्य सड़क निर्माण विभाग के मुताबिक़ आईआईटी की रिपोर्ट के बाद ही नियमों के तहत कंपनी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की जा सकती है.

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