इंदौर के कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन के एक दिन बाद 17 साल पुराने केस में मर्डर की साज़िश की धारा जुड़ी – प्रेस रिव्यू

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मध्य प्रदेश की इंदौर सीट से कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने हाल ही में अपना नामांकन वापस ले लिया था.
नामांकन लेने का ये फ़ैसला ऐसे वक़्त पर लिया गया, जब कुछ दिन पहले ही अक्षय बम के ख़िलाफ़ 17 साल पुराने मामले में हत्या की साज़िश से जुड़ी धाराएं लगाई गईं.
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, अक्षय बम ने 23 अप्रैल को कांग्रेस की टिकट पर नामांकन दाखिल किया था. अगले ही दिन पहले से चले आ रहे ज़मीन विवाद केस में हत्या की कोशिश से जुड़ी आईपीसी की धारा जोड़ी गईं.
29 अप्रैल को मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री और बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एलान किया था कि अक्षय बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया है और वो बीजेपी में शामिल होंगे.
इंदौर में 13 मई को चौथे चरण में मतदान होने हैं.
इंदौर की ज़िला अदालत ने अक्षय बम और उनके पिता को 10 मई को सुनवाई के दौरान पेश होने के लिए कहा है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, ''मां अहिल्या की नगरी इंदौर शहर को अपनी सभ्यता, अपने संस्कार और स्वच्छता को लेकर देश में जाना जाता है. लेकिन बीजेपी के रचे गए "लोकतंत्र की हत्या के षड्यंत्र ने दूषित राजनीति के रूप में इंदौर शहर को शर्मिंदा किया है.''
अक्षय बम अब बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

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मामला क्या है
अदालत के दस्तावेज़ों के मुताबिक़, ये केस अक्टूबर 2007 का है.
आरोप है कि अक्षय बम, उनके पिता कांतिलाल, सुरक्षा एजेंसी के मालिक सतवीर सिंह और अन्य दो लोग यूनुस ख़ान नाम के व्यक्ति के खेत में जाते हैं और मारपीट करते हैं.
आरोप है कि यूनुस ख़ान की सोयाबीन की फसल में अक्षय बम और उनके साथ गए लोगों ने आग लगा दी थी.
2007 में यूनुस ख़ान ने पुलिस को दर्ज बयान में आरोप लगाया था कि कांतिलाल ने उन पर गोली चलवाई थी.
अभियोजन पक्ष का कहना था कि अभियुक्त प्रभावशाली और रईस है.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक़, ''सतवीर सिंह सुरक्षा एजेंसी चलाते थे और ज़मीन पर क़ब्ज़े से जुड़े मामलों में शामिल रहे. अभियुक्त कांतिलाल और उनके बेटे अक्षय ने शिकायतकर्ता के ग़रीब और अनपढ़ होने का गलत फ़ायदा उठाया और ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश की.''
इस मामले में आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किए गए.
मामले में चार्जशीट फरवरी 2014 में दाख़िल की गई थी. इस दौरान सतवीर का निधन हो गया और दूसरे अभियुक्त सोहन फरार हैं.

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अक्षय बम के परिवार ने भी किया था केस
अक्षय बम के परिवार ने भी यूनुस ख़ान पर केस किया था. लेकिन सबूत ना होने के कारण अदालत में ये मामला टिक नहीं पाया था.
2022 में यूनुस ख़ान ने अदालत में दूसरा वकील केस में लाने की बात कही थी. अक्षय के वकील ने अदालत में कहा था कि इतने सालों में शिकायतकर्ता ने कुछ नहीं किया और अब परेशान करने के इरादे से वो फिर सक्रिय हुए हैं.
हालांकि अदालत ने यूनुस ख़ान की अपील पर अपनी अनुमति दी थी.
यूनुस ने पुलिस को अपने बयान में कहा- "जब मैं खेत में लौटा तो अक्षय, कांतिलाल, सतवीर और दूसरे हथियारबंद लोगों ने उसे घेरा. कांतिलाल ने कहा- ये यूनुस है, गोली मारो इसे."
यूनुस ने आरोप लगाया था कि सतवीर सिंह ने गोली चलाई, पर मेरे साथ के एक शख्स ने मुझे खींच लिया और गोली मुझे नहीं लगी.
पुलिस ने मौक़े से एक बंदूक और खोखा बरामद करने की बात कही थी.
24 अप्रैल को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा- अगर सतवीर की चलाई गोली से यूनुस मारा जाता तो मर्डर केस दर्ज किया जाता.
अक्षय बम ने अपने चुनावी हलफनामे में अपने ख़िलाफ़ दो अन्य मामले दर्ज होने की बात कही थी. पहले मामले में 2018 में रैश ड्राइविंग यानी तेज़ी से ख़तरनाक तरीके से गाड़ी चलाने को लेकर एफ़आईआर दर्ज की गई थी. इस एफआईआर में अक्षय बम का नाम नहीं था. इस मामले में आरोप तय किए गए थे, पर आदेश को अपलोड नहीं किया गया.
दूसरा केस 2022 का है.
तब ज़मीन से जुड़े एक दूसरे मामले में अक्षय बम के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया था. इस मामले में आरोप तय नहीं किए गए थे.

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मणिपुर: महिलाओं की भीड़ ने सेना के काफिले को रोका
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, मणिपुर में प्रदर्शन कर रही महिलाओं की भीड़ ने भारतीय सेना के काफ़िले को रोका और हिरासत में लिए 11 लोगों को ज़बरदस्ती छुड़वा लिया.
अखबार लिखता है कि ये घटना मंगलवार को बिष्णुपुर ज़िले की है.
जिन 11 लोगों को हिरासत में लिया गया था, उनके पास से हथियार और गोला बारूद भी मिले थे.
मणिपुर पुलिस ने बयान जारी कर बताया कि भारतीय सेना ने पेट्रोलिंग के दौरान दो गाड़ियों की पहचान की. सेना की गाड़ी देखने पर ये लोग गाड़ी से वहां से चले गए और हथियारों को वहीं छोड़ गए.
मणिपुर पुलिस ने उन हथियारों की जानकारी भी दी थी जिन्हें सेना ने बरामद किया था.
बाद में मैतेई महिलाओं का एक संगठन मौक़े पर जुटा और हथियारों को सौंपने की मांग की.
मणिपुर पुलिस ने बताया कि सुरक्षाबलों के रास्ते को रोकने के लिए महिलाएं जुटीं. इस बारे में पता चलने पर ज़िले की पुलिस वहां पहुंची. तब सेना ने बताया कि महिलाओं ने ज़बरदस्ती 11 लोगों को छुड़वा लिया.
मणिपुर पुलिस ने बताया है कि जो हथियार ज़ब्त किए गए थे, भीड़ उन्हें नहीं ले जा सकी है.

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सुप्रीम कोर्ट का सवाल- चुनाव से पहले केजरीवाल की गिरफ़्तारी क्यों?
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से गिरफ़्तारी किए जाने के वक़्त को लेकर सवाल किए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ज़िंदगी और आज़ादी बेहद अहम है और इसके लिए मना नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने कहा, ''चुनाव से पहले केजरीवाल को गिरफ़्तार किए जाने के वक़्त पर भी ईडी को जवाब देना होगा.''
केजरीवाल को मार्च महीने में दिल्ली की शराब नीति से जुड़े कथित घोटाले केस में गिरफ़्तार किया गया था.
केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने इस गिरफ़्तारी को राजनीति से प्रेरित बताया था और कहा था कि ईडी बीजेपी के टूल की तरह काम कर रही है.
शराब नीति से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के तीन नेता फिलहाल जेल में हैं और हाल ही में संजय सिंह इसी केस में ज़मानत मिलने के बाद बाहर आए थे.
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