You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बिहार की महिला पुलिसकर्मियों की ये परेशानियां उन्हें तकलीफ़ देती हैं
- Author, सीटू तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
देश में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या में अग्रणी राज्यों में से एक बिहार में पुलिसकर्मी एक अदद साफ-सुथरे शौचालय के लिए तरस रही हैं.
ओडिशा की संस्था सेंटर फ़ॉर द सस्टेनबल यूज़ ऑफ़ नेचुरल एंड सोशल रिसोर्स (सीएसएनआर) के ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार की 328 महिला पुलिसकर्मियों पर अध्ययन में ये बात सामने आई है. इसमें बिहार की सबसे ज्यादा 115 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं.
'ए स्टडी ऑन चैलेंजेज़ ऑफ़ वीमेन पुलिस पर्सनेल' नाम से मई 2023 में जारी इस अध्ययन में कार्यस्थल पर मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं, काम के घंटे, बराबरी, स्वास्थ्य, परिवार के रुख़ जैसे सवालों को केन्द्र में रखा गया है.
क्या है इस रिपोर्ट में?
इस रिपोर्ट में शामिल कुल 328 महिला पुलिसकर्मियों में 156 ऐसी महिलाएं है जो 21 से 30 आयु वर्ग में हैं. यानी ज़्यादातर वो हैं जो अपने करियर के साथ-साथ नए बनने वाले सामाजिक रिश्ते जैसे शादी के शुरुआती दौर में हैं.
इनमें 192 ने स्नातक की डिग्री ली है और 203 महिलाओं की शादी हो चुकी है.
शादीशुदा महिलाओं में से 102 के सिर्फ़ एक बच्चे और 80 महिलाओं के दो बच्चे हैं.
मासिक आय के लिहाज़ से देखें तो 134 महिलाओं का वेतन 10 हज़ार से 30 हज़ार के बीच है.
बिहार की बात करें तो इस अध्ययन में 113 ग्रुप सी (महिला सिपाही) और 2 ग्रुप बी से आने वाली महिलाएं शामिल हुई हैं.
अध्ययन के लिए राज्यों के चुनाव का आधार क्या है, ये पूछने पर सीएसएनआर के निदेशक धीरेन्द्र पांड्या बीबीसी को बताते है, " हमने ओडिशा में पुलिसकर्मियों के शारीरिक शोषण की ख़बरें पढ़ी थीं जिसके बाद ही हमने ओडिशा और उसके आसपास के तीन राज्यों में सर्वे का फ़ैसला लिया. अलग-अलग राज्यों में हमने वहां की यूनिवर्सिटीज़ और संस्थाओं की मदद से जून 2022 से अगस्त 2022 के बीच ये ग्राउंड सर्वे किया."
शौचालय और क्रेच की भी कमी
महिला पुलिसकर्मी अपनी न्यूनतम आवश्यकताओं के लिए भी परेशान हैं. इन चार राज्यों में ख़ासतौर पर बिहार और झारखंड में साफ सुथरे शौचालय, क्रेच (कामकाजी स्थानों पर शिशुगृह, जहां स्तनपान कराने जैसी सुविधाएं हों), रेस्ट रूम, वाहन की उपलब्धता और आवास की सुविधा भी एक बड़ा सवाल है.
शौचालय की बात करें तो ओडिशा की कुल 75 पुलिसकर्मियों में से 46, छत्तीसगढ़ की 85 में से 57, झारखंड की 53 में से 51 और बिहार की 115 पुलिसकर्मियों में से 101 ने कहा कि उनके कार्यस्थल पर साफ़-सुथरा शौचालय नहीं है. बिहार की बात करें तो यहां सभी थानों में शौचालय की सुविधा ही नहीं है.
बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा देखें तो ओडिशा में 68, छत्तीसगढ़ में 72, झारखंड में 45 और बिहार में 100 महिला पुलिसकर्मियों ने बताया है कि क्रेच की सुविधा नहीं है.
ये भी पढ़ें:- नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड की भारत यात्रा के दौरान किस संधि की होगी समीक्षा- - BBC News हिंदी
बच्चे को बाहर का दूध पिलाने की मजबूरी
बिहार की महिला सिपाही मंजू साह से जब मैं मिली तो वो ड्यूटी से तुरंत लौटी थी और अपनी बच्ची को दूध पिला रही थी.
वो अपने बैरक के बंद पड़े पंखे में गर्मी से बेहाल थी, लेकिन अपनी बच्ची के रोने की आवाज़ से ज़्यादा परेशान नज़र आ रही थी.
वो बताती हैं," ड्यूटी से आकर सबसे पहले दूध पिलाती हूं. बाकी टाइम बाहर का दूध पीती है. छोटी बहन को बुलाया है इसकी देखभाल के लिए."
इस अध्ययन में शामिल 193 में से 146 महिलाओं ने कहा है कि उनके बच्चे काम के घंटों के वक़्त बाहर का दूध पीते हैं.
जबकि 36 महिलाओं ने कहा कि उन्हें दूध पिलाने के लिए दो नर्सिंग ब्रेक मिलते हैं और 11 महिलाओं ने कहा कि वो काम पर जाने से पहले अपना दूध रेफ़्रीजरेट करती हैं.
ये भी पढ़ें:- बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ़्तारी अब तक क्यों नहीं हुई?
पीरियड्स के दौरान समस्या
काम के घंटे के लिहाज़ से देखें तो बिहार की 33, झारखंड की 26, छत्तीसगढ़ की 4 और ओडिशा की 6 महिला पुलिसकर्मियों ने कहा कि उन्हें 15 घंटे से ज़्यादा काम करना पड़ता है.
इस अध्ययन में कार्यस्थल पर यौन हिंसा की बात सिर्फ़ 16 पुलिसकर्मियों ने स्वीकारी है. इनमें सबसे ज़्यादा छत्तीसगढ़ राज्य की 9 महिला सिपाही हैं.
पीरियड्स के वक़्त की बात करें तो 70 महिलाओं ने बताया है कि वो शौचालय के अभाव, ट्रैफ़िक ड्यूटी के चलते पैड्स भी चेंज नहीं कर पातीं.
बिहार में इस सर्वे को लीड करने वाले उमाशंकर सिंह बीबीसी को बताते हैं, "पीरियड्स के दौरान महिलाओं को बिहार में स्पेशल लीव का प्रोविजन है, लेकिन बहुत कुछ उनके अधिकारी पर निर्भर करता है."
पटना पुलिस लाइन का हाल
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या को अपनी सरकार की उपलब्धि बताते हैं. लेकिन राजधानी पटना की पुलिस लाइन में 230 महिला सिपाहियों के लिए बना तीन मंज़िला बैरक बदहाल है.
ये बैरक बाहर से ठीक-ठाक हालत में दिखता है, लेकिन अंदर जाते ही अंधियारे गलियारों में कूड़े के ढेर, गंदगी से भरे शौचालय, गंदे वॉश बेसिन और उनके ऊपर खिड़कियों पर इस्तेमाल किए हुए सैनिटरी पैड टंगे हैं.
पूरी बिल्डिंग में कहीं भी डस्टबीन और पीने के साफ़ पानी की व्यवस्था नहीं है. 2018 बैच की एक महिला सिपाही बताती हैं, "पानी का कैन मंगाते हैं. यहां कई दिन पानी नहीं आता है तो पुरुष बैरक के बाहर लगे नल से पानी भर कर लाना पड़ता है. यहां आने पर सबसे पहले किसी भी महिला पुलिसकर्मी को टॉयफ़ाइड होगा, उसके बाद वो यहां की गंदगी की अभ्यस्त हो जाएगी."
हालत ये है कि इस गर्मी में भी ज़्यादातर कमरों के पंखे बीते एक साल से ख़राब पड़े हैं. उमस से भरे इन कमरों में रहने वाली 26 साल की एक महिला सिपाही कहती हैं ,"सरकार ने हमको 5 फ़ीट की क़ब्र दे दी है. ड्यूटी करके आना है और फिर यहीं सो जाना है. इसी कमरे में खाना भी बना लेना है और बच्चा भी पाल लेना है."
महिला पुलिस
पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो प्रति वर्ष 'पुलिस संगठनों के आंकड़े' जारी करता है. 1 जनवरी 2022 तक पुलिस संगठनों के आंकड़ों के मुताबिक़ देश में महिला पुलिसकर्मी, कुल पुलिस फ़ोर्स की 11.75 प्रतिशत हैं.
बिहार में 93,313 पुलिसकर्मी हैं जिसमें 19,970 महिलाएं हैं, यानी 21.21 प्रतिशत जो कि देश में आंध्र प्रदेश (21.76%) के बाद दूसरे नंबर पर है.
हालांकि जनवरी 2020 में बिहार की महिला पुलिसकर्मियों का आंकड़ा 25.30 प्रतिशत था जो देश में सबसे ज़्यादा था.
दिलचस्प है कि उस वक्त बिहार में पुलिसकर्मियों की संख्या 91,862 थी जिसमें महिला पुलिस 23,245 थी. यानी 2022 आते आते महिला पुलिसकर्मियों की संख्या घटी.
हालांकि बिहार सरकार के नए आंकड़ों के मुताबिक़ बिहार में अब महिला पुलिस की संख्या 25,108 हो गई है.
अध्ययन में शामिल दूसरे राज्यों की बात करें तो 1 जनवरी 2022 तक छत्तीसगढ़ में 7.09 प्रतिशत, झारखंड में 6.15 प्रतिशत और ओडिशा में 10.51 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं.
बिहार में पुलिस विभाग में महिलाओं को 37 फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान है. केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने मार्च 2023 में लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 'गृह मंत्रालय राज्यों को स्टेट पुलिस में महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 33 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए एडवाइज़री जारी करता रहता है.'
लेकिन ज़रूरी सवाल ये है कि महिला पुलिसकर्मियों की मूलभूत ज़रूरतों को लेकर सरकारें उतनी गंभीर नज़र नहीं आतीं.
ये भी पढ़ें:-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)